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रामदेव पीर
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रामदेव पीर Ramdev Pir 3.jpg शायर जी जयपाल नेतल दे (अमरकोट की राजकुमारी) शायर जी जयपाल मंगनी देवी चैत्र शुक्ल पंचमी, विक्रम संवत 1409 उंडू काश्मीर (बाड़मेर) रामदेवरा रामदेवरा मानवता
रामदेव पीर (1352–1385 ई.; संवत् 1409–1442), जिन्हें रामदेव जी अथवा रामशा पीर के नाम से भी जाना जाता है, भारत के गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में पूजे जाने वाले हिन्दू देवता हैं। वे चौदहवीं शताब्दी के तंवर वंशीय राजपूत थे और पोखरण क्षेत्र से सम्बंधित थे।राव जोधा पूर्व मारवाड़ का इतिहास नगर डाॅ महेन्द्र सिंह महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केंद्र 2011 जोधपुर 174 रामदेवजी ने तीन विवाह किये थे। उनका एक विवाह दलजी सोढा की पुत्री नेतलदे से हुआ था। रामदेव की दो अन्य रानियां पाऊ ठिकाने की भटियाणी और मारोठ के शाशक बिल्हण दहिया की पुत्री थी। रामदेव के छः पुत्र सादो, देवराज, गीदरा, मेहरा,बीका,जैता थे ।एक पुत्री चांद कुँवरी थी। कहा जाता है कि उनके पास अद्भुत शक्तियाँ थीं और उन्होंने अपना जीवन गरीबों और समाज के वंचित वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। राजस्थान में मेघवाल समुदाय के लोग उन्हें विशेष रूप से पूजते हैं। भारत में कई सामाजिक समूह उन्हें अपना इष्ट-देव मानते हैं। रामदेव को भगवान कृष्ण का अवतार भी माना जाता है।
पृष्ठभूमि
अजमल जी तंवर व माता मैणा दे के घर वि. सं. 1409 को चैत्र शुक्ल बीज के दिन बाबा रामदेवजी का जन्म हुआ, बाबा रामदेव सभी मनुष्यों की समानता में विश्वास रखते थे, चाहे वे उच्च हों या निम्न, अमीर हों या गरीब। उन्होंने गरीबों और उत्पीड़ितों की इच्छाओं की पूर्ति करके उनकी मदद की। उन्हें अक्सर घोड़े पर बैठे हुए दर्शाया जाता है। उनके अनुयायी राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश, मुंबई, दिल्ली और पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में फैले हुए हैं। राजस्थान में उनके स्मरण में कई मेले आयोजित किए जाते हैं, और उनके नाम पर कई राज्यों में मंदिर बने हुए हैं।https://rajeduboard.rajasthan.gov.in/books-2019/cls12/Piyush%20Prawah%20(58).pdf राजस्थान के गौरव - पियूष प्रवाह Board of Secondary Education, Rajasthan - Official Website 54 Page of the PDF or 46 Page of the BookIndia today, Volume 18, Issues 1-12 1993 लिविंग मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ६१ https://books.google.com/books?ei=_P6UT82IJIzxrQfE27npBA&sqi=2&id=JWUpAQAAIAAJ&dq=RAMDEV+MECCA&q=+MECCA#search_anchor 11 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20161223183354/https://books.google.com/books?ei=_P6UT82IJIzxrQfE27npBA&sqi=2&id=JWUpAQAAIAAJ&dq=RAMDEV+MECCA&q=+MECCA#search_anchor 23 दिसंबर 2016 live
मुसलमान रामदेव को रामशा पीर के रूप में पूजते हैं। कहा जाता है कि उनके पास अद्भुत शक्तियाँ थीं और उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। किंवदंती के अनुसार, मक्का के पाँच पीर उनकी शक्तियों की परीक्षा लेने आए। रामदेव ने उनका स्वागत किया और उनसे साथ भोजन करने का आग्रह किया। पीरों ने मना कर दिया और कहा कि वे केवल अपने बर्तन से ही भोजन करते हैं, जो मक्का में हैं। रामदेव मुस्कुराए और कहा, "देखो, आपके बर्तन आ रहे हैं", और तभी उनके बर्तन हवा में उड़कर मक्का से यहाँ आ गए। उनकी शक्तियों को देखकर पीरों ने उन्हें सम्मान दिया और उन्हें रामशा पीर कहा।