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411 समाचार
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सामंतवाद

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सामंतवाद मध्यकालीन युग में इंग्लैंड और यूरोप की प्रथा थी। इन सामंतों की कई श्रेणियाँ थीं जिनके शीर्ष स्थान में राजा होता था। उसके नीचे विभिन्न कोटि के सामंत होते थे और सबसे निम्न स्तर में किसान या दास होते थे। यह रक्षक और अधीनस्थ लोगों का संगठन था। राजा समस्त भूमि का स्वामी माना जाता था। सामंतगण राजा के प्रति स्वामिभक्ति बरतते थे, उसकी रक्षा के लिए सेना सुसज्जित करते थे और बदले में राजा से भूमि पाते थे। सामंतगण भूमि के क्रय-विक्रय के अधिकारी नहीं थे। प्रारंभिक काल में सामंतवाद ने स्थानीय सुरक्षा, कृषि और न्याय की समुचित व्यवस्था करके समाज की प्रशंसनीय सेवा की। कालांतर में व्यक्तिगत युद्ध एवं व्यक्तिगत स्वार्थ ही सामंतों का उद्देश्य बन गया। साधन-संपन्न नए शहरों के उत्थान, बारूद के आविष्कार, तथा स्थानीय राजभक्ति के स्थान पर राष्ट्रभक्ति के उदय के कारण सामंतशाही का लोप हो गया।. परिचय यूरोप में सामंतवाद का विकास सामान्यतः इन परिस्थितियों में हुआ। रोमन साम्राज्य के टूटने के बाद उस पर पश्चिमी यूरोप की असभ्य जातियां-फ्रैंक लोम्बार्ड तथा गोथ इत्यादि ने अधिकार कर लिया। इन लुटेरी जातियों ने समाज और सरकार को सर्वथा नवीन रूप दिया। पांचवीं शताब्दी तक रोमन साम्राज्य अपनी रक्षा करने में असमर्थ हो चुके थे। जर्मन की बर्बर जातियों के आक्रमण के कारण इटली के गांव असुरक्षित से हो गए थे, क्योंकि सरकार सुरक्षा करने में समर्थ नहीं थी जिसके परिणामस्वरूप जनता ने अपनी सुरक्षा के लिए शक्तिशाली वर्ग से समझौता किया। यही शक्तिशाली वर्ग आगे चलकर सामंतवाद के आधार बने। ब्रिटैनिका विश्वकोष में भी सुरक्षा की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है। उसके अनुसार ‘‘सामंतवाद के जन्म में सुरक्षा की भावना प्रधान थी। संभावित विदेशी आक्रमण तथा सरकारी अफसरों की अनियंत्रित मांगों से छुटकारे के लिए एक ऐसी सत्ता की आवश्यकता अनुभव की जा रही थी, जो उन्हें किसी भी कीमत पर सुरक्षा प्रदान कर सके।’’ यूरोप में सामंतवाद के उदय के पीछे एक और जबरदस्त कारण रहा हैं। साम्राज्य के दूरस्थ विस्तार के कारण सम्राट पूरे साम्राज्य का सुचारू रूप से संचालन करने में असमर्थ था। इसलिए सत्ता का विकेन्द्रीकरण हो गया जो आवश्यक कार्य होने के साथ लोकतंत्र की दिशा में एक कदम था। धीरे-धीरे जनता को सुरक्षा प्रदान करने वाला यह शक्तिशाली वर्ग अर्थात् सामंतवाद सम्पूर्ण यूरोप में फैल गया। उसका केन्द्र कैरोलिगियन साम्राज्य में था। वहां से वह पवित्र रोमन साम्राज्य के माध्यम से पूर्वी जर्मनी और डेनमार्क पहुंचा। दक्षिणी फ्रांस में सामंतवाद का प्रभाव स्पेन पर पड़ा। बाद में सामंतवाद फ्रांस में अपने उत्कर्ष रूप में दिखाई पड़ता है। नारमन विजय के फलस्वरूप दक्षिणी इटली और इंग्लैण्ड भी इसके पूर्ण प्रभाव में आ गए। इस प्रकार सम्पूर्ण यूरोप में एक नए ढंग की व्यवस्था का सूत्रपात हुआ और यही नई व्यवस्था सामंतवाद कहलायी जो लगभग आठवीं शताब्दी से तेरहवीं शताब्दी तक समस्त यूरोप में अपने पूर्ण वैभव के साथ छाई रही। इसी के संदर्भ में डॉ॰ रामशरण शर्मा को मत उद्धृत किया जा सकता है -‘‘उनका राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा भूमि अनुदानों के आधार पर गठित था और उसी ढांचा कृषि दासत्व प्रथा के आधार पर। इस प्रथा के अधीन किसान भूमि से बंधे होते थे और भूमि के मालिक वे जमींदार होते थे जो असली काश्तकारों और राजा के बीच कड़ी का काम करते थे। डी.डी.आर. भण्डारी भी ‘‘सामतंवाद को संवेदात्मक सरकार का एक रूप मानते है जिसमें सामंत मध्यस्थता का काम करते थे। कुछ इन्हीं आधारों की पुष्टी करते हुए डॉ॰ सतीशचन्द्र का मत है कि ‘‘यूरोप में सामंतवाद का सम्बन्ध दो व्यवस्थाओं से था जिनमें से एक कृषि दास व्यवस्था तथा दूसरा आधार था सैनिक संगठन।’’ इस आधार पर कृषि दासत्व एवं सैनिक संगठन दोनों सामंतवाद के मुख्य आधार है। इस विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि सामंतवाद यूरोप में भूमिव्यवस्था से सम्बन्धित विकेन्द्रीकरण पर आधारित एक ऐसी प्रशासकीय व्यवस्था थी जिसमें सामंत सर्वोच्च सत्ता और किसानों के मध्य पुल था, जो दोनों पार्टी से निश्चित अनुबंधों के माध्यम से जुड़ा होता था। यूरोप में राज्य सेवा करने के पुरस्कार स्वरूप सामंतों को भूमि दी जाती थी और उन सामंतों की प्रशासनिक देख-रेख में जितना क्षेत्र होता था, उसका पूरा राजस्व उन्हीं को प्राप्त होता था किन्तु वह अपने अधीनस्थ लोगों के प्राप्त कर में से अपने प्रभु को नियमित रूप से कुछ नज़र भेजता रहेगा। राजा अफसरों को नकद वेतन के बदले जमीन देता था। जमीन उन अन्य लोगों को भी दी जाती थी जिनको राजा पुरस्कृत करना चाहता था। इसलिए यूरोपीय सामंतवाद में किसानों को, जमींदारों या उन व्यक्तियों के लिए काम करना पड़ता था जिन्हें जमीन दे दी जाती थी और जो सामंती कहलाते थे। सामंतों का कर्तव्य राजा के लिए सैनिक एकत्र करना था। प्रो॰ सिजविक ने सामंतवाद को चार विभिन्न प्रवृत्तियों का परिणाम माना है। पहली प्रवृत्ति एक मनुष्य की दूसरे मनुष्य के साथ, जो उससे उच्चतर स्तर का था, वैयक्तिक संबंधों की थी। अपनी सुरक्षा के दृष्टिकोण से उन्होनें अपने से शक्तिशाली व्यक्ति के साथ सम्बन्ध स्थापित किया जो नागरिकता के नाते न होकर वैयक्तिक था। सरंक्षक और आश्रित एक दूसरे के साथ वैयक्तिक सम्बन्धों के जुड़ाव के कारण बंधे हुए थे। संरक्षक अपने आश्रितों की रक्षा करता था तथा आश्रितों की बढ़ती हुई संख्या के कारण उसका बल बढ़ जाता था। दूसरी प्रवृत्ति मनुष्य के अधिकार, राजनैतिक स्थान तथा उसकी सामाजिक स्थिति के निर्धारण करने की प्रवृत्ति थी। सामंतवाद में व्यक्ति के राजनैतिक संबंध तथा उसकी सामाजिक स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितनी भूमि का स्वामी था। तीसरी प्रवृत्ति यह थी कि बड़े-बड़े भूपति अपने प्रदेशों में राजनीतिक सत्ता का प्रयोग करने लगे। यह परिवर्तन क्रमशः हुआ। उन्हें यह अधिकार प्रारम्भ से प्राप्त नहीं था, केन्द्रीय सत्ता की दुर्बलता के कारण जैसे-जैसे उनकी शक्ति बढ़ी, उन्होंने अपने प्रदेश की सुव्यवस्था के लिए अपने अधिकारों को बढ़ाया और उन पर शासन करने लगे। चौथी प्रवृत्ति सामाजिक वर्गों के पार्थक्त की प्रवृत्ति थी राजा अथवा सामंत पर आश्रित व्यक्ति दो प्रकार के होते थे। पहले वे जो सैनिक सेवाओं के बदले राजा या सामंतों से बंधे हुए थे तथा दूसरे वे जो उनकी भूमि पर कृषि या अन्य प्रकार के कार्य करते थे। श्री एच. एस. डेवीस ने सामतंवाद के स्वरूप को निर्धारित करते हुए इसकी मौलिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण करते हुए कहा है कि ‘‘इस व्यवस्था के अंतर्गत व्यक्ति सुरक्षा के दृष्टिकोण से अपने प्रभु से अनुबंधित होता था। वह अपने सामंती प्रभुत से पृथक् अपनी स्वतंत्रा सत्ता की घोषणा नहीं कर सकता था। युद्ध सामंती व्यवस्था का प्रमुख सिद्धान्त था। भाई-भाई के विरूद्ध और पुत्र पिता के विरूद्ध लड़ने में कोई संकोच नहीं करता था। निम्न वर्ग की दशा भी अत्यन्त सोचनीय थी।’’ प्रस्तुत दृष्टिकोण में व्यक्ति की सुरक्षा की भावना पर अधिक बल दिया गया है एवं सामंती सम्बन्धों तथा अनुबन्धों की दृढ़ता की ओर संकेत किया गया है। जिस प्रभु से व्यक्ति लाभान्वित होता था, उसके प्रति अपने स्वामी-भक्ति का प्रदर्शन करना पड़ता था। व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता समाप्त हो जाती थी। हेनी एस ल्यूकस के अनुसार ‘‘सामंती संगठन में सामंत को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। प्रत्येक सामंती राजकुमार के अधीन अनेक वेसोल्स होते थे, जो उसे अपनी सलाह तथा युद्ध में सहायता देने के लिए प्रतिबंधित थे।’’ श्री ल्यूकस के मतानुसार राजा और सामंत दोनों की पारस्पारिक अनुबंधता सिद्ध होती है, जिसका आधार पारस्पारिक आदान-प्रदान था। सामंत राजा को सैनिक सहायता प्रदान करता था, राजा को महत्वपूर्ण परामर्श देकर राजा की मंत्रणा प्राप्त करने का अधिकारी था। बेव्सटर महोदय ने अपने कोश में सामंतवाद के स्वरूप में प्रकाश डालते हुए लिखा है कि ‘‘यह एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था थी जो राजा और सामंत के भूमि से सम्बन्धित पारस्पारिक सम्बन्धों पर आधारित थी तथा जिसमें भूमि प्राप्तकर्ता द्वारा सेवा और आदर-भावना स्वामित्व, सहायता, विवाह आदि की घटनाएं प्रमुख थी।’’ चैम्बर्स इन्साक्लोपीड़िया में सामंतवाद विषयक मान्यताओं में स्वामी भक्ति और आज्ञा-पालन पर बल देते हुए लिखा गया है कि ‘‘सामंतवाद शब्द यद्यपि समाज व्यवस्था का एक प्रकार है तथा मुख्य रूप से उन व्यक्तिगत सम्बन्धों की व्याख्या करता है जो जमीन के अधिकार और व्यक्तिगत सम्पति के आधार पर एक व्यक्ति की दूसरे व्यक्ति के प्रति अधीनता प्रकट करते है, तथापि यह व्यक्तिगत सम्बन्धों और नियमों की उस विशिष्ट पद्धति की ओर संकेत करता है जिसमें एक ओर सुरक्षा तथा निर्वाह है तथा दूसरी ओर सेवा तथा आज्ञा पालन है। इस प्रकार सामंत के निर्वाह और सामंतवाद सामाजिक एवं आर्थिक विकास प्रक्रिया सुरक्षा का उत्तरदायित्व प्रभु पर था। साथ ही सामंत प्रभु की आज्ञापालन और सेवा भक्ति से अनुबंधित था। आज्ञा पालन न करने पर राजा केवल सैद्धान्तिक रूप में उससे भूमि वापस लेकर उसे पदच्युत कर सकता था। यह केवल प्रारंभिक सैद्धान्तिक स्वरूप था, किन्तु व्यवहारिक रूप में ऐसा नहीं होता था। कालांतर में यह व्यवस्था बदल गयी। भूमि पहले आजीवन दी जाती थी, बाद में आनुवंशिक अधिकार होने लगा। तब उन्होंने भी प्राप्त भूमि को उन्हीं शर्तों पर प्रदान किया जिन शर्तों पर इन्हें राजा से प्राप्त हुई थी। इस प्रकार सामंती व्यवस्था वंशानुगत रूप से चलने लगी। पूर्वोक्त मत की पुष्टि के संदर्भ में वह विचार देखा जा सकता है। ‘‘सामंती प्रथा वंशानुगत थी। सामंत की मृत्यु के बाद उसका उत्तराधिकारी उसका स्वामी बनाया जाता था, उसे पहले कुछ भेंट राज दरबार में ले जाकर राजा के प्रति अपनी स्वामी भक्ति प्रगट करनी होती थी ।’’ इस प्रकार राजा द्वारा सामंत को और सामंत द्वारा अपने से नीचे सरदारों को भूमि प्रदान करना वंशानुगत हो गया और सामंतवाद के एक नये स्तर अर्थात् उपसामंतवाद का जन्म होने लगा। कृषकों का सम्बन्ध सीधे राजा से न होकर एक मध्यस्थ कुलीन उच्चवर्ग से होने लगा। यद्यपि मुद्रा का चलन पूर्णतः समाप्त नहीं हुआ था तथापि उसका प्रयोग बहुत कम होता था, धन के रूप में भूमि का प्रयोग किया जाता था। सामंती व्यवस्था का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सिद्धान्त आनुवंशिकता था। पाश्चात्य सामंतवाद विषयक पूर्वोक्त विद्वानों के मतों का विवेचन-विश्लेषण करने पर जो मुख्य निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। कहीं तो प्रभु और सामंत के अनुबंधात्मक संबंधों में निहित कानूनी पक्ष पर बल दिया गया है, कहीं सामाजिक पक्ष पर कहीं आर्थिक पक्ष पर, किन्तु कुछ ऐसे सामान्य तत्व भी है जिनका लगभग सभी विचारकों के मतों में संकेत मिलता है। इन सामान्य तत्वों में प्रभु द्वारा भूमि अनुदान और सामंत द्वारा सेवा एवं आज्ञा-पालन। इनके साथ यूरोपीय सामंतवाद के स्वरूप निर्धारण में कृषि दासत्व प्रथा भी एक महत्वपूर्ण तत्व है। इसके अधीन किसान भूमि से बंधे होते थे और भूमि के असली मालिक वे जमींदार होते थे जो असली काश्तकारों और राजा के बीच कड़ी का काम करते थे। किसान जमीन जोतने के बदले सामंतों को उपज और बेठ-बेगार के रूप में लगान अदा करते थे। इस प्रणाली का आधार आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था थी, जिसमें चीजों का उत्पादन बाजार बाजार में बेचने के लिए नहीं, बल्कि मुख्यतः स्थानीय किसानों और उनके मालिकों के उपयोग के लिए होता था।’’ परिभाषा सामंतवाद को लेकर मोटे तौर पर कोई स्वीकृत आधुनिक परिभाषा नहीं है।"सामंतवाद" https://web.archive.org/web/20080907020312/http://www.britannica.com/eb/article-9034150/feudalism 7 सितंबर 2008 ब्राउन ए.आर., एलिजाबेथ द्वारा. इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका ऑनलाइन ."