Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

चन्दौली जिला

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

चन्दौली ज़िला भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय चन्दौली है। सन् 1997 मे वाराणसी जिले के एक हिस्से को अलग करके चन्दौली जिले का निर्माण किया गया । == प्रशासनिक == यह वाराणसी मण्डल का भाग है और उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में बिहार की सीमा से लगा हुआ है। इस जिले में कुल 4 विधानसभा सैयदराजा, चकिया ,सकलडीहा, पं दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) तथा एक लोकसभा संसदीय क्षेत्र चंदौली है। == इतिहास == प्रशासनिक उद्देश्य से चन्दौली जनपद का निर्माण वाराणसी जनपद से अलग करके वर्ष 1997 में हुआ। यह जनपद पवित्र गंगा नदी के पूर्वी और दक्षिणी दिशा की ओर स्थित है। इस ज़िले नाम अपने तहसील मुख्यालय के नाम पर रखा गया है। यह पूरा जिला प्राचीन काशी राज्य के अधिकार में था। इस जिले से सम्बन्धित अनेकों कथाओं के अतिरिक्त यहाँ प्राचीन काल की मूल्यवान धरोहरों के प्रमाण भी पाये गए हैं और ईंट आदि के अवशेष भी जहाँ तहाँ पूरे ज़िले में बिखरे पड़े हैं। इस जिले के jhehबहुत से भागों का इतिहास अभी अज्ञात है। जिले की तहसीलों में कुछ उजाड़खंड स्थान हैं, तालाब और कुण्ड हैं और उनके बारे में कई लोक-कथाएँ हैं। एक बहुत ही प्राचीन क्षेत्र बलुआ है जो सकलडीहा तहसील से 22 कि०मी० दक्षिण गंगा नदी के तट पर स्थित है। गंगा यहाँ पूरब से पश्चिम दिशा की ओर बहती हैं। हिन्दुओं का एक धार्मिक मेला हर वर्ष माघ महीने में मौनी अमावस्या के दिन लगता है। यह ’पश्चिम वाहिनी मेला’ के रूप में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि गंगा पूरे देश में केवल दो ही जगह पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं- एक प्रयागराज (इलाहाबाद) में और दूसरा बलुआ में। सकलडीहा तहसील का रामगढ़ गाँव एक महान अघोरेश्वर संत बाबा कीनाराम की जन्मभूमि है। यह चहनियाँ से मात्र 06 कि०मी० की दूरी पर स्थित है। संत कीनाराम वैष्णव धर्म के महान अनुयायी थे। इनका शिव और शक्ति में गहरा विश्वास था और दैवीय शक्ति में भी दृढ़ विश्वास था। अपना पूरा जीवन इन्होंने मानव जाति की सेवा में लगा दिया। यह स्थान हिन्दुत्व का एक पवित्र स्थल बन गया है। जिले का एक प्राचीन स्थान है हेतमपुर गाँव। यहाँ एक किला है जिसे ’हेतमपुर किला’ कहा जाता है। जिला मुख्यालय से 22 कि०मी० उत्तर पूर्व में यह स्थित है। इस किले के अवशेष 22 बीघे के क्षेत्र तक फैले हुए हैं। कहा जाता है, 14वीं से 15वीं शताब्दी के बीच टोडरमल खत्री के द्वारा इसको आकार दिया गया था जो शेरशाह सूरी के राज्य में निर्माण पर्यवेक्षक थे। मुगल काल के बाद तालुकेदार तथा जागीरदार हेतम खाँ ने इसपर कब्जा कर लिया। यहाँ पाँच मुख्य ध्वस्त वीरान कोट हैं जिन्हें भुलैनी कोट, भितरी कोट, बिचली कोट, उत्तरी कोट और दक्षिणी कोट कहा जाता है। यह यात्रियों को बहुत आकर्षित करती हैं। कुछ लोग कहते हैं कि यह हेतम खाँ के द्वारा स्वयं बनवायी गयी थीं। काशी राज्य का हिस्सा होने के कारण चन्दौली का भी इतिहास वही है जो वाराणसी जिले का और काशी राज्य का है। भगवान बुद्ध के जन्म के पहले ईसा पूर्व छठीं शताब्दी में भारतवर्ष 16 महाजनपदों में विभाजित था। इनमें काशी एक था जिसकी राजधानी वाराणसी थी। वर्तमान का बनारस अपने चारों ओर के क्षेत्रों के साथ काशी महाजनपद कहा जाता था। वाराणसी नगर भारत के प्राचीनतम नगरों में से एक है। प्राचीन काल से ही यह विद्या का केन्द्र है। पुराणों में, महाभारत में और रामायण में इसका नाम आया