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411 समाचार
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थियोडोर शुल्त्स

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जुलाई 2026 थियोडोर शुल्त्स अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार का स्वर्ण पदक 30 अप्रैल 1902 अर्लिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका 26 फरवरी 1998 इवान्स्टन, संयुक्त राज्य अमेरिका अमेरिकी अर्थशास्त्र दक्षिण डकोटा राज्य महाविद्यालय, विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय मानव पूंजी सिद्धांत, कृषि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार (1979) थियोडोर विलियम शुल्त्स (30 अप्रैल 1902 – 26 फरवरी 1998) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात अमेरिकी अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और नीति निर्माता थे, जिन्हें कृषि अर्थशास्त्र और मानव पूंजी के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अनुसंधानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।https://www.nobelprize.org/prizes/economic-sciences/1979/schultz/biographical/ थियोडोर शुल्त्स की जीवनी और कार्य नोबेल पुरस्कार समिति 2 जून 2026 वर्ष 1979 में उन्हें अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान के लिए विलियम आर्थर लुईस के साथ संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।https://www.nytimes.com/1979/10/17/world/nobel-memorial-prize-in-economics.html अमेरिकी अर्थशास्त्री ने जीता अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार द न्यूयॉर्क टाइम्स 17 अक्टूबर 1979 2 जून 2026 यह महान सम्मान उन्हें विकासशील देशों में कृषि अर्थव्यवस्था और आर्थिक विकास की तथ्यात्मक व्याख्या करने के लिए प्रदान किया गया था।शुल्त्स थियोडोर पारंपरिक कृषि का ऐतिहासिक रूपांतरण आर्थिक समीक्षा पत्रिका 1964 12 194-210 उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण शोध वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर गरीब देशों की आर्थिक स्थिति को स्पष्ट रूप से समझने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा उनका जन्म 30 अप्रैल 1902 को संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिण डकोटा राज्य में स्थित अर्लिंगटन नामक एक छोटे से कृषि प्रधान नगर में हुआ था।स्मिथ रॉबर्ट शुल्त्स का प्रारंभिक जीवन और कृषि 2001 अर्थशास्त्र शिक्षा प्रकाशन उनके प्रारंभिक जीवन का समय अत्यंत संघर्षपूर्ण और चुनौतियों से भरा हुआ था क्योंकि उनका परिवार मुख्य रूप से खेती पर निर्भर था और उस दौरान देश में भारी आर्थिक मंदी छाई हुई थी। कृषि कार्य में सीधे तौर पर जुड़े होने के कारण उन्होंने बचपन से ही किसानों की आर्थिक समस्याओं और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को बहुत ही करीब से देखा था।जॉनसन माइकल महान अर्थशास्त्रियों का प्रारंभिक जीवन प्रायोगिक अर्थशास्त्र पत्रिका 2003 22 112-118 अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दक्षिण डकोटा राज्य महाविद्यालय में प्रवेश लिया।https://www.sdstate.edu/about/history दक्षिण डकोटा राज्य महाविद्यालय का इतिहास दक्षिण डकोटा विश्वविद्यालय 2 जून 2026 27 मार्च 2016 https://web.archive.org/web/20160327035730/http://www.sdstate.edu/about/history/ dead इसी महान संस्थान से उन्होंने वर्ष 1927 में कृषि अर्थशास्त्र विषय में अपना स्नातक अत्यंत उत्कृष्ट अंकों के साथ पूर्ण किया। इसके पश्चात वे अपना अनुसंधान कार्य जारी रखने के लिए विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय चले गए, जहाँ उन्हें कई महान अर्थशास्त्रियों के साथ कार्य करने का अत्यंत दुर्लभ और सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।शुल्त्स थियोडोर मेरा अकादमिक सफर और कृषि 1965 विश्व अर्थशास्त्र प्रकाशन इसी प्रतिष्ठित संस्थान से उन्होंने वर्ष 1930 में अर्थशास्त्र में अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की। यहाँ उन्होंने कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर अपना बहुत ही महत्वपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया था, जिसने उनके भविष्य के सबसे बड़े आर्थिक सिद्धांत की अत्यंत मजबूत नींव रखी।https://econ.wisc.edu/about/history/ विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय विज्ञान संकाय 2 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot विशेषज्ञता उनके अकादमिक शोध और विशेषज्ञता का मुख्य केंद्र कृषि अर्थशास्त्र और मानव पूंजी का विकास था। उन्होंने एक अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी आर्थिक सिद्धांत का निर्माण किया, जो यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि कृषि केवल जीवन निर्वाह का साधन नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण इंजन है।डेविस पॉल अंतर्राष्ट्रीय कृषि का इतिहास और विकास 2005 कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय प्रकाशन उन्होंने अपने शोध में यह भी सिद्ध किया कि किसी भी देश के संपूर्ण विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेश कारखानों या मशीनों में नहीं, बल्कि मानव की शिक्षा और स्वास्थ्य में किया जाने वाला निवेश है। इस वैचारिक प्रतिरूप को आज पूरी दुनिया में 'मानव पूंजी सिद्धांत' के नाम से जाना जाता है।टेलर रिचर्ड वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई क्रांतियाँ नेचर आर्थिक पत्रिका 2000 10 78-85 उन्होंने यह भी समझाया कि विकासशील देशों के किसान अत्यंत बुद्धिमान और आर्थिक रूप से जागरूक होते हैं, और यदि उन्हें सही तकनीक और अवसर प्रदान किए जाएं, तो वे उत्पादन में अद्भुत वृद्धि कर सकते हैं। यह सिद्धांत आज भी आधुनिक अर्थशास्त्र और विकास नीतियों का एक बहुत बड़ा और प्रामाणिक आधार है।विलियम्स जॉर्ज आधुनिक अर्थशास्त्र के नए सिद्धांत 2010 स्प्रिंगर प्रकाशन पुरस्कार और मान्यता अर्थशास्त्र और कृषि विकास के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 1979 में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।https://www.nobelprize.org/prizes/economic-sciences/1979/summary/ 1979 अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार का सारांश नोबेल फाउंडेशन 2 जून 2026 इस महान पुरस्कार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा किए गए शोध को एक नई और अत्यधिक प्रतिष्ठित मान्यता प्रदान की। नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित आर्थिक संगठनों और संस्थाओं द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'पारंपरिक कृषि का रूपांतरण' को अर्थशास्त्र जगत में एक अत्यंत प्रामाणिक और आधारभूत ग्रंथ की मान्यता प्राप्त है।एंडरसन थॉमस अर्थशास्त्र में कृषि सिद्धांत और मान्यता आर्थिक प्रगति 2012 45 200-210 उनके ऐतिहासिक शोध कार्य के कारण ही आज विश्व बैंक जैसी संस्थाओं को गरीब देशों के लिए कृषि नीतियां बनाने में अत्यधिक सहायता मिलती है। वे कई दशकों तक शिकागो विश्वविद्यालय में एक पूर्णकालिक वरिष्ठ प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे और वहाँ उन्होंने अर्थशास्त्र विभाग का अत्यंत सफल नेतृत्व भी किया। इन्हें भी देखें अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार कृषि अर्थशास्त्र सन्दर्भ 2