411 REFERENCE · Wikipedia
भामाशाह
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
भामाशाह(1547 - 1600) बाल्यकाल से मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के मित्र थे। वे महाराणा प्रताप के सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार थे। अपरिग्रह को जीवन का मूलमन्त्र मानकर संग्रहण की प्रवृत्ति से दूर रहने की चेतना जगाने में आप सदैव अग्रणी रहे। मातृ-भूमि के प्रति अगाध प्रेम था। दानवीरता के लिए भामाशाह नाम इतिहास में अमर है।http://www.bhaskar.com/news/RAJ-PALI-c-105-295675-NOR.html दानवीर भामाशाह ने की थी महाराणा प्रताप की मदद 19 सितंबर 2014 19 सितंबर 2014 https://archive.today/20140919230447/http://www.bhaskar.com/news/RAJ-PALI-c-105-295675-NOR.html dead
जीवनी
right|thumb|240px|आबू पर्वत पर स्थित दिलवाड़ा जैन मन्दिर जिसे भामाशाह और उनके भाई ताराचन्द ने बनाया था।
दानवीर भामाशाह का जन्म राजस्थान के मेवाड़ राज्य में 29 अप्रैल 1547 को हुआSingh Dr. Chhotu Narayan Bhamashah Report https://www.faces.org.in/Bhamashah-Report.pdfBhamashah Award Annual State Award Eternal Mewar https://www.eternalmewar.in/collaboration/bhamashah-award https://web.archive.org/web/20240807034432/http://www.eternalmewar.in/collaboration/bhamashah-award 7 अगस्त 2024 2025-01-01 www.eternalmewar.in live उनके पिता का नाम भारमल था जो रणथम्भौर के किलेदार थे।
भामाशाह का निष्ठापूर्ण सहयोग महाराणा प्रताप के जीवन में महत्वपूर्ण और निर्णायक साबित हुआ। मातृ-भूमि की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप का सर्वस्व होम हो जाने के बाद भी उनके लक्ष्य को सर्वोपरि मानते हुए अपनी सम्पूर्ण धन-संपदा अर्पित कर दी। यह सहयोग तब दिया जब महाराणा प्रताप अपना अस्तित्व बनाए रखने के प्रयास में परिवार सहित पहाड़ियों में छिपते भटक रहे थे। मेवाड़ के अस्मिता की रक्षा के लिए दिल्ली गद्दी का प्रलोभन भी ठुकरा दिया। महाराणा प्रताप को दी गई उनकी हरसम्भव सहायता ने मेवाड़ के आत्म सम्मान एवं संघर्ष को नई दिशा दी।
भामाशाह अपनी दानवीरता के कारण इतिहास में अमर हो गए। भामाशाह के सहयोग ने ही महाराणा प्रताप को जहाँ संघर्ष की दिशा दी, वहीं मेवाड़ को भी आत्मसम्मान दिया। कहा जाता है कि जब महाराणा प्रताप अपने परिवार के साथ जंगलों में भटक रहे थे, तब भामाशाह ने अपनी सारी जमा पूंजी महाराणा को समर्पित कर दी। तब भामाशाह की दानशीलता के प्रसंग आसपास के इलाकों में बड़े उत्साह के साथ सुने और सुनाए जाते थे।
हल्दी घाटी के युद्ध के पश्चात महाराणा प्रताप के लिए उन्होंने अपनी निजी सम्पत्ति में इतना धन दान दिया था कि जिससे २५००० सैनिकों का बारह वर्ष तक निर्वाह हो सकता था। प्राप्त सहयोग से महाराणा प्रताप में नया उत्साह उत्पन्न हुआ और उन्होंने पुन: सैन्य शक्ति संगठित कर मुगल शासकों को पराजित करा और फिर से मेवाड़ का राज्य प्राप्त किया।
भामाशाह के वंशज कावडिंया परिवार आज भी उदयपुर मे रहता है। आज भी ओसवाल जैन समाज कावडिंया परिवार का सम्मानपूर्वक सबसे पहले तिलक करते है । आपके सम्मान मे सुप्रसिद्ध उपान्यसकार कवि हरिलाल उपाध्याय द्वारा 'देशगौरव भामाशाह' नामक ऐतिहासिक उपान्यस लिखी गयी। भामाशाह और उनके भाई ताराचन्द ने आबू पर्वत मे जैन मंदिर बनाया।
लोकहित और आत्मसम्मान के लिए अपना सर्वस्व दान कर देने वाली उदारता के गौरव-पुरुष की इस प्रेरणा को चिरस्थायी रखने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी स्मृति में दानशीलता, सौहार्द्र एवं अनुकरणीय सहायता के क्षेत्र में दानवीर भामाशाह सम्मान स्थापित किया है। महाराणा मेवाड फाऊंडेशन की तरफ से दानवीर भामाशाह पुरस्कार राजस्थान मे मेरिट मे आने वाले छात्रो को दिया जाता है। उदयपुर, राजस्थान में राजाओं की समाधि स्थल के मध्य भामाशाह की समाधि बनी है। उनके सम्मान में ३१ दिसम्बर २००० को ३ रुपये का डाक टिकट जारी किया गया।
इन्हें भी देखें
दानवीर भामाशाह सम्मान
भामाशाह योजना
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Bhama Shah: Trusted Lieutenent of Maharana Pratap
श्रेणी:1542 में जन्मे लोग
श्रेणी:राजस्थान के लोग
श्रेणी:१६०० में निधन