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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

शोले (1975 फ़िल्म)

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शोले Sholay शोले.jpg शोले का पोस्टर रमेश सिप्पी गोपाल दास सिप्पीनिलकमल दुबे सलीम-जावेद राहुल देव बर्मन द्वारका दिवेचा राम येडेकर एम् एस शिंदे सलीम-जावेद धर्मेन्द्रसंजीव कुमारहेमामालिनीअमिताभ बच्चनजया बच्चनअमज़द ख़ान 1975 8 15 y 204 मिनटSholay (PG) http://www.bbfc.co.uk/releases/sholay-1988 ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म क्लासिफिकेशन 12 April 2013 no https://web.archive.org/web/20131109084512/http://www.bbfc.co.uk/releases/sholay-1988 9 November 2013 runtime हिन्दी 3 करोड़Chopra 2000 143 15 करोड़ शोले (अनुवाद: ज्वाला) १९७५ की एक भारतीय हिन्दी एक्शन फ़िल्म है। सलीम-जावेद द्वारा लिखी इस फ़िल्म का निर्माण गोपाल दास सिप्पी ने और निर्देशन का कार्य, उनके पुत्र रमेश सिप्पी ने किया है। इसकी कहानी जय (अमिताभ बच्चन) और वीरू (धर्मेन्द्र) नामक दो अपराधियों पर केन्द्रित है, जिन्हें डाकू गब्बर सिंह (अमजद ख़ान) से बदला लेने के लिए पूर्व पुलिस अधिकारी ठाकुर बलदेव सिंह (संजीव कुमार) अपने गाँव लाता है। जया भादुरी और हेमा मालिनी ने भी फ़िल्म में मुख्य भूमिकाऐं निभाई हैं। शोले को भारतीय सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में से एक माना जाता है। ब्रिटिश फ़िल्म इंस्टिट्यूट के २००२ के "सर्वश्रेष्ठ १० भारतीय फ़िल्मों" के एक सर्वेक्षण में इसे प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। २००५ में पचासवें फ़िल्मफेयर पुरस्कार समारोह में इसे पचास सालों की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार भी मिला। शोले का फ़िल्मांकन कर्नाटक राज्य के रामनगर क्षेत्र के चट्टानी इलाकों में ढाई साल की अवधि तक चला था। बहत फ़िल्मांकन महाराष्ट्र के उरण पनवेल मे हुवा केन्द्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड के निर्देशानुसार कई हिंसक दृश्यों को हटाने के बाद फ़िल्म को १९८ मिनट की लंबाई के साथ १५ अगस्त १९७५ को रिलीज़ किया गया था। हालांकि १९९० में मूल २०४ मिनट का मूल संस्करण भी होम मीडिया पर उपलब्ध हो गया था। रिलीज़ होने पर पहले तो शोले को समीक्षकों से नकारात्मक प्रतिक्रियाएं और कमजोर व्यावसायिक परिणाम मिले, लेकिन अनुकूल मौखिक प्रचार की सहायता से थोड़े दिन बाद यह बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता बनकर उभरी। फ़िल्म ने पूरे भारत में कई सिनेमाघरों में निरंतर प्रदर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ दिए, और मुंबई के मिनर्वा थिएटर में तो यह पांच साल से अधिक समय तक प्रदर्शित हुई। कुछ स्त्रोतों के अनुसार मुद्रास्फीति के लिए समायोजित करने पर यह सर्वाधिक कमाई करने वाली भारतीय फ़िल्म है। शोले एक डकैती-वॅस्टर्न फ़िल्म है, जो वॅस्टर्न शैली के साथ भारतीय डकैती फ़िल्मों परम्पराओं का संयोजन करती है, और साथ ही मसाला फ़िल्मों का एक परिभाषित उदाहरण है, जिसमें कई फ़िल्म शैलियों का मिश्रण पाया जाता है। विद्वानों ने फ़िल्म के कई विषयों का उल्लेख किया है, जैसे कि हिंसा की महिमा, सामंती विचारों का परिवर्तन, सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने वालों और संगठित होकर लूट करने वालों के बीच बहस, समलैंगिक गैर रोमानी सामाजिक बंधन और राष्ट्रीय रूपरेखा के रूप में फ़िल्म की भूमिका। राहुल देव बर्मन द्वारा रचित फ़िल्म की संगीत एल्बम और अलग से जारी हुए संवादों की संयुक्त बिक्री ने कई नए बिक्री रिकॉर्ड सेट किए। फ़िल्म के संवाद और कुछ पात्र बेहद लोकप्रिय हो गए और भारतीयों के दैनिक रहन-सहन हिस्सा बन गए। जनवरी २०१४ में, शोले को ३डी प्रारूप में सिनेमाघरों में फिर से रिलीज़ किया गया था। कथानक रामगढ़ नामक एक छोटे से गाँव में सेवानिवृत पुलिस अधिकारी ठाकुर बलदेव सिंह (संजीव कुमार) दो चोरों को बुलाता है, जिन्हें उसने एक बार गिरफ्तार किया था। ठाकुर को यकीन है कि वे दोनों – जय (अमिताभ बच्चन) तथा वीरू (धर्मेन्द्र) – कुख्यात डकैत गब्बर सिंह (अमजद ख़ान) को पकड़ने में उसकी सहायता कर सकते हैं। गब्बर सिंह को जीवित या मृत पुलिस के हवाले करने पर पचास हज़ार रुपये का नगद इनाम तो था ही, साथ ही ठाकुर ने उन दोनों को गब्बर को जीवित पकड़कर उसके पास लाने पर बीस हज़ार रुपये के अतिरिक्त इनाम की पेशकश भी की। गब्बर के तीन साथी रामगढ़ के ग्रामीणों से अनाज लेने आते हैं, पर जय और वीरु की वजह से उन्हें खाली हाथ जाना पड़ता है। गब्बर उनके मात्र दो लोगों से हारने पर बहुत क्रोधित होता है और उन तीनो को मार डालता है। इसके बाद वह होली के दिन गाँव पर हमला करता है और एक लम्बी लड़ाई के बाद जय और वीरु को बंधक बना लेता है। ठाकुर उन दोनों की मदद करने की स्थिति में होते हुए भी उनकी मदद नहीं करता। जय और वीरु किसी तरह बच निकलते हैं, और ठाकुर की इस अकर्मण्यता से क्षुब्ध होकर गाँव छोड़कर जाने का मन बना लेते हैं। तब ठाकुर उन्हें बताता है कि किस तरह कुछ वर्ष पहले उसने गब्बर को गिरफ्तार किया था पर वो जेल से भाग गया और फिर प्रतिशोध लेने के लिए उसने पहले तो ठाकुर के पूरे परिवार को मार डाला, और फिर ठाकुर के दोनो हाथ काट दिये। इसे छुपाने ठाकुर शाल ओढ़कर रहता था। रामगढ़ में रहते हुये जय और वीरू धीरे धीरे गाँव वालों को पसंद करने लगे थे। जय को ठाकुर की विधवा बहू राधा (जया भादुरी) और वीरु को गाँव में तांगा चलाने वाली बसन्ती (हेमा मालिनी) से प्यार हो जाता है। इसी बीच जय-वीरू और गब्बर के बीच छोटी-मोटी तकरारें होती रहती हैं, और एक दिन उसके आदमी बसन्ती और वीरु को पकड़ कर ले जाते हैं। जय उनको बचाने जाता है, और वे तीनों वहां से बच निकलते हैं। इस लड़ाई में जय को गोली लग जाती है, जिससे उसकी मृत्यु हो जाती है। जय की मृत्यु से आक्रोशित वीरु अकेले गब्बर का पीछा करता है और उसे पकड़ लेता है। दोनों के बीच हाथापाई होती है, जिसमें वीरू गब्बर को मारने ही वाला होता है कि ठाकुर वहां आ जाता है और गब्बर को जीवित उसके हवाले करने का जय का वायदा याद दिलाता है। वीरु गब्बर को ठाकुर को सौंप देता है, जो अपने नुकीले जूतों से गब्बर के हाथ कुचल देता है और फिर उसे पुलिस के हवाले कर देता है। वीरू अकेला गाँव छोड़कर रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाता है, जहाँ बसंती उसका इंतज़ार कर रही होती है। राधा एक बार फिर अकेली ही रह जाती है। कलाकार 2 अमिताभ बच्चन - जय धर्मेन्द्र - वीरू संजीव कुमार - ठाकुर बलदेव सिंह (ठाकुर साहब) हेमा मालिनी - बसंती अमिताभ बच्चन - जय (जयदेव) जाया भादुरी - राधा अमज़द ख़ान - गब्बर सिंह ए के हंगल - इमाम साहब/रहीम चाचा सचिन - अहमद, इमाम का बेटा सत्येन्द्र कपूर - रामलाल इफ़्तेख़ार - नर्मलाजी, राधा के पिता लीला मिश्रा - मौसी विकास आनंद - जय और वीरू को लाने नियुक्त जेलर पी जयराज - पुलिस कमिश्नर असरानी - जेलर राज किशोर - कैदी मैक मोहन - साँभा विजू खोटे - कालिया केष्टो मुखर्जी - हरिराम हबीब - हीरा शरद कुमार - निन्नी मास्टर अलंकार - दीपक गीता सिद्धार्थ - दीपक की माँ (अतिथि पात्र) ओम शिवपुरी - इंस्पेक्टर साहब (अतिथि पात्र) जगदीप - सूरमा भोपाली (अतिथि पात्र) हेलन - बंजारा नर्तकी (अतिथि पात्र, 'महबूबा महबूबा' गाने में) जलाल आग़ा -बंजारा गायक (अतिथि पात्र, 'महबूबा महबूबा' गाने में) निर्माण विकास इस योजना की शुरुआत तब हुई, जब जंजीर फ़िल्म की रिलीज़ के लगभग ६ महीने बाद सलीम-जावेद जी॰ पी॰ सिप्पी और रमेश सिप्पी से मिले, और उन्हें इसकी चार पंक्ति की कहानी सुनाई।