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दिसोम मा़ंझी थान दुमका
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सितंबर 2026
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दिसोम मांझी थान
thumb|दिसोम मा़ंझी थान, दुमका
दिसोम मांझी थान सिर्फ पूजा की जगह नहीं है, ये संथाल हूल (1855) के बाद बनी संथाल स्वशासन की सबसे बड़ी व्यवस्था है।
स्थापना और इतिहास
अंग्रेजों ने 1855 के सिदो-कान्हू के हूल के बाद संथाल परगना को अलग जिला बनाया, तब हर गाँव में मांझी व्यवस्था थी पर पूरे समाज का एक केंद्र नहीं था।
इसी कमी को पूरा करने के लिए 1960 के दशक में दुमका में *दिसोम मांझी थान आर जाहेर थान समिति* की स्थापना की गई।
दिसोम = पूरा देश / पूरा संथाल समाज
मतलब ये एक गाँव का नहीं, 6 जिला - दुमका, देवघर, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज के सभी मांझियों का केंद्रीय थान है।
जगह - दुमका शहर, गाँधी मैदान के पास रांगाटांड़ मोहल्ला में इसका स्थायी कार्यालय और पूजा स्थल (गोट टांडी) है।
आम मांझी थान की तरह ही पर बड़े स्तर पर -
- जाहेर थान - साल के 3 पेड़ों का झुरमुट, जहाँ मारांग बुरु (सृष्टि कर्ता), जाहेर एरा (जंगल देवी), मोरे को-तुरुय को निवास करते हैं।
- मांझी थान - बीच में साल की लकड़ी का खूँटा और 3 पवित्र पत्थर।
- गोट टांडी - खुला मैदान जहाँ हजारों लोग बैठकर फैसला सुनते हैं।
यहाँ कोई मूर्ति नहीं होती, प्रकृति ही देवता है।
यहाँ वंशानुगत नहीं, बल्कि चुनाव और सर्वसम्मति से पद दिए जाते हैं -
मुख्य 5 पद
1. दिसोम मांझी बाबा - अभी बिनीलाल टुडू - पूरे संथाल समाज के प्रधान। इनके बिना कोई भी बड़ा पर्व की तारीख तय नहीं होती।
2. दिसोम नायकी बाबा - अभी सीताराम सोरेन - मुख्य पुजारी। सारी पूजा-पाठ, बलि, हरियाड़, सोहराय वही कराते हैं।
3. दिसोम परगना बाबा - कई जिलों के परगना का मुखिया - अभी सरदार हेंब्रम
4. दिसोम जोग मांझी - नैतिक मामलों के मुखिया - मोहन टुडू
5. दिसोम गोडेत - प्रवक्ता / संदेशवाहक - स्टेनली हेंब्रम, सुरेश सोरेन
इनके नीचे हर जिले का जिला परगना और हर प्रखंड का प्रखंड मांझी काम करता है।
धार्मिक कैलेंडर तय करना
पूरा साल कब क्या पूजा होगी, ये यहीं तय होता है -
- बाहा पर्व (फागुन)
- हरियाड़ पूजा (13 सितंबर को) - खेती की अच्छी पैदावार के लिए
- जानथाड़ पूजा (2 नवंबर को) - इसके बाद ही लुगु बुरु धर्म गढ़ ललपनिया जाने का जत्था निकलता है
- दिसोम सोहराय (जनवरी) - 5 दिनों का सबसे बड़ा पर्व, इसमें बलि के मुर्गे की खिचड़ी प्रसाद के रूप में बाँटी जाती है
सामाजिक न्याय
- अंतरजातीय शादी, जमीन बिक्री, डायन प्रथा, बिटलाहा (सामाजिक बहिष्कार) का अंतिम फैसला।
- अगर कोई मांझी गलत करता है तो उसे यहीं दंड दिया जाता है।
राजनीतिक ताकत
- कोई भी राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपायुक्त दुमका आता है तो सबसे पहले दिसोम मांझी थान में मत्था टेकता है। राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने खुद यहाँ पूजा की थी
- PESA कानून 1996 के तहत सरकार को इस थान की बात सुननी पड़ती है।
- यहाँ जूता-चप्पल, हथियार, शराब लेकर जाना वर्जित
- फैसला खुले में, सबके सामने सुनाया जाता है
- हर बैठक "साप्ताहिक बोंगा बुरु" पूजा के बाद होती है।