Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

मोनारख जी महाराज

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

मेघवँश के महान संत श्री मोनारख जी राजस्थान के जालोर के निवासी थे| आबुपर्वत पर मेवाड के महाराज कुम्भा का आधिपत्य था| कुम्भा कई संत महात्माओँ से परचा माँगना था| परचा नही देने पर उनको कारागृह में डाल देता था| इस प्रकार कुम्भा ने हजारोँ संत महात्माओँ को बंदी बना दिया था| जब मोनारख जी इस बात का पता चला तो वे जालोर छोड आबुपर्वत पर आ गए तथा ओरिया नामक स्थान पर रहने लगे | कुम्भा के भय से यहाँ पर कोई भी भगवान का भजन नही करते थे लेकिन मोनारख जी नियम था कि प्रतिदिन प्रात: पाँच भजन तंदूरे पर गाकर ही भोजन ग्रहण करत थे| अपने नियमानुसार भजन करने लगे| जब कुम्भा को इस बात की खबर लगी तो उसने अपने सैनिको को भेजा तथा कहा कि उसको दरबार मे हाजिर करो| सैनिकोँ ने मोनारख जी से बिनती की कि महाराणा ने आपको दरबार में पेश होने का हुकम दिया है| मोनारख जी कुम्भा के समक्ष पेश हुए | कुम्भा ने कहा कि मेरे राज्य मे भक्ति करने वालो को परचे अर्थात चमत्कार दिखाने पडते है अन्यथा उन्हे कारगृह मे डाल दाया जाता है| मोनारख जी ने तदुंरा हाथ मे लिया तथा रखियो के अनगिनत परचे बताए| महाराणा कुम्भा उनके समक्ष नतमस्तक होकर चरणोँ में गिर गया| सभी बंदी महात्माओँ को आजाद कर दिया| महाराणा कुम्भा ने इन्हे अपना सतगुरू बना लिया| मोनारख जी ने अचलगढ से करीब चार किलोमीटर दूर ओरिया गाँव में ही समाधि ले ली| वर्तमान मे इनके समाधिस्थल पर मंदिर बना हुआ हैँ| ये एक कवि भी थे| इनके द्वारा लिखित भजन भगतोँ द्वारा गाए जाते थे|| बोलो श्री मोनारख जी महाराज की जय||