Chopra 2000 22–28 १९७३ से वे यह कहानी कई निर्माताओं को सुना चुके थे।Khan Salim Salim Khan Sukumaran Shradha Sholay, the Beginning OPEN Magazine 14 August 2010 http://www.openthemagazine.com/article/arts-letters/sholay-the-beginning en no https://web.archive.org/web/20171130151204/http://www.openthemagazine.com/article/arts-letters/sholay-the-beginning 30 November 2017 dmy-allChopra 2000 22–28 दो निर्माता/निर्देशकों (मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा) ने भी उनकी इस कहानी को सिरे से नकार दिया था।Chopra 2000 22–28 रमेश सिप्पी को उनकी अवधारणा अच्छी लगी और उन्होंने उन्हें आगे कार्य करने हेतु चुन लिया। इसकी वास्तविक योजना के अनुसार फ़िल्म में एक सैन्य अधिकारी द्वारा दो पूर्व सैनिकों को अपने परिवार की हत्या का बदला लेने के लिए चुना जाना था। बाद में उस सैन्य अधिकारी की जगह एक पुलिसवाले ने ले ली, क्योंकि सिप्पी को लगा कि इस तरह के दृश्य दिख़ाने के लिए अनुमति मिलना काफी कठिन रहेगा। सलीम-जावेद ने मिल कर इसकी कहानी को एक महीने में पूरा कर लिया। इसमें उनके नाम से लेकर उन लोगों के तौर तरीके तक शामिल थे।Chopra 2000 22–28 फ़िल्म की पटकथा और संवाद हिन्दी-उर्दू में,Cinar Alev Roy Srirupa Yahya Maha Visualizing Secularism and Religion: Egypt, Lebanon, Turkey, India 2012 University of Michigan Press 0472071181 117 https://books.google.com/books?id=q-5llJ_MsvgC&pg=PA117 en no https://web.archive.org/web/20171130151204/https://books.google.com/books?id=q-5llJ_MsvgC&pg=PA117 30 November 2017 dmy-all विशेषकर सिर्फ उर्दू में लिखे गए हैं।Chopra Anupama Sholay, the Making of a Classic 2000 Penguin Books 9780140299700 33 https://books.google.com/books?id=p8oM0k2UNzMC&pg=PA33 en no https://web.archive.org/web/20171130151204/https://books.google.com/books?id=p8oM0k2UNzMC&pg=PA33 30 November 2017 dmy-all सलीम-जावेद ने इन्हें मूलतः उर्दू लिपि में लिखा था, और फिर एक असिस्टेंट ने इन्हें देवनागरी में अनूदित किया, ताकि हिन्दी पढ़ने वालों को भी ये समझ आएं।Aḵẖtar Jāvīd Javed Akhtar Kabir Nasreen Munni Talking Films: Conversations on Hindi Cinema with Javed Akhtar 2002 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 9780195664621 49 https://books.google.com/books?id=_JILAQAAMAAJ en JA: I write dialogue in Urdu, but the action and descriptions are in English. Then an assistant transcribes the Urdu dialogue into Devnagari because most people read Hindi. But I write in Urdu. no https://web.archive.org/web/20140108035102/http://books.google.com/books?id=_JILAQAAMAAJ 8 January 2014 dmy-all यह फ़िल्म अकीरा कुरोसावा की १९५४ की फ़िल्म सेवन समुराई पर आधारित है,G. P. Sippy, Indian Filmmaker Whose Sholay Was a Bollywood Hit, Dies at 93 https://www.nytimes.com/2007/12/27/arts/27Sippy.html The New York Times 23 February 2011 Haresh Pandya 27 December 2007 no https://web.archive.org/web/20110828135232/http://www.nytimes.com/2007/12/27/arts/27Sippy.html 28 August 2011 और डकैती वेस्टर्न फ़िल्म का एक परिभाषित उदाहरण है, जिसमें भारतीय डकैती फ़िल्मों, विशेष रूप से मेहबूब ख़ान की मदर इंडिया (१९५७) और दिलीप कुमार की गंगा जमना (१९६१),Teo Stephen Eastern Westerns: Film and Genre Outside and Inside Hollywood 2017 Taylor & Francis 9781317592266 122 https://books.google.com/books?id=pi8lDwAAQBAJ&pg=PA122 en no https://web.archive.org/web/20171130151204/https://books.google.com/books?id=pi8lDwAAQBAJ&pg=PA122 30 November 2017 dmy-all और वेस्टर्न फ़िल्मों, विशेष रूप से सर्जीओ लियोन के स्पेगेटी वेस्टर्न जैसे कि वन्स अपॉन ए टाइम इन द वेस्ट (१९६८) के साथ-साथ द मैग्निफिशेंट सेवन (१९६०) के सम्मेलन शामिल हैं।http://www.rediff.com/movies/2002/aug/09dinesh.htm Why Sholay is a cult classic Raheja Dinesh 9 August 2009 1 December 2010 रीडिफ.कॉम no https://web.archive.org/web/20160304122450/http://www.rediff.com/movies/2002/aug/09dinesh.htm 4 March 2016 फ़िल्म के कथानक में कुछ तत्व अन्य भारतीय फ़िल्मों, जैसे मेरा गांव मेरा देश (१९७१) और खोटे सिक्के (१९७३) से लिए गए हैं।Chopra 2000 22–28 ट्रेन लूट के एक प्रयास का चित्रण करने वाला एक दृश्य गंगा जमना में एक समान दृश्य से प्रेरित था,Ghosh Tapan K. Bollywood Baddies: Villains, Vamps and Henchmen in Hindi Cinema 2013 SAGE Publications 9788132113263 55 https://books.google.com/books?id=0d6GAwAAQBAJ&pg=PA55 en no https://web.archive.org/web/20171130151204/https://books.google.com/books?id=0d6GAwAAQBAJ&pg=PA55 30 November 2017 dmy-all और इसकी तुलना नार्थ वेस्ट फ्रंटियर (१९५९) में इसी तरह के एक अन्य दृश्य से भी की गई है।Varma 2010 159–160 ठाकुर के परिवार के नरसंहार को दिखाते एक दृश्य की तुलना वन्स अपॉन ए टाइम इन द वेस्ट में मैकबेन परिवार के नरसंहार के साथ भी की गई है।Heide 2002 52 सैम पेकिनपा के वेस्टर्न, जैसे द वाइल्ड बंच (१९६९) और पैट गेटेट एंड बिली द किड (१९७३), और जॉर्ज रॉय हिल के बुच कैसिडी और सनडेंस किड (१९६९) ने भी शोले को प्रभावित किया था।http://www.sify.com/movies/bollywood-continues-to-lift-from-hollywood-scripts-news-bollywood-kkfrNmejhbc.html Bollywood continues to lift from Hollywood scripts 22 June 2009 Sify 22 December 2010 no https://web.archive.org/web/20101205195840/http://sify.com/movies/bollywood-continues-to-lift-from-hollywood-scripts-news-bollywood-kkfrNmejhbc.html 5 December 2010 चरित्र गब्बर सिंह को उसी नाम के एक वास्तविक डाकू पर बनाया गया था, जिसका १९५० के दशक में ग्वालियर के आसपास के गांवों में आतंक था। असली गब्बर सिंह जब किसी भी पुलिसकर्मी को पकड़ता था, तो उसके कान और नाक काटकर उसे छोड़ देता था, ताकि उसे अन्य पुलिसकर्मियों के लिए चेतावनी के रूप में दर्शाया जा सके।Khan 1981 88–89, 98 यह चरित्र गंगा जमना से भी प्रेरित था, जहां दिलीप कुमार का चरित्र गंगा एक डाकू था, जो गब्बर के समान ही खड़ीबोली और अवधी के मिश्रण से बनी एक बोली बोलता था।