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मोती महल (दारागंज)

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मोती महल मोती महल hi 25.4513 N 81.8845 E type:landmark_region:IN-UP inline,title टोडरमल किला; राजा टोडरमल का किला किला, महल मुगल वास्तुकला दारागंज, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत भारत 1585 1590 अग्रवाल परिवार लखौरी ईंट 40000 sqft m2 on मोती महल (अर्थात् मोती पैलेस), जिसे टोडरमल किला और राजा टोडरमल का किला भी कहा जाता है, दारागंज, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित एक ऐतिहासिक इमारत और किला है। यह गंगा के निकट स्थित है और इसका निर्माण मुगल सम्राट अकबर के दरबार में प्रशासक रहे राजा टोडर मल ने कराया था। यह इमारत 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की मानी जाती है।Tripathi Ankur अकबर के नवरत्न राजा टोडरमल ने Prayagraj के दारागंज में बनवाया था अपना किला, आज ढहने के कगार पर है यह किला https://www.jagran.com/uttar-pradesh/allahabad-city-akbar-navratna-king-todarmal-built-his-fort-in-daraganj-of-prayagraj-and-today-this-fort-is-on-the-verge-of-collapse-21374653.html दैनिक जागरण 17 फ़रवरी 2021 hiTodarmal's Moti Mahal decaying https://www.hindustantimes.com/india/todarmal-s-moti-mahal-decaying/story-JYNXLc8Z8eItELMrRWleFO.html हिंदुस्तान टाइम्स 23 नवंबर 2006मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में शुमार राजा टोडरमल के महल पर किराएदारों का कब्जा, वंशज परेशान, बोले- हमें मिलता है बेहद कम किराया https://www.jansatta.com/rajya/raja-todarmal-palace-occupied-by-tenants-descendants-are-troubled-said-we-are-given-really-less-rent-jsp/1162614/ जनसत्ता 22 सितंबर 2019 hi मोती महल में 1911 से 1933 तक दारागंज हाई स्कूल संचालित हुआ। किले का एक हिस्सा वर्तमान में विरासत आवास के रूप में संचालित किया जाता है। इतिहास मोती महल की नींव 1585 में रखी गई थी और इसका निर्माण लगभग 1590 में पूरा हुआ। इसका निर्माण अकबर के इलाहाबाद किले के निर्माण के दौरान हुआ था और किले के निर्माण के समय टोडर मल ने इसका उपयोग शिविर के रूप में किया था। यह संरचना लगभग 40,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली थी और इसमें दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, सैनिकों के लिए कमरे, अस्तबल और नक्काशीदार आधारों वाला एक दरबार कक्ष शामिल था। दूसरी मंजिल के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक बड़ा कक्ष अभी भी मौजूद है, जबकि पश्चिमी हिस्से के एक कमरे की पहचान परिवार द्वारा टोडर मल के कमरे के रूप में की गई है। इमारत का निर्माण लखौरी ईंटों से किया गया था। इसमें आवासीय कक्ष, रसोई और एक मंदिर भी था तथा मूल रूप से इसके छह प्रवेश द्वार थे। मोती महल का उपयोग टोडर मल के सचिवालय के रूप में किया जाता था। पहली मंजिल पर शस्त्रागार तथा मंत्रियों और सैन्य कमांडरों के रहने के लिए कक्ष थे।दरकने की कगार पर टोडरमल का मोती महल https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/allahabad/totaramal-s-moti-mahal-on-the-verge-of-decree अमर उजाला 3 जून 2018 hi टोडर मल के वंशजों से जुड़े एक विवरण के अनुसार, अवध के नवाब शुजा उद-दौला ने 1745 में मोती महल पर कब्जा कर लिया था। लॉर्ड क्लाइव ने 1746 में शुजा-उद-दौला को पराजित किया और संपत्ति को टोडर मल के वंशजों को वापस कर दिया, जिसके बाद वारेन हेस्टिंग्स ने 1785 में इस पर फिर से कब्जा कर लिया। 1857 का विद्रोह 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान विद्रोहियों ने मोती महल में शरण ली थी। 