सामंतवाद?" https://web.archive.org/web/20141018025458/http://www.fordham.edu/halsall/sbook1i.html#Feudalism 18 अक्तूबर 2014 हल्सल पॉल, के द्वारा. सोर्सबुक इंटरनेट मध्यकालीन. शब्द सामंतवाद या सामंती व्यवस्था पूर्व आधुनिक काल (17 वीं सदी) में गढ़ा गया था और अक्सर राजनीतिक और मत प्रचार संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता था। 20 वीं शताब्दी के मध्य तक, फ़्रांस्वा लुई गंशोफ़ के फ्यूडिलिज्म है, 3 एडीशन. (1964, मूलतः 1947 में फ्रेंच में प्रकाशित), सामंतवाद का एक पारंपरिक परिभाषा बन गया। 1960 के दशक के बाद से जब मार्क ब्लोच के फ्यूडल सोसायटी (1939) इसका समवर्ती हुआ जब इसे पहली बार अंग्रेजी में अनुवाद किया गया, कई मध्यकालीन इतिहासकारों ने एक व्यापक सामाजिक पहलू को इसमें शामिल किया, इसमें जमींदारी के बांड को जोड़ा, जिसे कभी-कभी "सामंती व्यवस्था" के रूप में संदर्भित किया जाता है। 1970 के दशक के बाद से, जब एलिजाबेथ ए.आर. ब्राउन ने द टायरेनी ऑफ ए कंस्ट्रक्ट (1974) प्रकाशित किया, कई लोगों ने फिर से सबूत की जांच की और निष्कर्ष निकाला कि सामंतवाद एक असाध्य शब्द है और विद्वतापूर्ण और शैक्षिक चर्चा से पूरी तरह इसे निकाल देना चाहिए या कम से कम केवल गंभीर योग्यता और चेतावनी के साथ इसका इस्तेमाल होना चाहिए। यूरोपीय संदर्भ के बाहर, सामंतवाद की अवधारणा का सामान्य तौर पर सादृश्य (अर्द्ध सामंती) के द्वारा प्रयोग किया जाता है, शोगुन के तहत सबसे अधिक बार जापान में चर्चा की जाती है और कभी-कभी मध्ययुगीन और गोंडाराइन इथियोपिया. हालांकि, कुछ सादृश्य सामंतवाद को आगे लिया गया है, प्राचीन मिस्र, पार्थियन साम्राज्य, भारतीय उपमहाद्वीप और अमेरिका के दक्षिण लड़ाई के पहले विविधता के रूप में देखा जाता था।http://college.hmco.com/history/readerscomp/mil/html/mh_017900_feudalism.htm Reader's Companion to Military History https://web.archive.org/web/20041112062036/http://college.hmco.com/history/readerscomp/mil/html/mh_017900_feudalism.htm 12 नवंबर 2004 29 अप्रैल 2011 live सामंतवाद शब्द का इस्तेमाल भी किया जाता है - अक्सर अनुपयुक्त या प्रबल भी हैं मध्ययुगीन यूरोप की गई उन लागू-अक्सर अनुपयुक्त या निंदात्मक ढ़ंग से- गैर पश्चमी देशों में जहां संस्था और व्यवहार उन मध्ययुगीन यूरोप के साथ समान माना जाता था।Cf. : उदाहरण के लिए 0312-6315 McDonald Hamish Feudal Government Alive and Well in Tonga Sydney Morning Herald 7 सितंबर 2008 17 अक्टूबर 2007 http://www.smh.com.au/news/world/feudal-government-alive-and-well-in-tonga/2007/10/16/1192300767418.html https://web.archive.org/web/20110629173357/http://www.smh.com.au/news/world/feudal-government-alive-and-well-in-tonga/2007/10/16/1192300767418.html 29 जून 2011 live कुछ इतिहासकारों और राजनीतिक सिद्धांतों का मानना ​​है कि कई मायनों में सामंतवाद शब्द का प्रयोग इसके विशिष्ट अर्थ को वंचित करने के लिए किया गया है जिसके चलते समाज को समझने में इस उपयोगी अवधारणा को अस्वीकार किया गया है। शास्त्रीय सामंतवाद इंग्लैंड में सामंतवाद के उदाहरण देंखे फ़्रांस्वा लुई गंशोफ़ का सामंतवाद संस्करण बड़े युद्धों के बीच पारस्परिक कानूनी और सैन्य दायित्वों का वर्णन करता है और भगवान, जागीरदार और मिल्कियत के आसपास तीन महत्वपूर्ण अवधारणाएं घूमती हैं। एक प्रभु व्यापक अर्थ में एक महान संदर्भ है जो जमीन पर कब्जा करता था, एक जागीरदार भगवान के द्वारा जमीन को अपनाता था और भूमि को जागीर के रूप में जाना जाता है। मिल्कियत का इस्तेमाल करते और प्रभु के संरक्षण के लिए विदेशी मुद्रा में, जागीरदार प्रभु की सेवा के कुछ प्रकार प्रदान करेगा। वहां कार्यकाल सामंती देश के कई किस्में थे, जिसमें सैन्य और गैर सैन्य शामिल थे। स्वामी और जागीरदार के बीच दायित्वों और इसके अधिकार के बीच संबंध के विषय में सामंती जागीर के रूप के आधारित था। ग़ुलामी इससे पहले कि प्रभु किसी को भूमि (एक मिल्कियत) अनुदान कर सके, उन्हें उस व्यक्ति को एक जागीरदार बनाना पड़ता था। इसे औपचारिक