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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सतघरा (मधुबनी)

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मार्च 2025 मार्च 2025 सतघरा, भारतीय राज्य बिहार के मधुबनी जिले में बाबूबरही अनुमंडल में स्थिति एक गांव है। ये गांव अपने सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहां की जनसंख्या, भाषा और जीवन शैली मैथिली संस्कृति से प्रभावित है, जो इस क्षेत्र की प्रमुख पहचान है। सतघरा, बाबूबरही से लगभग 3 किलोमीटर और जिले के मुख्यालय, मधुबनी से 30 किलोमीटर की दूरी पर है। गांव का पिनकोड 847224 है, और ये एक ग्राम पंचायत भी है। गाँव का क्षेत्र लगभाग 490 हेक्टेयर है। यहां की प्रमुख भाषा मैथिली है, लेकिन हिंदी और उर्दू भी बोली जाती है। ये गांव अपने धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। इसमें एक मशहूर दुर्गा मंदिर है जो गांव के केंद्र में स्थित है, साथ ही एक ब्रह्म स्थान और गांव के हर प्रवेश द्वार पर हनुमान जी का मंदिर अवस्थित है। इसके अलावा, गांव के पास कमला और बालन नदियां बहती हैं, जो इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक महत्व रखती हैं। सतघरा के लोग प्रमुख रूप से खेती पर निर्भर हैं, और यहां का माहौल शांत और ग्राम्य जीवन से भरा हुआ है। नज़दीकी शहर मधुबनी है, जो गांव से 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है और वहां के लिए प्रमुख व्यवसायी केंद्र है। गाँव में विभिन्न जातियों के लोग साथ रहते हैं, जिनमें ब्राह्मण समुदाय का प्रभाव दिखता है। ऐतिहासिक महत्त्व मिथिला में पंजी प्रथा की शुरूआत इसी गांव में हुए एक घटना के बाद सन 1326 ई. में हुआ । "मिथिला तत्वविमर्श" आदि ऐतिहासिक ग्रंथों से ज्ञात होता है कि महाराजा हरिसिंहदेव के समय सतघरा गाँव में पंडित हरिनाथ शर्मा नाम के विद्वान रहते थे। अपने भाई के अभद्र व्यवहार से रूठकर वे परदेश चले गए। उनकी धर्मपत्नी प्रतिदिन "बाबा मुक्तेश्वरनाथ महादेव" की भक्तिपूर्वक पूजा करती थी और मनाती थी कि उनके पति सकुशल घर वापस चले आयें। संयोग से एक दिन चाण्डाल बुरी भावना से वहाँ आया और उसने पंडित हरिनाथ शर्मा की धर्मपत्नी के सतीत्त्व को भग्न करना चाहा। शर्मा जी की पत्नी ने महादेव से अपनी सतीत्त्व की रक्षा के लिए प्रार्थना करने लगी कि मंदिर के द्वार पर दो काले नाग खड़े हो गए। वह चाण्डाल मंदिर के भीतर प्रवेश नहीं कर सका। धीरे - धीरे लोग वहाँ आ गये चाण्डाल भी खिसक गया। शर्मा जी की पत्नी भी अपने घर चली गई। किन्तु किसी सूत्र से यह अफवाह फैला दिया गया की पं हरिनाथ शर्मा की धर्मपत्नी का धर्म भ्रष्ट हो गया है। परिणाम स्वरूप वह समाज से वहिष्कृता हो गई। कुछ दिन पश्चात् पंडित हरिनाथ शर्मा परदेश से लौटे उन्हें पता चला तो वह पुनः परदेश लौटने लगे कि उनकी पत्नी का संवाद मिला कि वो