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कुंडली लपेटने की प्रौद्योगिकी
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right|thumb|किसी मोटर के स्टेटर की वाइंडिंग
कुंडली लपेटने की प्रौद्योगिकी (Coil winding summarizes) से अभिप्राय उन सभी विधियों तथा सावधानियों से है जो किसी विद्युत्-चुम्बकीय कुंडली (जैसे परिनालिका, ट्रांसफॉर्मर, प्रेरकत्व, मोटर की वाइंडिंग, रिले की वाइंडिंग आदि) को तैयार करते समय लेनी होती है। किसी भी विद्युत्-चुम्बकीय कुंडली से जो अपेक्षा की जाती है वह कार्य वह अपने छोटे-से-छोटे आकार में दे सके, कम से कम ऊष्मा पैदा करे, उसका तापमान एक सीमा से अधिक न बढ़े, उसके अन्दर विद्युत क्षेत्र E का मान एक सीमा के भीतर ही रहे ताकि 'वोल्टेज ब्रेकडाउन' न हो। अतः कुण्डली को लपेटने की डिजाइन इन सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिये। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि कुंडली लपेटने का कार्य आसानी से और कम समय में हो सके। कुंडली मजबूत भी होनी चाहिये ताकि उस पर लगने वाले विभिन्न बलों (विद्युतचुम्बकीय, अभिकेन्द्रीय बल आदि) के बावजूद वह अपने स्थान पर मजबूती से बनी रह सके। ट्रान्सफॉर्मर आदि की कुंडलियों की डिजाइन में लीकेज इंडक्टैंस का भी ध्यान रखना पड़ता है (प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग के बीच लीकेज इंडक्तैंस बहुत कम या बहुत अधिक न हो।)
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
विद्युत्-चुम्बकीय कुंडली
परिनालिका
श्रेणी:विद्युत मशीन