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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

एजोला

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right|thumb|300px|एजोला एजोला (Azolla) एक तैरती हुई फर्न है जो शैवाल से मिलती-जुलती है। सामान्यतः एजोला धान के खेत या उथले पानी में उगाई जाती है। यह तेजी से बढ़ती है।http://hi.vikaspedia.in/agriculture/animal-husbandry/90f91c94b93293e903-92e93594793693f92f94b902-915947-92d94b91c928-915947-93094292a-92e947902 एजोलाः मवेशियों के भोजन के रूप में 16 अक्तूबर 2014 https://web.archive.org/web/20141021024413/http://hi.vikaspedia.in/agriculture/animal-husbandry/90f91c94b93293e903-92e93594793693f92f94b902-915947-92d94b91c928-915947-93094292a-92e947902 21 अक्तूबर 2014 live अजोला एक जैव उर्वरक है। एक तरफ जहाँ इसे धान की उपज बढ़ती है वहीं ये कुक्कुट, मछली और पशुओं के चारे के काम आता है। कुछ देशों में तो लोग इसे चटनी व पकोड़े भी बनाते हैं। इससे बायोडीजल तैयार किया जाता है। यहां तक कि लोग इसे अपने घर के ड्रॉइंग रूम को सजाने के लिए भी लगाते हैं। अजोला पशुओं के लिए पौष्टिक आहार है। पशुओं को खिलाने से उनका दुग्ध उत्पादन बढ़ जाता है । परिचय एजोला पानी में पनपने वाला छोटे बारीक पौधों के जाति का होता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में फर्न कहा जाता है। एजोला की पंखुड़ियो में एनाबिना (Anabaena,) नामक नील हरित काई के जाति का एक सूक्ष्मजीव होता है जो सूर्य के प्रकाश में वायुमण्डलीय नत्रजन का यौगिकीकरण करता है और हरे खाद की तरह फसल को नत्रजन की पूर्ति करता है। एजोला की विशेषता यह है कि यह अनुकूल वातावरण में ५ दिनों में ही दो-गुना हो जाता है। यदि इसे पूरे वर्ष बढ़ने दिया जाये तो ३०० टन से भी अधिक सेन्द्रीय पदार्थ प्रति हेक्टेयर पैदा किया जा सकता है यानी ४० कि०ग्रा० नत्रजन प्रति हेक्टेयर प्राप्त। एजोला में ३.५ प्रतिशत नत्रजन तथा कई तरह के कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो भूमि की ऊर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं। धान के खेतों में इसका उपयोग सुगमता से किया जा सकता है। २ से ४ इंच पानी से भरे खेत में १० टन ताजा एजोला को रोपाई के पूर्व डाल दिया जाता है। इसके साथ ही इसके ऊपर ३० से ४० कि०ग्रा० सुपर फास्फेट का छिड़काव भी कर दिया जाता है। इसकी वृद्धि के लिये ३० से ३५ डिग्री सेल्सियस का तापक्रम अत्यंत अनुकूल होता है। एजोला के उपयोग से धान की फसल में ५ से १५ प्रतिशत उत्पादन वृद्धि संभावित रहती है। इस फर्न का रंग गहरा लाल या कत्थई होता है। धान के खेतों में यह अक्सर दिखाई देती है। छोटे-छोटे पोखर या तालाबों में जहां पानी एकत्रित होता है वहां पानी की सतह पर यह दिखाई देती है। भारत में एजोला की सात आठ किस्में पाई जाती है जिनमें से junwer29 सर्वोत्तम है उपयोग जैविक खाद अजोला का प्रयोग मुख्यतः धान की खेती में किया जाता है जिसमें सभी किस्मों का प्रयोग हम कर सकते हैं अगर Junwer29 का प्रयोग करते हैं तो अधिक लाभ मिलता है धान की रोपाई के 20 से 25 दिन बाद हम इसे खेतों में डाल सकते हैं एक बार डालने के बाद आसानी से पूरे खेत में यह फैल जाता है खेती में एजोला को हरी खाद के रूप में रामबाण माना गया है अजोला को खाद के रूप में प्रयोग करने से भूमि में कार्बनिक गुणों में बढ़ोतरी व फसल में नाइट्रोजन की पूर्ति करना मुख्य कार्य उपयोग पशु आहार अजोला सस्ता, सुपाच्य, पौष्टिक, पूरक पशु आहार है। इसे खिलाने से पशुओं के दूध में वसा व वसा रहित पदार्थ सामान्य आहार खाने वाले पशुओं की अपेक्षा अधिक पाई जाती हैं। यह