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पुली (2015 फ़िल्म)
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पुली (बब्बर शेर) एक भारतीय तमिल फ़िल्म है, जिसका निर्देशन और लेखन का कार्य चिम्बू देवन ने किया है। इस फ़िल्म में मुख्य किरदार में विजय हैं। यह दो अलग अलग किरदार निभा रहे हैं। इनके साथ सुदीप, श्रीदेवी, श्रुति हासन, हंसिका मोटवानी, प्रभु गणेशन और नन्दिता स्वेथा हैं। इसका निर्माण सेलवाकुमार ने किया है। यह हिन्दी और तेलुगू में अनुवादित की गई है। यह फ़िल्म 1 अक्टूबर 2015 को सिनेमा घरों में प्रदर्शित हुई।
== पटकथा ==
यह कहानी तब शुरू होती है, जब पुली (विजय) की प्रेमिका (श्रुति हासन) को एक शैतान ले जाता है। उसे बचाने के लिए पुली ‘वेधाला कोटाई’ नाम के राज्य में जाता है। वहाँ उसकी मुलाक़ात एक राजकुमारी (हंसिका मोटवानी) से होती है। वह रानी (श्रीदेवी) की एक इकलौती बेटी है। उसे बाद में यह पता चलता है कि सेनापति जलथरंगन (सुदीप) उसे जादू से चुड़ैल बना दिया है। अब उसका लक्ष्य रानी को उसके जाल से बचना होता है।
वह जलथरंगन से लड़ाई करता है और उसे हरा देता है। उसके मरने से पूर्व ही वह उसके हाथ से अंगूठी निकाल लेता है और सारे दुष्ट शक्तियों को बाहर कर देता है। जिससे जलथरंगन मरने के पश्चात भी उस जगह को अपने नियंत्रण में न ले सके। मारू धीरन को यह पता लगता है कि रानी तभी अपने वास्तविक रूप में आ सकती है, जब उसकी जादुई छड़ी नष्ट हो जाये। वह रानी से लड़ाई करता है और उसकी छड़ी को नष्ट कर देता है। उसके इस कार्य के कारण यावनारनी उसे वेधलपुरम के सिंहासन का वारिस बना देता है।
== कलाकार ==
== निर्माण ==
=== विकास ===
जनवरी 2011 में चिम्बू देवन ने बताया कि वह एक काल्पनिक फ़िल्म के निर्माण में लगे हुए हैं। मारीसन नामक इस फ़िल्म में धनुष मुख्य किरदार के रूप में चुने गए थे। साथ ही प्रकाश कुमार और कथिर को भी इसके लिए चुन लिया गया था। जब इस फ़िल्म के दल का चुनाव हो गया तब 2011 के अंत में इसका निर्माण शुरू हुआ। तब इस फ़िल्म के लिए जेनेलिया और हंसिका मोटवानी को इस फ़िल्म के मुख्य किरदार के लिए चुना गया। उसी दौरान वादिवेलु भी इसके पात्रों में शामिल हुए। लेकिन अक्टूबर 2011 को यूटीवी मोशन ने इस फ़िल्म के निर्माता बनने से मना कर दिया और उसकी जगह आस्कर ने ले ली। लेकिन यह परियोजना विफल रही और इसके अभिनेता और निर्देशक अन्य परियोजनाओं में लग गए। ओरु कन्नीयूम मूणु कलवानीकलूम (2014) के निर्माण के दौरान 2013 के अंत में चिम्बू देवन ने पुनः उस परियोजना को शुरू किया। इसमें विजय की ध्वनि से इसकी कहानी शुरू होती है। विजय ने इस परियोजना में हिस्सा लेने हेतु अपनी दिलचस्पी दिखाई थी। तभी इस परियोजना को एक निर्माता मिल गया। सेलवाकुमार इस के निर्माता बन गए। यह विजय के कई फ़िल्म का निर्माण और वितरण कर चुके हैं। यह दोनों निर्माता मिल कर एसकेटी नामक एक निर्माता कंपनी बनाई। यह इस फ़िल्म के निर्माण का कार्य मुरुगड़ोस कथ्थि के तुरंत बाद शुरू कर दिया।
इसके बाद सूत्रों द्वारा ए आर रहमान का नाम इस फ़िल्म के संगीत निर्माण हेतु दिया गया। लेकिन बाद में दल ने देवी श्री प्रसाद को इसके लिए चुन लिया। नटराजन सुब्रमणियम इस फ़िल्म के छायाकार के रूप में कार्य करते रहे। यह सथुरंगा वेट्टई (2014) में अपने अभिनय के सफलता के बावजूद यह फ़िल्म के दल के रूप में कार्य करने को उत्साहित थे। इस दल ने पाँच पोशाक बनाने वालों को अभिनेताओं के कपड़े बनाने का कार्य दिया। यह मनीष मल्होत्रा, दीपाली नूर, चैतन्य राव, सिवा और साई थे। इसमें करतब के दृश्य हेतु चार लोगों को चुना गया। यह सांग लिन और प्रदित सीलुएम हैं। साथ ही सुनली रोड्रिगुएस और दिलीप सुब्बरयन भी इसमें शामिल हैं। विशेष प्रभाव और कार्टून हेतु मकुटा को चुना गया। चिम्बू देवन इस फ़िल्म के लेखन को जनवरी और अगस्त 2014 के मध्य ही पूरा किया। अगस्त 2014 को यह केरल में इसका फिल्माना शुरू कर दिया।
=== पात्र चुनाव ===
