Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

अक्कम्मा चेरियन

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

अक्कम्मा चेरियन भारत के पूर्ववर्ती त्रावणकोर (केरल) से एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थी। वे त्रावणकोर की "रानी लक्ष्मीबाई" के रूप में जानी जाती है। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == चेरियन अक्कम्मा का जन्म 14 फरवरी 1909 को थॉममन चेरियन और अन्नाममा करिपापारंबिल की दूसरी बेटी के रूप में, त्रावणकोर के कंजिरपल्ली में में हुआ था। उन्होंने सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल, कंजिरपल्ली और सेंट जोसेफ हाई स्कूल, चांगनाशेरी से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण की। उन्होंने सेंट टेरेसा कॉलेज, एर्नाकुलम से इतिहास में स्नातक अर्जित किया। 1931 में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने सेंट मैरी अंग्रेजी माध्यमिक विद्यालय, एडककारा में एक शिक्षक के रूप में कार्य किया, जहाँ वह बाद में स्कूल की प्रबंधिका बन गईं। उन्होंने इस संस्थान में लगभग छह वर्षों तक काम किया, और इस अवधि के दौरान उन्होंने ट्रि प्रशिक्षण कॉलेज से एलटी की उपाधि भी प्राप्त की। == स्वतंत्रता सेनानी == फरवरी 1938 में, त्रावणकोर राज्य कांग्रेस का गठन हुआ और अक्कम्मा चेरियन ने स्वतंत्रता के संघर्ष में शामिल होने के लिए अपने शिक्षण करियर को छोड़ दिया। === उत्तरदायी प्रशासन के लिए आंदोलन === ==== सविनय अवज्ञा आंदोलन ==== राज्य कांग्रेस के तहत, त्रावणकोर के लोगों ने एक उत्तरदायी प्रशासन के लिए आंदोलन शुरू किया। त्रावणकोर के दीवान सी.पी. रामास्वामी अय्यर ने आंदोलन को दबाने का फैसला किया, और 26 अगस्त 1938 को, उन्होंने राज्य कांग्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया। जिसके बाद उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन का आयोजन किया। इसके राज्य के पट्टम ताणु पिल्लै समेत प्रमुख राज्य कांग्रेस नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया। तब राज्य कांग्रेस ने आंदोलन की अपनी पद्धति को बदलने का फैसला किया। इसकी कार्यकारी समिति भंग कर दी गई थी और इसके अध्यक्ष को एकात्मक शक्तियां प्रदान की गई और उन्हें अपने उत्तराधिकारी को नामित करने का अधिकार भी दिया गया। राज्य कांग्रेस के ग्यारह 'अध्यक्षों' को एक-एक करके गिरफ्तार किया गया। ग्यारहवें अध्यक्ष कुट्टानाद रामकृष्ण पिल्लई ने अपनी गिरफ्तारी से पहले बारहवी अध्यक्ष के रूप में अक्कम्मा चेरियन को नामित किया था। ==== कौडियार महल तक रैली ==== अक्कम्मा चेरियन ने राज्य कांग्रेस पर लगे प्रतिबंध को रद्द कराने के लिए थंपनूर से महाराजा चिथिरा थिरुनल बलराम वर्मा के कौडियार महल तक, खादी की टोपी पहने और झंडे लेकर निकले एक विशाल जन रैली का नेतृत्व किया। आंदोलन करने वाले भीड़ ने दीवान, सी पी रामस्वामी अय्यर को बर्खास्त करने की मांग की, जिनके खिलाफ राज्य कांग्रेस के नेताओं ने कई आरोप लगाए थे। ब्रिटिश पुलिस प्रमुख ने अपने सिपाहियों से 20,000 से अधिक लोगों की इस रैली में आगजनी करने का आदेश दे दिया। अक्कम्मा चेरियन ने चिल्लाया, "मैं इस रैली की नेता हूं; दूसरों को मारने से पहले मुझे गोली मारो"। उनके इन साहसिक शब्दों ने पुलिस अधिकारियों को अपना आदेश वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया। समाचार सुनकर महात्मा गांधी ने उन्हें 'त्रावणकोर की झांसी रानी' के रूप में सम्मानित किया। 