411 REFERENCE · Wikipedia
समान नागरिक संहिता
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
thumb|300px|right|1930 में जवाहरलाल नेहरू ने एक समान नागरिक संहिता का समर्थन किया था किंतु उन्हें वरिष्ठ नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ा
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code, यूनिफॉर्म सिविल कोड; UCC) एक सामाजिक मामलों से संबंधित कानून होता है जो सभी पंथ के लोगों के लिये विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत व बच्चा गोद लेने आदि में समान रूप से लागू होता है।https://www.bbc.com/hindi/india/2016/06/160620_stake_holders_code_sra समान नागरिक संहिता: पहल न होने के असल कारण BBC News हिंदी 7 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20171202002958/http://www.bbc.com/hindi/india/2016/06/160620_stake_holders_code_sra 2 दिसंबर 2017 live दूसरे शब्दों में, अलग-अलग पंथों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही 'समान नागरिक संहिता' की मूल भावना है।https://www.hindustantimes.com/opinion/triple-talaq-ban-this-un-islamic-practice-and-bring-in-a-uniform-civil-code/story-ZuZeeKjjngTUoWjflLPqjK.html Triple Talaq: Ban this un-Islamic practice and bring in a uniform civil code 22 नव॰ 2017 Hindustan Times 7 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20190806171756/https://www.hindustantimes.com/opinion/triple-talaq-ban-this-un-islamic-practice-and-bring-in-a-uniform-civil-code/story-ZuZeeKjjngTUoWjflLPqjK.html 6 अगस्त 2019 live यह किसी भी पंथ जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है।
विभिन्न देशों में समान नागरिक संहिता की स्थिति
विश्व के अधिकतर आधुनिक देशों में ऐसे कानून लागू हैं। जैसे कि अमेरिका, आयरलैंड, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की , इंडोनेशिया, सूडान, इजिप्ट, जैसे कई देश हैं जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू किया है।
भारत में समान नागरिक संहिता लागू नहीं है, बल्कि भारत में अधिकतर निजी कानून धर्म के आधार पर तय किए गए हैं।Modern Indian Family Law https://web.archive.org/web/20131015010330/http://books.google.co.in/books?id=GlYq9ONRTUIC&dq=india+family+law&printsec=frontcover&source=in&hl=en&ei=990rS-6DDMqIkAXqlvWACQ&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=11&ved=0CD0Q6AEwCg 15 अक्तूबर 2013 - by Werner Menski हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध के लिये एक व्यक्तिगत कानून है, जबकि मुसलमानों और इसाइयों के लिए अपने कानून हैं। मुसलमानों का कानून शरीअत पर आधारित है; अन्य धार्मिक समुदायों के कानून भारतीय संसद के संविधान पर आधारित हैं।
भारत के सन्दर्भ में समान नागरिक संहिता
वर्तमान में, भारत के विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानून उनके धार्मिक ग्रंथों द्वारा शासित होते हैं।Has the Supreme Court set the ball rolling for a Uniform Civil Code? https://www.hindustantimes.com/india-news/has-the-supreme-court-set-the-ball-rolling-for-a-uniform-civil-code-101615802810671.html 1 जुलाई 2023 Hindustan Times 15 मार्च 2021 en सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून को बनाने और लागू करने का एक प्रस्ताव है जो सभी नागरिकों पर उनके धर्म, लिंग और यौन अभिरुचि की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होगा। पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करना भारत की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए गए विवादास्पद वादों में से एक है। यह भारतीय राजनीति में धर्मनिरपेक्षता के संबंध में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और शरिया और धार्मिक रीति-रिवाजों की रक्षा में भारत के राजनीतिक वामपंथी, मुस्लिम समूहों और अन्य रूढ़िवादी धार्मिक समूहों और संप्रदायों द्वारा विवादित बना हुआ है। अभी व्यक्तिगत कानून सार्वजनिक कानून से अलग-अलग हैं। इस बीच, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25-28 भारतीय नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है और धार्मिक समूहों को अपने स्वयं के मामलों का प्रबंधन करने की अनुमति देता है, संविधान का अनुच्छेद 44 भारतीय राज्य से अपेक्षा करता है कि वह राष्ट्रीय नीतियां बनाते समय सभी भारतीय नागरिकों के लिए राज्य के नीति निर्देशक तत्व और समान कानून को लागू करे।