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411 समाचार
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सत्यानंद स्टोक्स

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सत्यानंद स्टोक्स Satyanand Stokes with local children.jpg 250px स्थानीय बच्चों के साथ सत्यानंद स्टोक्स सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर yes 1882 8 16 फिलाडेल्फिया, पेनसिल्वेनिया, संयुक्त राज्य अमेरिका 1946 5 14 1882 8 16 शिमला, पंजाब प्रान्त, ब्रिटिश भारत(वर्तमान शिमला, हिमाचल प्रदेश, भारत) बागवानी विशेषज्ञ 7 (3 पुत्र और 4 पुत्रियाँ) सैमुअल इवांस स्टोक्स वरिष्ठफ्लोरेंस स्पेंसर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रियादेवी स्टोक्स (जन्म नाम: एग्नेस बेंजामिन) विद्या स्टोक्स सत्यानंद स्टोक्स (जन्म: सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर,(Samuel Evans Stokes) 16 अगस्त 1882 – 14 मई 1946) एक अमेरिकी मूल के व्यक्ति थे, जो भारत में आकर बस गए और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से सहभागी बने। उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश का अध्ययन किया और श्री रूल्या राम आर्य से भेंट की। इसके पश्चात उन्होंने अपना नाम सत्यानंद आर्य रख लिया और बाद में अपने उपनाम के रूप में स्टोक्स का पुनः प्रयोग करने लगे। सत्यानंद स्टोक्स को आज मुख्यतः इस कारण स्मरण किया जाता है कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती की शुरुआत की। वर्तमान में सेब राज्य की प्रमुख बागवानी फसल तथा निर्यात उत्पादों में से एक है।Fit to Post: Satyananda Stokes http://in.yfittopostblog.com/tag/satyananda-stokes/ https://web.archive.org/web/20100819063115/http://in.yfittopostblog.com/tag/satyananda-stokes/ 19 अगस्त 2010 जीवनी प्रारम्भिक जीवन सत्यानंद स्टोक्स का जन्म सैमुअल इवांस स्टोक्स जूनियर के रूप में एक अमेरिकी क्वेकर परिवार में हुआ था। उनके पिता एक व्यवसायी थे तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में लिफ्ट निर्माण की अग्रणी कंपनी स्टोक्स एंड पैरिश मशीन कंपनी के संस्थापक थे। भारत आगमन 1904 में, 22 वर्ष की आयु में, सैमुअल शिमला के निकट सुबाथू स्थित एक कुष्ठ रोगी आश्रम में कार्य करने के लिए भारत आए। उनके माता-पिता इस निर्णय के विरोधी थे। क्वेकर परंपरा में पले-बढ़े सैमुअल भारतीय आध्यात्मिकता में प्रतिष्ठित तपस्वी जीवनशैली से प्रभावित हुए और ग्रामीणों के बीच अत्यंत सादा एवं मितव्ययी जीवन व्यतीत करने लगे। इस प्रकार वे एक ईसाई संन्यासी के रूप में पहचाने जाने लगे। कुछ वर्षों बाद, जब कैंटरबरी के आर्चबिशप शिमला (जो उस समय ब्रिटिश राज की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी) में वायसराय से मिलने आए, तो उन्होंने कुष्ठ रोगी आश्रम के बारे में सुना और सैमुअल के कार्यों से प्रभावित हुए। उन्होंने सैमुअल को फ्रांसिस्कन फ्रायर्स नामक एक धार्मिक संघ स्थापित करने के लिए प्रेरित किया, जिसका उद्देश्य निर्धनता में जीवन व्यतीत करना तथा रोगियों और मृत्युशय्या पर पड़े लोगों की सेवा करना था। सैमुअल ने ऐसा संघ स्थापित किया, किंतु इस भ्रमणशील साधु-संघ में उनकी सदस्यता केवल दो वर्षों तक ही रही। 