Chopra Anupama Shatrughan Sinha as Jai, Pran as Thakur and Danny as Gabbar? What ‘Sholay’ could have been https://scroll.in/article/745687/shatrughan-sinha-as-jai-pran-as-thakur-and-danny-as-gabbar-what-sholay-could-have-been Scroll 11 August 2015 no https://web.archive.org/web/20151108092131/http://scroll.in/article/745687/shatrughan-sinha-as-jai-pran-as-thakur-and-danny-as-gabbar-what-sholay-could-have-been 8 November 2015 dmy-all यह चरित्र सेर्गियो लियोन के फॉर ए फ्यू डॉलर्स मोर (१९६५) के खलनायक "एल इंडियो" (गिया मारिया वॉलोंटे द्वारा अभिनीत) से भी प्रभावित था।Banerjea 2005 183 सूरमा भोपाली, फ़िल्म का एक मामूली चरित्र, भोपाल के सूरमा नामक एक जंगल अधिकारी पर आधारित था, जो अभिनेता जगदीप का परिचित था। सूरमा को आखिरकार मुकदमा दायर करने की धमकी देनी पड़ी थी, जब फ़िल्म देखने वाले लोगों ने उन्हें भी एक लकड़हारे के रूप में संदर्भित करना शुरू कर दिया था।http://www.bollywoodhungama.com/news/features/how-soorma-bhopali-and-calendar-were-created/ How 'Soorma Bhopali' and 'Calendar' were created! 13 February 2013 24 April 2013 बॉलीवुड हँगामा no https://web.archive.org/web/20161121104754/http://www.bollywoodhungama.com/news/features/how-soorma-bhopali-and-calendar-were-created/ 21 November 2016 पात्र चुनाव शोले के निर्माताओं ने शुरुआत में गब्बर सिंह की भूमिका हेतु डैनी डेन्जोंगपा को चुना था, लेकिन वे इस किरदार हेतु तैयार नहीं हुए, क्योंकि वह पहले ही फिरोज ख़ान की धर्मात्मा (1975) में काम करने के लिए हामी भर चुके थे, जिसका फ़िल्मांकन समय भी शोले के समान ही था।http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/did-you-know-/Danny-Denzongpas-loss/articleshow/3422978.cms Danny Denzongpa’s loss 30 August 2008 द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया 26 January 2012 https://web.archive.org/web/20141113081159/http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/did-you-know-/Danny-Denzongpas-loss/articleshow/3422978.cms 13 November 2014 निर्माताओं की दूसरी पसंद अमजद ख़ान थे। वे इस किरदार को निभाने के लिए तैयार हो गए और अभिशप्त चम्बल नामक एक पुस्तक पढ़कर इस चरित्र की तैयारी करने लगे। चम्बल के डकैतों के शोषण के बारे में बताती यह पुस्तक उनकी साथी कलाकार जया भादुरी के पिता तरुण कुमार भादुरी ने लिखी थी।Chopra 2000 60 संजीव कुमार भी गब्बर सिंह की भूमिका निभाना चाहते थे, लेकिन सलीम-जावेद को लगा कि "उनकी पहले की भूमिकाओं के के कारण दर्शकों में उनके प्रति सहानुभूति थी; गब्बर को पूरी तरह घृणित होना था।" सिप्पी चाहते थे कि जय का किरदार शत्रुघन सिन्हा निभाएँ, लेकिन कई अन्य बड़े सितारे इस फ़िल्म में काम कर रहे थे, और इसलिए सिन्हा ने मना कर दिया। अमिताभ बच्चन उस समय इतने प्रसिद्ध नहीं हुए थे; उन्हें इस किरदार को पाने के लिए कठोर परिश्रम करना पड़ा था।Chopra 2000 22–28 सलीम-जावेद ने हालांकि १९७३ में ही शोले के लिए बच्चन के नाम की सिफारिश कर दी थी; क्योंकि जंजीर फ़िल्म में उनके अभिनय को देखकर ही सलीम-जावेद आश्वस्त हो गए थे कि बच्चन इस फ़िल्म के लिए सही अभिनेता हैं।Chaudhuri Diptakirti Written by Salim-Javed: The Story of Hindi Cinema’s Greatest Screenwriters 2015 Penguin Group 9789352140084 93 https://books.google.com/books?id=Cri9CgAAQBAJ&pg=PT93 en no https://web.archive.org/web/20171130151204/https://books.google.com/books?id=Cri9CgAAQBAJ&pg=PT93 30 November 2017 dmy-all क्योंकि फ़िल्म के कई सदस्यों ने कथानक पहले ही पढ़ लिया था, कई अभिनेता अलग अलग किरदार निभाने हेतु इच्छुक थे। प्राण को पहले ठाकुर बलदेव सिंह के किरदार के लिए चुना गया, लेकिन सिप्पी को संजीव कुमार इस किरदार हेतु बेहतर लगे।Chopra 2000 31–32 सलीम-जावेद ने भी ठाकुर के चरित्र के लिए दिलीप कुमार से बात की थी, लेकिन उन्होंने उस समय मन कर दिया; दिलीप कुमार ने बाद में माना कि यह उन कुछ फ़िल्मों में से एक थी जिसे छोड़ने पर उन्हें खेद था। धर्मेन्द्र को भी ठाकुर के किरदार में रुचि थी, लेकिन जब उन्हें सिप्पी ने बताया कि यदि वे ठाकुर बने तो संजीव कुमार को वीरू का किरदार दे दिया जायेगा और फिर हेमा मालिनी के साथ उनकी जोड़ी बनेगी।Chopra 2000 35–36 फ़िल्म के निर्माण के दौरान चार मुख्य किरदारों के कारण इसके निर्माण में काफी समय लग गया। इसका फ़िल्मांकन शुरू होने से चार महीने पूर्व ही अमिताभ ने जया से शादी कर ली। जया के माँ बनने के कारण इस फ़िल्म के निर्माण में और देरी हुई और इस फ़िल्म के प्रदर्शन के दौरान ही अभिषेक बच्चन का जन्म हुआ था। धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी के प्रेमालाप वाले दृश्यों के दौरान भी धर्मेन्द्र पूरी मेहनत पर पानी फेर देते थे, और इस कारण एक ही दृश्य के लिए कई बार मेहनत करनी पड़ रही थी। इस फ़िल्म के प्रदर्शित होने के पाँच वर्ष बाद इन दोनों ने भी शादी कर ली।Chopra 2000 91–105 फ़िल्मांकन thumb|रामनगर के पास स्थित रामदेवराबेट्टा; शोले के अधकतर हिस्सों को ऐसे ही चट्टानी इलाकों में फ़िल्माया गया था।|alt=A rocky outcrop such as those used in filming Sholay शोले के अधकतर हिस्सों को कर्नाटक के बंगलौर नगर के पास स्थित एक छोटे से कस्बे रामनगर के चट्टानी इलाकों में फ़िल्माया गया था।http://timesofindia.indiatimes.com/city/bengaluru/Ramgarh-of-Sholay-to-become-district/articleshow/2140172.cms? Ramgarh of Sholay to become district 23 December 2008 22 June 2007 The Times of India no https://web.archive.org/web/20151013005634/http://timesofindia.indiatimes.com/city/bengaluru/Ramgarh-of-Sholay-to-become-district/articleshow/2140172.cms 13 October 2015 फ़िल्म के सेटों तक सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित के लिए निर्माताओं को बैंगलोर राजमार्ग से रामनगर तक एक सड़क बनानी पड़ी थी।Chopra 2000 45 कला निर्देशक राम येदेकर द्वारा इस स्थल के पास ही एक पूरा कृत्रिम नगर बनाया गया था। ऑन-लोकेशन सेट की प्राकृतिक प्रकाश व्यवस्था से मेल ख़ाने के लिए, मुंबई के राजकमल स्टूडियो के पास भी एक जेल का सेट बनाया गया था।Roy 2003 225 बाद में थोड़े समय के लिए रामनगर के एक हिस्से को फ़िल्म के निर्देशक के सम्मान में "सिप्पी नगर" का नाम भी दिया गया था।http://www.rediff.com/entertai/1999/dec/30sholay.htm 'We are not remaking Sholay...' 30 December 1999 20 April 2013 Rediff no https://web.archive.org/web/20131021153903/http://www.rediff.com/entertai/1999/dec/30sholay.htm 21 October 2013 २०१० तक, "शोले चट्टानों" (जहां फ़िल्म की शूटिंग की गई थी) की एक यात्रा भी रामनगर आने वाले पर्यटकों के लिए उपलब्ध थी।http://www.hindustantimes.com/art-and-culture/sholay-ka-ramgarh/story-wFY6D54CpoRCtuqPKhk2LL.html Sholay ka Ramgarh Mekkad Salil 19 June 2010 27 September 2010 हिन्दुस्तान टाईम्स no https://web.archive.org/web/20151005114908/http://www.hindustantimes.com/art-and-culture/sholay-ka-ramgarh/story-wFY6D54CpoRCtuqPKhk2LL.html 5 October 2015 फ़िल्मांकन ३ अक्टूबर १९७३ को शुरू हुआ, जिसमें बच्चन और भादुरी का एक दृश्य फ़िल्माया गया।