अपनी पत्नी से मिलकर सारी वस्तु स्थिति की जानकारी ले लें। बाद में जैसा विचार हो वैसा करें। शर्मा जी ने घर से बाहर ही अपनी पत्नी से मिले, पत्नी ने सारी बातें बताई। उस समय ग्राम पंचायत द्वारा अपराधी की अग्नि परीक्षा होती थी। ग्रामाध्यक्ष के सामने जब ये बात आई कि भगवान शंकर की कृपा से पं शर्मा की पत्नी का धर्म बच गया है तब उनकी अग्नि परीक्षा हुई। अग्नि परीक्षा में अपराधी के हाथ पर पीपल के कुछ पत्ते रखे जाते थे और उनसे संकल्प कराया जाता था कि वह व्यक्ति यदि अमुक अपराध का अपराधी हो तो उसका हाथ जलने लगे। हाथ पर पीपल के पत्ते पर तप्तलौह रखा जाता था। धर्मशास्त्र में वर्णित दूरी तक तप्त लौह लेकर चले जाने पर अभियुक्त का हाथ नही जलते थे तो वह अपराध मुक्त समझा जाता था। परन्तु शर्माजी की पत्नी का हाथ जलने लगा था, इसलिए ग्रामाध्यक्ष द्वारा उन्हें अपराधी घोषित कर दिया गया था। परन्तु शर्माजी की पत्नी को विश्वाश था की वह अपराधिनी नहीं है, महादेव की कृपा से मेरा पतिव्रत धर्म नष्ट नही हुआ है। उस समय मिथिला के राजा हरिसिंहदेव के महामंत्री कविकोकिल विद्यापति ठाकुर के पितामह भ्राता चण्डेश्वर ठाकुर थे जिनकी धर्मपत्नी लखिमा ठकुराइन बड़ी विदुषी थीं। पं हरिनाथ शर्मा की पत्नी लखिमा ठकुराइन के पास गई और उन्होने आपविती सुनाई। लखिमा ठकुराईन ने संकल्प वाक्य की जाँच की, जिससे अग्नि परिक्षा ली गई थी। जाँच के बाद लखिमा ठकुराइन ने कहा कि पंडितों ने जिस वाक्य से अग्नि परिक्षा लिया है वह त्रुटिपूर्ण है। ग्रामीणों ने जिस वाक्य से अग्नि परिक्षा लिया था उसका अर्थ था कि यदि अभियुक्त चाण्डालगामिणी हों, तो उनके हाथ जल जायें। लखिमा ठकुराइन ने कहा संभव है, अभियुक्त के पति ही चाण्डाल हों, अतः संकल्प वाक्य होना चाहिये कि स्वामी के अतिरिक्त अभियुक्त यदि चाण्डालगामिणी हो तो उनके हाथ जल जायें। लखिमा ठकुराइन की कथनानुसार पं. हरिनाथ शर्मा की पत्नी का अग्नि परीक्षा कराई गई। इस बार उनके हाथ नहीं जले। शर्माजी की पत्नी निरपराध प्रमाणित हो गई। परन्तु यह भी सिद्ध हो गया की शर्माजी में चाण्डालत्व दोष है । पं हरिनाथ शर्मा नैष्ठिक विद्वान थे किसी को विश्वाश नही होता था कि उनमें चाण्डालत्व दोष हो सकता है। मिथिला के राजा हरिसिंहदेव ने तब मिथिला के 1400 मिमांशक विद्वानों, पंडितों की सभा बुलाई। बहुत विचार विमर्श के बाद यह देखा गया कि पं हरिनाथ शर्मा का विवाह शास्त्रानुकूल नहीं हुआ है, जिससे उनमें चाण्डालत्व दोष आ गया है। जिस सीमा तक पितृपक्ष की संतति से धर्मशास्त्र में वैवाहिक सम्बन्ध करने की मनाही है, उसी सीमा के भीतर पं शर्मा की वैवाहिक सम्बन्ध हो गया था। यह कथा पंजी पोथी के प्रारंभ में उल्लिखित है। हरिसिंहदेव ने सोचा कि जब पं. हरिनाथ शर्मा जैसे शास्त्रज्ञ का अनाधिकार वैवाहिक सम्बन्ध हो सकता है तो सामान्यजनों में बहुत होता होगा अतः उन्होने निर्णय लिया कि सभी लोगों की वंशावली एक जगह उल्लिखित हो। जनसंख्यिकी 2011 की जनसंख्या गणना के अनुसार, सतघरा में 1,095 परिवार रहते हैं, और कुल जनसंख्या 4,734 है।