और प्रतीकात्मक समारोह में संपन्न किया गया जिसे प्रशस्ति समारोह कहा गया और यह शपथ और श्रद्धांजलि अधिनियम दो भागों में बांटा गया। श्रद्धांजलि के दौरान स्वामी और मातहत एक अनुबंध में आते हैं जो जागीरदार को अपने आदेश में प्रभु के लिए लड़ने के लिए प्रवेश करना होता था, हालांकि प्रभु को बाहरी ताकतों से जागीरदार की रक्षा करने का वादा के लिए सहमत होना पड़ता था। श्रंद्धांजलि लैटिन के फिडेलिटास शब्द से आता है और प्रभु अर्थ सामंती अपने लिए एक जागीरदार द्वारा निष्ठा होता था। "श्रंद्धांजलि" भी शपथ के लिए संदर्भित करता है और अधिक स्पष्ट रूप से श्रद्धांजलि के दौरान किए गए जागीरदार की प्रतिबद्धताओं को पुष्टि करता है। इस तरह की शपथ श्रद्धांजलि के बाद होता था।मध्यकालीन सामंतवाद https://web.archive.org/web/20120209083705/http://www.scribd.com/doc/28860952/Mediavel-Feudalism 9 फ़रवरी 2012 स्टेफेनसन कार्ल, के द्वारा. (कॉरनेल यूनिवर्सिटी प्रेस, 1994). क्लासिक सामंतवाद का परिचय. एक बार प्रशस्ति समारोह पूरा किया गया, प्रभु और जागीरदार के साथ एक सामंती संबंध आपसी दायित्वों पर एक दूसरे पर सहमत थे। प्रभु का प्रमुख दायित्व "सहायता", या सैन्य सेवा के लिए जागीरदार किया गया था। जो भी उपकरण का उपयोग कर जागीरदार मिल्कियत से राजस्व के आधार पर प्राप्त कर सकता है, मातहत को कॉल करने के लिए प्रभु की ओर से सैन्य सेवा करने के लिए उत्तर जिम्मेदार था। सैन्य मदद की यह सुरक्षा का प्राथमिक कारण प्रभु सामंती रिश्ते में प्रवेश किया था। इसके अलावा, जागीरदार को अपने प्रभु की अन्य दायित्व हो सकते हैं, जैसे कोर्ट में प्रवेश, चाहे जागीरगारी, सामंति या राजा के खुद के कोर्ट में उपस्थिति.एन्च्य्क. ब्रिट. op.cit. यह सामंती अनुबंध का एक मानक हिस्सा था कि हर किरायेदार दायित्व के अधीन था के लिए अपने अधिपति के लिए सलाह और उसे समर्थन अदालत में भाग लेने, इंग्लैंड के ऐतिहासिक उमरा, एड हैरिस में सर निकोलस. कोर्टहोe, p.18, एनसिक द्वारा उद्धृत. ब्रिट, op.cit, पृ. 388: "यह सामंती व्यवस्था का सिद्धांत है कि हर किरायेदार की अदालत में शामिल होना चाहिए था उसके बेहतर तत्काल" यह भी "सलाह" प्रदान करने के जागीरदार शामिल सकता है, इसलिए यदि प्रभु एक बड़ा फैसला वह अपनी सारी जागीरदार को बुलाने और एक कौंसिल आयोजित करेंगे सामना करना पड़ा है। जागीर स्तर पर इस कृषि नीति का एक काफी सांसारिक मामला हो सकता है, लेकिन यह भी कुछ मामलों में मौत की सज़ा सहित आपराधिक अपराधों के लिए सजा का प्रभु से नीचे सौंपने शामिल थे। राजा की सामंती अदालत के संबंध में, इस तरह के विवेचना युद्ध की घोषणा के सवाल शामिल हो सकते हैं। इन उदाहरण हैं यूरोप में स्थान और समय की अवधि पर निर्भर करता है, सीमा शुल्क और सामंती प्रथाओं विविध, सामंतवाद का उदाहरण देखें. सामंती समाज सामंतवादी व्यवस्था शब्द 'सामंती समाज' के रूप में परिभाषित बलोच मार्क द्वाराबलोच, मार्क, सामंती समाज . टिआर मान्यों ला. दो खंड. शिकागो: शिकागो विश्वविद्यालय प्रेस, 1961 ISBN 0-226-05979-0 गंशोफ़ द्वारा फैलता प्रस्तावित परिभाषा पर और मनोरिअलिस्म सामंती शामिल भीतर संरचना न केवल योद्धा अभिजात वर्ग, लेकिन यह भी किसानों से बंधे. सामंतवाद का इतिहास सामंतवाद पारंपरिक रूप से एक साम्राज्य का विकेन्द्रीकरण का एक परिणाम के रूप में उभर रहे हैं। यह विशेष रूप से जापानी और कारोलिंगियन यूरोपीय साम्राज्य जो दोनों नौकरशाही आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के लिए इन घुड़सवार सैनिकों को भूमि आवंटित करने की क्षमता के बिना घुड़सवार समर्थन अभाव में मामला था। घुड़सवार सैनिकों को उनके आवंटित भूमि और उनकी सत्ता पर वंशानुगत शासन की एक प्रणाली से अधिक सुरक्षित क्षेत्र के रूप में अच्छी तरह से सामाजिक, राजनीतिक, न्यायिक और आर्थिक क्षेत्रों धरना आया था। इन शक्तियों का अधिग्रहण काफी इन साम्राज्यों में केंद्रीकृत सत्ता की उपस्थिति कम हो। केवल जब बुनियादी सुविधाओं के साथ अस्तित्व के रूप में बनाए रखने के लिए केंद्रीकृत सत्ता यूरोपीय मोनर्चिएस-गायब हो गई अंततः सामंतवाद नई इस शुरू करने के लिए उपज करने के लिए संगठित शक्ति और.