Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

ज्वारासुर

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

हिन्दू Jwarhareshwor Statue at Gokarneshwor Mahadev Temple Premises, Gokarna, Kathmandu.jpg काठमांडू के गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर में ज्वरहरेश्वर की मूर्ति ज्वर असुर बुख़ार के दानवhttps://www.wisdomlib.org/hinduism/compilation/puranic-encyclopaedia/d/doc241654.html Story of Jvara 28 January 2019 फ़ेब्रिस ज्वरासुर हिन्दु धर्म में बुखार के दानव और शीतला देवी के सहायक हैं। हिंदू धर्म एक पौराणिक कथा के अनुसार, ज्वरासुर का जन्म चिंतनमय शिव के ललाट के पसीने से हुआ था और वह देवताओं के लिए एक खतरा था। एक बार विष्णु ने हयग्रीव का अवतार लिया था तब वह ज्वरासुर के बुखारसे पीड़ित थे। इसलिए उन्होने दानव ज्वरासुर को मार डाला। उन्होने अपने सुदर्शन चक्र से उसके तीन टुकड़े कर दिये। हालांकि, ब्रह्मा ने ज्वरासुर काे पुनर्जीवित कर दिया और उसके तीनो हिस्सों को जोड़ दिया। लेकिन उस समय उसके तीनों हिस्सों में से प्रत्येक के सिर और अंग का विकास हो गया था। इस प्रकार ज्वरासुर तीन चेहरे और तीन पैरों वाला दिखाई देता है और एक ही बार में सभी दिशाओं में स्थानांतरित करने की एक असाधारण क्षमता रखता है। बाद में वे शीतला देवी के जीवनसाथी के रूप चुने गए। The Divine consort: Rādhā and the goddesses of India By John Stratton Hawley, Harvard University. Center for the Study of World Religions 1982 http://books.google.co.in/books?id=j3R1z0sE340C&pg=PA351 एक अन्य कथा के अनुसार, माँ दुर्गा देवी कात्यायनी (ऋषि कात्यायन की बेटी के रूप में दुनिया में सभी अभिमानी, बुरे राक्षसी शक्तिओं को नष्ट करने के लिए) के रूप में अवतार लिया और काल्केया द्वारा भेजे गए कई राक्षसों को मार डाला। ज्वरासुर नाम के बुखार के दानव ने, कात्यायनी के बचपन के दोस्तो में लाइलाज बीमारियाँ जैसे कि हैजा, अतिसार, खसरा, चेचक जैसे रोग फैलाना शुरू कर दिया। इसलिए कात्यायनी अपने बीमारियों से ग्रस्त दोस्तों का इलाज किया। उसके बाद पूरी दुनिया को बुखार और रोगों से राहत देने के लिए कात्यायनी ने शीतला देवी का रूप लिया। उनके चार हाथ में से एक हाथ में छोटा झाड़ू, दूसरे हाथ में पंखा, तीसरे हाथ में ठंडे पानी का बर्तन और चौथे हाथ में वे पीने का प्याला रखती है। उन्होंने अपनी शक्ति का इस्तेमाल सभी बच्चों के रोगों के इलाज करने के लिए किया। उसके बाद कात्यायनीने अपने दोस्त बटुकको आग्रह किया कि वह बाहर जाएं और राक्षस ज्वरासुर के साथ युद्ध करे।इसलिए युवा बटुक और दानव ज्वरासुर के बीच युद्ध शुरू हो गया। दानव ज्वरासुर  बटुक को हराने में सफल हो गया। उसके बाद बटुक मृत गिर पडा। ज्वरासुर हैरान हो गया था क्योकि बटुक कहीं दिख नहीं रहा था। पर उसको पता ही नहीं चला कि बटुक ने एक भयानक पुरुष का रूप ले लिया था। इस पुरुष की तीन आंखें और चार हाथ थे। सिर राक्षस जैसा और उसके पास कुल्हाड़ी, तलवार, त्रिशूल था। उनका रंग अंधेरा जैसा काला था। उसके बाल उड़ रहे थे। आंखें क्रोध से जल रही थी। उन्होने बाघ की त्वचा ओर खोपड़ीओं की मालाएँ पहनी थी। बटुकने शिवजी का एक भयानक अवतार कालभैरव का रूप ले लिया था। उसके बाद कालभैरव ज्वरासुर की निंदा करते हैं और उसको बताते कि वह माँ दुर्गा देवी (देवी कात्यायनी) के सेवक है। उन दोनो में एक लंबी बहस होती है, लेकिन वह फिर लड़ाई में परिवर्तित हो जाती है। ज्वरासुर अपनी शक्ति के माध्यम से कई राक्षसों उत्पन्न किये, लेकिन सभी को कालभैरव ने नष्ट कर दिया। अंत में, कालभैरव ने ज्वरासुर के साथ मल्लयुद्ध किया और बादमें अपने त्रिशूल से उसको मार डाला। शीतला देवी-ज्वरासुर का पंथ बंगाली संस्कृति में व्यापक रूप से लोकप्रिय है। संयोग से, बंगाली, उड़िया और हिंदी भाषाओं, बुखार को ज्वर के रूप में जाना जाता है और असुर का अर्थ है राक्षस होता है। ज्वरासुर का नाम दो शब्दों का एक संयोजन है। ज्वारा (यानी बुखार) और असुर (यानी राक्षस) - ज्वरासुर। इस प्रकार, ज्वरासुर बुखार का राक्षस है।ऐसा कहा जाता है कि शीतला देवी और ज्वरासुर अपने गधे पर एक साथ यात्रा करते हैं। ज्वरासुर युवान सेवक के रूप में हैं। उत्तरी भारत के सभी गांव के लोगों ज्वरासुर की पत्नी शीतला देवी को चेचक और बुखार के रोगों में रक्षक के रूप में पूजा जाता है। Fruits of worship: practical religion in Bengal By Ralph W. Nicholas 2003 http://books.google.co.in/books?id=yLI7nyI2UVYC&pg=PA70&lpg=PA70 बौद्ध धर्म में बौद्ध संस्कृति में ज्वरासुर को पार्णशबरी (बौद्ध धर्म के अनुसार बीमारियों की देवी) पति के रूप में दिखाया गया है। कुछ तस्वीरो में देवताओं को वर्जयोगिनी (बौद्ध देवी और बीमारी नाशक) के प्रकोप से बचने के लिए दुर उडते बताए जाते हैं। Studies in Hindu and Buddhist art P. K. Mishra 1999 http://books.google.co.in/books?id=AqSAQpCOifoC&pg=RA1-PA107&lpg=RA1-PA107&dq=Jvarasura&source=bl&ots=hgyH0Zqd-N&sig=5aAPlcgBO7WdmNNjzzTztPE2n5U&hl=en&sa=X&ei=v7gDT4uVEojTrQe9h-nzDw&ved=0CDoQ6AEwAg#v=onepage&q=Jvarasura&f=false सन्दर्भ श्रेणी:हिंदू लोकदेवता श्रेणी:तिब्बतके बौद्ध धर्मकी पौराणिक कथाओं श्रेणी:असुर