https://www.census2011.co.in/data/village/220140-satghara-bihar.html Satghara Village Population - Babubarhi - Madhubani, Bihar www.census2011.co.in 2025-03-29 अधिकांश ग्रामीण पक्के घरों में रहते हैं , पीएमएवाई-ग्रामीण के तहत गरीब परिवार के लिए पक्के घर बनाने की योजना चल रही है। इस योजना के तहत, 2016 से लेकर अब तक, लक्ष्य है कि हर परिवार के पास पक्का घर हो, जिसमें शौचालय, बिजली और पानी की सुविधा हो। हर घर नल का जल योजना के तहत, गांव में पाइन के पानी की व्यवस्था पर काम चल रहा है, लेकिन अभी भी अधिकतर घर हैंडपंप पर निर्भर हैं। शिक्षा की स्थिति 2011 की जनसंख्या गणना के अनुरूप, सतघरा की साक्षरता दर 59.59% थी, जो बिहार के औसत 61.80% से थोड़ी कम थी। इसमें पुरुष साक्षरता दर 73.34% और महिला साक्षरता दर 47.72% थी, जो लिंग में शिक्षा के अंतर को दर्शाता है। गाँव में शिक्षा के लिए कुछ बुनियादियाँ सुविधाएँ मौजुद हैं। यहां प्राइमरी और मिडिल स्कूल स्थापित हैं, जैसे कि एम.एस. सतघरा, जो बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, बी.एन.एस.जे.आई. कॉलेज पिपराघाट नाम का एक उच्चतर माध्यमिक संस्थान भी है, जो 11वीं और 12वीं कक्षा तक शिक्षा देता है। ये कॉलेज 1980 में स्थापित हुआ था और सरकारी विभाग द्वार संचलित है। लेकिन, कॉलेज में कक्षा की संख्या कम है और बुनियादी ढांचे में कमी दिखती है, जैसे कि अधिकाँश कक्षाओं का स्थिति खराब होना या सीमित संसाधन। स्वास्थ्य सेवा की स्थिति सतघरा के नजदीक बाबूबरही में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मौजुद है, जो लगभग 4-5 किलोमीटर की दूरी पर है। ये केंद्र बुनियादी स्वास्थ्य सेवा जैसे टीकाकरण, प्रसूति सेवा (डिलीवरी), और छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज प्रदान करता है। लेकिन, पीएचसी में अक्सर डॉक्टर और स्टाफ की कमी, दवाओं का अभाव, और पुराने उपकरणों की समस्या होती है। गंभीर बीमारी या आपातकालीन स्थिति होने पर लोगों को मधुबनी शहर (25-30 किमी) या झंझारपुर (15-20 किमी) के सरकारी या निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। गाँव में कोई बड़ा हॉस्पिटल या डायग्नोस्टिक सेंटर नहीं है। अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे जैसे टेस्ट के लिए शहर जाना पड़ता है। विद्युतीकरण सतघरा में लगभग हर घर तक बिजली का कनेक्शन पहुंच गया है, खास कर दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) और सौभाग्य योजना के लिए, जहां 2015 और 2017 में लॉन्च किया गया था। योजनाओं का उद्देश्‍य हर गांव और घर तक बिजली पहुंचाना था, और इसके आधार पर सतघरा भी विद्युतीकृत हो चुका है। सन्दर्भ श्रेणी:मधुबनी ज़िले के गाँव