12 जून 1857 को कर्नल जेम्स जॉर्ज नील के नेतृत्व में ब्रिटिश सैनिकों ने उन पर हमला किया। तोपखाने की गोलाबारी से इमारत को नुकसान पहुंचा और इसके छह में से पांच प्रवेश द्वार क्षतिग्रस्त हो गए।Singh Vinod टोडरमल किला : मोती महल के दीवान-ए-आम में अब गायों के खूंटे, किले में पाथी जा रही गोबर की चिपरी https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/allahabad/the-fort-of-raja-todarmal-the-minister-of-mughal-emperor-akbar-is-on-the-verge-of-ruin अमर उजाला 12 जुलाई 2022 hi वास्तुकला मोती महल में मुगल कालीन वास्तुकला की विशेषताएँ दिखाई देती हैं। इमारत में बड़े कक्ष, आवासीय कमरे, सैनिकों के रहने के स्थान, एक अस्तबल और सेवा क्षेत्र थे। दरबार कक्ष में नक्काशीदार आधार हैं, जबकि ऊपरी मंजिलों के कुछ हिस्से अब भी उपयोग में हैं। गंगा की ओर वाले हिस्से में गणेश को समर्पित एक मंदिर स्थित है। लखौरी ईंटों का उपयोग तथा कक्षों और अन्य कमरों की संरचना इमारत से संबंधित विवरणों में उल्लिखित विशेषताओं में शामिल हैं। बाद का उपयोग मोती महल में 1911 से 1933 तक दारागंज हाई स्कूल संचालित हुआ, जिसके बाद विद्यालय दूसरे भवन में स्थानांतरित हो गया। 23 दिसंबर 1921 को प्रकाशित द पायनियर मेल की एक रिपोर्ट में राजा मोती चंद को मोती महल का मालिक बताया गया और कहा गया कि दारागंज हाई स्कूल पिछले सात वर्षों से इस इमारत में संचालित हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, मोती चंद ने प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा के सम्मान में एक वर्ष का किराया माफ कर दिया था। रिपोर्ट में विद्यालय की वित्तीय कठिनाइयों का उल्लेख किया गया, जिन्हें मुख्यतः असहयोग आन्दोलन से जोड़ा गया था।द पायनियर मेल एंड इंडियन वीकली न्यूज़, खंड 48 23 दिसंबर 1921 द पायनियर मेल https://www.google.co.in/books/edition/The_Pioneer_Mail_and_Indian_Weekly_News/7iFDAQAAIAAJ?hl=en&gbpv=1&dq=Moti+Mahal+Daraganj&pg=RA27-PA47&printsec=frontcover The Honorable Raja Moti Chand, C.I.E., the owner of "Moti Mahal", the buildings which the Daraganj High School has been occupying for the last seven years, has remitted the rent of the premises for one year in honour of the Prince of Wales' visit to India, in consideration of the financial difficulties of the school due mainly to the Non-Cooperation Movement. बाद में इस इमारत का उपयोग आवास के रूप में जारी रहा। वहाँ रहने वाले अग्रवाल परिवार के सदस्यों ने स्वयं को टोडर मल का वंशज बताया और अपने वंश से संबंधित एक उर्दू वंशावली सुरक्षित रखी है। 2020 में परिवार के सदस्य मोती महल में रह रहे थे और संपत्ति के कुछ हिस्सों की देखरेख कर रहे थे। उन्होंने स्वयं को टोडर मल का सत्रहवीं पीढ़ी का वंशज बताया। उस समय इमारत में आठ किरायेदारों के रहने की भी सूचना दी गई थी, जो ₹50 से ₹100 तक का मासिक किराया देते थे। परिवार आय के लिए एक किराना दुकान भी चलाता था।डिजी--रोटी के लिए संघर्ष कर रहे राजा टोडरमल के वंशज https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/prayagraj/story-digi-descendants-of-king-todarmal-struggling-for-bread-3440069.html हिन्दुस्तान 24 अगस्त 2020 मोती महल के एक हिस्से का जीर्णोद्धार किया गया है और वर्तमान में इसे किला टोडरमल हेरिटेज स्टेज़ नाम से विरासत आवास के रूप में संचालित किया जाता है।किला टोडरमल हेरिटेज स्टेज़ - दारागंज https://kashistay.in/accommodation/darhganj/kila-todarmal-heritage-stays/1030869 काशी स्टे सन्दर्भ श्रेणी:प्रयागराज श्रेणी:उत्तर प्रदेश के किले श्रेणी:मुगल वास्तुकला