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अखा भगत
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अखा भगत
thumb जेतलपुर, (हाल में गुजरात, भारत) इ.स १६५६ अहमदाबाद, (हाल में गुजरात, भारत) ब्रह्मज्ञानी भक्ति काल कविता सामाजिक, आध्यात्मिक भक्ति आंदोलन बीजक "साखी ,सबद, रमैनी" सिद्ध, गोरखनाथ, रामानंद दादू, नानक, पीपा, हजारी प्रसाद द्विवेदी
अखा भगत, जिन्हें अखो के नाम से भी जाना जाता है, 17वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध गुजराती दार्शनिक, कवि और वेदांतवादी थे। उनका जन्म अहमदाबाद के पास जेतलपुर गांव में हुआ था। उन्हें अक्सर उनके तीखे व्यंग्य और गूढ़ आध्यात्मिक विचारों के लिए याद किया जाता है। वे पेशे से एक सुनार (स्वर्णकार) थे, लेकिन उनकी पहचान उनकी कविता और आध्यात्मिक ज्ञान से बनी।
इन्होंने पंचीकरण, गुरु शिष्य संवाद, अनुभव बिंदु, चित्त विचार संवाद, आदि ग्रंथों की रचना की है। मिथ्याचार,वैष्णव संप्रदायों, परलोकवाद, दंभ, दुराग्रह, सामाजिक दुर्गुणों आदि पर भी इन्होंने कठोर प्रहार किया है।
जीवन
अखा भगत का जन्म 1591 ई. में गुजरात के अहमदाबाद के पास जेतलपुर गाँव में हुआ था। वे पेशे से सुनार (सोने के आभूषण बनाने वाले) थे और बाद में अहमदाबाद की टकसाल (मिंट) में एक मुख्य अधिकारी बन गए थे।
अहमदाबाद में उनका निवास स्थल 'अखा नो ओरडो' (अखा का कमरा) के नाम से जाना जाता है, जो आज भी मौजूद है।
वैराग्य और ज्ञान की खोज
अखा भगत का जीवन एक साधारण सुनार से एक ज्ञानी संत बनने की एक महत्वपूर्ण यात्रा है। उनके वैराग्य का मुख्य कारण उनके जीवन में घटी कुछ निराशाजनक घटनाएँ थीं:
उनकी अपनी बहन ने उनके दिए हुए गहनों में मिलावट की थी, जिससे उन्हें गहरा आघात लगा। इस घटना ने उन्हें यह महसूस कराया कि इस दुनिया में बाहरी रिश्ते और दिखावे व्यर्थ हैं।
एक अन्य घटना में, उनके एक मित्र ने भी उनके साथ छल किया। इन घटनाओं ने उनके मन में वैराग्य की भावना को और मजबूत किया।
इन दुखों के कारण, अखा ने संसार से विरक्त होकर गुरु की तलाश में घर छोड़ दिया। वे ज्ञान की खोज में काशी (वाराणसी) पहुँचे, जहाँ उन्होंने अद्वैत वेदांत का गहन अध्ययन किया। वहाँ उन्होंने ब्रह्मज्ञान प्राप्त किया और वापस अहमदाबाद लौट आए।
साहित्यिक और दार्शनिक योगदान
ज्ञान प्राप्त करने के बाद, अखा भगत ने अपने जीवन का उद्देश्य समाज को अज्ञानता और आडंबरों से मुक्त करना बना लिया। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों को ज्ञान का मार्ग दिखाया। उनका इतिहास मुख्य रूप से उनकी रचनाओं के लिए जाना जाता है, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
छप्पा (Chhappa): यह उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है। इसमें उन्होंने छह-पंक्ति के छंदों के माध्यम से समाज में व्याप्त धार्मिक पाखंड, अंधविश्वास, जातिवाद और रूढ़िवादिता पर तीखा व्यंग्य किया। उनके छप्पे आज भी गुजराती साहित्य में अपनी तीक्ष्णता और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध हैं।
अखेगीत (Akhegita): इस रचना में उन्होंने अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया।
अखाराचियाँ (Akharachian): इस ग्रंथ में उन्होंने ज्ञान और भक्ति के महत्व पर जोर दिया।
अखा भगत को 'ज्ञान का वटवृक्ष' (ज्ञान गरवो वड़लो) भी कहा जाता है, जो गुजराती साहित्य में उनके अद्वितीय योगदान को दर्शाता है।
अखा भगत का निधन 1656 ई. में हुआ। उनकी शिक्षाएं और रचनाएं आज भी गुजराती साहित्य और समाज में एक अमिट छाप छोड़ती हैं। उनकी विरासत केवल उनके साहित्यिक कार्यों में ही नहीं, बल्कि उनके द्वारा स्थापित ज्ञानमार्ग में भी निहित है, जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। अहमदाबाद में उनका निवास स्थल 'अखा नो ओरडो' (अखा का कमरा) आज भी उनके जीवन और दर्शन का प्रतीक है।
बाहरी कड़ियाँ
History of Gujarati Literature
श्रेणी:हिंदू सन्त
श्रेणी:गुजराती कवि