गट, अजार. युद्ध में मानव सभ्यता, न्यू यॉर्क: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2006. 332-343 पीपी सामंतवाद का इतिहास लेखन शब्द सामंतवाद अनजान था और इस प्रणाली का वर्णन करता यह अवधि मध्यकालीन थे में से लोगों के जीवन प्रणाली नहीं राजनीतिक औपचारिक एक कल्पना के रूप में. यह खंड सामंतवाद का विचार है, के इतिहास का वर्णन कैसे विद्वानों और विचारकों, यह कैसे समय के साथ बदल के बीच उत्पन्न अवधारणा है और इसके उपयोग के बारे में आधुनिक बहस. आविष्कार शब्द "सामंती" इतालवी नवजागरण न्यायविद द्वारा आविष्कार किया गया था वर्णन करने के लिए वे क्या करने के लिए संपत्ति के आम प्रथागत कानून हो लिया। यह) 884 से व्युत्पन्न मध्यकालीन लैटिन शब्द फ़ोदुम (एक शब्द चार्टर Frankish जो पहले एक पर प्रकट होता दिनांकित, भूमि अर्थ एस्टेट में एक बस गया था, लेकिन समझ पाने से एक और अधिक प्राचीन बुनियादी सबसे गोथिक स्रोत फैहू वाचक बस में "संपत्ति" जो अपने "पशु".मकदूनियाई ब्रिटानिका, 9th.ed. Vol. 9, p.119, सामंतवाद. पशु cf लैटिन शब्द पेचुनिया जिसका मतलब है पैसा भी. शब्द सामंती व्यवस्था वकीलों अंग्रेजी और शताब्दी (1614) द्वारा 17 फ्रांसीसी था गढ़ा में,http://dictionary.reference.com/browse/feudal Feudal (n.d.) Online Etymology Dictionary सितंबर 16, 2007 https://web.archive.org/web/20110520072918/http://dictionary.reference.com/browse/feudal 20 मई 2011 live कैंटर, नोर्मन एफ मध्य युग की सभ्यता के. 1994 बारहमासी, हार्पर. जब यह प्रणाली कथित वर्णन करने के लिए या गायब हो गया था पूरी तरह से तेजी से चला गया है। अवधि में कोई भी लेखकों में सामंतवाद के लिए विकसित हुई है चाहिए था करने के लिए शब्द ही प्रयोग किया जाता है जाना जाता है। यह एक था बाद में टीकाकारों ने अपमानजनक रूप में अक्सर इस्तेमाल किया जाएगा. वर्णन किसी भी कानून या कस्टम कि दिनांकित, वे कथित रूप अनुचित या बाहर मई 2009 सीमा शुल्क और इनमें से अधिकांश कानूनों मिल्कियत में थे संबंधित के मध्ययुगीन संस्था को किसी तरह से और इस प्रकार यह शब्द एक साथ लुम्पेद के अंतर्गत. मई 2009 शब्द आज हम जानते हैं, "सामंतवाद", फ्रेंच क्रांति से आता है फ्रेंच दौरान féodalisme, गढ़ा. मई 2009 शब्द का विकास सामंतवाद 1748 बन गया एक लोकप्रिय और व्यापक रूप में शब्द का प्रयोग किया,) कानून करने के लिए धन्यवाद मोंतेस्कुई DE L'एसप्रिट है देस आत्मा की लोइस (. सदी में 18, प्रबुद्धता लेखकों की राजशाही फ्रेंच या लिखा है, प्राचीन प्रणाली के बारे में सामंतवाद बदनाम करने के लिए अन्सिएँ व्यवस्था। यह आत्मज्ञान की आयु था जब लेखकों कारण मूल्यवान और मध्य युग "युग डार्क थे देखा के रूप में". आत्मज्ञान लेखकों आम तौर पर मज़ाक उड़ाया और सामंतवाद सहित उपहास "अंधकार युग से कुछ भी, लाभ का मतलब है की एक मौजूदा राजनीतिक फ्रांसीसी राजशाही के रूप में विशेषताओं पर नकारात्मक पेश अपनी.रॉबर्ट बार्टलेट मध्ययुगीन पनोरमा में "परिप्रेक्ष्य पर मध्यकालीन विश्व", 2001, ISBN 0-89236-642-7 उनके लिए 'सामंतवाद' का मतलब विशेषाधिकार ज़मींदार ial विशेषाधिकारों और. जब फ्रांसीसी संविधान सभा 1789 सामंती शासन "अगस्त में" को समाप्त कर दिया यह है कि क्या मतलब था। एडम स्मिथ "प्रयोग किया जाता शब्द" सामंती व्यवस्था करने के लिए दायित्वों का वर्णन एक सामाजिक और आर्थिक विशेषाधिकारों और आर्थिक प्रणाली द्वारा परिभाषित विरासत में शुमार और सामाजिक, जिनमें से प्रत्येक के पास निहित सामाजिक. कम्मी ऐसे में एक से प्राप्त धन प्रणाली कृषि श्रम द्वारा ओवेद ​​सेवाओं के लिए प्रथागत था, जो आयोजित के आधार पर नहीं, लेकिन सेना के अनुसार बाजार के लिए। जमींदार है रईसोंhttp://www.usna.edu/Users/history/abels/hh315/Feudal.htm Feudalism Richard Abels usna.edu https://web.archive.org/web/20100327220107/http://www.usna.edu/Users/history/abels/hh315/Feudal.htm 27 मार्च 2010 live