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हाइपोक्सिया
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हाइपोक्सिया वह स्थिति है जिसमे शरीर या शरीर के अंग को ऊतक स्तर पर पर्याप्त ऑक्सीजन नही मील पाती है। हालांकि हाइपोक्सिया अक्सर एक रोग की स्थिति है, धमनी ऑक्सीजन सांद्रता में बदलाव सामान्य शरीर विज्ञान का हिस्सा हो सकता है। जैसे की: हाइपोवेंटिलेशन प्रशिक्षण या ज़ोरदार शारीरिक व्यायाम से भी हाइपोक्सिया की स्थिति बन सकती है।Woorons, Xavier, Hypoventilation training, push your limits! Arpeh, 2014, 164p. (ISBN 978-2-9546040-1-5) हाइपोक्सिया, हाइपोजेमिया और एनोजेमिया से अलग होता है। हाइपोक्सिया ऑक्सीजन की कमी को या आपूर्ति न हो पाने को कहा जाता है परन्तु हाइपोजेमिया और एनोजेमिया ऑक्सीजन की शुन्य स्थिति को खा जाता है, जिसमे शारीर को न मात्र में ऑक्सीजन मिलती है।West, John B. (1977). Pulmonary Pathophysiology: The Essentials. Williams & Wilkins. p. 22. ISBN 0-683-08936-6. हाइपोक्सिया नवजात शिशु में अपरिपक्व जन्म की एक गंभीर स्थिति है। इसका मुख्य कारण यह है कि मानव भ्रूण के गर्भावस्था के दौरान फेफडों का दुसरे अंगो के बाद विकसित होना। फेफड़ों की सहायता करने के लिए पूरे शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त वितरित की जाती है जिसके लिए हाइपोक्सिया के जोखिम शिशुओं को अक्सर इनक्यूबेटर के अंदर रखा जाता है जो की निरंतर सकारात्मक एयरवे प्रेशर प्रदान करने में सक्षम होता है।Cymerman, A; Rock, PB. "Medical Problems in High Mountain Environments. A Handbook for Medical Officers". USARIEM-TN94-2. US Army Research Inst. of Environmental Medicine Thermal and Mountain Medicine Division Technical Report।
संकेत और लक्षण
सामान्यीकृत हाइपोक्सिया: यह हाइपोक्सिया की वह स्थिति है जिसमे व्यक्ति अत्यधिक बीमार हो जाता है और इसके लक्षणों में शामिल है चक्कर आना, थकान, सुन्नता, मतली, अनॉक्सिता और पाँव में झुनझुनी होना। गंभीर हाइपोक्सिया की स्थिति में गतिभंग, भ्रम की स्थिति, भटकाव, दु:स्वप्न, व्यवहार में बदलाव, गंभीर सिर दर्द, चेतना, सांस लेने में तकलीफ, पीलापन, क्षिप्रहृदयता की हाइपोक्सिया और रक्त चाप में कमी होने से मृत्यु हो जाना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।
स्थानीय हाइपोक्सिया: अगर ऊतक सेल्स ठीक से कार्य नहीं कर पा रही या शारीर को ठंड लग रही है और पिली प्रकट हो रही है तो उस स्थिति को स्थानीय हाइपोक्सिया खा जाता है। इस स्थिति में साइनोसीस की शिकायत भी होती है और शरीर का रंग नीला पड़ जाता है। अगर हाइपोक्सिया बहुत गंभीर है तो ऊतक अंततः गल बन सकता है। चरम दर्द आसपास की जगहों पर महसूस किया जा सकता है।Robinson, Grace; Strading, John; West, Sophie (2009). Oxford Handbook of Respiratory Medicine. Oxford University Press. p. 880. ISBN 0199545162.
Illingworth, Robin; Graham, Colin; Hogg, Kerstin (2012). Oxford Handbook of Emergency Medicine. Oxford University Press. p. 768. ISBN 0199589569.
Ramrakha, Punit; Moore, Kevin (2004). Oxford Handbook of Acute Medicine. Oxford University Press. p. 990. ISBN 0198520727.
सन्दर्भ
श्रेणी:न्यायालयिक विज्ञान