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महाशिवरात्रि
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महाशिवरात्रि हिन्दू 02 Mahashivratree festival.JPG महाशिवरात्रि में ध्यान की मुद्रा में शिव मूर्ति उपवास अध्यात्म जागरण शिवलिंग पूजा योगजे गॉर्डन मेल्टॉन Religious Celebrations: An Encyclopedia of Holidays, Festivals, Solemn Observances, and Spiritual Commemorations धार्मिक उत्सव: छुट्टियों, त्यौहारों, गंभीर अनुष्ठानों और आध्यात्मिक स्मरणोत्सवों का एक विश्वकोश https://books.google.com/books?id=lD_2J7W_2hQC 2011 एबीसी-सीएलआईओ 978-1-59884-206-7 541–542 हिन्दू धार्मिक label property raw P837 Q117355827 1 मार्च/28 फ़रवरी (स्थान पर निर्भर)https://www.drikpanchang.com/calendars/hindu/hinducalendar.html?geoname-id=1275339&year=2022 2022 Hindu Festivals Calendar, Hindu Tyohar Calendar for Mumbai, Maharashtra, India 11 मार्चhttp://www.drikpanchang.com/festivals/maha-shivaratri/maha-shivaratri-date-time.html 2021 Maha Shivaratri | Shivratri Date and Time for New Delhi, NCT, India Adarsh Mobile Applications LLP Drikpanchang शिव और पार्वती के विवाह के स्मरणोत्सव के रूप मेंशिव के तांडव नृत्य की उपासनाशक्ति के रूप में शिवलिंग की अभिव्यक्तिStephen Knapp (2012), Hindu Gods & Goddesses, Jaico Publishing House, India, 9788184953664, पृष्ठ 110 वार्षिक 1 दिनhttps://www.allindianfestivals.in/mahashivratri/ Mahashivratri 27 दिसम्बर 2020 9 मार्च 2024 27 फ़रवरी 2024 https://web.archive.org/web/20240227133955/https://www.allindianfestivals.in/mahashivratri/ dead 18 फ़रवरी https://www.drikpanchang.com/calendars/hindu/hinducalendar.html?year=2023 2023 Hindu Festivals 8 मार्च https://www.drikpanchang.com/calendars/hindu/hinducalendar.html?year=2024 2024 Hindu Festivals 26 फरवरी 15 फरवरी
पाठ=|अंगूठाकार|250x250पिक्सेल|भगवान शिव की प्रतिमा
महाशिवरात्रि भारतीयों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। माघ फागुन फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव व पत्नी पार्वती की पूजा होती हैं। यह पूजा व्रत रखने के दौरान की जाती है। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है|ShivShankar.in Maha Shivaratri https://suvichar.inhindi.co.in Shivaratri ShivShankar.in 7 मार्च 2016 https://web.archive.org/web/20220524143727/https://suvichar.inhindi.co.in/ dead 24 मई 2022भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|https://www.thehinduopinion.com/2020/01/mahashivratri-best-photos-and-wallpaper.html महाशिवरात्रि की फोटो या वॉलपेपर Mahashivratri best photos and wallpaper THE HINDU OPINION 2020-02-01 1 फ़रवरी 2020 https://web.archive.org/web/20200201162952/https://suvichar.inhindi.co.inhttps://kyoo.in/mahashivratri-2021-date/415/ महाशिवरात्रि Mahashivratri date THE Kyoo 2020-02-01दिसंबर 2020 InternetArchiveBot
कश्मीर शैव मत में इस त्यौहार को हर-रात्रि और बोलचाल में 'हेराथ' या 'हेरथ' भी कहा जाता हैं।Stanley D. Brunn The Changing World Religion Map: Sacred Places, Identities, Practices and Politics https://books.google.com/books?id=CGh-BgAAQBAJ&pg=PA403 2015 Springer 978-94-017-9376-6 402–403 23 फ़रवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170222112220/https://books.google.com/books?id=CGh-BgAAQBAJ&pg=PA403 22 फ़रवरी 2017 live Asim Maitra Religious Life of the Brahman: A Case Study of Maithil Brahmans https://books.google.com/books?id=f3LXAAAAMAAJ 1986 Munshilal 978-81-210-0171-7 125 23 फ़रवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170222111623/https://books.google.com/books?id=f3LXAAAAMAAJ 22 फ़रवरी 2017 live
कथाएँ
महाशिवरात्रि से सम्बन्धित कई पौराणिक कथाएँ है:
समुद्र मन्थन
[[समुद्र मन्थन|समुद्र मंथन]अमृत का उत्पादन करने के लिए निश्चित था, लेकिन इसके साथ ही हलाहल नामक विष भी पैदा हुआ था। हलाहल विष में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल भगवान शिव इसे नष्ट कर सकते थे। भगवान शिव ने हलाहल नामक विष को अपने कण्ठ में रख लिया था। जहर इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव अत्यधिक दर्द से पीड़ित हो उठे थे और उनका गला नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव 'नीलकण्ठ' के नाम से प्रसिद्ध हैं। उपचार के लिए, चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान शिव को रात भर जगाये रहने की सलाह दी। इस प्रकार, भगवान शिव के चिन्तन में एक सतर्कता रखी। शिव को आनंदित करने और जागाये रखने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाये। जैसे सुबह हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। शिवरात्रि इस घटना का उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया। तब से इस दिन, भक्त उपवास करते है।https://www.amarujala.com/photo-gallery/dehradun/mahashivratri-2018-lord-shiva-mystery-in-this-temple महाशिवरात्रि से पहले जानिए समुद्र मंथन से जुड़े भगवान शिव के इस मंदिर का राज Amar Ujala hi 2021-03-10
शिकारी कथा
