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यईश इब्न इब्राहीम अल-उमवी
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यईश इब्न इब्राहिम अल-उमवी يعيش بن إبراهيم الأموي अबू अब्दुल्लाह यईश इब्न इब्राहिम इब्न यूसुफ इब्न सिमाक अल-अंडालूसी 14वीं शताब्दी 14वीं शताब्दी (लगभग 1373 के बाद सक्रिय) अल-अंडालस (स्पेन) दमिश्र, सीरिया दमिश्र गणित, अंकगणित मरासिम अल-इंतिसाब इस्लाम
यईश इब्न इब्राहिम अल-उमवी (يعيش بن إبراهيم الأموي; सक्रिय काल 14वीं शताब्दी) एक प्रमुख अरब-अंडालूसी गणितज्ञ थे। उनका जन्म स्पेन के अल-अंडालस क्षेत्र में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय और करियर सीरिया के ऐतिहासिक शहर दमिश्र में बिताया। उन्हें मुख्य रूप से अंकगणित (Arithmetic) के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्होंने गणितीय नियमों को सरल बनाने और उन्हें व्यावहारिक अनुप्रयोगों, जैसे कि कराधान और विरासत के बंटवारे में उपयोग करने पर विशेष बल दिया।https://mathshistory.st-andrews.ac.uk/Biographies/Al-Umawi/ Al-Umawi - Biography Maths History en 2026-03-07
जीवनी और पृष्ठभूमि
अल-उमवी का पूरा नाम अबू अब्दुल्लाह यईश इब्न इब्राहिम इब्न यूसुफ इब्न सिमाक अल-अंडालूसी था। जैसा कि उनके नाम 'अल-अंडालूसी' से स्पष्ट है, उनकी जड़ें मुस्लिम स्पेन में थीं। वे एक ऐसे समय में दमिश्र चले गए थे जब वह शहर इस्लामी दुनिया में विज्ञान और शिक्षा का एक महान केंद्र बन चुका था। दमिश्र में उन्होंने एक शिक्षक के रूप में कार्य किया और गणितीय सिद्धांतों पर शोध किया। उनके जीवन के बारे में बहुत अधिक विवरण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा लिखी गई पांडुलिपियों से यह स्पष्ट होता है कि वे 1373 ईस्वी (हिजरी 775) के आसपास सक्रिय थे।
गणितीय योगदान
अल-उमवी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान उनकी प्रसिद्ध पुस्तक मरासिम अल-इंतिसाब फ़ी इल्म अल-हिसाब (Marasim al-intisab fi 'ilm al-hisab) है। यह पुस्तक अंकगणित के नियमों और प्रक्रियाओं पर केंद्रित है। इसमें उन्होंने निम्नलिखित क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की है:
1. अंकगणितीय संचालन: उन्होंने जोड़, घटाव, गुणा और भाग की जटिल प्रक्रियाओं को समझाने के लिए सरल तरीके प्रस्तुत किए।
2. वर्ग और घन (Squares and Cubes): उन्होंने संख्याओं के वर्गों और घनों के योग को निकालने के लिए विशेष सूत्रों का उल्लेख किया।
3. व्यावहारिक अनुप्रयोग: अल-उमवी ने गणित को केवल सैद्धांतिक नहीं रखा, बल्कि उसे दैनिक जीवन की समस्याओं, जैसे व्यापारिक गणनाओं, भूमि मापन और सरकारी कराधान (Taxation) से जोड़ा।
4. विरासत गणना: इस्लामी कानून के अनुसार विरासत के बंटवारे में गणित का बहुत महत्व है, और अल-उमवी ने इस जटिल प्रक्रिया को हल करने के लिए सटीक गणितीय विधियाँ प्रदान कीं।
उनकी कार्यशैली की एक विशेषता यह थी कि उन्होंने भारतीय गणितीय पद्धतियों और अरबी गणितीय परंपराओं के बीच एक पुल के रूप में कार्य किया।Gibb H.A.R. The Encyclopaedia of Islam 1970 Brill en
प्रमुख रचनाएँ
अल-उमवी की रचनाएँ 14वीं और 15वीं शताब्दी के गणितीय साहित्य का अभिन्न हिस्सा रहीं:
मरासिम अल-इंतिसाब फ़ी इल्म अल-हिसाब: यह उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है। इसे 1981 में अहमद सलीम सैदान द्वारा संपादित और प्रकाशित किया गया था।Ahmad Salim Saidan (ed.), Yaish ibn Ibrahim al-Umawi, On arithmetical rules and procedures (Aleppo, 1981).
रफ अल-इश्काल फ़ी मारिफ़त अल-अश्काल: यह ज्यामिति (Geometry) पर आधारित एक लघु ग्रंथ है।
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं ने अल-उमवी को एक ऐसे विद्वान के रूप में मान्यता दी है जिन्होंने मध्यकालीन गणितीय परंपरा को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।Saidan A. S. Dictionary of Scientific Biography 1970 Charles Scribner's Sons 0-684-10114-9
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विकीडेटा: यईश इब्न इब्राहिम अल-उमवी (Q10394588)
मैकट्यूटर (MacTutor) गणित इतिहास संग्रह पर जीवनी
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