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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जच्चा की बावड़ी

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300px|अंगूठाकार|दाएँ|हित्र्डौन में प्रहलाद कुण्ड के समीप स्थित जच्चा की बावड़ी जच्चा की बावड़ी भारत के राजस्थान राज्य में स्थित हिण्डौन सिटी के प्रहलाद कुंड के पास स्थित है।14वीं शताब्दी में निर्मित इस बावडी का निर्माण करवाया था, इस बावड़ी की जच्चा से जुडी एक बड़ी आश्चर्यजनक घटना है और उन्हीं के नाम पर इस बावडी का नाम जच्चा की बावडी पडा। इसके ठीक सामने प्रसिद्ध प्रहलाद कुंड और श्री नरसिंह जी का मंदिर है। इसे इतना गहरा बनाया गया कि इसमें यदि कोई वस्तु गिर भी जाये, तो उसे वापस पाना बहुत मुश्किल है। इतिहास जच्चा की बावडी हिण्डौन का प्रसिद्घ दर्शनीय स्थल है। यह करसौली व खरैटा रोड़ पर प्रहलाद कुण्ड के समीप स्थित है। जनश्रुति के अनुसार इसका निर्माण लक्खी बनजारे कराया। इससे जुडी रोचक घटना तो यह है कि जब खुदाई में जल नहीं निकला तो किसी साधु ने कहा था कि यदि कौई गर्भवती स्त्री इसके अन्दर बच्चे को जन्म दे तो इसमें जल निकल सकता है। लोग कहते है जब एक बार इसका जल सूख गया और इसकी सफाई की गई तो इसके अन्दर बावड़ी के बीचों बीच एक पत्थर के तख्त पर बच्चे को आँचल पिलाती हुई लेटी महिला की प्रस्तर प्रतिमा देखी गई। इसी के नाम पर इसे जच्चा की बावड़ी नाम मिला। बनावट व शिल्पकला इसमें कोई दुविधा नहीं कि बावड़ी का निर्माण बड़े कलात्मक रूप से किया है। 200 फीट चौडी और 200 फीट लम्बी वर्गाकार बावड़ी में पानी तक पहुँचने के लिए जो सीढ़ियाँ बनाई गई है वे देखते ही बनती हैं। बावडी में ऊपर से नीचे तक पक्की सीढियाँ बनी हुई हैं, जिससे पानी का स्तर चाहे कितना ही हो, आसानी से भरा जा सकता है। यह बावडी 100 फ़ीट से भी ज्यादा गहरी है, जिसमें भूलभुलैया के रूप में 5000 सीढियाँ (अनुमानित)हैं। बावड़ी के चार कोनों में चार चबूतरे हैं। पता नहीं किस कारण बनाए गए थे और बीच में जच्चा कि लेटी प्रस्तर प्रतिमा है। बावड़ी के ऊपर कूऐं का ठाना है जिससे द्वारा जमीन की सिंचाई होती थी। इसके किनारे पर एक प्राचीन मकान है जो अब धाराशाही हो गया है। विशेषता इस बावड़ी के पानी की सबसे बडी विशेषता यह है कि कपडे धोने के लिए साबुन का प्रयोग नहीं किया जाता है। बिना साबुन के इसके जल में कपड़ा धोने पर बिल्कुल साफ हो जाते हैं। बावडी की ही खास बात यह है कि इनके निर्माण में प्रयुक्त लाल बलुआ पत्थरों पर शानदार नक्काशी की गई है,। बावडी की सीढियों को इतने आकर्षक एवं कलात्मक तरीके से बनाया गया है कि यह देखते ही मनमोह लेती है। नरसिंह भगवान का मंदिर श्री नरसिंह जी मंदिर एक बहुत प्राचीन मंदिर है और यह बावड़ी के सामने प्रहलाद कुंड के किनारे स्थित है। ये वो मंदिर है जहां नरसिंह भगवान ने हिराण्यकश्यप को मारने के बाद प्रहलाद को अपनी गौदी में बैठाया था यहां पास में नरसिंह जी का एक अन्य गुफा मंदिर है, जोकि यहाँ से लगभग 15 किलोमीटर दूर है जहां भगवान ने राजा असुर हिण्यकश्यप का नरसिंहार किया था। प्रहलाद कुण्ड हिण्डौन का ऐतिहासक पौराणिक प्रहलाद कुंड, यह बावड़ी की सामने बांई ओर स्थित है जोकि साक्ष्य है कि हिण्डौन भक्त प्रहलाद और उसके पिता असुर राजा हिरण्याकश्यप की कर्म भूमि रही है। हिण्डौन को हिरण्याकुश की खैर (हिरण्याकस्यप की राजधानी) से सम्बोधित किया जाता है। श्रेणी:बावड़ी