https://books.google.com/books?id=YQVuAAAAMAAJ&q=RAMDEV+MECCA A call to honour: in service of emergent India by Jaswant Singh Rupa & Co 2006 9788129109767 23https://books.google.com/books?id=JWUpAQAAIAAJ&q=+MECCA India today, Volume 18, Issues 1-12 Living Media India Pvt. Ltd 1993 61https://books.google.com/books?id=_7Q3AAAAIAAJ&q=RAMDEV+MECCA&pg=PA139 Hinduism: New Essays in the History of Religions By Bardwell L. Smith Smith Bardwell L. Brill Archive 1976 9004044957 138–139https://books.google.com/books?id=0rpzmcHn-0kC&q=RAMDEVPIR+MECCA&pg=PA114 Gujarat Unknown: Hindu-Muslim Syncretism and Humanistic Forays By J. J. Roy Burman Roy Burman J. J. Mittal Publications 2004 9788183240529 114–115
वे पाँच पीर, जो रामदेव की शक्तियों को देखने आए थे, उनसे इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने उनके साथ रहना तय किया। उनकी कब्रें रामदेव की समाधि के पास स्थित हैं। रामदेव ने अपने जीवन में कुल 24 चमत्कार किए।https://books.google.com/books?id=JWUpAQAAIAAJ&q=+MECCA India today, Volume 18, Issues 1-12 Living Media India Pvt. Ltd 1993 61thumb|रामदेवरा (जैसलमेर) स्थित बाबा रामदेव की समाधि
समाधि
बाबा रामदेव ने वि.स. १४४२ में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को राजस्थान के रामदेवरा (पोकरण से 10 कि.मी.) में जीवित समाधि ले ली।
रामदेव जयंती
रामदेव जयंती, अर्थात् बाबा का जन्मदिवस प्रतिवर्ष उनके भक्तों द्वारा सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है। यह तिथि भाद्र शुक्ल द्वितीया को पड़ती है। रामदेवरा के मंदिर में भादवा सुदी बीज से एकादशी तक एक अंतरप्रांतीय मेले का आयोजन होता है जिसे "भादवा का मेला" कहते हैं। इस मेले में देश के हर कोने से लाखों हिन्दू और मुस्लिम श्रद्धालु यात्रा करते हुए पहुंचते हैं तथा बाबा की समाधि पर नमन करते हैं।https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/barmer/ramdevra/news/according-to-the-bhat-book-of-tanwar-dynasty-baba-ramdevs-incarnation-day-today-anointed-with-panchamrit-on-the-tomb-129618714.html रामदेवरा में मनाया बाबा का जन्मोत्सव:तंवर वंश की भाट बही के अनुसार बाबा रामदेव का अवतरण दिवस आज, समाधि पर किया पंचामृत से अभिषेक दैनिक भास्कर https://web.archive.org/web/20220406062152/https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/barmer/ramdevra/news/according-to-the-bhat-book-of-tanwar-dynasty-baba-ramdevs-incarnation-day-today-anointed-with-panchamrit-on-the-tomb-129618714.html 6 अप्रैल 2022 19 जून 2023 live
https://www.patrika.com/jodhpur-news/history-of-baba-ramdev-of-runicha-1-1766256/ इतिहास का ये रोचक तथ्य आया सामने, चैत्र शुक्ल पंचमी को हुआ था बाबा रामदेव का अवतरण! Bhati Harshwardhan 31 अगस्त 2017 राजस्थान पत्रिका https://web.archive.org/web/20181008004409/https://www.patrika.com/jodhpur-news/history-of-baba-ramdev-of-runicha-1-1766256/ 8 अक्टूबर 2018 19 जून 2023 live
इन्हें भी देखें
तेजाजी
गौगाजी
पाबूजी
श्री रामदेवबाबा अभियांत्रिकी व प्रबंध महाविद्यालय
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दू धर्म और इस्लाम
श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता
श्रेणी:हिंदू लोक देवता