Chopra 2000 64 फ़िल्म का निर्माण अपने समय के लिए भव्य था; अक्सर कलाकारों के लिए पार्टियों और भोजों का आयोजन होता रहता था,Chopra 2000 66–67 और इस कारण इसका बजट तो बढ़ा ही, साथी ही इसे पूरा करने में ढाई साल लग गए। इसकी उच्च लागत का एक कारण यह भी था कि सिप्पी ने अपना वांछित प्रभाव प्राप्त करने के लिए एक बार फ़िल्माए जा चुके दृश्यों को कई बार दोबारा फ़िल्माया। गीत "ये दोस्ती" के ५ मिनट के गीत अनुक्रम को शूट करने में २१ दिन लग गए, दो छोटे दृश्य जिसमें राधा दीपक जलाती है, प्रकाश की समस्याओं के कारण २० दिनों में फ़िल्माए जा सके, और एक दृश्य, जिसमें गब्बर इमाम के बेटे की हत्या करता है, १९ दिनों में जाकर शूट हो पाया।Chopra 2000 77–79 ट्रेन में चोरी का दृश्य, जिसे मुंबई-पुणे रेलमार्ग पर पनवेल के पास फ़िल्माया गया था, ७ सप्ताह से भी अधिक समय में पूरा हो पाया।http://punemirror.in/index.aspx?page=article&sectid=2&contentid=20100804201008040006534547ec622a7&sectxslt=&pageno=1 Sholay continues to smoulder 4 August 2010 6 December 2010 Pune Mirror IANS https://web.archive.org/web/20120311160806/http://punemirror.in/index.aspx?page=article&sectid=2&contentid=20100804201008040006534547ec622a7&sectxslt=&pageno=1 11 March 2012 शोले स्टीरियोफोनिक साउंडट्रैक रखने और ७० मिमी वाइडस्क्रीन प्रारूप का उपयोग करने वाली पहली भारतीय फ़िल्म थीं।35 years on, the Sholay fire still burns http://movies.ndtv.com/bollywood/35-years-on-the-sholay-fire-still-burns-44425 NDTV 14 August 2010 12 April 2013 https://web.archive.org/web/20130612074406/http://movies.ndtv.com/bollywood/35-years-on-the-sholay-fire-still-burns-44425 12 June 2013 हालांकि, उस समय वास्तविक ७० मिमी कैमरे महंगे थे, इसलिए फ़िल्म को पहले पारंपरिक ३५ मिमी फ़िल्म पर ही शूट किया गया, और उससे बनी ४:३ की तस्वीरों को बाद में २.२:१ फ्रेम में परिवर्तित कर दिया गया। इस प्रक्रिया के बारे में सिप्पी ने कहा, "एक ७० मिमी [एसआईसी] प्रारूप बड़ी स्क्रीन का वास्तविक आनंद देता है और तस्वीर को और भी बड़ा बनाने के लिए इसका और अधिक आवर्धन करता है, लेकिन चूंकि मैं ध्वनि का भी बराबर प्रसार चाहता था, तो हमने 'छः ट्रैक-स्टीरियोफोनिक' ध्वनि का प्रयोग किया और फिर इसे बड़ी स्क्रीन के साथ संयुक्त किया। यह निश्चित रूप से एक विभेदक था।"http://economictimes.indiatimes.com/industry/media/entertainment/3d-effect-back-to-70mm-screens/articleshow/5780184.cms 3D effect: Back to 70mm screens? 30 December 2010 Raghavendra Nandini द इकॉनोमिक टाइम्स 10 April 2010 no https://web.archive.org/web/20170213005654/http://economictimes.indiatimes.com/industry/media/entertainment/3d-effect-back-to-70mm-screens/articleshow/5780184.cms 13 February 2017 फ़िल्म के पोस्टरों द्वारा भी इसके ७० मिमी की फ़िल्म के उपयोग पर जोर दिया गया, जिन पर फ़िल्म का नाम सिनेमास्कोप के लोगो से मेल खाता हुआ सा शैलीबद्ध किया गया था। फ़िल्म के पोस्टरों ने शोले को इससे पुरानी (तथा समकालीन) अन्य फ़िल्मों से अलग करने का भी काम किया; उनमें से एक में तो यह अंग्रेजी टैगलाइन भी जोड़ी गयी थी: "द ग्रेटेस्ट स्टारकास्ट एवर असेम्ब्लड - द ग्रेटेस्ट स्टोरी एवर टोल्ड" ("अब तक के सबसे बड़े कलाकार - अब तक की सबसे महानतम कहानी।")The Man Who Was Seen Too Much: Amitabh Bachchan on Film Posters (The Poster As Preview) http://www.tasveergharindia.net/cmsdesk/essay/106/index_1.html Tasveer Ghar Mazumdar, Ranjani 9 May 2013 no https://web.archive.org/web/20150512142358/http://www.tasveergharindia.net/cmsdesk/essay/106/index_1.html 12 May 2015 वैकल्पिक संस्करण वास्तव में जो फ़िल्म उस समय फ़िल्मायी गयी थी, उसका अंत बहुत अलग था। मूल कहानी में ठाकुर गब्बर को मार देता है, और इसके अलावा भी कई ऐसे ही दृश्य थे, जो मूल कहानी में अलग थे। गब्बर की मृत्यु का दृश्य, और इसके साथ साथ गब्बर द्वारा इमाम के बेटे की हत्या और ठाकुर के परिवार के नरसंहार वाले सभी दृश्यों को भारतीय सेंसर बोर्ड ने हटा दिया था।Chopra 2000 77–79 सेंसर बोर्ड को इस बात की चिंता थी कि कहीं इस तरह के हिंसात्मक दृश्यों को देखने से लोगों पर बुरा प्रभाव न पड़ जाये और लोग कानून की परवाह न कर अन्य लोगों से बदला लेने के लिए उन्हें इसी तरह मारने न लगें।http://im.rediff.com/movies/2001/feb/07anu.htm I didn't even know there was another ending to Sholay Das Ronjita 7 February 2001 Rediff 27 September 2010 no https://web.archive.org/web/20110715164950/http://im.rediff.com/movies/2001/feb/07anu.htm 15 July 2011 हालांकि सिप्पी ने इस दृश्य को फ़िल्म का हिस्सा बनाए रखने के लिए काफी लड़ाई लड़ी, पर बाद में इस दृश्य को सेंसर बोर्ड के निर्देशानुसार फिर से शूट किया गया, जिसमें ठाकुर के गब्बर को मारने से कुछ ही समय पहले पुलिस आ जाती है।http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/Changed-Sholay-climax-because-of-the-Censor-Board-Ramesh-Sippy/articleshow/19754678.cms? Changed 'Sholay' climax because of the Censor Board: Ramesh Sippy Prabhakar, Jyothi 28 April 2013 The Times of India 5 July 2013 no https://web.archive.org/web/20150817120148/http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/Changed-Sholay-climax-because-of-the-Censor-Board-Ramesh-Sippy/articleshow/19754678.cms 17 August 2015 इसके सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने से लेकर १५ सालों तक लोगों को सेंसर बोर्ड द्वारा निर्देशित दृश्य वाला फ़िल्म ही देखने को मिला था। १९९० में इसका बिना सेंसर किया हुआ ब्रिटिश संस्करण वीएचएस में प्रदर्शित हुआ।http://film.thedigitalfix.com/content.php?contentid=58178 Sholay (1975) Region 0 DVD Review 9 August 2010 The Digital Fix no https://web.archive.org/web/20161121171814/http://film.thedigitalfix.com/content.php?contentid=58178 21 November 2016 इसके बाद एरोस एंटरटेनमेंट ने इसके दो अलग डीवीडी संस्करण जारी किए; पहला, जिसमें बिना सेंसर की हुई २०४ मिनट की मूल फ़िल्म थी, और दूसरा, जिसमें सेंसर बोर्ड द्वारा स्वीकृत १९८ मिनट वाली फ़िल्म थी।