Shimon Shetreet Hiram E. Chodosh Uniform Civil Code for India: Proposed Blueprint for Scholarly Discourse https://books.google.com/books?id=y-pIDwAAQBAJ&pg=PT4 Oxford University Press 978-0198077121 December 2014 2020-08-22Article 44 in the Constitution of India 1949 https://indiankanoon.org/doc/1406604/ 2020-08-22
इतिहास
ब्रिटिश भारत (1858 - 1947)
व्यक्तिगत कानून पहली बार ब्रिटिश राज के दौरान मुख्य रूप से हिंदू और मुस्लिम नागरिकों के लिए बनाए गए थे। अंग्रेजों को समुदाय के नेताओं के विरोध का डर था और इसलिए वे इस घरेलू क्षेत्र में आगे हस्तक्षेप करने से बचते थे। भारतीय राज्य गोवा जो उस समय पुर्तगाल के औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत होने के कारण ब्रिटिश भारत से अलग था, वहाँ एक समान पारिवारिक कानून को बरकरार रखा गया जिसे गोवा नागरिक संहिता के रूप में जाना जाता था और इस प्रकार यह आज तक समान नागरिक संहिता वाला भारत का एकमात्र राज्य है। भारत की आजादी के बाद, हिंदू कोड बिल पेश किया गया, जिसने बौद्ध, हिंदू, जैन और सिख जैसे भारतीय धर्मों के विभिन्न संप्रदायों में बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत कानूनों को संहिताबद्ध किया व उनमें सुधार भी किया, लेकिन इसने ईसाइयों, यहूदियों, मुसलमानों और पारसियों को छूट दी, जिन्हें हिंदुओं से अलग समुदायों के रूप में पहचाना गया।Rina Verma Williams Postcolonial Politics and Personal Laws https://archive.org/details/nlsiu.340.58.wil.23165 18, 28, 106, 107, 119 Oxford University Press 0195680146 2006
प्रक्रिया की शुरुआत 1882 के हैस्टिंग्स योजना से हुई और अंत शरिअत कानून के लागू होने से हुआ।http://www.wluml.org/node/5627 Occasional Paper 7: Islamic Law and the Colonial Encounter in British India | Women Reclaiming and Redefining Cultures www.wluml.org 14 अक्तूबर 2016 https://web.archive.org/web/20161018100416/http://www.wluml.org/node/5627 18 अक्तूबर 2016 dead हालाँकि समान नागरिकता कानून उस वक्त कमजोर पड़ने लगा, जब तथाकथित सेक्यूलरों ने मुस्लिम तलाक और विवाह कानून को लागू कर दिया। 1929 में, जमियत-अल-उलेमा ने बाल विवाह रोकने मुसलमानों को अवज्ञा आंदोलन में शामिल होने की अपील की। इस बड़े अवज्ञा आंदोलन का अंत उस समझौते के बाद हुआ जिसके तहत मुस्लिम जजों को मुस्लिम शादियों को तोड़ने की अनुमति दी गई।
भारतीय संविधान और समान नागरिक संहिता
true 600px center cenre मैं व्यक्तिगत रूप से समझ नहीं पा रहा हूं कि किसी धर्म (मजहब) को यह विशाल, व्यापक क्षेत्राधिकार क्यों दिया जाना चाहिए ? ऐसे में तो धर्म, जीवन के प्रत्येक पक्ष पर हस्तक्षेप करेगा और विधायिका को उस क्षेत्र पर अतिक्रमण से रोकेगा। यह स्वतंत्रता हमें क्या करने के लिये मिली है? हमारी सामाजिक व्यवस्था असमानता, भेदभाव और अन्य चीजों से भरी है। यह स्वतंत्रता हमे इसलिये मिली है कि हम इस सामाजिक व्यवस्था में जहाँ हमारे मौलिक अधिकारों के साथ विरोध है वहाँ वहाँ सुधार कर सकें।Ambedkar with UCC http://www.outlookindia.com/website/story/ambedkar-and-the-uniform-civil-code/221068 Outlook India 14 August 2013 https://web.archive.org/web/20160414123716/http://www.outlookindia.com/website/story/ambedkar-and-the-uniform-civil-code/221068 14 अप्रैल 2016 live-- बी आर अम्बेडकर
