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कृष्ण बिहारी 'नूर'
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मई 2016
कृष्ण बिहारी 'नूर' भारतीय शायर थे जिनका जन्म 8 नवम्बर 1925 को लखनऊ के ग़ौसनगर मुहल्ले में हुआ।https://www.amarujala.com/kavya/mud-mud-ke-dekhta-hu/krishna-bihari-noor-left-singing जब फ़िराक़ गोरखपुरी के टोकने पर कृष्ण बिहारी ‘नूर’ ने गाना छोड़ दिया अमर उजाला hi 2025-07-17 उन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एमए किया। सन् १९६८-६९ से लेखन की शुरुआत हुई। पहली कहानी सन् १९७१ में प्रकाशित हुई। तबसे सैकड़ों रचनाएँ हिन्दुस्तान के प्रमुख समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हुये। http://www.abhivyakti-hindi.org/lekhak/k/krishnabehari.htm कृष्ण बिहारी 9 जून 2008 एचटीएम अभिव्यक्ति https://web.archive.org/web/20080509144817/http://www.abhivyakti-hindi.org/lekhak/k/krishnabehari.htm 9 मई 2008 dead अनेक प्रकार की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं के सदस्य और इमारात में हिन्दी के विकास में संलग्न। उनका नाम उर्दू अदब के 20वीं सदी के मक़बूल शायरों में शुमार है । उनका निधन 30 मई 2003 में हुआ।
प्रकाशित कृतियाँ
कहानी संग्रह : दो औरतें, पूरी हक़ीकत पूरा फ़साना, नातूर।
एकांकी नाटक : यह बहस जारी रहेगी, एक दिन ऐसा होगा, गांधी के देश में
नाटक : संगठन के टुकड़े
कविता संग्रह : मेरे मुक्तक : मेरे गीत, मेरे गीत तुम्हारे हैं, मेरी लम्बी कविताएँ,
उपन्यास : रेखा उर्फ नौलखिया, पथराई आँखों वाला यात्री, पारदर्शियाँ।
यात्रा वृतांत : सागर के इस पार से उस पार से।
"दो औरतें " कहानी का नेशनल स्कूल ऑफ ड्रॉमा दिल्ली द्वारा श्री देवेंन्द्र राज अंकुर के निर्देशन में सन १९९६ में मंचन। अखबार और रेडियो की दुनिया से संबद्ध रहने के बाद पिछले सत्रह वर्षों से अध्यापन। कृष्ण बिहारी के एक सौ एक गीत उनके जालघर 'मेरे गीत तुम्हारे हैं' पर पढ़े जा सकते हैं। यह जालघर अभी निर्माणाधीन है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
कृष्ण बिहारी की रचनाएँ कविता कोश में