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411 समाचार
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सावित्रीबाई फुले

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सावित्री बाई फुले thumb| सावित्रीबाई फुले चौक, पुणे|201x201पिक्सेल अंगूठाकार|फुले दंपत्ति|161x161पिक्सेल सावित्री बाई फुले (3 जनवरी 1831 – 10 मार्च 1897) उनका संग्रह याद रहेगा।https://hindi.news18.com/blogs/pankaj-shukla_1/savitribai-phule-and-her-incomplete-dream-of-girls-education-3400367.html साल गुजरे मगर सावित्री बाई फुले का महिला शिक्षा का सपना अधूरा News18 India 2021-01-03 3 जनवरी 2021 https://web.archive.org/web/20210103071120/https://hindi.news18.com/blogs/pankaj-shukla_1/savitribai-phule-and-her-incomplete-dream-of-girls-education-3400367.html dead भारत की प्रथम महिला शिक्षक अध्यापक सावित्री बाई फुले थी श्रीमती सावित्रीबाई फुले की जीवनी सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1841 में महात्मा ज्योतिराव फुले से हुआ था।https://tubelighttalks.com/savitribai-phule-information-quotes-death-essay-hindi/ Savitribai Phule Jayanti [Hindi]: Information, Quotes, Death, Essay 2021-01-03 Tube Light Talks en-US 2021-01-03 सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल(भारत की प्रथम महिला शिक्षिका)और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं। महात्मा ज्योतिराव को महाराष्ट्र और भारत में सामाजिक सुधार आंदोलन में एक सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में माना जाता है। उनको महिलाओं और अनाथ, दीन-दुखी, गरीब लोगों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। ज्योतिराव, जो बाद में ज्योतिबा के नाम से जाने गए सावित्रीबाई के संरक्षक, गुरु और समर्थक थे। सावित्रीबाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और महिलाओ को शिक्षित बनाना। वे एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री के रूप में भी जाना जाता था। सामाजिक मुश्किलें वे स्कूल जाती थीं, तो उनका विरोध होता था। सावित्रीबाई पूरे देश की नायिका हैं। हर बिरादरी और धर्म के लिये उन्होंने काम किया। शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले ने बहुत बड़ा योगदान है। विद्यालय की स्थापना 5 सितंबर 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्हों ने महिलाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पाँच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया।{{®=÷®√$√°π¢÷^×√•π§^:!;:7)?()8&6_4#"6-9;_7!8'6*%{™=§^§]{✓×™÷™×=÷|°=×✓π•×§∆`π^§✓¢&478(0-(6₹&'(!9?(__7?(₹6"6+&7:7:9?/838_(8#+)'#-9_78(_(-38292:°{¥✓$™•×§`°•÷|§•°•{•ו= Cite web|url=https://www.bhaskar.com/maharashtra/mumbai/news/savitribai-phule-opened-the-countrys-first-girls-school-126425252.html|title=सावित्रीबाई ने महाराष्ट्र में खोला था देश का पहला कन्या विद्यालय, यहां बालिकाओं को पढ़ाने पर फेंका जाता था कीचड़|date=2020-01-03|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2021-01-03}} निधन 10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया। प्लेग महामारी में सावित्रीबाई प्लेग के मरीजों की सेवा करती थीं। एक प्लेग के छूत से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण इनको भी छूत लग गया। और इसी कारण से उनकी मृत्यु हुई।https://www.haribhoomi.com/news/savitribai-phule-jayanti-savitribai-phule-biography सावित्रीबाई फुले जयंती: सावित्रीबाई फुले की जीवनी Hari Bhoomi दिल्ली टीम डिजिटल/हरिभूमि 2019-01-03 www.haribhoomi.com hi 2021-01-04 23 अक्तूबर 2020 https://web.archive.org/web/20201023061153/https://www.haribhoomi.com/news/savitribai-phule-jayanti-savitribai-phule-biography dead सावित्रीबाई फुले पर प्रकाशित साहित्य क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखिका : शैलजा मोलक)https://hindi.thebetterindia.com/10362/savitribai-phule-first-female-teacher-india/ कीचड़ और पत्थर फेंक कर रोका, घर से निकाला, पर स्त्री शिक्षा की ज्योत जलाये रखी सावित्रीबाई ने! 2019-01-03 The Better India - Hindi en-US 2021-01-04 क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखक : ना.ग. पवार) क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखक : नागेश सुरवसे) क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले (विद्याविकास) (लेखक : ज्ञानेश्वर धानोरकर) त्या होत्या म्हणून (लेखिका : डॉ. विजया वाड) 'व्हय मी सावित्रीबाई फुले' हे नाटक (एकपात्री प्रयोगकर्ती आद्य अभिनेत्री : सुषमा देशपांडे) (अन्य सादरकर्त्या - डॉ. वैशाली झगडे) साध्वी सावित्रीबाई फुले (लेखिका : फुलवंता झोडगे) सावित्रीबाई फुले (लेखक : अभय सदावर्ते) सावित्रीबाई फुले (लेखिका : निशा डंके) सावित्रीबाई फुले (लेखक : डी.बी. पाटील ) सावित्रीबाई फुले - श्रध्दा (लेखक : मोहम्मद शाकीर) सावित्रीबाई फुले (लेखिका : प्रतिमा इंगोले ) सावित्रीबाई फुले (लेखक : जी.ए. उगले) सावित्रीबाई फुले (लेखिका : मंगला गोखले) सावित्रीबाई फुले : अष्टपैलू व्यक्तिमत्त्व (लेखक : ना.ग. पवार) 'हाँ मैं सावित्रीबाई फुले' (हिंदी), (प्रकाशक : अझिम प्रेमजी विद्यापीठ) ज्ञान ज्योती माई सावित्री फुले (लेखिका : विजया इंगोले) ज्ञानज्योती सावित्रीबाई फुले (लेखिका उषा पोळ-खंदारे) Savitribai - Journey of a Trailblazer (Publisher : Azim Premji University) Shayera.Savitri Bai Phule (in urdu)Author Dr.Nasreen Ramzan Sayyed गूगल डूडल 3 जनवरी 2017 को उनके 189 वे जन्मदिवस पर गूगल ने उनका गूगल डूडल प्रसिद्ध कर उन्हें अभिवादन किया है। सन्दर्भ महिलाओं को समान शिक्षा देने के लिए सावित्रीबाई फुले ने किया था प्रयास श्रेणी:सत्यशोधक समाज श्रेणी:भारतीय महिलाएँ श्रेणी:मराठी कवयित्री श्रेणी:भारत में स्त्री-शिक्षा श्रेणी:समाज सुधारक श्रेणी:1831 में जन्मे लोग श्रेणी:१८९७ में निधन श्रेणी:महाराष्ट्र का इतिहास श्रेणी:दलित लेखिका