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कुथाम्पुल्ली साड़ी
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कुथाम्पुल्ली साड़ी (Kuthampully saree) भारत के केरल राज्य के त्रिस्सूर ज़िले की तिरुविल्वामला ग्राम पंचायत के कुथाम्पुल्ली गाँव के बुनकरों द्वारा पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली एक विशेष साड़ी है। कुथाम्पुल्ली साड़ी मुख्य रूप से अपने किनारों के कारण अलग से पहचानी जाती है।https://ikasavu.com/kerala_women_ethnic_collection/kerala_set_mundu/handloom_set_mundu Kuthampully Saree external 3 October 2019 11 April 2021 https://web.archive.org/web/20210411161758/https://ikasavu.com/kerala_women_ethnic_collection/kerala_set_mundu/handloom_set_mundu dead
पृष्ठभूमि और इतिहास
कुथाम्पुल्ली केरल के त्रिस्सूर ज़िले में स्थित एक छोटा सा गाँव है। यहाँ की प्रमुख साड़ियाँ 'कसावु' के साथ धूसर शैली में बनाई जाती हैं। इन साड़ियों का निर्माण मुख्य रूप से कुथाम्पुल्ली, तिरुविल्वामला, एरावथोडी और कोंडोज़ी क्षेत्रों में किया जाता है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, 1200 से 1700 ईस्वी के बीच तमिलनाडु से बुनकर इन क्षेत्रों में आए और उन्होंने यहाँ बुनाई शुरू की।Kuthampully Saree https://vikaspedia.in/social-welfare/entrepreneurship/indian-handloom/kuthampully-saree 11 March 2021 Vikaspedia
वर्तमान में कुथाम्पुल्ली में मुख्य रूप से कन्नड़ भाषी लोग निवास करते हैं। ये बुनकर 'देवांग चेट्टियार' समुदाय से संबंध रखते हैं, जिनकी उत्पत्ति मूल रूप से बैंगलोर और मैसूर में हुई थी। बुनाई की इस परंपरा को संरक्षित करने के लिए वर्ष 1972 में 102 सदस्यों के साथ 'कुथाम्पुल्ली हथकरघा औद्योगिक सहकारी समिति' को पंजीकृत किया गया था। वर्तमान में इसके 814 सदस्य हैं और कुथाम्पुल्ली में इनका अपना भवन है।http://keralalivenews.blogspot.in/2009/06/kuthampully-handloom-weaving-devanga_10.html Weaving a Devanga style Keralalivenews 2012-06-13
सितंबर 2011 में, कुथाम्पुल्ली साड़ी को भौगोलिक उपदर्शन अधिनियम के माध्यम से विशेष बौद्धिक सम्पदा अधिकार प्राप्त हुए।https://timesofindia.indiatimes.com/city/kochi/Kuthampully-sarees-get-an-IP-address-weave-history/articleshow/9816811.cms Kuthampully sarees get an IP address, weave history 2011-09-01 The Times of India 2026-07-28 0971-8257http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-06-10/thiruvananthapuram/32155187_1_branding-exercise-regional-brands-international-branding dead The Times of India Kerala handloom to get international branding 2012-06-13
प्रयुक्त सामग्री
कुथाम्पुल्ली साड़ियों की बुनाई के लिए उपयोग की जाने वाली मुख्य सामग्री 80 और 100 काउंट के महीन सूती धागे और ज़री हैं। इस ज़री को स्थानीय भाषा में "कसावु" कहा जाता है।
तकनीक और बुनाई
साड़ी के किनारे को डॉबी या जैक्वार्ड तकनीक का उपयोग करके अतिरिक्त ज़री के ताने के साथ बुना जाता है। साड़ी के मुख्य भाग के अंदर 'बूटी' डिज़ाइन बुना जाता है, जबकि इसका पल्लू जैक्वार्ड का उपयोग करके ज़री से तैयार किया जाता है।
इस साड़ी की सबसे बड़ी विशेषता "स्ट्रीट साइज़िंग" तकनीक का उपयोग करके ताना तैयार करने में छिपी है। इस प्रक्रिया के बाद ताने के धागे लगभग गोलाकार और एक समान आकार के हो जाते हैं, जिससे साड़ी की सतह बहुत साफ और चिकनी हो जाती है तथा उसमें कोई भी रेशा बाहर नहीं निकला रहता।
सन्दर्भ
श्रेणी:केरल की संस्कृति
श्रेणी:भारतीय वस्त्र