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मैरो डोनर रजिस्ट्री इंडिया
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अंगूठाकार|थैलेसीमिया
थैलेसीमिया के लिये इसके अलावा इस रोग के रोगियों के मेरु रज्जु (बोन मैरो) ट्रांस्प्लांट हेतु अब भारत में भी बोनमैरो डोनर रजिस्ट्री खुल गई है। http://203.200.89.99/main.aspx?edate=9/22/2008&editioncode=2&pageno=17#
थैलीसीमिया रोग नियंत्रण परियोजना का शुभारंभ
१८ सितंबर
दैनिक जागरण-ई पेपर
हिन्दीजून 2020 InternetArchiveBot मैरो डोनर रजिस्ट्री इंडिया (एम.डी.आर.आई) में बोनमैरो दान करने वालों के बारे में सभी आवश्यक जानकारियां होगी जिससे देश के ही नहीं वरन विदेश से इलाज के लिए भारत आने वाले रोगियों का भी आसानी से उपचार हो सकेगा। यह केंद्र मुंबई में स्थापित किया जाएगा। ऐसे केंद्र वर्तमान में केवल अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में ही थे। ल्यूकेमिया और थैलीसीमिया के रोगी अब बोनमैरो या स्टेम सेल प्राप्त करने के लिए इस केंद्र से संपर्क कर मेरुरज्जु दान करने वालों के बारे में जानकारी के अलावा उनके रक्त तथा लार के नमूनों की जांच रिपोर्ट की जानकारी भी ले पाएंगे। जल्दी ही इसकी शाखाएं महानगरों में भी खुलने की योजना है।
फिलहाल एम डीआर आई केंद्र मुंबई में काम करेगा किंतु जल्द ही दिल्ली, कोलकाता और बेंगलूर में भी इसकी शाखाएं खोलने की योजना है। इसका सबसे अधिक लाभ ऐसे रोगियों को होगा जिन्हें या तो अपने सग संबंधियों से बोनमैरो मिल नहीं पाती या उनकी बोनमैरो उनसे मेल नहीं खाती। डाक्टरों के मुताबिक देश में हर साल करीब 40000 रोगी बोनमैरो प्रत्यारोपण रजिस्ट्री की सुविधा नहीं होने के कारण मौत के मुंह में चले जाते हैं। मुंबई में एम डी आर आई केंद्र खोलने का महत्वपूर्ण निर्णय बाँम्बे हाँसि्पटल में हाल में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान लिया गया जिसमें बिर्टेन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों के जाने.माने डाक्टरोंएवं विशषज्ञों तथा देशभर के सभी प्रमुख प्रत्यारोपण केंद्रों के प्रतिनधियों ने हिस्सा लिया। एम डी आर आई से संबद् डाक्टर अशोक कृपलानी ने कहा कि देश में ऐसे केंद्र की बहुत जरूरत थी क्योंकि भारतीय मूल के लोगों को बोनमैरो प्रत्यारोपण में दो बडी समस्याएं पेश आती है। पहली यह कि भारतीय मूल के लोग पश्चिमी मूल के लोगों से अनुवांशिक रूप से भिन्ना होते हैं इसलिए उनकी बोनमैरो पश्चिमी लोगों की बोनमैरो से आसानी से मेल नहीं खाती और दूसरा यह कि अगर किसी भारतीय की बोनमैरो मेल खा भी जाती है तो उसे विदेश जाना पड़ता है जिससे उसका एक से डेड़ करोड रूपये तक का खर्च आ जाता है A जो हरेक के बस की बात नहीं होती। डाक्टर कृपलानी ने कहा कि फिलहाल विश्व भर में एक करोड बीस लाख से अधिक लोग विभिन्ना केंद्रों में बोनमैरो दान करनेके लिए अपने नाम सुचीबद् करा चुके है।
सन्दर्भ
श्रेणी:रक्त रोग