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भ्रष्टाचार का अर्थशास्त्र
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भ्रष्टाचार का अर्थशास्त्र (en Economics of corruption) सार्वजनिक अधिकार‑शक्ति के निजी लाभ हेतु दुरुपयोग तथा उसके समाज पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का अध्ययन करता है। यह अनुशासन भ्रष्टाचार के कारणों‑परिणामों तथा राज्य की आर्थिक कार्यप्रणाली पर उसके प्रभाव का विश्लेषण करने का उद्देश्य रखता है।
उच्च स्तर के भ्रष्टाचार से ग्रस्त अर्थव्यवस्थाएँ उतनी उन्नति नहीं कर पातीं जितनी अल्प‑भ्रष्ट अर्थव्यवस्थाएँ कर सकती हैं। भ्रष्टाचारग्रस्त अर्थतन्त्र स्वाभाविक आर्थिक नियमों के विकृत होने के कारण सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाते। फलस्वरूप, भ्रष्टाचार संसाधनों के अक्षम वितरण, अल्प‑गुणवत्ता वाले शिक्षण‑व्यवस्था एवं स्वास्थ्य‑सेवा, तथा काला बाज़ार के विस्तार को जन्म देता है, जिसमें अवैध क्रियाकलाप तथा वैध वस्तुओं‑सेवाओं से प्राप्त वह आय सम्मिलित होती है जिसे कराधान के लिए घोषित किया जाना चाहिए परन्तु घोषित नहीं की जाती।
भ्रष्टाचार के अध्ययन की एक प्रमुख चुनौती उसकी परिभाषा में निहित है। यह एक सूक्ष्म विषय प्रतीत हो सकता है, किन्तु भ्रष्टाचार को किस प्रकार परिभाषित किया जाता है, इससे उसके विश्लेषण‑मॉडल तथा मापन‑पद्धति प्रभावित होती है। यद्यपि भ्रष्टाचार की अनेक परिभाषाएँ उपलब्ध हैं, अधिकांश परिभाषाएँ एक केन्द्रीय विषय पर अभिसरित होती हैं—“सार्वजनिक पद‑शक्ति का अवैध रूप से निजी लाभ हेतु दुरुपयोग।” कुछ अवैध क्रियाएँ—जैसे धोखाधड़ी, धन‑शोधन, मादक‑द्रव्य व्यापार, अथवा काला‑बाज़ार, तभी भ्रष्टाचार मानी जाती हैं जब उनमें सार्वजनिक अधिकार‑शक्ति (नौकरशाही) का दुरुपयोग सम्मिलित हो।Jain Arvind K. February 2001 Corruption: A Review https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1111/1467-6419.00133 Journal of Economic Surveys en 15 1 71–121 10.1111/1467-6419.00133 0950-0804 subscriptionhttps://doi.org/10.3386/w17968 Corruption Banerjee Abhijit Mullainathan Sendhil April 2012 National Bureau of Economic Research 10.3386/w17968 Cambridge, MA Hanna Rema free
एक अन्य उपयुक्त परिभाषा के अनुसार—भ्रष्टाचार वह “व्यवस्था” है जिसमें “दो पक्षों (एक ‘मांगकर्ता’ तथा एक ‘आपूर्तिकर्ता’) के मध्य निजी विनिमय” सम्मिलित होता है, जो (१) संसाधनों के वितरण को तत्काल अथवा भविष्य में प्रभावित करता है, तथा (२) निजी लाभ हेतु सार्वजनिक अथवा सामूहिक उत्तरदायित्व के उपयोग या दुरुपयोग को सम्मिलित करता है।Sadig, Ali, The Effects of Corruption on FDI Inflows (June 14, 2009). Cato Journal, Vol. 29, No. 2, 2009, Available at SSRN: https://ssrn.com/abstract=2264898
