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सरिय्या अम्र बिन आस
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सरिय्या हज़रत अम्र बिन आस रज़ि० सितंबर 629 और
इस्लामी कैलेंडर के 6वें महीने 8 हिजरी http://military.hawarey.org/military_english.htm List of Battles of Muhammad 2011-04-29 https://web.archive.org/web/20110726142128/http://military.hawarey.org/military_english.htm 2011-07-26 deadhttps://books.google.com/books?id=mZmBkoDa9fcC&pg=PA218 Atlas Al-sīrah Al-Nabawīyah 2004 9789960897714 17 December 2014 जातुस्सलासिल * सफल ऑपरेशन, दुश्मन भाग गया (1 उप-जनजाति लड़ने के लिए रुकी). मित्र राष्ट्रों ने मदीना पर आक्रमण करने के अपने इरादे को विफल कर दियाhttps://books.google.com/books?id=Feo9AAAAYAAJ&pg=PA104 The Life of Mahomet and History of Islam to the Era of the Hegira 17 December 2014 Muir Sir William 1861 मुस्लिम बाइज़ेंटाइन साम्राज्य:en:Ghassanids हज़रत अम्र बिन आस रज़ि०अबू उबैदाह इब्न अल-जर्राह((सुदृढ़ीकरण कमांडर)) अंजान 300 प्रारंभ में,https://books.google.com/books?id=mZmBkoDa9fcC&pg=PA218 Atlas Al-sīrah Al-Nabawīyah 2004 9789960897714 17 December 2014 फिर 200 सुदृढीकरणhttps://books.google.com/books?id=-ppPqzawIrIC&pg=PA247 https://web.archive.org/web/20160501133017/https://books.google.com/books?id=-ppPqzawIrIC&pg=PA247 1 May 2016 The Sealed Nectar 9798694145923 17 December 2014 dead Mubarakpuri Safiur Rahman 6 October 2020 अज्ञात (बहुत बड़ा, प्राथमिक स्रोतों के अनुसार 100.000 तक पहुंचना) अंजान अंजान मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
सरिय्या हज़रत अम्र बिन आस रज़ि० या सरिय्या जातुस्सलासिल सैन्य अभियान मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश पर सितंबर 629 और
इस्लामी कैलेंडर के 6वें महीने 8 हिजरी में हुआ। हज़रत अम्र बिन आस रज़ि० के नेतृत्व और सहायक कमांडर अबू उबैदाह इब्न अल-जर्राह रज़ि०
के साथ
प्राथमिक स्रोतों के अनुसार
500 सहाबा ने एक लाख की सेना को हराया।
नाम
जातुस्सलासिल, वादियुल कुरा से आगे एक क्षेत्र का नाम है। यहां से मदीना की दूरी दस दिन है। इब्ने इस्हाक़ का बयान है कि मुसलमान कबीला जुज़ाम की फौज में स्थित सलसल नामी एक स्रोत पर उतरे थे। इसी लिए इस मुहिम का नाम जातुस्सलासिल पड़ गया।
पृष्ठभूमि
इस्लाम के विद्वान सफिउर्रहमान मुबारकपुरी लिखते हैं कि
जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मूता की लड़ाई के सिलसिले में मशारिफे शाम के अंदर रहने वाले अरब कबीलों के दृष्टिकोण की जानकारी हुई कि वे मुसलमानों से लड़ने के लिए रूमियों के झंडे तले जमा हो गए थे तो आप ने एक ऐसी परिपक्व नीति की ज़रूरत महसूस की जिसके ज़रिए एक ओर तो इन अरब क़बीलों और रूमियों में भेद-भाव पैदा हो जाए और दूसरी ओर खुद मुसलमानों से उनकी दोस्ती हो जाए, ताकि इस इलाके में दोबारा आप के ख़िलाफ़ इतनी बड़ी सेना जमा करना संभव न हो सके
इस मकसद के लिए आप ने हज़रत अम्र बिन आस रज़ि० को चुना क्योंकि उनकी दादी कबीला बली से ताल्लुक रखती थीं। चुनांचे आप ने मूता की लड़ाई के बाद ही यानी जमादिउल आख़िर सन् 08 हि० में उनका दिल रखने के लिए हज़रत अम्र बिन आस रजि० को उन की ओर भेजा। कहा जाता है कि जासूसों ने यह ख़बर भी दी थी कि बनू कुजाओं से मदीना पर धावा बोलने के इरादे से एक टुकड़ी तैयार कर रखी है, इसलिए आप ने हज़रत अम्र बिन आस रजि० को उनकी ओर रवाना किया। संभव है दोनों चीजें इकट्ठा हो गयी हों।