एक बार पार्वती जी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, 'ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?' उत्तर में शिवजी ने पार्वती को 'शिवरात्रि' के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई- 'एक बार चित्रभानु नामक एक शिकारी था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी।'
शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी। संध्या होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए वह एक तालाब के किनारे बेल-वृक्ष पर पड़ाव बनाने लगा। बेल वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो विल्वपत्रों से ढका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला।https://www.abplive.com/astro/mahashivratri-2021-vrat-katha-maha-shivratri-vrat-story-mahashivratri-vrat-ki-katha-1810204 Mahashivratri 2021 Vrat Katha: महाशिवरात्रि पर शिव पुराण में बताई गई इस व्रत कथा को पढ़ने से मिलता है लाभ न्यूज़ एबीपी 2021-03-10 www.abplive.com hi 2021-03-10
पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियाँ तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरीं। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुँची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, 'मैं गर्भिणी हूँ। शीघ्र ही प्रसव करूँगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊँगी, तब मार लेना।' शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई।
कुछ ही देर बाद एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, 'हे पारधी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूँ। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूँ। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊँगी।' शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिन्ता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली। शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नहीं लगाई। वह तीर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, 'हे पारधी!' मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊँगी। इस समय मुझे
शिकारी हँसा और बोला, सामने आए शिकार को छोड़ दूँ, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूँ। मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे। उत्तर में मृगी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी। इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान माँग रही हूँ। हे पारधी! मेरा विश्वास कर, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरन्त लौटने की प्रतिज्ञा करती हूँ।
मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में बेल-वृक्षपर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हृष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृगविनीत स्वर में बोला, हे पारधी भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलम्ब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन मृगियों का पति हूँ। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊँगा।
मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटनाचक्र घूम गया, उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, 'मेरी तीनों पत्नियाँ जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएँगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूँ।' उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गया। भगवान शिव की अनुकम्पा से उसका हिंसक हृदय कारुणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा।
थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किन्तु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवम् सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवम् दयालु बना लिया। देवलोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहे थे। घटना की परिणति होते ही देवी-देवताओं ने पुष्प-वर्षा की। तब शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष को प्राप्त हुए।
अनुष्ठान
thumb|गेंदे के फूलों की अनेक प्रकार की मालायें जो शिव को चढ़ाई जाती हैं।
इस अवसर पर भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। जलाभिषेक : जल से और दुग्धाभिषेक : दूध से। बहुत जल्दी सुबह-सुबह भगवान शिव के मन्दिरों पर भक्तों, जवान और बूढ़ों का ताँता लग जाता है वे सभी पारम्परिक शिवलिंग पूजा करने के लिए जाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं। भक्त सूर्योदय के समय पवित्र स्थानों पर स्नान करते हैं जैसे गंगा, या (खजुराहो के शिव सागर में) या किसी अन्य पवित्र जल स्रोत में। यह शुद्धि के अनुष्ठान हैं, जो सभी हिन्दू त्योहारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पवित्र स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं, भक्त शिवलिंग स्नान करने के लिए मन्दिर में पानी का बर्तन ले जाते हैं महिलाओं और पुरुषों दोनों सूर्य, विष्णु और शिव की प्रार्थना करते हैं मन्दिरों में घण्टी और "शंकर जी की जय" ध्वनि गूँजती है। भक्त शिवलिंग की आधी परिक्रमा करते हैं और फिर शिवलिंग पर पानी या दूध भी चढ़ाते हैं।http://hindi.webdunia.com/shivratri-special/maha-shivaratri-worship-113030600026_1.html घर पर कैसे करें शिवरात्रि का पूजन... WD hindi.webdunia.com hi 2021-03-10
शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए:
शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक। बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं;
फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की सन्तुष्टि को दर्शाते हैं;
जलती धूप, धन, उपज (अनाज);
दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है;
और बेलपत्र जो सांसारिक सुखों के साथ सन्तोष अंकन करते हैं।
भगवान शिव की अन्य पारम्परिक पूजा
ज्योतिर्लिंग
बारह ज्योतिर्लिंग (प्रकाश के लिंग) जो पूजा के लिए भगवान शिव के पवित्र धार्मिक स्थल और केन्द्र हैं। वे स्वयम्भू के रूप में जाने जाते हैं, जिसका अर्थ है "स्वयं उत्पन्न"। बारह स्थानों पर बारह ज्योर्तिलिंग स्थापित हैं।
सोमनाथ यह शिवलिंग गुजरात के काठियावाड़ में स्थापित है।
श्री शैल मल्लिकार्जुन मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है श्री शैल मल्लिकार्जुन शिवलिंग
महाकाल उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहाँ शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।
ॐकारेश्वर मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदाने देने हुए यहां प्रकट हुए थे शिवजी। जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।
नागेश्वर गुजरात के द्वारकाधाम के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।
बैजनाथ झारखंड के बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग।
भीमाशंकर महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग।
त्र्यंम्बकेश्वर नासिक (महाराष्ट्र) से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।
घृष्णेश्वर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गाँव में स्थापित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग।
केदारनाथ हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग। हरिद्वार से 150 पर मिल दूरी पर स्थित है।
काशी विश्वनाथ बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।
रामेश्वरम् त्रिचनापल्ली (मद्रास) समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।
भारत में शिवरात्रि
मध्य भारत
मध्य भारत में शिव अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है। महाकालेश्वर मंदिर, (उज्जैन) सबसे सम्माननीय भगवान शिव का मंदिर है जहाँ हर वर्ष शिव भक्तों की एक बड़ी मण्डली महा शिवरात्रि के दिन पूजा-अर्चना के लिए आती है। जेओनरा, सिवनी के मठ मंदिर में व जबलपुर के तिलवाड़ा घाट नामक दो अन्य स्थानों पर यह त्योहार बहुत धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। दमोह जिले के बांदकपुर धाम में भी इस दिन लाखों लोगों का जमावड़ा रहता है।
कश्मीर
कश्मीरी ब्राह्मणों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह शिव और पार्वती के विवाह के रूप में हर घर में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के उत्सव के 3-4 दिन पहले यह शुरू हो जाता है और उसके दो दिन बाद तक जारी रहता है।
दक्षिण भारत
महाशिवरात्रि आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के सभी मंदिरों में व्यापक रूप से मनाई जाती है।
बांग्लादेश में शिवरात्रि
बांग्लादेश में हिंदू महाशिवरात्रि मनाते हैं। वे भगवान शिव के दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने की उम्मीद में व्रत रखते हैं। कई बांग्लादेशी हिंदू इस खास दिन चंद्रनाथ धाम (चिटगांव) जाते हैं। बांग्लादेशी हिंदुओं की मान्यता है कि इस दिन व्रत व पूजा करने वाले स्त्री/पुरुष को अच्छा पति या पत्नी मिलती है। इस वजह से ये पर्व यहाँ खासा प्रसिद्ध है।
नेपाल में शिवरात्रि
नेपाल पशुपति नाथ में महाशिवरात्रि
पशुपतिनाथ मंदिर
महाशिवरात्रि को नेपाल में व विशेष रूप से पशुपति नाथ मंदिर में व्यापक रूप से मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर काठमांडू के पशुपतिनाथ मन्दिर पर भक्तजनों की भीड़ लगती है। इस अवसर पर भारत समेत विश्व के विभिन्न स्थानों से जोगी, एवम् भक्तजन इस मन्दिर में आते हैं।
शिव जिनसे योग परंपरा की शुरुआत मानी जाती है को आदि (प्रथम) गुरु माना जाता है। परंपरा के अनुसार, इस रात को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जिससे मानव प्रणाली में ऊर्जा की एक शक्तिशाली प्राकृतिक लहर बहती है। इसे भौतिक और आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है इसलिए इस रात जागरण की सलाह भी दी गयी है जिसमें शास्त्रीय संगीत और नृत्य के विभिन्न रूप में प्रशिक्षित विभिन्न क्षेत्रों से कलाकारों पूरी रात प्रदर्शन करते हैं। शिवरात्रि को महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति के सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं व अविवाहित महिलाएं भगवान शिव, जिन्हें आदर्श पति के रूप में माना जाता है जैसे पति के लिए प्रार्थना करती हैं।https://rishikeshnews.com/mahashivratri-2026-puja-muhurat-vrat/ महाशिवरात्रि 2026 कब है? 15 फरवरी को शिवरात्रि, जानिए तिथि, पूजा मुहूर्त और व्रत नियम hi 10 फ़रवरी 2026 14 मार्च 2026 https://web.archive.org/web/20260314231215/https://rishikeshnews.com/mahashivratri-2026-puja-muhurat-vrat/ dead
इन्हें भी देखें
शिव पुराण
शिव
गणगौर
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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