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अखाड़ा
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right|thumb|300px|महाभारत में वर्णित राजगीर का जरासंध अखाड़ा
right|thumb|300px|प्रयागराज में कुम्भ मेला के समय गंगा पुल को पार करता साधुओं का अखाड़ा
अखाड़ा शब्द दो अलग-अलग अर्थों में प्रयुक्त होता है-
व्यायामशाला, जहाँ पहलवान कुश्ती आदि करते/सीखते थे, तथा
अखाड़ा साधुओं का वह दल है जो शस्त्र विद्या में भी पारंगत रहता है।अखाड़ा शब्द का अर्थ और उत्पत्ति
गाँव का मैदान, जहाँ लोग नृत्य करते हैं। https://www.dailypioneer.com/2018/state-editions/talk-on-nagpuri-folk-music-at-ignca.html संग्रहीत प्रति 22 फ़रवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190328042823/https://www.dailypioneer.com/2018/state-editions/talk-on-nagpuri-folk-music-at-ignca.html 28 मार्च 2019 dead
अखाड़ा प्राचीनकाल में भारत के साधु-सन्तों का एक ऐसा समूह होता था जो संकट के समय में राजधर्म के विरुद्ध परिस्थितयों में, राष्ट्र रक्षा और धर्म रक्षा के लिए कार्य करता था। इस प्रकार के संकट से राष्ट्र और धर्म दोनो की रक्षा के लिए अखाड़े के साधु अपनी अस्त्र विद्या का उपयोग भी किया करते थे। इसी लिए अखाड़े के अन्तर्गत पहलवानों के लिए एक मैदान होता था जिसमें सभी अखाड़े के सदस्य शरीर को सुदृढ़ रखने और संकट के समय में सुरक्षा की दृष्टि से खुद को एक से बढ़कर एक दाँव-पेच का अभ्यास किया करते थे। साथ ही शस्त्र विद्या भी सीखते थे। वर्तमान समय में भी अखाड़े होते हैं जो आज भी राष्ट्र को संकट में आने पर ज्ञान आदि से लोगों को सही राह पर लाने के लिए तत्पर रहते हैं। अखाड़े एक तरह से हिंदू धर्म के 'मठ' कहे जा सकते हैं। आज 13 प्रमुख अखाड़े हैं। अखाड़े अपनी-अपनी परंपराओं में शिष्यों को दीक्षित करते हैं और उन्हें उपाधि देते हैं।
भारत के सबसे विशाल मेले कुम्भ में ये अखाड़े पूरी तन्मयता से आज भी सम्मलित होते हैं और शाही स्नान किया करते है।
इन अखाड़ों का एक अध्यक्ष होता जिसका चुनाव एक जटिल प्रक्रिया के अधीन होता है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद तेरह अखाड़ों की प्रमुख संस्था है। यही परिषद ही देश में होने वाले चारों कुंभों में मेला प्रशासन और शासन से साधु-संतों की सुविधाओं को लेकर बात करता है। इस संस्था की स्थापना १९५४ के प्रयागराज कुंभ में हुई दुर्घटना के बाद की गई थी। तब से लेकर आज तक अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद कुंभ मेले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है। अखाड़ा परिषद ही मेले में व्यवस्थाओं, सुविधाओं और मूलभूत जरूरतों के लिए शासन-प्रशासन से बात करता है। उनकी बैठकों में ही सभी व्यवस्थाओं को लेकर निर्णय लिये जाते हैं।अखाड़ा परिषद की 'कहानी' संतों की जुबानी
प्रमुख अखाड़े
कुल 14 अखाड़े हैं-https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-history/juna-akhara-hindu-sant-samaj-120042000110_1.html हिन्दू संत धारा के जूना अखाड़ा का परिचय
शिव संन्यासी सम्प्रदाय के 7 अखाड़े
1. श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी- दारागंज प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
2. श्री पंच अटल अखाड़ा- चैक हनुमान, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
3. श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी- दारागंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
4. श्री तपोनिधि आनन्द अखाड़ा पंचायती- त्रम्केश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)
5. श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा- बाबा हनुमान घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