1912 में सैमुअल ने एक स्थानीय युवती से विवाह किया, निर्धन जीवनशैली का त्याग किया और अपनी पत्नी के गाँव के निकट कोटगढ़ में कृषि भूमि खरीदकर वहीं बस गए। उनकी पत्नी एग्नेस प्रथम पीढ़ी के एक ईसाई परिवार की पुत्री थीं। सैमुअल को अपने पिता से पर्याप्त पैतृक संपत्ति प्राप्त हुई थी, जिसकी क्रय-शक्ति भारत के उस दूरस्थ क्षेत्र में और भी अधिक प्रभावशाली सिद्ध हुई। एग्नेस और सैमुअल के सात बच्चे हुए।2013-10-22 Granddaughter introduces American who brought apple to Himachal https://www.hindustantimes.com/chandigarh/granddaughter-introduces-american-who-brought-apple-to-himachal/story-68fBjnILgSSIbekExtLivJ.html 2022-12-24 Hindustan Times enSharma Asha An American in Khadi: The Definitive Biography of Satyanand Stokes https://archive.org/details/americaninkhadid0000shar 1999 Penguin Books India New Delhi 0-14-028509-1 97 स्टोक्स क्राइस्ट मिथक सिद्धांत के आलोचक थे। उन्होंने द हिस्टोरिकल कैरेक्टर ऑफ द गॉस्पेल नामक पुस्तक लिखी, जिसे क्रिश्चियन लिटरेचर सोसाइटी फॉर इंडिया (मद्रास) द्वारा प्रकाशित किया गया था। बाद में यह पुस्तक लंदन में द गॉस्पेल अकॉर्डिंग टू ज्यूज़ एंड पैगन्स (1913) शीर्षक से पुनः प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में उन्होंने यीशु मसीह के ऐतिहासिक अस्तित्व तथा उनके क्रूस पर चढ़ाए जाने की ऐतिहासिकता के पक्ष में तर्क प्रस्तुत किए। सेब की खेती सैमुअल ने अपने द्वारा खरीदी गई कृषि भूमि के विकास पर विशेष ध्यान दिया और उन्हें ऐसे विद्वत्तापूर्ण संसाधनों तक पहुँच प्राप्त थी जो अन्य ग्रामीणों के लिए उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के लुइज़ियाना में स्टार्क ब्रदर्स द्वारा विकसित सेब की एक नई किस्म को शिमला की पहाड़ियों के लिए उपयुक्त पाया और 1916 में कोटगढ़ स्थित अपने खेत में इसकी खेती आरम्भ की। इससे प्राप्त प्रचुर उत्पादन तथा दिल्ली में निर्यात व्यवसाय संचालित करने वाले यूरोपीय बसने वालों तक सैमुअल की पहुँच ने स्थानीय किसानों को भी उनके मार्ग का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। अगले कुछ दशकों में उन्होंने और अधिक भूमि खरीदी तथा उसे विभिन्न सेब की किस्मों के उत्पादन के लिए समर्पित किया। इन किस्मों के पौधों और बीजों का उपयोग स्थानीय ग्रामीण अपने बागों की स्थापना के लिए करने लगे। इन प्रयासों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की तथा क्षेत्र में सेब उत्पादन को एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिन्दू धर्म में परिवर्तन उनका सुखद जीवन उस समय गहरे दुःख में बदल गया जब उनके पुत्र तारा की अमीबीय पेचिश (Amoebic dysentery) के कारण मृत्यु हो गई। 1932 में सैमुअल ने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया और अपना नाम सत्यानंद रख लिया, जबकि उनकी पत्नी एग्नेस ने अपना नाम बदलकर प्रियादेवी कर लिया।Sharma Asha An American in Khadi: The Definitive Biography of Satyanand Stokes https://archive.org/details/americaninkhadid0000shar 1999 Penguin Books India New Delhi 0-14-028509-1 293The Pacific Historical Review हिन्दू धर्म अपनाने का स्टोक्स का निर्णय उनकी पत्नी एग्नेस के लिए आसान नहीं था, क्योंकि इसके परिणामस्वरूप उनके पारिवारिक संबंधों में दूरी उत्पन्न हो गई।