पशुओं में बांझपन निवारण में उपयोगी है। पशुओं के पेशाब में खून आने की समस्या फॉस्फोरस की कमी से होती है जो अजोला खिलाने से दूर हो जाती है। अजोला से पशुओं में कैल्शियम, फॉस्फोरस, लोहे की आवश्यकता की पूर्ति होती है जिससे पशुओं का शारीरिक विकास अच्छा है। अजोला में प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड, विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी-12 तथा बीटा-कैरोटीन) एवं खनिज लवण जैसे कैल्शियम, फास्फ़ोरस, पोटेशियम, आयरन, कापर, मैगनेशियम आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। इसमें शुष्क मात्रा के आधार पर 40-60 प्रतिशत प्रोटीन, 10-15 प्रतिशत खनिज एवं 7-10 प्रतिशत एमीनो अम्ल, जैव सक्रिय पदार्थ एवं पोलिमर्स आदि पाये जाते है। इसमें कार्बोहाइड्रेट एवं वसा की मात्रा अत्यन्त कम होती है, अतः इसकी संरचना इसे अत्यन्त पौष्टिक एवं असरकारक आदर्श पशु आहार बनाती है। यह गाय, भैंस, भेड़, बकरियों , मुर्गियों आदि के लिए एक आदर्श चारा सिद्ध हो रहा है।अजोला की खेती करने का तरीका दुधारू पशुओं पर किए गए प्रयोगों से पाया गया है कि जब पशुओं को उनके दैनिक आहार के साथ 1.5 से 2 किग्रा. अजोला प्रतिदिन दिया जाता है तो दुग्ध उत्पादन में 15-20 प्रतिशत वृद्धि होती है। अजोला के गुणधर्म अजोला जल की सतह पर मुक्त रूप से तैरने वाला फर्न है। यह छोटे-छोटे समूह में हरित गुक्ष्छ की तरह तैरता है। भारत में मुख्य रूप से "अजोला पिन्नाटा" नामक अजोला की जाति पाई जाती है जो काफी हद तक गर्मी सहन करने वाली जाति है। अजोला जल मे तीव्र गति से बढ़ती है। अजोला प्रोटीन, आवश्यक अमीनो अम्ल, विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी-12 तथा बीटा कैरोटीन), एवं कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, लोहा, कॉपर एवं मैग्नीशियम से भरपूर है। शुष्क वजन के आधार पर इसमें 20-30 प्रति‍शत प्रोटीन, 20-30 प्रति‍शत वसा, 50-70 प्रति‍शत खनिज लवण, 10-13 प्रति‍शत रेशा, बायो-एक्टिव पदार्थ एवं बायो पॉलीमर पाये जाते हैं। इसमें उत्तम गुणवत्ता युक्त प्रोटीन एवं उपरोक्त तत्व होने के कारण पशु इसे आसानी से पचा लेते हैं। अजोला की उत्पादन लागत काफी कम होती है। यह औसतन 15 किलोग्राम प्रति वर्गमीटर प्रति सप्ताह की दर से उपज देती है। सामान्य अवस्था मे यह फर्न तीन दिन में दोगुनी हो जाती है। यह पशुओं के लिए प्रतिजैविक (एन्टीबायोटिक) का कार्य करती है। यह पशुओं के लिए आदर्श आहार के साथ साथ भूमि उर्वरा शक्ति बढाने के लिए हरी खाद के रूप में भी उपयुक्त है। एजोला बनाने की विधि पानी के पोखर या लोहे के ट्रे में एजोला कल्चर बनाया जा सकता है। पानी की पोखर या लोहे के ट्रे में ५ से ७ से.मी. पानी भर देवें। उसमें १०० से ४०० ग्राम कल्चर प्रतिवर्ग मीटर की दर से पानी में मिला देवें। सही स्थिति रहने पर एजोला कल्चर बहुत तेज गति से बढ़ता है और २.३ दिन में ही दुगना हो जाता है। एजोला कल्चर डालने के बाद दूसरे दिन से ही एक ट्रे या पोखर में एजोला की मोटी तह जमना शुरू हो जाती है जो नत्रजन स्थिरीकरण का कार्य करती है सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ अजोला हरित खाद के रूप में पशुओं के लिए पौष्टिक आहार : सदाबहार अदभुत हरा चारा है अजोला (कृषि विमर्श) किसानों का नया प्लान! इस बिजनेस से होगा डबल मुनाफा, तेजी से दोगुनी होगी इनकम https://web.archive.org/web/20210416070542/https://hindi.news18.com/news/business/azolla-fertilizer-farming-cost-and-profits-best-low-budget-business-idea-samp-3423160.html 16 अप्रैल 2021 जीविका दीदियों ने शुरु की अजोला की खेती, पशुचारा का बन रहा विकल्प श्रेणी:फर्न श्रेणी:पशुपालन