6. श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़ा- दशस्मेव घाट, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
7. श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा- गिरीनगर, भवनाथ, जूनागढ़ (गुजरात)
बैरागी वैष्णव सम्प्रदाय के 3 अखाड़े
8. श्री दिगम्बर अनी अखाड़ा- शामलाजी खाकचौक मन्दिर, सांभर कांथा (गुजरात)
9. श्री निर्वानी आनी अखाड़ा- हनुमान गादी, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
10. श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा- धीर समीर मन्दिर बंसीवट, वृन्दावन, मथुरा (उत्तर प्रदेश)
उदासीन संप्रदाय के 4 अखाड़े
11. श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा- कृष्णनगर, कीटगंज, प्रयाग (उत्तर प्रदेश)
12. श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
13. श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा- कनखल, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
14. अन्तरराष्ट्रीय जगतगुरु दसनाम गुसांई गोस्वामी एकता अखाड़ा परिषद, दिल्ली
(गृहस्थ दसनामी गोस्वामी गुसांई का सबसे बड़ा, सामाजिक अखाड़ा )
अन्य अखाड़े
किन्नर अखाड़ा
"पारम्परिक" अखाड़ा के विन्यास और निर्माण की बारीकी से एक मुक्केबाजी की अंगूठी होती है, हालाँकि कुश्ती की अंगूठी में तीन अंगूठी रस्सियां होती हैं, जो मानक मुक्केबाजी रिंग से भी कम होती हैं। [1] इसके अलावा, अंगूठी के रस्सियों को उनके मिडपॉइंट पर एक साथ टिथर नहीं किया जाता है, उन्हें मुक्केबाजी रस्सियों की तुलना में कम तना हुआ है। अधिकांश (यदि सभी नहीं) कुश्ती के छल्ले मुक्केबाजी के छल्ले की तुलना में पैडिंग और सदमे अवशोषित निर्माण के तरीके में अधिक शामिल हैं, हालाँकि यह प्रमोटर की वरीयताओं के अनुसार भिन्न होता है।
कुश्ती के छल्ले आम तौर पर एक ऊँचा इस्पात किरण और फोम पैडिंग और एक कैनवास चटाई द्वारा कवर लकड़ी के फलक चरण से बना होते हैं, नीचे के देखने से दर्शकों को रोकने के लिए ऊंचे पक्षों के साथ एक कपड़े स्कर्ट के साथ कवर किया जाता है। अंगूठी के चारों ओर तीन अंगूठी रस्सियां हैं पदोन्नति के आधार पर, इन टुकड़ों का निर्माण अलग है; कुछ लोग, जैसे डब्ल्यूडब्ल्यूई, टेप में लपेटे जाने वाले प्राकृतिक फाइबर रस्सियों का उपयोग करते हैं, दूसरों को रबड़ नली में बँधे हुए इस्पात केबल्स का इस्तेमाल होता है। [2] ये रस्सियों को टर्नबकल्स द्वारा ऊपर रखा गया और तनाव हो गया, जो बदले में, इस्पात बेलनाकार ध्रुवों पर लटका, रिंग पोस्ट अंगूठी में आने वाले टर्नबकल्स की छोरें आमतौर पर भारी संख्या में गद्देदार होती हैं, या तो अमेरिका में, या तीनों के लिए एक बड़े पैड के साथ एक बॉक्सिंग रिंग जैसा, जैसा कि न्यू जापान प्रो-कुश्ती के रूप में है। आम तौर पर आसपास के किनारे के आसपास स्टील के दो सेट (अंगूठी के दोनों तरफ एक) होते हैं जो कुछ पहलवान अंगूठी में प्रवेश करने और बाहर निकलने के लिए उपयोग करते हैं। रिंग के सभी हिस्सों को अक्सर विभिन्न आक्रामक और रक्षात्मक चाल के भाग के रूप में उपयोग किया जाता है।
https://en.wikipedia.org/wiki/Wrestling_ring संग्रहीत प्रति 29 अक्तूबर 2017 https://web.archive.org/web/20171213200403/https://en.wikipedia.org/wiki/Wrestling_ring 13 दिसंबर 2017 live
इतिहास
आदि शंकराचार्य के आविर्भाव काल सन 788 ई० से लेकर 820 ई० के उत्तरार्द्ध में देश के चार कोनों में चार शंकर मठों और दसनामी संप्रदाय की स्थापना की गई। बाद में इन्हीं दसनामी संन्यासियों के अनेक अखाड़े प्रसिद्ध हुए। इनमें सात पंचायती अखाड़े आज भी अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत समाज में कार्यरत हैं।
इन्हें भी देखें
निर्मोही अखाड़ा
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
धर्म और आस्था के अखाडे (भारतीय पक्ष)
श्रेणी:भारतीय संस्कृति