http://www.zulm.net/modules.php?op=modload&name=News&file=article&sid=103&mode=&order=0 Sholay DVD review :: zulm.net :: definitive indian dvd guide 17 February 2001 zulm.net 3 July 2013 https://web.archive.org/web/20120811131134/http://www.zulm.net/modules.php?op=modload&name=News&file=article&sid=103&mode=&order=0 11 August 2012runtime The ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म क्लासिफिकेशन (BBFC) notes three running times of Sholay. The version that was submitted in film format to BBFC had a running time of 198 minutes. A video version of this had a running time of 188 minutes. BBFC notes that "When a film is transferred to video the running time will be shorter by approximately 4% due to the differing number of frames per second. This does not mean that the video version has been cut or re-edited." The director's cut was 204 minutes long.http://www.bbfc.co.uk/website/Classified.nsf/c2fb077ba3f9b33980256b4f002da32c/cde1a8bb41dd72ca8025660b0006032d?OpenDocument Sholay British Board of Film Classification 25 September 2012 11 May 2013 https://web.archive.org/web/20131021153210/http://www.bbfc.co.uk/website/Classified.nsf/c2fb077ba3f9b33980256b4f002da32c/cde1a8bb41dd72ca8025660b0006032d?OpenDocument 21 October 2013 विषय-वस्तु विद्वानों ने फ़िल्म के कई विषयों का उल्लेख किया है, जैसे कि हिंसा की महिमा, सामंती विचारों का परिवर्तन, सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने वालों और संगठित होकर लूट करने वालों के बीच बहस, समलैंगिक गैर रोमानी सामाजिक बंधन और राष्ट्रीय रूपरेखा के रूप में फ़िल्म की भूमिका। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के एक समाजशास्त्री कौशिक बनर्जी ने नोट किया कि शोले ने जय और वीरू के उदाहरणों के माध्यम से "नकली पौरूष के सहानुभूतिपूर्ण निर्माण" का प्रदर्शन किया।Banerjea 2005 164 बनर्जी ने यह भी तर्क दिया कि फ़िल्म के दौरान वैधता और आपराधिकता के बीच की नैतिक सीमा धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।Banerjea 2005 177–179 फ़िल्म विद्वान विमल डिसानायके इस बात से सहमत हैं कि फ़िल्म ने भारतीय सिनेमा में "हिंसा और सामाजिक व्यवस्था के बीच विकसित बोलीभाषा में एक नया मंच" लाने का काम किया।Dissanayake 1993 199 फ़िल्म विद्वान एम. माधव प्रसाद के अनुसार जय और वीरू एक हाशिए वाली आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो परंपरागत समाज में पेश की जाती है।Prasad 1998 156–160 प्रसाद ने यह भी कहा कि, जय और वीरू की आपराधिकता को किनारे करते हुए बदला लेने के तत्वों के माध्यम से जिस तरह कहानी में उन्हें शामिल किया गया, यह प्रतिक्रियात्मक राजनीति को दर्शाती है, और दर्शकों को सामंती आदेश स्वीकार करने के लिए मजबूर करती है। बनर्जी ने समझाया कि यद्यपि जय और वीरू दुष्ट हैं, लेकिन फिर भी वे अपनी भावनात्मक जरूरतों के कारण से मानवीय हैं, और इस तरह का द्वैतवाद उन्हें गब्बर सिंह की शुद्ध बुराई के सामने कमजोर बनाता है।Banerjea 2005 177–179 फ़िल्म के खलनायक गब्बर सिंह को उसकी व्यापक दुःखद क्रूरता के बावजूद दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रियाऐं प्राप्त हुई।Dissanayake 1993 199 डिसानायके बताते हैं कि दर्शकों को चरित्र के संवाद और व्यवहार से मोहित किया गया था, और इन्हीं तत्वों ने गब्बर के कारनामों पर पर्दा डालने का भी काम किया, जो कि किसी भारतीय ड्रामा फ़िल्म में पहली बार हुआ था।Dissanayake 1993 199 उन्होंने नोट किया कि फ़िल्म में हिंसा का चित्रण मोहक लेकिन असहनीय था।Dissanayake 1993 200 उन्होंने आगे कहा कि, "पुरानी ड्रामा फ़िल्मों के विपरीत, जिनमें मादा शरीर दर्शकों के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित रखता था, शोले में एक नर केंद्रबिंदु पर है; यह एक युद्ध के मैदान सा है जहां अच्छाई और बुराई के बीच सर्वोच्चता के लिए प्रतिस्पर्धा चलती है।Dissanayake 1993 200 डिसानायके का तर्क है कि शोले को राष्ट्रीय रूपरेखा के एक प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है: इसमें एक आरामदायक तार्किक कथा की कमी है, यह सामाजिक स्थिरता को बार-बार चुनौतीपूर्ण दिखाता है, और साथ ही इसमें भावनाओं की कमी के कारण मानव जीवन का अवमूल्यन भी दर्शाया गया है। एक साथ रखने पर, ये सभी तत्व भारत का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करते हैं।Dissanayake 1993 201 शोले की कथा शैली, इसकी हिंसा, और बदले और सतर्कता की कार्रवाई की तुलना कभी-कभी विद्वानों द्वारा इसकी रिलीज के समय भारत में राजनीतिक अशांति से की जाती है। यह तनाव १९७५ में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल में समाप्त हुआ।Hayward 2006 63–64 Holtzman 2011 118 डिसानायके और सहाय ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि, हालांकि फ़िल्म में कई तत्व हॉलीवुड की वॅस्टर्न शैली की फ़िल्मों से लिये गए थे, विशेष रूप से इसके दृश्य, परन्तु फिर भी यह फ़िल्म सफलतापूर्वक "भारतीयकृत" थी।Dissanayake Sahai 1992 125 Dissanayake 1993 197 उदाहरण के तौर पर, विलियम वैन डेर हाइड ने शोले में एक नरसंहार दृश्य की तुलना वन्स अपॉन ए टाइम इन द वेस्ट के एक दृश्य से की थी। हालांकि दोनों फ़िल्में तकनीकी शैली में समान थी, पर शोले ने भारतीय परिवारों के मूल्यों और मेलोड्रामैटिक परंपरा पर जोर दिया, जबकि वेस्टर्न फ़िल्में दृष्टिकोण में अधिक भौतिकवादी और स्र्द्ध थी।Heide 2002 52 इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ हिंदी सिनेमा में मैथिली राव ने नोट किया कि शोले वेस्टर्न शैली को "सामंतीवादी विचार" में ढाल देती है। शिकागो रीडर के टेड शेन ने शोले की "हिस्टोरिकल विज़ुअल स्टाइल" और अंतःक्रियात्मक "पॉपुलिस्ट संदेश" को नोट किया।http://www.chicagoreader.com/chicago/sholay/Film?oid=1063841 Sholay Chicago Reader Shen Ted 13 December 2002 11 April 2013 no https://web.archive.org/web/20160304093713/http://www.chicagoreader.com/chicago/sholay/Film?oid=1063841 4 March 2016 सांस्कृतिक आलोचक और इस्लामवादी विद्वान ज़ियाउद्दीन सरदार ने अपनी पुस्तक द सीक्रेट पॉलिटिक्स ऑफ अ डेजर्स: इनोसेंस, कल्पपेबिलिटी एंड इंडियन पॉपुलर सिनेमा में शोले में मुस्लिम और महिला पात्रों की रूढ़िवादीता पर प्रहार किया, जिसे उन्होंने "निर्दोष ग्रामीणों के मजाक" कहा।Sardar 1998 48-49 सरदार ने नोट किया कि फ़िल्म में दो प्रमुख मुस्लिम पात्र थे; सूरमा भोपाली (एक भद्दा आपराधी), और दूसरा डकैतों का एक असहाय शिकार (इमाम); इसके अतिरिक्त एक मादा चरित्र (राधा) का एकमात्र कार्य मौन रहकर भाग्य का सामना करना है, जबकि दूसरी महिला पात्र (बसंती) एक खूबसूरत ग्रामीण महिला के अलावा कुछ भी नहीं है। कुछ विद्वानों ने संकेत दिया है कि शोले में समलैंगिक गैर प्रेम प्रसंगयुक्त विषय भी हैं। Gopinath G. Queering Bollywood https://archive.org/details/sim_journal-of-homosexuality_2000_39_3-4/page/283 10.1300/J082v39n03_13 Journal of Homosexuality 39 3–4 283–297 2000 11133137 0091-8369 Anjaria U. 10.1080/14746689.2012.655103 'Relationships which have no name': Family and sexuality in 1970s popular film South Asian Popular Culture 10 23–35 2012 टेड शेन फ़िल्म में जय और वीरू के बीच दिखाए गए संबंधों का वर्णन कैंप शैली की तुलना में करते हैं। अपनी पुस्तक बॉलीवुड एंड ग्लोबललाइजेशन: इंडियन पॉपुलर सिनेमा, नेशन एंड डायस्पोरा में दीना होल्ट्ज़मैन का कहना है कि जय की मृत्यु ने दोनों पुरुष पात्रों के बीच के संबंधों को तोड़ने का काम किया ताकि एक मानक संबंध स्थापित किया जा सके (वीरू और बसंती के मध्य)।