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आर्यभट की ज्या सारणी
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आर्यभट द्वारा रचित आर्यभटीय में दिये गये २४ संख्याओं का समुच्चय आर्यभट की ज्या-सारणी (Āryabhaṭa's sine table) कहलाता है। आधुनिक अर्थ में यह कोई गणितीय सारणी (टेबुल) नहीं है जिसमें संख्याएँ पंक्ति व स्तम्भ के रूप में विन्यस्त (arranged) हों।Helaine Selin Helaine Selin Encyclopaedia of the History of Science, Technology, and Medicine in Non-Western Cultures स्प्रिंगर 2008 2 986–988 978-1-4020-4425-0Eugene Clark The Āryabhaṭiya of Āryabhaṭa: An ancient Indian work on mathematics and astronomy The University of Chicago Press Chicago 1930
thumb|right|250px|वृत्त में चाप (Arc) तथा जीवा (chord)
परम्परागत अर्थों में यह त्रिकोणमिति में प्रयुक्त ज्या फलन (sine function) के मानों की सूची भी नहीं है बल्कि यह ज्या फलन के मानों के प्रथम अन्तर (first differences) है (नीचे की सारणी में स्तम्भ ६)। इसी लिये इसे "आर्यभट की ज्या-अन्तर सारणी" (Āryabhaṭa's table of sine-differences) भी कहा जाता है।10.1006/hmat.1997.2160 Takao Hayashi T November 1997 Āryabhaṭa's rule and table for sine-differences Historia Mathematica 24 4 396–406 10.1007/BF00329978 B. L. van der Waerden March 1988 B. L. Reconstruction of a Greek table of chords Archive for History of Exact Sciences स्प्रिंगर Berlin 38 1 23–38
आर्यभट की यह सारणी, गणित के इतिहास में, विश्व की सबसे पहले रचित ज्या-सारणी है।http://www-history.mcs.st-andrews.ac.uk/HistTopics/Trigonometric_functions.html The trigonometric functions J J O'Connor and E F Robertson June 1996 4 मार्च 2010 https://web.archive.org/web/20080921133843/http://www-history.mcs.st-andrews.ac.uk/HistTopics/Trigonometric_functions.html 21 सितंबर 2008 liveAryabhata and the Construction of the First Trigonometric Table
श्लोक के रूप में ज्या-सारणी
मूल सारणी
आर्यभटीय का निम्नांकित श्लोक ही आर्यभट की ज्या-सारणी को निरूपित करता है। यह आर्यभटीय के 'दशगीतिका' नामक प्रथम अध्याय का १२वाँ छन्द है-
मखि भखि फखि धखि णखि ञखि ङखि हस्झ स्ककि किष्ग श्घकि किघ्व।
घ्लकि किग्र हक्य धकि किच स्ग झशंव क्ल प्त फ छ कला-अर्ध-ज्यास् ॥
आधुनिक निरूपण
उपर्युक्त श्लोक कूट रूप में है। आर्यभटीय में ही इसकी सहायता से ज्या-मान निकालने की विधि भी बतायी गयी है। इस विधि का उपयोग करके जो मान प्राप्त होते हैं वे नीचे की सारणी में दिये गये हैं।
ऊपर के श्लोक में आये शब्द वास्तव में ज्या के मनों के अन्तर को निरुपित करते हैं। इन शब्दों का संख्यात्म मान , स्तम्भ ६ में दिया हुआ है। वास्तव में, किसी कोण के ज्या के मान निकालने के लिये उस कोण तक आये सभी मानों का योग निकालना पड़ेगा, जो गणना करके स्तम्भ संख्या ७ में लिखा गया है।
क्रमांक कोण (A)(डिग्री,आर्क मिनट में) आर्यभट के संख्यात्मक निरूपण के रूप में मान आर्यभट के संख्यात्मक निरूपण का (ISO 15919 लिप्यन्तरण) संख्या के रूप में मान ज्या (A) का आर्यभट द्वारा दिया मान ज्या (A) का आधुनिक मान (3438 × sin (A) 1 03° 45′ मखि makhi 225 225′ 224.8560 2 07° 30′भखि bhakhi 224 449′ 448.7490 3 11° 15′फखि phakhi 222 671′ 670.7205 4 15° 00′धखि dhakhi 219 890′ 889.8199 5 18° 45′णखि ṇakhi 215 1105′ 1105.1089 6 22° 30′ञखिñakhi 210 1315′ 1315.6656 7 26° 15′ङखि ṅakhi 205 1520′ 1520.5885 8 30° 00′हस्झ hasjha 199 1719′ 1719.0000 9 33° 45′स्ककि skaki 191 1910′ 1910.0505 10 37° 30′किष्ग kiṣga 183 2093′ 2092.9218 11 41° 15′श्घकि śghaki 174 2267′ 2266.8309 12 45° 00′किघ्व kighva 164 2431′ 2431.0331 13 48° 45′घ्लकि ghlaki 154 2585′ 2584.8253 14 52° 30′किग्र kigra 143 2728′ 2727.5488 15 56° 15′हक्य hakya131 2859′ 2858.5925 16 60° 00′धकि dhaki 119 2978′ 2977.3953 17 63° 45′किच kica 106 3084′ 3083.4485 18 67° 30′स्ग sga 93 3177′ 3176.2978 19 71° 15′झश jhaśa 79 3256′ 3255.5458 20 75° 00′ंव ṅva 65 3321′ 3320.8530 21 78° 45′क्ल kla 51 3372′ 3371.9398 2282° 30′प्त pta 37 3409′ 3408.5874 23 86° 15′फ pha 22 3431′ 3430.6390 24 90° 00′छ cha 7 3438′ 3438.0000
आर्यभट की गणना-विधि
आर्यभटीय के 'गणितपाद' नामक अध्याय में ज्या-सारणी की गणना की विधि बतायी गयी है।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखे
माधवाचार्य की ज्या सारणी
भास्कर प्रथम का ज्या सन्निकटन सूत्र (Bhaskar I's Sine approximation formula)
श्रेणी:त्रिकोणमिति
श्रेणी:भारतीय गणित