Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

प्रार्थना समाज

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

मई 2016 प्रार्थना समाज भारतीय नवजागरण के दौर में धार्मिक और सामाजिक सुधारों के लिए स्थापित समुदाय है। इसकी स्थापना आत्माराम पांडुरंग,महादेव गोविन्द रानडे तथा इतिहासकार आर. जी. भंडारकर बंबई में 31 मार्च 1867 को की। इतिहास प्रार्थना समाज की पृष्ठभूमि 19वीं शताब्दी के प्रारंभ अथवा उससे भी पहले 18वीं शताब्दी में हुई कई घटनाओं से बन चुकी थी। अंग्रेजी शिक्षा का प्रवेश और ईसाई मिशनरियों के कार्य, ये दो घटनाएँ उस पृष्ठभूमि के निर्माण में विशेष सहायक बने। अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार से शिक्षित भारतीयों में अपने सामाजिक और आर्थिक विश्वासों तथा रीति रिवाजों के दोषों और त्रुटियों के प्रति चेतना जगी। ईसाई मिशनरियों ने अनेकानेक लोग जिनमें विशेष रूप से हिंदुओं का धर्मपरिवर्तन करके उन्हें ईसाई बना लिया। इससे भी लोगों की आँखें खुल गईं। फिर मिशनरियों ने अपनी कठोर प्रहारी आलोचना द्वारा भी धर्मपरिवर्तन के अनिच्छुक लोगों के विचारों में बड़ा परिवर्तन ला दिया। हिंदू दर्शन के उन नेताओं ने जो इन तत्वों के प्रभाव का अनुभव कर रहे थे और नवीन ज्ञान से भी परिचित हो रहे थे, सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर हिंदू समाज के बौद्धिक और आध्यात्मिक पुनरुत्थान के कार्य का श्रीगणेश किया। हिंदू विचारधारा के इन्ही नेताओं में से कुछ ने प्रार्थना समाज की स्थापना की। प्रार्थना समाज के आंदोलन ने राजा राममोहन राय द्वारा बंगाल में स्थापित ब्रह्मसमाज (1828) से प्रेरणा ग्रहण की और व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन के स्वस्थ्य सुधार के लिए अपनी सारी शक्ति धार्मिक शिक्षा के प्रचार में अर्पित कर दी। बंबई के पश्चात् धीरे-धीरे इसका विस्तार पुणे, अहमदाबाद, सतारा और अहमदनगर आदि स्थानों में भी हुआ। प्रार्थना समाज के प्रमुख प्रकाश स्तंभों में आत्माराम पांडुरंग, वासुदेव बाबाजी नौरंगे, रामकृष्ण गोपाल भंडारकर, महादेव गोविंद रानडे, वामन अबाजी मोदक और नारायण गणेश चंदावरकर थे। प्रार्थनासमाज के आलोचकों द्वारा किए गए असत्य प्रचार को मिटाने के लिए इन नेताओं को बहुत संघर्ष करना पड़ा। असत्य प्रचार के अंतर्गत यह कहा जाता था कि प्रार्थना समाज ईसाई धर्म के अनुकरण पर आधारित है और यह देश के प्राचीन धर्म के विरुद्ध है। नियम और सिद्धांत प्रार्थना समाज के मुख्य नियम और सिद्धांत निम्नलिखित हैं : ईश्वर ही इस ब्रह्मांड का रचयिता है। ईश्वर की आराधना से ही इस संसार और दूसरे संसार में सुख प्राप्त हो सकता है। ईश्वर के प्रति प्रेम और श्रद्धा, उसमें अनन्य आस्था-प्रेम, श्रद्धा, और आस्था की भावनाओं सहित आध्यात्मिक रूप से उसकी प्रार्थना और उसका कीर्तन, ईश्वर को अच्छे लगने वाले कार्यों को करना-- यह ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। मूर्तियों अथवा अन्य मानव सृजित वस्तुओं की पूजा करना, ईश्वर की आराधना का सच्चा मार्ग नहीं है। ईश्वर अवतार नहीं लेता और कोई भी एक पुस्तक ऐसी नहीं है, जिसे स्वयं ईश्वर ने रचा अथवा प्रकाशित किया हो, अथवा जो पूर्णतः दोष-रहित हो। प्रार्थना समाज रिपोर्ट 1911-12. जे. एन. फर्कहार द्वारा माडर्न रिलीजस अमेन्ट्स इन इण्डिया में उद्धृत, पृ. 8० विचारधारा प्रार्थना समाज का उद्देश्य प्रार्थना और सेवा द्वारा ईश्वर की पूजा करना था। ब्रह्म समाज की भाँति उपनिषदों और भगवद्गीता की शिक्षाएँ उद्देश्य के आधार हैं किंतु एक बात में यह ब्रह्म समाज से भिन्न है, इसमें भारत के, विशेषत: महाराष्ट्र के, मध्यकालीन संतों - ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ और तुकाराम - की शिक्षाओं को गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त है। कार्य प्रार्थना समाज ने रानाडे के नेतृत्व में जाति प्रथा, बाल-विवाह, मूर्ति पूजा तथा हिन्दू समाज की अन्य रीतियों के विरुद्ध आंदोलन किया। के. दामोदरन, भारतीय चिंतन परंपरा, पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली, तीसरा संस्करण 1982, पृ. 365-366 उसने 19वीं शताब्दी के नवें दशक में नारी जागरण की योजनाओं का आरंभ किया। आर्य-महिला-समाज की स्थापना (1882) उन्हीं योजनाओं का फल है। 1878 में प्रार्थना समाज द्वारा स्थापित पहला रात्रिविद्यालय जनशिक्षा और प्रौढ़ शिक्षा के क्षेत्र में अग्रेणी रहा। वासुदेव बाबाजी नौरंगे बालकाश्रम की स्थापना लालशंकर उमाशंकर द्वारा पंढरपुर में 1875 में हुई। यह बालकाश्रम बाद में प्रार्थना समाज के संरक्षण में आ गया। यह अपने ढंग की सर्वाधिक प्राचीन और बड़ी संस्था है और यह 1975 में अपनी शताब्दी पूरी कर चुकी है। प्रार्थनासमाज के संरक्षण में दो बलकाश्रम और चलते हैं - एक विले पार्ले (बंबई) में डी.एन. सिरूर होम और दूसरा सतारा जिले के वाई नामक स्थान में है। "दि डिप्रेस्ड क्लास मिशन सोसायटी ऑव इंडिया" नाम की संस्था, जो अछूतोद्धार के लिए प्रसिद्ध है, प्रार्थना समाज के एक कार्यकर्ता विट्ठल रामजी शिंदे द्वारा स्थापित हुई। 1917 में प्रार्थना समाज ने राम मोहन अंग्रेजी विद्यालय की स्थापना की। अब इसके संरक्षण से दस से अधिक विद्यालय बंबई और उसके आस पास चल रहे हैं। संबंधित लेख ब्रह्म समाज आर्य समाज सन्दर्भ श्रेणी: हिंदू आंदोलन और संगठन श्रेणी:सामाजिक आन्दोलनों का इतिहास श्रेणी: भारत में स्थित धार्मिक संगठन श्रेणी: 1867 में स्थापित धार्मिक संगठन श्रेणी: जाति-विरोधी आंदोलन श्रेणी: भारत में 1867 में स्थापित प्रतिष्ठान श्रेणी:हिन्दू धर्म सुधार आन्दोलन