Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

आसिम रांदेरी

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

आसिम रांदेरी, जिनका जन्म नाम सूबेदार महमूद मियां मुहम्मद इमाम (15 अगस्त 1904 – 5 फरवरी 2009) था, एक गुजराती भाषा के कवि थे, जो मुख्य रूप से अपनी ग़ज़लों के लिए लोकप्रिय थे। वे स्वतंत्रता-पूर्व युग से ही गुजराती साहित्य के एक दिग्गज हस्ताक्षर रहे और उन्हें 2005 के वली गुजराती पुरस्कार और कलापी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। == प्रारंभिक जीवन == आसिम रांदेरी का जन्म 15 अगस्त 1904 को भारत के गुजरात राज्य के सूरत शहर के रांदेर क्षेत्र में हुआ था। उनका जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ था। उन्होंने एक ब्रिटिश कंपनी में काम करने से पहले मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की थी। == करियर == आसिम रांदेरी ने 18 वर्ष की आयु में लेखन शुरू किया था। उन्होंने 1928 और 1932 के बीच पूर्वी अफ्रीका में 'केन्या डेली मेल' के साथ काम किया। 1932 के बाद उन्होंने बॉम्बे में स्वीडिश मैच कंपनी के साथ एक सेल्समैन के रूप में काम करना शुरू किया। == कृतियाँ == रांदेरी की रचनाओं जैसे 'लीला', 'शणगार', 'तापी तीरे' और 'गुलछड़ी' ने अपनी साहसिक शैली से गुजराती ग़ज़ल लेखन में क्रांति ला दी। रांदेरी द्वारा रचित एक काल्पनिक पात्र 'लीला', युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ। इस पात्र के प्रति उनका प्रेम इतना गहरा था कि उन्होंने इसी शीर्षक से छह वर्षों तक एक पत्रिका का संपादन भी किया। 'तापी तीरे' सूरत की जीवनरेखा मानी जाने वाली तापी नदी के तट पर पनपने वाले प्रेम पर आधारित गुजराती ग़ज़लों का संग्रह है। 1920 के दशक में सूरत गुजराती ग़ज़लों का केंद्र बन गया था। प्रसिद्ध गुजराती ग़ज़ल गायक मनहर उधास ने 2000 के दशक की शुरुआत में आसिम की कई ग़ज़लों को गाकर उन्हें घर-घर में प्रसिद्ध कर दिया। == व्यक्तिगत जीवन == आसिम रांदेरी का निधन 104 वर्ष की आयु में बुढ़ापे के कारण हुआ। उनका निधन उनके गृहनगर रांदेर में हुआ और उन्हें गोरेगरिमा कब्रिस्तान में दफनाया गया। == इन्हें भी देखें == गुजराती भाषा के लेखकों की सूची == सन्दर्भ ==