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प्रोटॉन–प्रोटॉन शृंखला
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दाएँ|अंगूठाकार|अलग-अलग तापमान (T) के लिए प्रोटॉन-प्रोटॉन (pp), कार्बन-नाइट्रोजन-ऑक्सीजन (सीएनओ) और त्रि-अल्फा संलयन प्रक्रियाओं के लिए सापेक्ष निर्गत ऊर्जा (ε) का लघुगणक आरेख। असतत रेखा तारों में pp और सीएनओ प्रक्रियाओं की संयुक्त जनित ऊर्जाओं को दिखाती है। सूर्य के अंतःक्षेत्र में तापना 1.55 करोड़ केल्विन तापमान होता है। करीब 2 करोड़ केल्विन तापमान पर पीपी और सीएनओ प्रक्रियायें लगभग समान होती हैं।
प्रोटॉन–प्रोटॉन शृंखला (proton–proton chain) तारों में हाइड्रोजन को हीलियम में बदलने वाली ज्ञात दो नाभिकीय संलयन अभिक्रियाओं में से एक है। इसे सामान्यतः p–p शृंखला कहते हैं। यह उन तारों में प्रमुख अभिक्रिया होती है जिनका द्रव्यमान सूर्य के बराबर या इससे कम होता है।http://csep10.phys.utk.edu/astr162/lect/energy/ppchain.html The Proton–Proton Chain माइकल गुइड्री अस्ट्रोनोमी 162: स्टार्स, गैलेक्सीज, एंड कोस्मोलॉजी टेनेसी विश्वविद्यालय, नॉक्सविले en प्रोटॉन–प्रोटॉन शृंखला https://web.archive.org/web/20160620155744/http://csep10.phys.utk.edu/astr162/lect/energy/ppchain.html 2016-06-20 2018-07-30 dead जबकि सैद्धान्तिक मॉडलों के अनुसार अन्य ज्ञात अभिक्रिया, सीएनओ चक्र है जो उन तारों में बहुतायत में होती है जिनका द्रव्यमान लगभग 1.3 सौर द्रव्यमान से अधिक हो।https://books.google.com/books?id=p4ojTNkcFx8C&pg=PA119 Evolution of Stars and Stellar Populations सालारिस मौरिज़ियो कैसिसी सैंटी जॉन विली एंड सन्स 2005 0-470-09220-3 119–121 en तारों और तारकीय समुदायों का विकास
सामान्य तौर पर प्रोटॉन–प्रोटॉन संलयन प्रक्रिया उस स्थिति में सम्भव है जब प्रोटॉनों की गतिज ऊर्जा (तापमान) इतनी पर्याप्त हो कि वो इनके पारस्परिक विद्युत्-चुम्बकीय प्रेरण से अधिक हो।https://www.sciencedirect.com/topics/engineering/fusion-reaction Fusion Reaction - an overview ScienceDirect Topics www.sciencedirect.com 2026-03-31
सूर्य में ड्यूटीरियम-निर्माण की घटनायें बहुत विरल हैं। सूर्य में द्वि-प्रोटॉन-निर्माण की प्रक्रिया बहुत सामान्य है जो दो प्रोटॉनों की अभिक्रिया से प्राप्त हो सकते हैं लेकिन इनका क्षय समय बहुत कम होता है और उसी समय ये दो प्रोटॉनों में क्षय हो जाते हैं। चूँकि हाइड्रोजन का हीलियम में रूपान्तरण धीमा होता है अतः सौर के अंतःक्षेत्र में हाइड्रोजन के पूर्णतः हीलियम में रूपान्तरण में लगने वाले समय की गणना करने पर दस अरब वर्षों का समय मिलता है।Kenneth S. Krane, Introductory Nuclear Physics, Wiley, 1987, p. 537.
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Proton-proton chain reaction
भौतिकी रासायनिकी खगोलशास्त्र अंतरिक्ष उड़ान
श्रेणी:नाभिकीय संलयन