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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

वेंकटेश्वर

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हिन्दू वेंकटेश्वर Venkateswara BNC.jpg श्री वेंकटेश्वर वेंकटेश्वर Veṅkaṭēśvara विष्णु के अवतार वैकुंठ ॐ नमो वेंकटेशाय शंख, चक्र नामं पद्मावती गरुड़ दक्षिण भारत श्रीदेवी, भूदेवी वेंकटेश्वर (వెంకటేశ్వరుడు, வெங்கடேஸ்வரர், ವೆಂಕಟೇಶ್ವರ, वेंकटेश्वरः) भगवान विष्णु के दशावतारों में से नवें एवम् चौबीस अवतारों में से तेइसवें अवतार माने जाते हैं। उन्हें गोविंदा, श्रीनिवास, बालाजी, वेंकट आदि नामों से भी जाना जाता है। भगवान विष्णु ने यह अवतार कृष्ण अवतार के बाद द्वापर युग के सबसे अंतिम चरण में माता लक्ष्मी को खोजने के लिए लिया था। ऐसा माना जाता है कि विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे निवास किया था। यह तालाब तिरुमला के पास स्थित है। तिरुमाला-तिरुपति के चारों ओर स्थित पहाड़ियाँ, शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनीं 'सप्तगिर‍ि' कहलाती हैं। वैकुण्ठ एकादशी के अवसर पर लोग तिरुपति वेन्कटेशवर मन्दिर पर प्रभु के दर्शन के लिए आते हैं, जहाँ पर आने के पश्चात उनके सभी पाप धुल जाते हैं। मान्यता है कि यहाँ आने के पश्चात व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। जन्म श्री वेंकटेश्वर भगवान के जन्म के विषय में कोई कथा नहीं दी गई है। दक्षिण भारतीय लोगों के मतानुसार और श्रीमत भागवत पुराण के अनुसार श्री वेंकटेश्वर भगवान ने किसी स्त्री से जन्म नहीं लिया था। वे स्वयं प्रकट हुए थे। उनकी पालक माता वकुला देवी को माना गया है। इनके अवतरण उस समय हुआ था जब महर्षि भृगु ने त्रिदेवों की परीक्षा लेने के लिए भगवान विष्णु के वक्ष पर जोरदार लात मारी। इससे भगवान विष्णु के स्थान पर माता लक्ष्मी क्रोधित हो गई और बैकुण्ठ छोड़कर चली गई। भगवान विष्णु ने उस समय वेंकटेश्वर के रूप में पृथ्वी पर प्रकट होने का निश्चय किया। उन्होंने निसंतान स्त्री वकुला को मातृत्व का सुख दिया था। वकुला ने इन्हें श्रीनिवास नाम दिया था। श्रीमत भागवत पुराण के अनुसार वकुला पूर्व जन्म में भगवान विष्णु के कृष्ण अवतार में उनकी पालक माता यशोदा थी। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें उनके अंतिम समय में आश्वासन दिया कि अगले जन्म में वे उनके पुत्र रूप में पुन: उत्पन्न होंगे और वे उनका विवाह भी देख पाएंगी। जिस कारण यशोदा ने वकुला रूप में दोबारा जन्म लिया। श्री वेंकटेश्वर स्वामी के गरीब होने का कारण माता लक्ष्मी के जाने के बाद भगवान विष्णु श्रीहीन हो गए थे। साथ ही वकुला भी बहुत ही निर्धन थी। भगवान विष्णु ने तब धन के देवता और यक्षों के राजा कुबेर से धन मांगा और कहा कि वे कलयुग के अंत तक उनका धन ब्याज समेत लौटा देंगे। कुबेर से लिए हुए धन से श्रीनिवास भगवान ने उनसे विवाह कर लिया। विवाह के पश्चात् भगवान वेंकटेश्वर ने वकुला को उनके पूर्व जन्म के विषय में बताया और उन्हें जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्त कर दिया। देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु वेंकटेश्वर अवतार में और माता लक्ष्मी पद्मावती अवतार में वहीं बस गए। माता लक्ष्मी को साथ लेकर भगवान विष्णु वापस बैकुंठ आ गए। इन्हें भी देखें तिरुपति वेन्कटेशवर मन्दिर तिरुपति श्रेणी:हिन्दू देवता