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शाह वलीउल्लाह देहलवी
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शाह वलीउल्लाह देहलवी Shah Waliullah Name.svg शाह वलीउल्लाह का अरबी लीपि में नाम मौलाना सन 1703 ईस्वी से 1762 ईस्वी तक शाह अब्दुल अजीज इस्लाम कुरान का अनुवाद फारसी भाष में, हुज़्ज़तुल्लाह इल-बलीग़ा, अल-फौजुल कबीर, अल-अकीदतुल हसनैन, मजमुआ रसैल इमाम शाह वलीउल्लाह ज्ञान की छाया मदरसा इस्लामिक विद्वान शाह वलीउल्लाह मुग़ल भारतीय 28 38 03.4 N 77 14 14.7 E मुन्हदिया कब्रिस्तान दिल्ली गेट शाहजहांँनाबाद 25pxमुग़ल साम्राज्य (अब पुरानी दिल्ली दिल्ली भारत 20 अगस्त 1762 (उम्र 59) फुलत गाँव मुजफ्फरनगर 25px मुग़ल साम्राज्य (अब मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश भारत 21 फरवरी 1703 अब्दुर रहीमक़ुतुबुद्दीन अहमद वलीउल्लाह इब्न अब्दुर्रहीम इब्न वहीदुद्दीन इब्न मुअज़्ज़म इब्न मन्सूर अल-उमर अद् देहलवी https://www.rekhta.org/authors/shah-waliullah-mohaddis-delhvi/ebooks?lang=hi शाह वलीउल्लाह मोहद्दिस देहलवी की उर्दू किताबें rekhta.org 28 जून 2020 अरबी: قطب الدين أحمد ولي الله بن عبد الرحيم العمري الدهلوي; 1703–1762), जिन्हें आमतौर पर लोग शाह वलीउल्लाह देहलवी (शाह वली अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है), एक इस्लामिक विद्वान, मुहद्दिद,इतिहासकार और मुग़ल साम्राज्य से ग्रंथ सूची के लेखक थे।http://heritagetimes.in/mishra-on-shah/ शाह वलीउल्लाह देहलवी जिन्होंने हिन्दोस्तान में क्रांतिकारी की नीव रखी heritagetime.com 28 जून 2020
प्रारम्भिक जीवन
शाह वलीउल्लाह का जन्म 21 फरवरी 1703 को दिल्ली के एक प्रमुख इस्लामी विद्वान शाह अब्दुर रहीम के घर हुआ था। वह अपने पतिव्रता होने के कारण शाह वलीउल्लाह के नाम से जाना जाता था। उन्होंने सात साल की उम्र तक कुरान को याद किया। इसके तुरंत बाद, उन्होंने अरबी और फ़ारसी अक्षरों में महारत हासिल कर ली। उनकी शादी चौदह साल की उम्र में हो गई थी। सोलह वर्ष की उम्र तक उन्होंने हनफ़ी कानून, धर्मशास्त्र, ज्यामिति, अंकगणित और तर्कशास्त्र के मानक पाठ्यक्रम को पूरा कर लिया था।
उनके पिता, शाह अब्दुर रहीम मदरसा-ए रहीमियाह के संस्थापक थे। वह कानून की संहिता, फतवा-ए-आलमगीरी के संकलन के लिए औरंगजेब द्वारा नियुक्त समिति पर थे। उनके दादा, शेख वजीहुद्दीन , शाहजहाँ की सेना में एक महत्वपूर्ण अधिकारी थे।
उनका एक बेटा था जो एक प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान, शाह अब्दुल अज़ीज़ भी था। वह हज करने अरब गया था।
Early life and education
अहमद, जिनका जन्म 21 फरवरी 1703 को दिल्ली में हुआ था, एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान शाह अब्दुर रहीम के पुत्र थे। बाद में वे अपनी धार्मिक निष्ठा और आध्यात्मिकता के कारण शाह वलीउल्लाह के नाम से प्रसिद्ध हुए।उन्होंने सात साल की उम्र में कुरआन याद कर लिया था, और इसके तुरंत बाद अरबी और फ़ारसी भाषाओं में निपुण हो गए। चौदह वर्ष की आयु में उनका विवाह हुआ, और पंद्रह वर्ष की आयु में उन्होंने हनफ़ी फ़िक्ह (कानून), धर्मशास्त्र, ज्यामिति, अंकगणित, और तर्कशास्त्र की पूरी पढ़ाई पूरी कर ली।अपने पिता की मृत्यु के दो साल बाद, वे मदरसा-ए-रहीमिया के डीन (प्रमुख) बने। उनके पिता शाह अब्दुर रहीम ने ही मदरसा-ए-रहीमिया की स्थापना की थी और वे औरंगज़ेब द्वारा गठित उस समिति के सदस्य थे जिसने फ़तवा-ए-आलमगीरी का संकलन किया था।शाह वलीउल्लाह ने 1732 में, जब वे 29 वर्ष के थे, मक्का की यात्रा की। उनके पोते शाह इस्माइल देहलवी थे, जिनका देवबंदी आंदोलन के गठन और विचारधारा पर गहरा प्रभाव पड़ा।
सन्दर्भ
श्रेणी:दिल्ली के लोग
श्रेणी:इस्लामिक
श्रेणी:1703 में जन्मे लोग
श्रेणी:निधन वर्ष अनुपलब्ध
श्रेणी:1703
श्रेणी:इस्लाम के मुस्लिम विद्वान