समान नागरिक संहिता का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग ४ के अनुच्छेद ४४ में है। इसमें नीति-निर्देश दिया गया है कि समान नागरिक कानून लागू करना हमारा लक्ष्य होगा।https://timesofindia.indiatimes.com/india/how-muslim-fears-were-allayed-and-the-ucc-became-a-directive-principle/articleshow/60417611.cms How Muslim fears were allayed, and the UCC became a directive principle | India News - Times of India The Times of India 7 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20171104001435/https://timesofindia.indiatimes.com/india/how-muslim-fears-were-allayed-and-the-ucc-became-a-directive-principle/articleshow/60417611.cms 4 नवंबर 2017 live सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में केन्द्र सरकार के विचार जानने की पहल कर चुका है।https://www.jagran.com/editorial/nazariya-supreme-court-opens-eyes-of-modi-government-on-uniform-civil-code-said-move-forward-in-direction-of-one-country-one-law-19578109.html सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता पर मोदी सरकार की खोली आंखें, कहा- एक देश एक कानून की दिशा में बढ़ो आगे Dainik Jagran 18 सितंबर 2019 https://web.archive.org/web/20190926100630/https://www.jagran.com/editorial/nazariya-supreme-court-opens-eyes-of-modi-government-on-uniform-civil-code-said-move-forward-in-direction-of-one-country-one-law-19578109.html 26 सितंबर 2019 livehttp://ddnews.gov.in/hi/national/no-attempts-made-to-frame-uniform-civil-code-supreme-court देश में समान नागरिक संहिता के लिए नहीं हुए प्रयास: सुप्रीम कोर्ट | DD News ddnews.gov.in
विचार
विधि आयोग
विधि और न्याय मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में समान नागरिक संहिता से संबंधित मुद्दों के समग्र अध्ययन हेतु एक विधि आयोग का गठन किया गया। विधि आयोग ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा मूल अधिकारों के तहत अनुच्छेद 14 और 25 के बीच द्वंद्व से प्रभावित है। आयोग ने भारतीय बहुलवादी संस्कृति के साथ ही महिला अधिकारों की सर्वोच्चता के मुद्दे को इंगित किया। पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा की जा रही कार्यवाहियों को ध्यान में रखते हुए विधि आयोग ने कहा कि महिला अधिकारों को वरीयता देना प्रत्येक धर्म और संस्थान का कर्तव्य होना चाहिये। विधि आयोग के विचारानुसार, समाज में असमानता की स्थिति उत्पन्न करने वाली समस्त रुढ़ियों की समीक्षा की जानी चाहिये। इसलिये सभी निजी कानूनी प्रक्रियाओं को संहिताबद्ध करने की आवश्यकता है जिससे उनसे संबंधित पूर्वाग्रह और रूढ़िवादी तथ्य सामने आ सकें। वैश्विक स्तर पर प्रचलित मानवाधिकारों की दृष्टिकोण से सर्वमान्य व्यक्तिगत कानूनों को वरीयता मिलनी चाहिये। लड़कों और लड़कियों की विवाह की 18 वर्ष की आयु को न्यूनतम मानक के रूप में तय करने की सिफारिश की गई जिससे समाज में समानता स्थापित की जा सके।
छत्तीसगढ़ में स्थिति
अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया। मंत्रिपरिषद ने समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है, जबकि अन्य सदस्यों का चयन राज्य सरकार द्वारा किया जाना है। समिति का कार्य राज्य में समान नागरिक संहिता के संभावित क्रियान्वयन के लिए मसौदा तैयार करना होगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्णय राज्य में व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करने की दिशा में प्रारंभिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी: साय कैबिनेट का बड़ा फैसला https://ndtv.in/madhya-pradesh-chhattisgarh/ucc-chhattisgarh-implementation-vishnu-deo-sai-cabinet-decision-11360808 NDTV 2026-04-15 अगस्त 2026 InternetArchiveBot
इन्हें भी देखें
पन्थनिरपेक्षता
छद्म धर्मनिरपेक्षता
बी आर अम्बेडकर
शाहबानो प्रकरण
तुष्टीकरण
तीन तलाक
बाहरी कड़ियाँ
यूनिफॉर्म सिविल कोड: 68 साल में पहली बार सरकार ने लॉ कमीशन से मांगी रिपोर्ट
समान नागरिकता कानून
समान नागरिक संहिता - 1 : आखिर भय क्यों? (पाञ्चजन्य)
Lawyersclubindia - An interactive Platform for Lawyers and General Public
The Uniform civil code
UCC क्या है? क्या कहता है संविधान?
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय विधि
श्रेणी:विधि
श्रेणी:भारतीय परिवार क़ानून