Sharma Asha An American in Khadi: The Definitive Biography of Satyanand Stokes https://archive.org/details/americaninkhadid0000shar 1999 Penguin Books India New Delhi 0-14-028509-1 279, 287 भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन स्टोक्स में सामाजिक न्याय की प्रबल भावना थी और बाद में वे ब्रिटिश साम्राज्य से भारत की स्वतंत्रता के लिए चल रहे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। उन्हें यह दुर्लभ सम्मान प्राप्त है कि वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) के सदस्य बनने वाले एकमात्र अमेरिकी थे। उन्होंने लाला लाजपत राय के साथ पंजाब का प्रतिनिधित्व किया। 1921 में वे कांग्रेस के उस घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले एकमात्र विदेशी थे, जिसमें भारतीयों से सरकारी सेवाओं का त्याग करने का आह्वान किया गया था। उसी वर्ष उन्हें राजद्रोह तथा ब्रिटिश सरकार के प्रति घृणा फैलाने के आरोप में कारावास की सज़ा दी गई। इस प्रकार वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटेन के राजनीतिक बंदी बनने वाले एकमात्र अमेरिकी बने। स्टोक्स की गिरफ्तारी पर महात्मा गांधी ने लिखा: उनका (स्टोक्स का) भारतीयों की तरह अनुभव करना, उनके दुःखों को साझा करना और स्वयं को इस संघर्ष में समर्पित कर देना सरकार के लिए असहनीय सिद्ध हुआ। उन्हें सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र छोड़ना स्वीकार्य नहीं था, इसलिए उनकी श्वेत त्वचा भी उनकी रक्षा नहीं कर सकी। दीर्घकालिक बीमारी के पश्चात 14 मई 1946 को सैमुअल इवांस स्टोक्स (सत्यानंद स्टोक्स) का निधन हो गया। उनका देहावसान भारत की स्वतंत्रता और विभाजन से कुछ ही समय पूर्व हुआ था। विकिपीडिया शैली में हिंदी अनुवाद: कृतियाँ अर्जुन: एक भारतीय बालक की जीवन-कथा। (सैमुअल इवांस स्टोक्स के नाम से)। वेस्टमिंस्टर, 1910। यहूदियों और मूर्तिपूजकों के अनुसार सुसमाचार: गैर-ईसाई स्रोतों के आधार पर सुसमाचार की ऐतिहासिकता की स्थापना। (सैमुअल इवांस स्टोक्स के नाम से)। लॉन्गमैन्स, ग्रीन, 1913। विश्व संस्कृति के रूप में यूरोपीय सभ्यता की विफलता। (सैमुअल इवांस स्टोक्स के नाम से)। एस. गणेशन एंड कंपनी, 1921। राष्ट्रीय आत्म-साक्षात्कार तथा अन्य निबंध। (सैमुअल इवांस स्टोक्स के नाम से)। रुबिकॉन पब्लिशिंग हाउस, 1977। सत्यकाम: सच्ची अभिलाषा का मनुष्य। इंडियन पब्लिशर्स डिस्ट्रीब्यूटर्स, 1998। 81-7341-070-4 -अंग्रेजी में शीर्षक: Arjun: The Life-Story of an Indian Boy. (as Samuel Evans Stokes). Westminster, 1910. The Gospel According to Jews and Pagans: The Historical Character of the Gospel Established from Non-Christian Sources. (as Samuel Evans Stokes). Longmans, Green, 1913. The Failure of European Civilisation as a World Culture. (as Samuel Evans Stokes). Pub. S. Ganesan & Co., 1921 National Self-realisation and Other Essays. (as Samuel Evans Stokes) Rubicon Pub. House. 1977 Satyakama: Man Of True Desire. Indian Publishers Distributors, 1998. 81-7341-070-4. संदर्भ