Holtzman 2011 111-113 संगीत शोले ध्वनि-पट्टी राहुल देव बर्मन 1975 1975 बॉलीवुड संगीत ध्वनि-पट्‍टी 28 59 यूनिवर्सल म्यूज़िक इंडियापॉलीडोर रिकॉर्ड्स राहुल देव बर्मन काला सोना 1975 धरम करम 1975 गीत "महबूबा मेहबूबा" राहुल देव बर्मन ने गाया, जिसे हेलन और जलाल आगा पर फ़िल्माया गया था। यह गीत बिनाका गीत माला १९७५ वार्षिक सूची पर २४वीं पायदान पर तथा १९७६ वार्षिक सूची पर ५वीं पायदान पर रही। http://en.wikipedia.org/wiki/Binaca_Geetmala_annual_list_1975 बिनाका गीत माला की 1975 वार्षिक सूची 27 जून 2011 https://web.archive.org/web/20120312025629/http://en.wikipedia.org/wiki/Binaca_Geetmala_annual_list_1975 12 मार्च 2012 live https://english.manoramaonline.com/entertainment/music/2019/03/20/holi-songs-celebrations-festival-playlist.html Play Holi Song गीत "कोई हसीना जब रूठ जाती है" बिनाका गीत माला की १९७५ वार्षिक सूची पर ३०वीं पायदान पर और १९७६ वार्षिक सूची पर २०वीं पायदान पर रही। http://en.wikipedia.org/wiki/Binaca_Geetmala_annual_list_1976 बिनाका गीत माला की 1976 वार्षिक सूची 27 जून 2011 https://web.archive.org/web/20081004135131/http://en.wikipedia.org/wiki/Binaca_Geetmala_annual_list_1976 4 अक्तूबर 2008 live गीत "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे" बिनाका गीत माला की १९७६ वार्षिक सूची पर ९वीं पायदान पर रही। गाने गायन राहुल देव बर्मन आनन्द बक्शी कोई हसीना जब रूठ जाती है किशोर कुमार, हेमा मालिनी ४:०० महबूबा महबूबा राहुल देव बर्मन ३:५४ ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे किशोर कुमार, मन्ना डे ५:२१ ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे दुखद किशोर कुमार १:४९ हाँ जब तक है जाँ लता मंगेशकर ५:२६ होली के दिन दिल खिल जाते है किशोर कुमार, लता मंगेशकर, समूह ५:४२ रोचक तथ्य इसी वर्ष (१९७५) धर्मेन्द्र तथा अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत फ़िल्म चुपके चुपके भी रिलीज़ हुई थी जो आगे चलकर कई भावी फ़िल्मों के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इस फ़िल्म का एक और अन्त रखा गया था जिसमें गब्बर सिंह मर जाता है। इस सीन को फ़िल्म में नहीं दिखाया गया था। काफी सालों बाद इस सीन को कुछ एक टीवी चनलों पर दिखाया गया था। फ़िल्म के लिए एक कव्वाली भी रिकॉर्ड की गयी थी जो फ़िल्म की अवधि बढ़ने के कारण शामिल नहीं की गयी। फ़िल्म के एल पी रिकॉर्ड पर ये उपलब्ध है। परिणाम कमाई शोले फ़िल्म १५ अगस्त १९७५ को भारत के स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर मुंबई में रिलीज़ हुई। नकारात्मक समीक्षा और प्रभावी प्रचार की कमी के कारण, शुरु के दो सप्ताह तक यह फ़िल्म कुछ खास नहीं चली, हालांकि सकारात्मक मौखिक प्रचार के चलते तीसरे सप्ताह से इसके दर्शक बढ़ने लगे।Chopra 2000 169 शुरुआती हफ़्तों में फ़िल्म की धीमी कमाई अवधि के दौरान, निर्देशक और लेखक ने फ़िल्म के कुछ दृश्यों को फिर से फ़िल्माने पर विचार किया ताकि अमिताभ बच्चन का चरित्र मर न सके। हालांकि जैसे ही फ़िल्म ने रफ्तार पकड़ी, तो उन्होंने इस विचार को त्याग दिया।Chopra 2000 164 धीरे धीरे फ़िल्म के संवाद प्रसिद्ध होने लगे,Banerjea 2005 177–179 और इससे यह रातो रात सनसनी बन गयी। इसके बाद ११ अक्टूबर १९७५ को इसे मुंबई के बाहर अन्य क्षेत्रों में, विशेषकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बंगाल तथा हैदराबाद में रिलीज़ किया गया।Chopra 2000 173 शोले १९७५ की सर्वाधिक कमाई करने वाली फ़िल्म बनी, और एक फ़िल्म रैंकिंग वेबसाइट, बॉक्स ऑफिस इंडिया ने इसे कमाई के आधार पर "आल टाइम ब्लॉकबस्टर" का दर्जा दिया है। इस फ़िल्म ने भारत में ६० स्वर्ण जयंतियों तक प्रदर्शन का कीर्तिमान भी बनाया।A golden jubilee means that a film has completed 50 consecutive weeks of showing in a single theatre. साथ ही यह फ़िल्म भारतीय फ़िल्मों के इतिहास में ऐसी पहली फ़िल्म बनी, जिसने सौ से भी ज्यादा सिनेमा घरों में रजत जयंती मनाई।A silver jubilee means that a film has completed 25 consecutive weeks of showing in a single theatre. मुम्बई के मिनर्वा सिनेमाघर में तो इसे लगातार ५ वर्षों तक प्रदर्शित किया गया। शोले तब तक किसी सिनेमाघर पर सबसे ज्यादा समय तक प्रदर्शित होने वाली भारतीय फ़िल्म रही, जब तक दिलवाले दुल्हनिया ले जयंगे (१९९५) ने २००१ में २८६ सप्ताह का इसका रिकॉर्ड तोड़ नहीं दिया।Elliott Payne Ploesch 2007 54 शोले के कुल बजट और बॉक्स ऑफिस आय पर सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कई फ़िल्म वेबसाइटें इसकी सफलता के अनुमान प्रदान करती हैं। बॉक्स ऑफिस इंडिया के अनुसार, अपने प्रथम प्रदर्शन के दौरान इसने १५ करोड़ रुपयों (लगभग १६,७७८,००० अमेरिकी डॉलर)exchange की शुद्ध सकल (नेट ग्रॉसnettgross According to the website "Box Office India", film tickets are subject to "entertainment tax" in India, and this tax is added to the ticket price at the box office window of theatres. The amount of this tax is variable among states. "Nett gross figures are always after this tax has been deducted while gross figures are before this tax has been deducted." Although since 2003 the entertainment tax rate has significantly decreased, as of 2010, gross earnings of a film can be 30–35% higher than nett gross, depending on the states where the film is released.http://www.boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=315&catName=UmVhZCBNb3Jl https://web.archive.org/web/20131020180004/http://www.boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=315&catName=UmVhZCBNb3Jl 20 October 2013 Box Office in India Explained Box Office India 14 May 2013) कमाई की, जो कि इसकी ३ करोड़ की लागत (१९७५ में लगभग ३,३५५,००० अमेरिकी डॉलरexchange The exchange rate in 1975 was 8.94 Indian rupees () per 1 US dollar (US$).Statistical Abstract of the United States 1977 917) से कई गुना था।Chopra 2000 143http://boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=124&catName=MTk3MC0xOTc5 https://web.archive.org/web/20131014062240/http://boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=124&catName=MTk3MC0xOTc5 14 October 2013 Top Earners 1970–1979 – BOI Box Office India 24 February 2012 इससे यह उस समय तक की सर्वाधिक कमाई करने वाली फ़िल्म बनी, और इसकी कमाई के उस समय के ये रिकॉर्ड उन्नीस वर्ष के लिए अखंड रहे, जो कि किसी फ़िल्म के लिए इस सूची के शीर्ष पर रहने का सबसे लंबा समय भी है। १९७० के दशक की मूल रिलीज़ के अतिरिक्त, फ़िल्म को १९८० के दशक के उत्तरार्ध में, और फिर १९९० के दशक के उत्तरार्ध में भी पुन: रिलीज़ किया गया, जिससे इसकी कुल कमाई में वृद्धि होती रही।