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समन्तभद्र
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आचार्य समन्तभद्र दूसरी सदी के प्रमुख दार्शनिक और प्रमुख दिगंबर जैन आचार्य थे। वह जैन दर्शन के प्रमुख सिद्धांत, अनेकांतवाद के महान प्रचारक थे।Ghoshal 2002 7-19Jain 2015 xvi उनका जन्म कांचीनगरी (शायद आज के कांजीपुरम्) में हुआ था। उनकी सबसे प्रख्यात रचना रत्नकरण्ड श्रावकाचार हैं।Jain 1917 iv
रचनाएँ
thumb| रत्नकरण्ड श्रावकाचार का अंग्रेजी अनुवाद
रत्नकरण्ड श्रावकाचार https://books.google.co.in/books?id=9ZComgEACAAJ Ratnakaranda Shravakacara 9788188769049 Samantabhadra Ācārya 2006-07-01- रत्नकरण्ड श्रावकाचार श्रावक के आचरण पर हैं इसमें १५० श्लोक हैं।
तत्त्वार्थ सूत्र पर टीका Jain 1917 vजिसका मंगलाचरण अप्त-मीमंसा के नाम से प्रख्यात हुआ।Ghoshal 2002 7
आप्त-मीमंसा- ११४ श्लोकों में जैन धर्म के अनुसार केवल ज्ञान समझाया गया हैं इसमें केवली के गुणों का वर्णन हैं। Jain 2015 xvii
स्वयम्भू-स्तोत्र- २४ तीर्थंकरों की स्तुति।Jain 2015 xi
युक्यानुशासन (युक्ति + अनुशासन) – 'युक्त्यानुशासन' एक काव्य रचना है जिसके ६४ श्लोकों में तीर्थंकर महावीर स्वामी की स्तुति की गयी है।Gokulchandra Jain 2015 84
गन्धहस्तिमहाभाष्य -- तत्वार्थसूत्र की टीका
जिनशतकम् (स्तुतिविद्या) -- यह ११६ श्लोकों की संस्कृत काव्य रचना है जिसमें २४ जैन तीर्थंकरों की स्तुति की गयी है।
तत्त्वानुशासन
विजयधवलाटीका
व्याधि
आचार्य समन्तभद्र मुनि को संन्यास जीवन के शुरुवाती वर्षों में 'भस्मक' नाम की व्याधि हो गयी थी Jain 2015 xviiiजिसके कारण अंत में उन्होंने सल्लेखना व्रत धारण करने का सोचा। जब उन्होंने अपने गुरु से इसके लिए आज्ञा मांगी तो गुरु ने इसकी आज्ञा नहीं दी।Long 2013 110 उनके गुरु ने उन्हें मुनि व्रतों का त्याग कर रोग उपचार करने को कहा।Jain 2015 xviii उपचार के बाद आचार्य समन्तभद्र स्वामी ने पुनः मुनि व्रतों को धारण किया और महान दिगंबर जैन आचार्य हुए।Jain 2015 xx
सन्दर्भ
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ग्रन्थ
https://books.google.co.in/books?id=KBbt-zzaKKEC Āpta-mīmāṁsā of Āchārya Samantabhadra 9788126307241 Saratchandra Ghoshal 2002 6 जनवरी 2016 https://web.archive.org/web/20160131135633/https://books.google.co.in/books?id=KBbt-zzaKKEC 31 जनवरी 2016 live
Jain Vijay K. Acarya Samantabhadra’s Svayambhustotra: Adoration of The Twenty-four Tirthankara 2015 Vikalp Printers 9788190363976 https://books.google.co.in/books?id=xI8HBgAAQBAJ Non-Copyright 6 जनवरी 2016 https://web.archive.org/web/20150916101903/https://books.google.co.in/books?id=xI8HBgAAQBAJ 16 सितंबर 2015 live
https://books.google.co.in/books?id=kLAlAQAAIAAJ The Ratna-karanda-sravakachara Champat Rai Jain 1917 6 जनवरी 2016 https://web.archive.org/web/20151222161540/https://books.google.co.in/books?id=kLAlAQAAIAAJ 22 दिसंबर 2015 live
बाहरी कड़ियाँ
तीर्थंकर महावीर
आचार्य कुंदकुंद
आचर्य पूज्यपाद
आचार्य अकलंक
आचार्य विद्यानंदी
स्याद्वाद
अहिंसा
श्रेणी:जैन आचार्य