मार्क्स कार्ल मार्क्स भी विश्लेषण में राजनीतिक शब्द का प्रयोग किया। सदी में 20 मार्क्स पूंजीवाद का उदय वर्णित सामंतवाद अपरिहार्य से पहले आर्थिक स्थिति आने के रूप में. सामंतवाद के लिए मार्क्स, परिभाषित किया था कि अभिजात वर्ग) शक्ति का शासक वर्ग (भूमि कृषि योग्य नियंत्रण के अपने विश्राम किया पर, कृषिदासता तहत शोषण का आम तौर पर, भूमि के खेत जो इन किसानों वर्ग के प्रमुख के लिए एक समाज पर आधारित है। "हाथ से चक्की देता है, आप प्रभु सामंती समाज के साथ भाप मिल पूंजीवादी,. औद्योगिक समाज के साथ"द पोवर्टी ऑफ फिलोसोफी (1847) अध्याय 2 से उद्धरण. मार्क्स इस प्रकार मॉडल आर्थिक विशुद्ध माना सामंतवाद के भीतर एक. उत्तरार्ध अध्ययन शताब्दियों में देर से 19 वीं और 20 वीं, जॉन होरचे गोल और फ्रेडेरिक विलियम मैटलैंड, मध्ययुगीन ब्रिटेन के दोनों इतिहासकारों, 1066 में नोर्मन विजय से पहले चरित्र समाज के रूप में निष्कर्ष पर पहुंचे विभिन्न अंग्रेजी की। दौर का तर्क था कि नोर्मंस इंग्लैंड के लिए उनके साथ सामंतवाद लाया था, जबकि मैटलैंड तर्क था कि इसके मूल सिद्धांतों जगह में पहले से ही 1066 से पहले ब्रिटेन में थे। बहस आज जारी है, लेकिन आम सहमति का निर्माण होता है: इंग्लैंड से पहले विजय प्रशस्ति है, जो सामंतवाद में व्यक्तिगत तत्वों में से कुछ सन्निहित थी। विलियम ने विजेता विदेश में शुरू की एक संशोधित सामंतवाद फ्रांसीसी से उत्तरी इंग्लैंड सामंतवाद विकेन्द्रीकृत का मुकाबला जो पहलुओं. 1086 में उन्होंने सभी ने राजा, यहां तक ​​कि उनके प्रमुख जागीरदार, जो सामंती कार्यकाल के द्वारा आयोजित की जागीरदार के प्रति वफादारी की शपथ आवश्यक है। सामंती कार्यकाल से होल्डिंग का मतलब है कि जागीरदार राजा या प्रतिस्थापन में एक पैसा भुगतान के लिए आवश्यक शूरवीरों की कोटा प्रदान करनी चाहिए। सदी में, 20 वीं इतिहासकार फ़्रांस्वा लुई गंशोफ़ सामंतवाद था विषय पर बहुत प्रभावशाली. गंशोफ़ एक संकीर्ण कानूनी और सैन्य नजरिए से सामंतवाद को परिभाषित है, उनका तर्क है कि सामंती संबंधों मध्ययुगीन बड़प्पन के भीतर ही ही अस्तित्व में. गंशोफ़ की अवधारणा में यह व्यक्त सामंतवाद (1944). उसकी परिभाषा क्लासिक सामंतवाद आज है सबसे व्यापक रूप से जाना जाता हैफिलिप दैलेअदर "सामंतवाद", उच्च मध्य युग और जागीरदार भी एक आसान तरीका है समझने के लिए, बस रखा, जब एक जागीर दी गई एक स्वामी, जागीरदार वापसी सेवा में सैन्य प्रदान की है। है, के एक गंशोफ़ समकालीन फ्रांसीसी इतिहासकार मार्क बलोच इतिहासकार था सबसे प्रभावशाली 20 वीं सदी के मध्यकालीन. बलोच सामंतवाद को देखने के एक कानूनी और सैन्य दृष्टि से, लेकिन एक समाजशास्त्रीय एक से इतना नहीं से संपर्क किया। वह) अंग्रेजी 1961; विकसित उनके विचारों में (सामंती समाज 1939-40. बलोच समाज का एक प्रकार है कि केवल बड़प्पन तक ही सीमित नहीं था के रूप में सामंतवाद की कल्पना की। गंशोफ़ की तरह, उन्होंने स्वीकार किया कि वहां यहोवा के और जागीरदार के बीच एक पदानुक्रमित संबंध था, लेकिन बलोच ही साथ एक इसी तरह के संबंध को देखा और किसानों के बीच यहोवा प्राप्त करने के. यह इस कट्टरपंथी धारणा है कि किसानों सामंती संबंधों का हिस्सा थे कि बलोच अपने साथियों से अलग करता है। जबकि जागीरदार जागीर के बदले में सैन्य सेवा प्रदर्शन किया, किसान संरक्षण के लिए बदले में शारीरिक श्रम का प्रदर्शन किया। दोनों सामंती संबंधों का एक रूप है। बलोच के अनुसार, समाज के अन्य तत्वों के सामंती संदर्भ में देखा जा सकता है, जीवन के सभी पहलुओं को 'आधिपत्य' पर केंद्रित थे और इसलिए हम उपयोगी एक सामंती चर्च संरचना, एक सामंती (और विरोधी सभ्य) सभ्य साहित्य की बात कर सकते हैं और एक सामंती अर्थव्यवस्था। सामंतवाद संशोधनवाद 1974 में, अमेरिका इतिहासकार एलिजाबेथ एआर ब्राउन 10.2307/1869563 79 4 1063 Brown Elizabeth A. R. The Tyranny of a Construct: Feudalism and Historians of Medieval Europe The American Historical Review 7 सितंबर 2008 1974-10 http://www.journals.uchicago.edu/doi/abs/10.2307/1869563 