अप्रैल 2014 में सूत्रों द्वारा कन्नड़ अभिनेता सुदीप को इस फ़िल्म में समान मुख्य किरदार हेतु सुझाव दिया गया था। सूत्रों पर ध्यान देने के बाद उसे मुख्य शत्रु का किरदार दिया गया। बाद में सुदीप ने यह बताया कि वह इस फ़िल्म में कार्य कर रहे हैं। दल ने सफलता पूर्वक श्रीदेवी को राजकुमारी के सहायक किरदार के रूप में चुन लिया। यह 29 वर्ष बाद पहली बार तमिल फ़िल्म में कार्य किया। इसके साथ ही प्रभु को भी इस फ़िल्म के एक किरदार हेतु चुन लिया गया।
चिम्बू देवन ने यह बताया कि वह विजय के साथ दो मुख्य स्त्री किरदार भी जोड़ रहे हैं। वह प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण को इस फ़िल्म हेतु चुन रहे थे, लेकिन उनके भारी भरकम पारिश्रमिक के कारण उन्हें नहीं जोड़ते हैं। जुलाई 2014 को श्रुति हासन ने फ़िल्म में कार्य करने कि पुष्टि की। यह तीन फिल्मों के बाद 2 वर्षों बाद तमिल फ़िल्म में कार्य कर रही हैं। हंसिका मोटवानी भी इस फ़िल्म में एक महत्व पूर्ण किरदार के रूप में जुड़ गई। वह श्री देवी कि बेटी का किरदार निभा रहीं हैं। इसी के साथ थम्बी रमाइयाह और विद्युल्लेखा रमन भी इस फ़िल्म के किरदार के रूप में जुड़ गए। इसके बाद हास्यकार सथ्यन, रोबो शंकर और इम्मान अन्नचि भी इस फ़िल्म से जुड़ गए। जनवरी 2015 के एक सूचना के अनुसार नारेन, विजय कुमार, अली, करुणास और जो मल्लोरी भी इससे जुड़ गए हैं। अप्रैल 2015 को नन्दिता इस से जुड़ गई जब भावना ने इससे किनारा कर लिया था। गायत्री रमन इस फ़िल्म में श्रुति हासन के माँ के रूप में अभिनय कर रही हैं।
=== फ़िल्माना ===
इस फ़िल्म का फिल्माने का कार्य 10 नवम्बर 2014 को चेन्नई के पूर्वी तट के सड़क के पास आदित्यराम स्टुडियो में विजय और हंसिका मोटवानी के साथ एक नकली पहाड़ पर शुरू हुई। इसका निर्माण कला निर्देशक टी॰ मुथुराज ने किया था। इसके लिए दल को 45 दिन का समय लगा था। साथ ही इसके निर्माण हेतु आस पास के जगह से 100 तकनीकी लोगों को लाया गया था। इस फ़िल्म का दूसरा हिस्सा दिसम्बर में बनना शुरू हुआ। तब इस फ़िल्म का 20 प्रतिशत हिस्सा बन चुका था। इसके बाद जनवरी 2015 को शहर से बाहर इसका निर्माण होता रहा, जब तक कि जनवरी का मध्य नहीं हुआ था। एक सूत्र के अनुसार मैसूर में होने वाले एक हिस्से को निर्माताओं ने मना कर दिया।
जब इसका निर्माण हो रहा था, तब इसका नाम विजय 58 के अलावा गरुड़, मारीसन, मारू धीरण और पोर वाल नाम से निर्माता ने पंजीकृत किया था। लेकिन इस के शीर्षक को चुनते समय जनवरी 2015 को इसका नाम पुलि रखा गया। जिसका अधिकार इसके निर्देशक एस॰ जे॰ सूर्या ने खरीद लिया था।
== समीक्षा ==
हिन्दी दैनिक समाचार-पत्र दैनिक भास्कर के समीक्षा के अनुसार इस फिल्म में केवल विजय और दृश्य प्रभाव पर ही ध्यान दिया गया है। इस फिल्म में काफी ज्यादा गाने हैं, जो हिन्दी दर्शकों को पसंद न आए। यदि आप बाहुबली को ध्यान में रखकर यह फिल्म देखने जा रहे हैं तो आपको निराशा ही मिलेगी। क्योंकि बाहुबली इससे कई भागों में काफी आगे थी। हालांकि यह विजय के अभिनय और श्रीदेवी के इतने वर्षों बाद फिल्मों से जुडने के कारण देखने जा सकते हैं। मनोरंजन समाचार जालस्थल बिहाइंडवूड ने इसके निर्माण कला और दृश्य प्रभाव की सराहना की लेकिन इसके पटकथा की आलोचना की। डीएनए के लथा श्रीनिवासन ने इसे पाँच सितारों से केवल आधे ही दिये। इसने भी दृश्य प्रभाव की सराहना की और पटकथा पर निराशाजनक बताया। इस शैली की कहानी में कुछ नया नहीं है। इसकी कहानी बहुत धीमी गति से आगे बढ़ती है, जिससे कोई भी उबासी लेने को मजबूर हो जाएगा। छायांकन, दृश्य प्रभाव और कलाकारों के प्रदर्शन प्रशंसा योग्य है। हिन्दुस्तान टाईम्स के गौतमन भास्करन ने इसे पाँच में से एक सितारा ही दिया। द हिन्दू के भारद्वाज रंगन और रेडिफ के एस॰ सरस्वती ने इस पर नकारात्मक समीक्षा दी है। दोनों का कहना है कि इसके कुछ संवाद राजनीति के दृष्टिकोण से बनाए गए हैं। रंगन ने चिम्बू देवन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे बड़ों के लिए इसको बनाना भूल गए हैं। यदि इसे बाहुबली एक और इतिहास से जुड़ी काल्पनिक फिल्म से तुलना करें तो उसमें जिस तरह से कहानी में सतत प्रतिबद्धता देखने को मिली वह पुली में नहीं है।
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
पुली इंटरनेट मूवी डेटाबेस पर