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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

एकदेववाद

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अंग्रेज़ी सितंबर 2026 सितंबर 2026 एकदेववाद (अंग्रेज़ी: Henotheism; यूनानी शब्दों "हेन" अर्थात "एक" तथा "थियोस" अर्थात "ईश्वर" से निर्मित) धर्म-अध्ययन के क्षेत्र में प्रयुक्त एक वर्गीकरण है, जो उन धार्मिक व्यवस्थाओं को इंगित करता है जिनमें अनेक देवताओं की उपस्थिति स्वीकार की जाती है, परंतु उनमें से किसी एक देवता को सर्वोच्च अथवा सर्वप्रधान माना जाता है। इस प्रकार की धार्मिक मान्यता एकेश्वरवाद (मोनोथीज़्म) तथा बहुदेववाद (पॉलिथीज़्म) — दोनों की सीधी श्रेणियों में पूर्णतः फिट नहीं बैठती, इसलिए विद्वान इसे एक पृथक तथा सूक्ष्म वर्गीकरण के रूप में प्रयोग करते हैं। शब्द की उत्पत्ति "एकदेववाद" शब्द का प्रचलन जर्मन दार्शनिक फ्रीड्रिष विल्हेल्म योज़ेफ़ शेलिंग द्वारा किया गया, जिन्होंने इसे धार्मिक विकास की उस मध्यवर्ती अवस्था के रूप में परिभाषित किया, जो बहुदेववाद के पश्चात तथा एकेश्वरवाद से पूर्व आती है। बाद में भाषावैज्ञानिक मैक्स म्यूलर ने इस शब्द को अकादमिक जगत में व्यापक रूप से प्रचलित किया तथा इसे "सिद्धांततः एकेश्वरवाद, किंतु व्यवहार में बहुदेववाद" के रूप में परिभाषित किया। विशेषताएँ एकदेववादी धार्मिक व्यवस्था में उपासक किसी एक विशेष देवता की आराधना को प्राथमिकता देते हैं, परंतु साथ ही वे अन्य देवताओं के अस्तित्व को भी नकारते नहीं हैं। यह मान्यता "कैथेनोथीज़्म" (kathenotheism) से भिन्न मानी जाती है, जिसमें उपासना के लिए सर्वोच्च देवता समय के साथ बदलता रहता है, जबकि एकदेववाद में उपास्य सर्वोच्च देवता समय के साथ स्थिर बना रहता है। इसी प्रकार एकदेववाद "मोनोलेट्री" (एकनिष्ठ उपासना) से भी भिन्न है, क्योंकि एकनिष्ठ उपासक केवल एक ही देवता की उपासना करता है, जबकि एकदेववादी अपने पंथ के भीतर विभिन्न देवताओं में से किसी की भी उपासना कर सकता है, भले ही एक देवता को सर्वोच्च माना जाए। उदाहरण विद्वानों के अनुसार हिंदू धर्म को अक्सर एकदेववाद का सबसे प्रमुख उदाहरण माना जाता है, विशेष रूप से वैदिक धर्म के संदर्भ में, जहाँ विभिन्न देवताओं की स्तुति करते हुए भी अंततः एक ही दिव्य सत्ता की विभिन्न अभिव्यक्तियों के रूप में उनकी कल्पना की जाती थी। प्राचीन यूनानी तथा रोमन धर्म को भी एकदेववादी माना जाता है, जिनमें ज़्यूस (यूनानी) तथा ज्यूपिटर (रोमन) को अन्य देवताओं पर प्रधानता प्राप्त थी। कुछ विद्वानों ने ईसाई धर्म की त्रिएकत्व (ट्रिनिटी) मान्यता को भी एकदेववाद के दृष्टिकोण से विश्लेषित करने का प्रयास किया है, यद्यपि ईसाई धर्म स्वयं को एकेश्वरवादी मानता है। सन्दर्भ श्रेणी:बहुदेववाद श्रेणी:आस्तिकता