बहरहाल अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हज़रत अम्र बिन आस रज़ि० के लिए सफेद झंडा बांधा और उसके साथ काली झंडियां भी दीं और उनकी कमान में बड़े-बड़े मुहाजिरों व अंसार की तीन सौ की तायदाद देकर उन्हें विदा किया। उन के साथ तीस घोड़े भी थे। आप ने हुक्म दिया कि बली और अज़रा और बिलक़ीन के जिन लोगों के पास से गुज़रें उनसे मदद चाहें। वे रात को सफ़र करते और दिन को छिपे रहते थे। जब दुश्मन के क़रीब पहुंचे तो मालूम हुआ कि उन की सेना बहुत बड़ी है। इसलिए हज़रत अम्र रजि० ने हज़रत राफेअ रजि० बिन मकीस जोहनी को कुमुक तलब करने के लिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सेवा में भेज दिया। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हज़रत अबू उबैदा बिन जर्राह रज़ि० को झंडा देकर उनके नेतृत्व में दो सौ फौजियों की कुमुक रवाना फ़रमाई, जिस में मुहाजिरों के सरदार जैसे अबू बक्र रज़ि० और उमर रज़ि० और अंसार के सरदार भी थे। हज़रत उबैदा रज़ि० को हुक्म दिया गया था कि अम्र बिन आस रजि० से जा मिलें और दोनों मिल कर काम करें, मतभेद न करें। वहां पहुंच कर अबू उबैदा रज़ि० ने इमामत करनी चाही लेकिन हज़रत अम्र रज़ि० ने कहा, आप मेरे पास कुमुक के तौर पर आए हैं, अमीर मैं हूं। अबू उबैदा ने उनकी बात मान ली और नमाज़ हज़रत अम्र रज़ि० ही पढ़ाते रहे ।
हमला
कुमुक आ जाने के बाद यह सेना और आगे बढ़ कर कुजाआ इलाके में दाख़िल हुई और इस इलाके को रौंदती हुई उसकी दूर-दराज की सीमाओं तक जा पहुंची। आख़िर में एक सेना से मुडभेड़ हुई, लेकिन जब मुसलमानों ने उस पर हमला किया तो वह इधर उधर भाग कर बिखर गयी।
सुबह की प्रार्थना के बाद रात की आड़ में, अम्र इब्न अल-अस ने रात में दुश्मन के शिविर पर अपनी खुद की संख्या को छुपाते हुए एक रात का छापा मारा। विरोधी तादाद के चकमे में आगये और बड़ी तादाद होते हुए भी हार गए।
'अम्र ने अपने सैनिकों को दो आदमियों में से प्रत्येक को एक साथ रहने का भी निर्देश दिया, उन्होंने अपने घोड़ों को एक साथ बाँधने का भी निर्देश दिया ताकि युद्ध के दौरान जो कुछ भी हुआ हो उसे अलग न किया जा सके। मुस्लिम विद्वान सैफुर रहमान अल-मुबारकपुरी के अनुसार, एक उप-जनजाति को छोड़कर, उसने अधिकांश लोगों को भगा दिया।
सफिउर्रहमान मुबारकपुरी पुस्तक अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ) सरिय्या ज़ाते अतलह (रबीउल अव्बल सन् 08 हि०) https://archive.org/details/offlinedeeniapp_20210707_1905/Ar%20Raheequl%20Makhtoom%20Seerate%20Nabi/page/n773/mode/2up 13 दिसम्बर 2022 799
सराया और ग़ज़वात
अंगूठाकार|
इस्लामी शब्दावली में अरबी शब्द ग़ज़वा Ghazwa https://en.wiktionary.org/wiki/ghazwa इस्लाम के पैग़ंबर के उन अभियानों को कहते हैं जिन मुहिम या लड़ाईयों में उन्होंने शरीक होकर नेतृत्व किया,इसका बहुवचन है गज़वात, जिन मुहिम में किसी सहाबा को ज़िम्मेदार बनाकर भेजा और स्वयं नेतृत्व करते रहे उन अभियानों को सरियाह(सरिय्या) या सिरया कहते हैं, इसका बहुवचन सराया है।siryah https://en.wiktionary.org/wiki/siryah#English
ग़ज़वात और सराया की तफसील, पुस्तक: मर्दाने अरब, पृष्ट ६२] https://archive.org/details/mardane-arab-hindi-volume-no.-1/page/n32/mode/1up
इन्हें भी देखें
सरिय्या कअब बिन उमैर ग़फ़्फ़ारी
सरिय्या बशीर बिन साद (फ़िदक)
मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
मुहम्मद के अभियानों की सूची
ग़ज़वा ए दूमतुल जन्दल
सन्दर्भ
श्रेणी:मुहम्मद
श्रेणी:इस्लाम
श्रेणी:इस्लाम का इतिहास
श्रेणी:अरब इतिहास
श्रेणी:मुस्लिम विजय
बाहरी कड़ियाँ
Ar-Raheeq Al-Makhtum|Ar Raheeq Al Makhtum– The Sealed Nectar (Biography Of The Noble Prophet) -First PRIZE WINNER BOOK Ar Raheeq Al Makhtum
अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी), पैगंबर की जीवनी (प्रतियोगिता में प्रथम पुस्तक) अर्रहीकुल मख़तूम