http://boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=323&catName=QWJvdXQgSW5mbGF0aW9uIERhdGE= https://web.archive.org/web/20140106184319/http://boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=323&catName=QWJvdXQgSW5mbGF0aW9uIERhdGE%3D 6 January 2014 About Inflation Figures – BOI Box Office India 24 February 2012 yes अक्सर यह उद्धृत किया जाता है कि मुद्रास्फीति के आंकड़ों को समायोजित करने के बाद, शोले भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फ़िल्मों में से एक है, हालांकि इस तरह के आंकड़े निश्चितता से ज्ञात नहीं हैं।http://boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=350 https://web.archive.org/web/20131014214254/http://boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=350 14 October 2013 The Biggest Blockbusters Ever In Hindi Cinema Box Office India 13 April 2013 २०१२ में, बॉक्स ऑफिस इंडिया ने शोले की समायोजित शुद्ध सकल कमाई १.६३ अरब रुपये (२५ मिलियन अमेरिकी डॉलर) दर्शायी,nettgross जबकि भारतीय फ़िल्मों के कारोबार पर २००९ की एक रिपोर्ट में अंग्रेजी समाचारपत्र टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसकी समायोजित सकल कमाई ३ अरब रुपये (४६ मिलियन अमेरिकी डॉलर) बतायी थी।Kazmi Nikhat Sholay adjusted gross http://timesofindia.indiatimes.com/india/Box-Office-With-Rs-200cr-in-kitty-Ghajini-rewrites-records/articleshow/3965713.cms The Times of India 23 February 2011 12 January 2009 no https://web.archive.org/web/20140430071524/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Box-Office-With-Rs-200cr-in-kitty-Ghajini-rewrites-records/articleshow/3965713.cms 30 April 2014 समीक्षा शोले को शुरुआत में समीक्षकों से अति नकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थी। समकालीन आलोचकों में, इंडिया टुडे के केएल अमलादी ने फ़िल्म को "बुझे हुए शोले" और "एक गंभीर दोषपूर्ण प्रयास" कहा।Chopra 2000 161 फ़िल्मफेयर ने कहा कि यह फ़िल्म भारतीय समाज के साथ वेस्टर्न शैली की एक असफल मिश्रण थी, जिसने इसे "नकली वेस्टर्न फ़िल्म - न तो यहां की और न वहां की ही" बना दिया।Chopra 2000 161 अन्य समीक्षकों ने इसे "ध्वनि और क्रोध मात्र, अर्थहीन" और १९७१ की फ़िल्म मेरा गाँव मेरा देश का "निम्न दरजे का पुनर्निर्माण" करार दिया। व्यापार पत्रिकाओं और स्तंभकारों ने शुरुआत में फ़िल्म को फ्लॉप तक कह दिया था।Chopra 2000 161–168 जर्नल स्टडीज: ए आयरिश क्वार्टरली रिव्यू में १९७६ में छपे एक लेख में लेखक माइकल गैलाघर ने फ़िल्म की तकनीकी उपलब्धियों की तो सराहना की, लेकिन अन्य सभी तत्वों की आलोचना करते हुए लिखा: "इसके दृश्य वास्तव में अभूतपूर्व हैं, लेकिन हर दूसरे स्तर पर यह असहनीय है; यह निराकार और बेतुकी है, मानव छवि में अनौपचारिक तथा सतही है, और इसे कुछ हद तक हिंसा का बुरा टुकड़ा भी कहा जा सकता है।"Gallagher 1976 344 समय बीतने के साथ, शोले को मिली प्रतिक्रियाओं में काफी अंतर आया; इसे अब एक "कल्ट" या "क्लासिक" फ़िल्म, और साथ ही हिंदी-भाषा में बनी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में से एक माना जाता है।Chopra 2000 3 २००५ की बीबीसी की एक समीक्षा में, फ़िल्म के अच्छी तरह से लिखे गए पात्रों और सरल पटकथा की सराहना की गई, हालांकि असरानी और जगदीप की हास्यपूर्ण चरित्रों को अनावश्यक कहा गया।http://www.bbc.co.uk/films/2005/08/17/sholay_2005_review.shtml Sholay (1975) Rajput Dharmesh 17 August 2005 BBC 16 April 2013 no https://web.archive.org/web/20121007025157/http://www.bbc.co.uk/films/2005/08/17/sholay_2005_review.shtml 7 October 2012 फ़िल्म की ३५वीं वर्षगांठ पर हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा था कि यह "कैमरे के काम के साथ-साथ संगीत के मामले में एक ट्रेलब्लैज़र थी" और "व्यावहारिक रूप से इसका हर दृश्य, संवाद या यहां तक ​​कि हर छोटे से छोटा चरित्र भी हाइलाइट में रहा था।"Sholay completes 35 years http://www.hindustantimes.com/entertainment/sholay-completes-35-years/story-gZIxKfIxNvLThEiQ05KYWP.html 15 August 2010 Hindustan Times 27 September 2010 no https://web.archive.org/web/20151005160039/http://www.hindustantimes.com/entertainment/sholay-completes-35-years/story-gZIxKfIxNvLThEiQ05KYWP.html 5 October 2015 २००६ में लिंकन सेंटर की फ़िल्म सोसाइटी ने शोले को एक असाधारण फ़िल्म कहा, और साहसिक तथा कॉमेडी दृश्यों, संगीत और नृत्य के इसके निर्बाध मिश्रण के रूप में वर्णित करते हुए इसे "निर्विवाद क्लासिक" कहा।http://filmlinccom.siteprotect.net/wrt/onsale06/sholay.html Sholay 21 December 2010 Film Society of Lincoln Center https://web.archive.org/web/20131021150641/http://filmlinccom.siteprotect.net/wrt/onsale06/sholay.html 21 अक्तूबर 2013 dead शिकागो रिव्यू के समीक्षक टेड शेन ने २००२ में इसके विधिवत लिखे गए कथानक और "स्लैपडैश" छायांकन के लिए फ़िल्म की आलोचना की और कहा कि फ़िल्म "स्लैपस्टिक और मेलोड्रामा के बीच घूमती रहती" है। निर्माता जी.पी. सिप्पी के मृत्युलेख में, न्यूयॉर्क टाइम्स समाचारपत्र में लिखा गया था कि शोले ने "हिंदी फ़िल्म निर्माण में क्रांतिकारी बदलाव किया और यह भारतीय लिपि लेखन में सच्ची पेशेवरता लाई।" पुरस्कार शोले को नौ फ़िल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया था, लेकिन एकमात्र विजेता एम एस शिंदे थे, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ संपादन के लिए यह पुरस्कार जीता।https://sites.google.com/site/deep750/FilmfareAwards.pdf?attredirects=0 FILMFARE NOMINEES AND WINNER टाइम्स समूह 17 September 2015 https://web.archive.org/web/20151019034032/https://sites.google.com/site/deep750/FilmfareAwards.pdf?attredirects=0 19 October 2015 no फ़िल्म ने १९७६ के बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन पुरस्कार (हिंदी विभाग) में भी तीन पुरस्कार जीते: अमजद ख़ान ने "सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता", द्वारका दिवेचा ने "सर्वश्रेष्ठ छायांकन (रंगीन)" और राम येडेकर ने "सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक" का पुरस्कार प्राप्त किया।http://www.bfjaawards.com/legacy/pastwin/197639.htm 1976: 39th Annual BFJA Awards Bengal Film Journalists' Association 2 December 2010 19 January 2008 https://web.archive.org/web/20080119012515/http://www.bfjaawards.com/legacy/pastwin/197639.htm yes शोले को २००५ में पचासवें फ़िल्मफेयर पुरस्कारों में "पचास वर्षों की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म" के विशेष पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।