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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन

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जुलाई 2026 जुलाई 2026 thumb|भगवान राम‌ और गोस्वामी जी श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन अथवा श्री राम स्तुति तुलसीदास जी द्वारा रचित १६वीं शताब्दी का एक पद्य है। इसमें भगवान राम के अदभुत गुण एवं शौर्य का वर्णन है। मनुष्य के मन को नियंत्रित करनेवाली ये यह स्तुति संस्कृतमय अवधी में है। इसमें कई अलंकारों का प्रयोग हुआ है। भक्तिरस से ओत-प्रोत यह कविता, साहित्यिक तौर पर भी अद्भुत है। विनयपत्रिका की यह स्तुति यह स्तुति हरिगीतिका छन्द में लिखी गयी है। कविता और हिंदी व्याख्या श्रीरामचन्द्र कृपालु भजमन हरणभवभयदारुणम्। नवकंजलोचन कंजमुख करकंज पदकंजारुणम् ॥१॥व्याख्या: हे मन कृपालु श्रीरामचन्द्रजी का भजन कर। वे संसार के जन्म-मरण रूपी दारुण भय को दूर करने वाले हैं। उनके नेत्र नव-विकसित कमल के समान हैं। मुख-हाथ और चरण भी लालकमल के सदृश हैं ॥१॥कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनीलनीरदसुन्दरम्। पटपीतमानहु तडित रूचिशुचि नौमिजनकसुतावरम् २॥ व्याख्या: उनके सौन्दर्य की छ्टा अगणित कामदेवों से बढ़कर है। उनके शरीर का नवीन नील-सजल मेघ के जैसा सुन्दर वर्ण है। पीताम्बर मेघरूप शरीर मानो बिजली के समान चमक रहा है। ऐसे पावनरूप जानकीपति श्रीरामजी को मैं नमस्कार करता हूँ ॥२॥ भजदीनबन्धु दिनेश दानवदैत्यवंशनिकन्दनम्। रघुनन्द आनन्दकन्द कोशलचन्द दशरथनन्दनम् ॥३॥व्याख्या: हे मन दीनों के बन्धु, सूर्य के समान तेजस्वी, दानव और दैत्यों के वंश का समूल नाश करने वाले, आनन्दकन्द कोशल-देशरूपी आकाश में निर्मल चन्द्रमा के समान दशरथनन्दन श्रीराम का भजन कर ॥३॥शिरमुकुटकुण्डल तिलकचारू उदारु अंग विभूषणम्। आजानुभुज शरचापधर संग्रामजितखरदूषणम् ॥४॥ व्याख्या: जिनके मस्तक पर रत्नजड़ित मुकुट, कानों में कुण्डल भाल पर तिलक, और प्रत्येक अंग मे सुन्दर आभूषण सुशोभित हो रहे हैं। जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी हैं। जो धनुष-बाण लिये हुए हैं, जिन्होनें संग्राम में खर-दूषण को जीत लिया है ॥४॥ इति वदति तुलसीदास शङकरशेषमुनिमनरंजनम्।मम हृदय कंज निवास कुरु कामादिखलदलगञजनम् ॥५॥''' व्याख्या: जो शिव, शेष और मुनियों के मन को प्रसन्न करने वाले और काम, क्रोध, लोभादि शत्रुओं का नाश करने वाले हैं, तुलसीदास प्रार्थना करते हैं कि वे श्रीरघुनाथजी मेरे हृदय कमल में सदा निवास करें ॥५॥ श्रेणी:तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथ श्रेणी:राम श्रेणी:आरती