व्यापकता (pervasiveness) भ्रष्टाचार की सम्भाव्यता का मापक है, अर्थात किसी नये उद्यम को किसी देश में सरकारी अधिकारियों अथवा जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार करते समय भ्रष्टाचार का सामना होने की कितनी सम्भावना है। उच्च व्यापकता का अर्थ है कि सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों के समयन भ्रष्टाचार का सामना होने की सम्भावना अधिक है।Mudambi Ram Navarra Pietro Delios Andrew 2013-06-01 Government regulation, corruption, and FDI https://doi.org/10.1007/s10490-012-9311-y Asia Pacific Journal of Management en 30 2 487–511 10.1007/s10490-012-9311-y 1572-9958 subscription
अध्ययन में भ्रष्टाचार के दो प्रकारों का उल्लेख किया जाता है—
१. उगाही (Extortion): जब कोई अधिकारी हानिकारक कार्यवाही की धमकी देकर रिश्वत की माँग करता है, अथवा किसी व्यक्ति को ऐसे परिस्थितियों में डाल देता है कि वह अपने विधिक हितों की रक्षा हेतु रिश्वत देने को विवश हो जाए।
२. साँठगाँठ (Collusion): जब कोई अधिकृत व्यक्ति ऐसा कार्य करने के लिए रिश्वत स्वीकार करता है जिसे उसे नहीं करना चाहिए, और दोनों पक्ष परिणाम में समान रूप से रुचि रखते हैं।
ऐसे भ्रष्टाचार से होने वाली वास्तविक क्षति का आकलन प्रायः कठिन होता है और यह आधिकारिक आँकड़ों से अनेक गुना अधिक हो सकती है।
भ्रष्टाचार पर शोध के समक्ष एक महत्त्वपूर्ण प्रायोगिक बाधा, मापन, उपस्थित होती है। भ्रष्टाचार स्वभावतः अवैध एवं गोपनीय होता है।https://giaccentre.org/the-cost-of-corruption/ Cost of corruption – GIACC giaccentre.org 2024-04-26 इसका बड़ा भाग कभी उजागर नहीं होता और न ही अभियोजन तक पहुँचता है। इस चुनौती के बावजूद शोधकर्ताओं ने प्रत्यक्ष भ्रष्टाचार के बजाय भ्रष्टाचार की धारणा को मापने के प्रयासों के माध्यम से प्रगति की है।https://doi.org/10.3386/w17968 Corruption Banerjee Abhijit Mullainathan Sendhil April 2012 National Bureau of Economic Research 10.3386/w17968 Cambridge, MA Hanna Rema free
भ्रष्टाचार को वस्तुनिष्ठ रूप से मापने का एक उपाय यह है कि भ्रष्टाचार‑सम्बन्धी दायर अभियोगों की संख्या गिनी जाए। किन्तु यह उपाय सीमित है, क्योंकि वास्तविक भ्रष्टाचार की तुलना में अभियोगों का अनुपात अत्यधिक परिवर्तनशील हो सकता है। अनेक बार भ्रष्टाचार दण्डित नहीं होता और इस प्रकार इस माप में सम्मिलित नहीं हो पाता। व्यक्तिपरक माप, जो प्रायः सर्वेक्षण‑आधारित होते हैं, भ्रष्टाचार के आकलन में उपयोगी उपकरण सिद्ध हो सकते हैं। देशों के मध्य तुलनाएँ अपेक्षाकृत अधिक व्यापक एवं संगत हो सकती हैं, यद्यपि विषय की प्रकृति के कारण इनमें कुछ पक्षपात उपस्थित रहता है।
अन्तर्राष्ट्रीय देश जोखिम मार्गदर्शिका (International Country Risk Guide) विभिन्न उद्यमों से यह पूछने वाला सर्वेक्षण है कि उनसे अवैध अथवा अतिरिक्त‑वैधानिक भुगतान की माँग किए जाने की कितनी सम्भावना है। भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (Corruption Perceptions Index) अनेक देशों एवं संस्थाओं के आँकड़ों को सम्मिलित करने वाला विस्तृत सर्वेक्षण है। अन्ततः, विश्व बैंक प्रतिवर्ष “भ्रष्टाचार नियन्त्रण” सूचकांक प्रकाशित करता है, जो उपर्युक्त दोनों स्रोतों के समान आधारों का उपयोग करता है।
सन्दर्भ
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