1869563 American Historical Association अवधारणा को एकरूपता के खारिज कर दिया लेबल भावना होती है कि एक झूठे एक कालभ्रम सामंतवाद के रूप में. सामंतवाद की विरोधाभासी, परिभाषाओं अक्सर वर्तमान उपयोग के कई नोट करने के बाद, वह तर्क है कि शब्द वास्तविकता यह है ही मध्ययुगीन में कोई आधार के साथ एक निर्माण, आधुनिक इतिहासकारों के एक आविष्कार वापस पढ़ें "त्य्रंनिकाल्ली" रिकॉर्ड में ऐतिहासिक. ब्राउन के समर्थकों का सुझाव दिया है कि इस शब्द का इतिहास पाठ्यपुस्तकों से किया जाना चाहिए और पूरी तरह मध्ययुगीन इतिहास पर व्याख्यान. जागीरदार में फिएफ्स और: मध्यकालीन सबूत (1994),रेनॉल्ड्स, सुसान फिएफ्स एंड वसल्स: द मिडियावल एविडेंस रीइंटरप्रेटेड . ऑक्सफ़र्ड, ब्रिटेन: ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 1994 ISBN 0-19-820648-8 सुसान रेनोल्ड्स थीसिस मूल पर विस्तार ब्राउन है। हालांकि कुछ समकालीनों कार्यप्रणाली रेनॉल्ड्स पूछताछ की है, अन्य इतिहासकारों तर्क उसके समर्थित है और यह. कृपया ध्यान दें कि रेनॉल्ड्स सामंतवाद उपयोग के मार्क्सवादी उद्देश्य के लिए नहीं करता है। शब्द सामंती की तरह है) सिस्टम लागू किया गया, यह भी करने के लिए गैर पश्चिमी समाजों में इसी तरह के नजरिए और जो संस्थान हैं उन मध्यकालीन यूरोप के कथित अन्य के लिए हैं प्रबल (देखें सामंती. अंत में कहते हैं, आलोचकों, कई मायनों अवधि सामंतवाद प्रयोग किया गया है जिसका अर्थ है विशिष्ट से वंचित यह, प्रमुख सिद्धांतकारों कुछ इतिहासकारों और राजनीतिक के लिए समाज को अस्वीकार समझ उपयोगी अवधारणा के लिए यह एक के रूप में. दूसरों को अपनी दिल की अवधारणा ले लिया है: एक प्रभु और उसके जागीरदार, सेवा के बदले में समर्थन की एक पारस्परिक व्यवस्था के बीच अनुबंध. इन्हें भी देखें 3 नकली सामंतवाद सेसटुई कुए स्वतंत्रता के चार्टर शिष्टता वॉर्म्स का समझौता अंग्रेजी सामंती बरोनी आर्य लोग उतरा संपत्ति मजोरत जमींदारी मध्ययुगीन जनसांख्यिकी मध्य-युग नुल्ले टेर्रे सांस सेग्नर उइअ एम्प्तोरेस सार्क दासत्व मोर्त्मैन की विधियों जागीरदार इंग्लैंड में सामंतवाद प्रोटोफयूडालिज्म सेना शूरवीर मध्ययुगीन युद्ध गैर यूरोपीय: फेंग्जियन भारतीय सामंतवाद (इंडियन फ्यूडलिज्म) स्रोत बलोच, मार्क, सामंती समाज. tr मान्यों ला. दो खंड. शिकागो: शिकागो विश्वविद्यालय प्रेस, 1961 ISBN 0-226-05979-0 एलिजाबेथ ब्राउन, एक निर्माण के अत्याचार: सामंतवाद और यूरोप के मध्यकालीन इतिहासकारों के ', अमेरिकी ऐतिहासिक समीक्षा, 79 (1974) पीपी 1063-8. कैंटर, नोर्मन एफ, युग की खोज मध्य: जीवन, काम करता है और बीसवीं शताब्दी मध्यकालीन महान विचार . क्विल, 1991. Longmans, Green Ganshof François Louis Feudalism https://archive.org/details/feudalism00gans London; New York 1952 0802071589 ग़ुएर्रेऔ, आलें, ल AVENIR डी 'संयुक्त राष्ट्र गायब हो चुकी इन्सर्तैन:. पेरिस ले सयूइल, 2001. (शब्द के अर्थ का पूरा इतिहास). पाली, जीन पियरे और बौर्नाज़ेल, एरिक, सामंती परिवर्तन, 900-1200 tr,.. हिग्गित्त कैरलाइन. न्यूयॉर्क और लंदन: होम्स और मिएर, 1991. रेनॉल्ड्स, सुसान फिएफ्स और जागीरदार: मध्यकालीन रेंतेर्प्रेत्ब साक्ष्य. ऑक्सफ़र्ड, ब्रिटेन: ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी प्रेस 1994 ISBN 0-19-820648-8 सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ "सामंतवाद" ब्राउन ए.आर., एलिजाबेथ द्वारा. इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका ऑनलाइन . पॉल हल्सल्ल द्वारा "सामंतवाद?", सोर्सबुक इंटरनेट मध्यकालीन. मध्यकालीन सामंतवाद स्तेफेंसों कार्ल, के द्वारा. (कॉरनेल यूनिवर्सिटी प्रेस, 1994). क्लासिक सामंतवाद का परिचय. "सामंतवाद की समस्या: एक ऐतिहासिक निबंध" पश्चिमी केंटकी विश्वविद्यालय रॉबर्ट हर्बिसों द्वारा, 1996. Feudalism श्रेणी:आर्थिक इतिहास श्रेणी:प्रारम्भिक मध्य युग * श्रेणी:अल्पतन्त्र श्रेणी:उच्च मध्य युग श्रेणी:बाद के मध्ययुगीन मध्य युग के बारे में रचना श्रेणी:सामाजिक प्रणाली श्रेणी:अन्य आर्थिक प्रणाली