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राणा मोकल
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राणा मोकल मेवाड़ के राणा लाखा तथा मारवाड़ की राजकुमारी रानी हंंसाबाई केे पुत्र थेे।
मेवाड़ वंशावली
मेवाड़ राज्य की विषय परिस्थितियों का दौर राणा लाखा की मृत्यु के बाद प्रारंभ हो गया। राणा मोकल को परिस्थितियाँ विरासत के रूप में प्राप्त हुई, क्योंकि इनके पिता लाखा का विवाह मारवाड़ की राजकुमारी हंसाबाई से वृद्धावस्था में हुआ और बहुत जल्द ही राणा लाखा की मृत्यु हो गयी। 1421 में जब मोकल शासक बना तो अल्पायु होने के कारण चूण्डा ने उसके संरक्षक के रुप में कार्य किया, मृत्यु के पश्चात् मेवाड़ का शासन हंसाबाई व उसके भाई राव रणमल केे हाथों में आ गया, कुुंवर चूड़ा अपने अपमान के कारण मांंडू ( मध्य प्रदेश) चला गया, राणा मोकल का शासनकाल 1421 ई.-1433 ई. के बीच माना जाता है।
राणा मोकल नेे अपनी पुत्री लाला मेेेवाड़ी का विवाह गागरोण के शासक अचलदास खींची सेे कर दी। उन्होंने 1428 ई. के रामपुरा युद्ध में नागौर शासक फिरोज खाँ को पराजित किया। मेवाड़ राज्य में राणा मोकल ने हिंदू परम्परा को स्थापित करने के लिए तुुुलादान पद्दति को लागू किया इस परम्परा के तहत् मंंदिरों के लिए सोना-चाँदी दान के रूप में दिया जाता था। महाराणाा मोकल ने एकलिंंगजी के मंदिर के परकोटे का निर्माण कराया। इसी प्रकार चित्तौड़ में स्थित त्रिभुवन नारायण मंदिर का पुनः निर्माण इन्ही के काल में हुआ, जिसेे समधीश्ववर मंंदिर केे नाम से जाना जाता है। इसी प्रकार कुुुम्भा सेे पूूूर्व राणा मोकल ने मेवाड़ की धार्मिक आस्था को बनाए रखा।
राणा को स्थापत्य कला से भी प्रेम था इनके दरबार में फना , मना , विशल नामक वास्तुकार शोभा बढ़ाते थे। एकलिंंग मंदिर के परकोटे का निर्माण किया।
जब राणा मोकल गुजरात के शासक अहमद शाह के विरुद्ध अभियान पर जा रहे थे तो रास्ते मे जिलवाडा नामक स्थान पर राणा क्षेेेत्र सिंह के दासीपुुत्र चाचा व मेरा ने राणा मोकल की हत्या कर दी। वस्तुतः शाही परिवार में शासक की विजातीय पत्नी को पासवान/ पङदायत/ खवास कहा जाता था। इनकी संतानो को चेला /गोटा बरदार/खवास पुत्र/लालजी/वाभा कहा जाता था । मारवाड़ में ऐसी संतानो को महाराजा श्री तख्त सिंह जी के शासनकाल में राव राजा कहा जाता था। इनको बङे बङे ठिकाने इनायत किये जाते थे ताकि उनका जीवन स्तर राजपरिवार के स्तर पर के अनुकूल बना रहे। चाचा और मेरा भी ऐसे ही पासवान पुत्र थे। इसके उपरांत 1433 ई. में महाराणा कुम्भा गद्दी पर बैठे।
महाराणा मोकल 1421 - 1433 महारानी हंसाबाई 1433 महाराणा कुुुम्भा महाराणा मोकल
श्रेणी:मेवाड़ के शासक