1939 में निषिद्ध आदेशों का उल्लंघन करने के लिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और दोषी ठहराया गया। === देससेविका संघ का गठन === अक्टूबर 1938 में, राज्य कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति ने देससेविका (महिला स्वयंसेवी समूह) को व्यवस्थित करने के लिए अक्कम्मा चेरियन को निर्देशित किया। उन्होंने विभिन्न केंद्रों का दौरा किया और महिलाओं से देससेविका के सदस्यों के रूप में शामिल होने की अपील की। === कारावास === स्वतंत्रता के संघर्ष के दौरान अक्कम्मा चेरियन को दो बार कारावास की सजा सुनाई गई थी। ==== राज्य कांग्रेस का वार्षिक सम्मेलन ==== प्रतिबंध आदेश के बावजूद 22 और 23 दिसंबर 1938 को राज्य कांग्रेस का पहला वार्षिक सम्मेलन वट्टियोकोरवु में आयोजित किया गया। राज्य कांग्रेस के लगभग सभी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और कारावास भेज दिया गया। अक्कम्मा चेरियन को उनकी बहन रोजमामा पुनोज़ (एक स्वतंत्रता सेनानी, एमएलए और 1948 से एक सीपीआई नेता) के साथ, 24 दिसंबर 1939 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्हें एक साल की कारावास की सजा सुनाई गई। जेल में उन्हें कई बार अपमानित किया गया और धमकी दी गई। जेल अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों के कारण, कुछ कैदियों ने उनके खिलाफ दुर्व्यवहार और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया। यह मामला पट्टम ए ताणु पिल्लै द्वारा महात्मा गांधी के जानकारी में लाया गया। हालांकि सीपी रामस्वामी अय्यर ने सभी आरोपो से इनकार कर दिया। अक्कम्मा चेरियन के भाई, केसी वर्की करिपापारंबिल भी स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बने रहे। ==== भारत छोड़ो आन्दोलन ==== जेल से रिहा होने के बाद अक्कम्मा राज्य कांग्रेस की पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गई। 1942 में, वे कार्यवाहक अध्यक्ष बनाई गईं। अपने अध्यक्षीय संबोधन में, उन्होंने 8 अगस्त 1942 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ऐतिहासिक बॉम्बे सत्र में पारित भारत छोड़ो आन्दोलन का स्वागत किया। जिसके उपरान्त उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और पुन: एक साल की कारावास की सजा सुनाई गई। 1946 में, प्रतिबंध आदेशों का उल्लंघन करने के लिए उन्हें गिरफ्तार कर छह महीने के लिये कैद कर दिया गया। 1947 में, अक्कम्मा चेरियन फिर से गिरफ्तार कर लि गई, क्योंकि उन्होंने सीपी रामस्वामी अय्यर के स्वतंत्र त्रावणकोर की इच्छा के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। == स्वतंत्र भारत में जीवन == 1947 में, आजादी के बाद, कंकिरपल्ली से त्रावणकोर विधानसभा के लिये अक्कम्मा चेरियन निर्विरोध चुनी गई। 1951 में, उन्होंने एक स्वतंत्रता सेनानी और त्रावणकोर-कोचीन विधान सभा के सदस्य वी.वी। वर्की मैननामप्लाकल से विवाह किया। उनका एक बेटा जॉर्ज वी. वर्की हुआ, जोकि आगे चल कर एक इंजीनियर बने। 1950 के दशक की शुरुआत में, लोकसभा टिकट देने से इनकार करने के बाद कांग्रेस पार्टी से उन्होंने इस्तीफा दे दिया और 1952 में, उन्होंने मुवात्तुपुझा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय रूप से संसदीय चुनाव लड़ने में असफल रही। 1950 के दशक की शुरुआत में, जब पार्टियों की विचारधारा बदलने लगी, तो उन्होंने राजनीति छोड़ने का फैसला कर लिया। उनके पति वीवी वर्की मैननामप्लाकल, चिराक्कवडू, 1952-54 से केरल विधानसभा में एक विधायक के रूप में कार्य करते रहे। 1967 में, उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में कानजीरापल्ली से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार ने उन्हें पराजित कर दिया। बाद में, उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के पेंशन सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य किया। उन्होंने एक किताब "जीविथम ओरु समरम" भी लिखी है। == मृत्यु और स्मारक == 5 मई 1982 को अक्कम्मा चेरियन की मृत्यु हो गई। उनकी याद में वेल्लयांबलम, तिरुवनंतपुरम में उनकी एक प्रतिमा स्थापित की गई थी। श्रीबाला के मेनन द्वारा उनके जीवन पर एक वृत्तचित्र फिल्म भी बनाई गई थी। == सन्दर्भ ==