है। यह हिन्दुओं का, साथ ही साथ बौद्धों और जैनों का भी पवित्र स्थान है। यह नाम राजा काशी के नाम पर पड़ा है जो इस वंश परम्परा का सातवाँ राजा था। सातवीं पीढ़ी के बाद एक विख्यात राजा धनवंतरी ने यहाँ शासन किया जिनका नाम आयुर्वेद के संस्थापक मुख्य चिकित्सक के रूप में स्मरण किया जाता है। काशी राज्य पर महाभारत के पूर्व की शताब्दी में मगध वंश परम्परा के शासक ब्रह्मदत्त का प्रभुत्व था। किन्तु ब्रह्मदत्त की वंशावली का उत्थान महाभारत युद्ध के बाद देखा गया। इस वंश परम्परा के करीब सैकड़ों राजाओं ने इस राज्य पर अपना शासन किया। इसके कुछ शासक तो चक्रवर्ती सम्राट हुआ करते थे। काशी के राजा मनोज ने कोशल, अंग और मगध की राजधानियों को जीत कर अपने राज्य में मिला लिया। जैन धर्मग्रंथों के अनुसार अश्वसेवा नाम के काशी के राजा थे जो 23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के पिता थे। सन् 1775 में काशी राज्य ब्रिटिश शासकों के अधिकार में आ गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बनारस स्टेट का भारत में विलय हो जाने पर इस पीढ़ी के सबसे अंतिम राजा महाराज विभूति नारायण सिंह थे जिन्होंने करीब आठ साल तक शासन किया। बाबू प्रसिद्ध नारायण सिंह, चंदौली (तत्कालीन वाराणसी) जनपद के प्रथम स्नातक के साथ-साथ जनपद के प्रथम जन प्रतिनिधि थे। श्री सिंह बनारस डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के प्रथम चेयरमैन थे। बाबु प्रसिद्ध नारायण सिंह चंदौली जनपद के कादिराबाद गावँ के मूल निवासी थे। राजा बनारस द्वारा नौगढ़ में श्री सिंह को जमीन दान स्वरूप दिया गया था जहाँ पर श्री सिंह ने शमशेरपुर नामक गावँ स्थापित किया और आदिवासी समाज के उत्थान में काफी सहयोग किया।[उद्धरण चाहिए] == भूगोल == जनपद चन्दौली वाराणसी से ३० कि०मी० दूरी पर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में अक्षांश २४° ५६' से २५° ३५' उत्तर एवं ८१° १४' से ८४° २४' पूर्व में स्थित है। भौगोलिक संरचना की दृष्टि से जिले की औसत ऊंचाई ७० मीटर (२२९ फीट) तथा क्षेत्रफल २४८४.७० किमी है। चन्दौली पूर्व दिशा में बिहार राज्य, उत्तर-उत्तर-पूर्व में गाजीपुर जनपद, दक्षिण में सोनभद्र जनपद, दक्षिण-पूर्व में बिहार राज्य एवं दक्षिण-पश्चिम में मिर्ज़ापुर जनपद की सीमाओं से घिरा है। कर्मनाशा नदी इस जनपद और बिहार राज्य के मध्य की विभाजन रेखा है। गंगा, कर्मनाशा और चन्द्रप्रभा नदियाँ इस जनपद की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव रखती हैं। चंदौली को चावल का कटोरा के रूप में भी जाना जाता है। == जनांकिक == 2001 के रूप में भारत चंदौली 20,071 की आबादी थी। पुरुषों आबादी और 45% महिलाओं की 55% का गठन. 74% की पुरुष साक्षरता और 55% की महिला साक्षरता के साथ, चंदौली 66% की एक औसत साक्षरता दर 59.5% के राष्ट्रीय औसत से अधिक है। जनसंख्या का 16% उम्र के 6 वर्ष से कम है।जिले में धनगर (गड़रिया) समुदाय के लोग भी निवास करते हैं, जो लंबे समय से प्रशासनिक स्तर पर अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी करने की माँग को लेकर सक्रिय रहे हैं।<ref>{{cite news |title=प्रमाण पत्र के लिए किया प्रदर्शन, Chandauli Hindi News |url=https://livehindustan.com |work=Hindustan |language=hi}}</ref> == जिले के प्रमुख व्यक्तित्व == नामवर सिंह कमलापति त्रिपाठी अखण्डानन्द सरस्वती लालबहादुर शास्त्री राजनाथ सिंह अवध बिहारी( सिंह कविजी) == इन्हें भी देखें == चन्दौली उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के जिले == बाहरी कड़ियाँ == चन्दौली ज़िले का आधिकारिक जालस्थल == सन्दर्भ ==