411 REFERENCE · Wikipedia
खिलौना (1970 फ़िल्म)
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
खिलौना खिलौना (हिन्दी फ़िल्म) का पोस्टर.JPG खिलौना का पोस्टर चंदर वोहरा गुलशन नन्दा प्रसाद प्रोडक्शन्स (प्राइवेट) लिमिटेड ऍल वी प्रसाद आर के स्टूडियोज़ द्वारका दिवेचा लक्ष्मीकांत प्यारेलाल शिवाजी अवधूत गुलशन नन्दा संजीव कुमार, मुमताज़, जितेन्द्र, शत्रुघन सिन्हा, दुर्गा खोटे, बिपिन गुप्ता, जगदीप 1970 भारत हिन्दी
खिलौना १९७० में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। इस फ़िल्म के निर्देशक हैं चंदर वोहरा। इस फ़िल्म को फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों में छः श्रेणियों में नामांकित किया गया था और इसने दो श्रेणियों में पुरस्कार जीते।
संक्षेप
ठाकुर सूरज सिंह एक अमीर आदमी हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी (दुर्गा खोटे) हैं और तीन लड़के हैं, किशोर (रमेश देओ), विजयकमल (संजीव कुमार) और मोहन (जितेन्द्र) और एक अविवाहित बेटी राधा है। किशोर की पत्नी लक्ष्मी और दो बच्चे पप्पू और लाली हैं। किशोर परिवार का कारोबार देखता है, विजयकमल एक प्रसिद्ध कवि है और मोहन शहर में शिक्षा ग्रहण कर रहा है। विजयकमल सपना नाम की लड़की से प्यार करता है लेकिन उनका पड़ोसी बिहारी (शत्रुघन सिन्हा) अपने पैसों के दम पर उससे ज़बरदस्ती शादी कर लेता है और शादी की महफ़िल में ही सपना आत्महत्या कर लेती है। विजयकमल यह सब देखकर पागल हो जाता है।
ठाकुर की पत्नी को विजयकमल को पागलखाने भेजना गवारा नहीं है, इसलिए उसे घर की छत पर एक कमरे में बन्द रखा जाता है। डाक्टरों के यह कहने पर कि अगर उसकी शादी करा दी जाय तो शायद उसकी याददाश्त वापिस आ सकती है, ठाकुर हीराबाई नाम की तवायफ़ के कोठे में जाकर हीराबाई की लड़की चांद (मुमताज़) से अपने बेटे के साथ झूठी शादी रचाने की मिन्नत करता है और बदले में हज़ार रुपये महीना देने की पेशकश करता है। चांद मान जाती है और ठाकुर के घर आकर विजयकमल की देखभाल करने लगती है। विजयकमल की हालत धीरे धीरे सुधरने लगती है लेकिन इस बीच विजयकमल के द्वारा चांद का बलात्कार होता है, बिहारी भी चांद से ज़बरदस्ती करने की कोशिश करता है और मोहन चांद को अपना बनाने के ख़्वाब संजोने लगता है। चांद गर्भवती हो जाती है। इसी बीच यह बात भी उजागर होती है कि चांद हीराबाई की नहीं बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता (नारी सभा के प्रैसिडैन्ट) की बेटी है लेकिन यह बात हीराबाई, सामाजिक कार्यकर्ता और चांद (जो छुपकर सारी बात सुनती है) के अलावा किसी को मालूम नहीं है। एक हादसे में विजयकमल के साथ हाथापायी के दौरान बिहारी छत से गिर कर मर जाता है और विजयकमल की याद्दाश्त वापिस लौट आती है लेकिन अब वो चाँद को पहचानता तक नहीं है। ठाकुर के परिवारवाले अब चाँद से चले जाने को कहते हैं और जब चाँद उनको यह बताती है कि वह विजयकमल के बच्चे की माँ बनने वाली है तो उसे बहुत दुत्कारते हैं। फ़िल्म के अन्त में मोहन आकर सारा मसला सुलझा लेता है और चाँद को ठाकुर के घर में अपना लिया जाता है।
चरित्र
मुख्य कलाकार
संजीव कुमार - विजयकमल एस सिंह
मुमताज़ - चाँद
जितेन्द्र - मोहन एस सिंह
शत्रुघन सिन्हा - बिहारी
दुर्गा खोटे - ठकुराइन सूरज सिंह
बिपिन गुप्ता - सूरज सिंह
जगदीप - महेश
दल
संगीत
इस फ़िल्म के गीत लिखे हैं आनन्द बख़्शी ने और संगीत दिया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने।
+फ़िल्म खिलौना के गीतगीतगायक१सनम तू बेवफ़ा के नाम से मशहूर हो जायलता मंगेशकर२ख़ुश रहे तू सदा ये दुआ है मेरीमोहम्मद रफ़ी३खिलौना जानकर तुम तोमोहम्मद रफ़ी४ये नाटक कवि लिख गये कालीदासमन्ना डे५रोज़ रोज़ रोज़ी तुमको प्यार करता हैआशा भोंसले, किशोर कुमार
रोचक तथ्य
परिणाम
बौक्स ऑफिस
यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस में हिट थी।
समीक्षाएँ
नामांकन और पुरस्कार
१८वें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार में इस फ़िल्म को छ: श्रेणियों में नामांकित किया गया था जो कि इस प्रकार है:-
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - संजीव कुमार
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार - मुमताज़
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता पुरस्कार - जगदीप
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ कथा पुरस्कार - गुलशन नन्दा
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक पुरस्कार - मोहम्मद रफ़ी
इनमें से इस फ़िल्म ने सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म तथा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार जीते।
बाहरी कड़ियाँ
0148375 खिलौना
श्रेणी:1970 में बनी हिन्दी फ़िल्म
श्रेणी:फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार विजेता