https://www.filmfare.com/awards/filmfare-awards/ All Filmfare Awards Winners Filmfare https://archive.today/20180227163020/https://www.filmfare.com/awards/filmfare-awards/ 27 February 2018 no 27 February 2018 dmy-all + कुल प्राप्त पुरस्कार वर्ष नामांकित व्यक्ति पुरस्कार परिणाम१९७६ एम एस शिंदे फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संपादक पुरस्कार जी पी सिप्पीhttp://filmfareawards.indiatimes.com/articleshow/articleshow/366907.cms 51वीं फिल्मफेयर पुरस्कार नामांकन सूची, 1975 22 जून 2011 https://archive.today/20120707224844/http://filmfareawards.indiatimes.com/articleshow/articleshow/366907.cms 7 जुलाई 2012 live फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार रमेश सिप्पी फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार संजीव कुमार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार अमज़द ख़ान फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार असरानी फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता पुरस्कार जावेद अख्तर, सलीम ख़ान फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ कथा पुरस्कार राहुल देव बर्मन फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संगीतकार पुरस्कार आनंद बख्शी (गीत "महबूबा महबूबा" के लिए) फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार पुरस्कार राहुल देव बर्मन ("महबूबा महबूबा" गाने के लिए) फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक पुरस्कार अमज़द ख़ान सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता - बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन पुरस्कार (हिंदी विभाग) द्वारका दिवेचा सर्वश्रेष्ठ छायांकन (रंगीन) - बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन पुरस्कार (हिंदी विभाग) राम येडेकर सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक - बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन पुरस्कार (हिंदी विभाग) विरासत शोले को कई "सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म" सम्मान प्राप्त हुए हैं। इसे १९९९ में बीबीसी इंडिया द्वारा "सहस्त्राब्द की फ़िल्म" घोषित किया गया था। २००२ में ब्रिटिश फ़िल्म इंस्टीट्यूट की १० सर्वश्रेष्ठ भारतीय फ़िल्मों की सूची के शीर्ष पर स्थान प्राप्त हुआ,Top 10 Indian Films British Film Institute 2002 http://www.bfi.org.uk/features/imagineasia/guide/poll/india 14 June 2012 https://web.archive.org/web/20110515101729/http://www.bfi.org.uk/features/imagineasia/guide/poll/india/ 15 May 2011 और २००४ में स्काई डिजिटल के एक सर्वेक्षण में दस लाख ब्रिटिश भारतीयों के मत से इसे सर्वश्रेष्ठ भारतीय फ़िल्म का दर्जा दिया गया।http://www.highbeam.com/doc/1P1-94953889.html 'Sholay' voted best Indian movie New Straits Times Thambirajah, Mohan 27 May 2004 25 April 2013 SHOLAY has been voted the greatest Indian movie in a research by Sky Digital of one million Indians in Britain. https://web.archive.org/web/20160225042453/https://www.highbeam.com/doc/1P1-94953889.html 25 February 2016 Highbeam २०१० की टाइम मैगज़ीन की "बेस्ट ऑफ बॉलीवुड" सूची में यह फ़िल्म शामिल थी,Corliss Richard http://content.time.com/time/specials/packages/article/0,28804,2022076_2022067_2022045,00.html Sholay – 1975 – Best of Bollywood Time 27 October 2010 30 July 2012 no https://web.archive.org/web/20130828050259/http://content.time.com/time/specials/packages/article/0%2C28804%2C2022076_2022067_2022045%2C00.html 28 August 2013 और २०१३ की सीएनएन-आईबीएन की "१०० महानतम भारतीय फ़िल्मों" की सूची में भी इसे शामिल किया गया था।http://ibnlive.in.com/photogallery/13200-19.html 100 Years of Indian Cinema: The 100 greatest Indian films of all time सीएनएन न्यूज़18 17 April 2013 12 February 2014 https://web.archive.org/web/20130425234438/http://ibnlive.in.com/photogallery/13200-19.html 25 April 2013 शोले ने कई फ़िल्मों और कथाओं को प्रेरित किया, और फ़िल्मों की एक शैली, "करी वेस्टर्न", शैली को मुख्य धारा में स्थापित कर दिया, जो स्पैगेटी वेस्टर्न फ़िल्म शैली का भारतीय रूपांतरण है। मदर इंडिया (१९५७) और गंगा जमना (१९६१) जैसी पूर्व भारतीय डकैती फ़िल्मों में इसकी जड़ें होने की वजह से इस शैली को डकैती वेस्टर्न भी कहा जाता है। यह एक प्रारंभिक और सबसे निश्चित मसाला फ़िल्म भी थी, और इसने ही "मल्टी-स्टार" फ़िल्मों के लिए प्रारंभिक मंच त्यार किया। यह फ़िल्म बॉलीवुड के पटकथा लेखकों के लिए वाटरशेड थी, जिन्हें शोले से पहले अच्छी तरह से भुगतान नहीं किया जाता था; फ़िल्म की सफलता के बाद, इसके लेखक जोड़ी सलीम-जावेद सितारे बन गए और पटकथा लेखन एक सम्मानित पेशा माना जाने लगा। बीबीसी ने गब्बर सिंह की तुलना स्टार वार्स के चरित्र डार्थ वेदर से करते हुए शोले को "बॉलीवुड की स्टार वार्स" के रूप में वर्णित किया है, क्योंकि उनके अनुसार इसने बॉलीवुड पर वह प्रभाव डाला, जो स्टार वार्स (१९७७) ने हॉलीवुड पर डाला था। फ़िल्म के कुछ दृश्यों और संवादों ने भारत में काफी प्रतिष्ठा अर्जित की, जैसे कि गब्बर के संवाद, जैसे "कितने आदमी थे", "जो डर गया, समझो मर गया", और "बहत याराना लागता है" इत्यादि तो अति प्रसिद्ध हुए। ये और फ़िल्म के अन्य लोकप्रिय संवाद लोगों की दैनिक स्थानीय भाषा का हिस्सा बन गए थे। फ़िल्म के पात्रों और संवादों को लोकप्रिय संस्कृति में संदर्भित और पैरोडी किया जाना जारी है। गब्बर सिंह, फ़िल्म का दुखद खलनायक, हिंदी फ़िल्मों में एक ऐसा युग बनकर उभरा, जो कि "उन खलनायकों के युग के रूप में प्रतीत होता है", जो कहानी के संदर्भ को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे शान (१९८०) का शाकाल (कुलभूषण खरबंदा द्वारा अभिनीत), मिस्टर इंडिया (१९८७) का मोगम्बो (अमरीश पुरी) और त्रिदेव (१९८९) का भुजंग (अमरीश पुरी)। फ़िल्मफेयर द्वारा २०१३ में गब्बर सिंह को भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित खलनायक के तौर पर नामित किया गया था, और फ़िल्म के चारों अभिनेता "८० आइकॉनिक प्रदर्शन" की २०१० की सूची में शामिल किये गए थे। टिप्पणियां 30em सन्दर्भ 30em ग्रन्थ सूची 30em Kaur Raminder Sinha Ajay J Bollyworld: Popular Indian Cinema Through A Transnational Lens Banerjea Koushik 'Fight Club': Aesthetics, Hybridisation and the Construction of Rogue Masculinities in Sholay and Deewar https://books.google.com/books?id=DGtNhQsLl7wC&pg=PA176 2005 SAGE 978-0-7619-3321-2 harv Banerjee Shampa Srivastava Anil One Hundred Indian Feature Films: An Annotated Filmography https://books.google.com/books?id=zX4GY37rG8kC&pg=PA16 1988 Taylor & Francis 978-0-8240-9483-6 harv Chopra Anupama Sholay – The Making of a Classic https://books.google.com/books?id=p8oM0k2UNzMC 2000 Penguin Books, India 0-14-029970-X harv 1 जून 2018 https://web.archive.org/web/20131009030303/http://books.google.com/books?id=p8oM0k2UNzMC 9 अक्तूबर 2013 live Dissanayake Wimal The concepts of evil and social order in Indian melodrama: an evolving dialectic 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