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सिंघण
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देवगिरि के यादव सम्राट 1200/1210–1246 सेउना यादव वंश जैतुगी कृष्ण
सिंघण (1210-1247 ई.) देवगिरि के यादव वंश का राजा था। वह यादव वंश का सबसे शक्तिशाली और प्रतापी राजा सिद्ध हुआ था। 37 वर्ष के अपने शासन काल में उसने चारों दिशाओं में बहुत से युद्ध किए और देवगिरि के यादव राज्य को उन्नति की चरम सीमा पर पहुँचा दिया। होयसल राजा वीर बल्लाल ने सिंघण के पितामह भिल्लम को युद्ध में मारा था और यादव राज्य को बुरी तरह से आक्रान्त किया था। अपने कुल के इस अपमान का प्रतिशोध करने के लिए सिंघण ने द्वारसमुद्र के होयसाल राज्य पर आक्रमण किया और वहाँ के राजा वीर बल्लाल द्वितीय को परास्त कर उसके अनेक प्रदेशों पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया।http://archive.org/details/the-seunas-the-yadavas-of-devagiri The Seunas (The Yadavas Of Devagiri) S. Ritti
साम्राज्य विस्तार
सिंघण ने अपने साम्राज्य की सीमाओं को विस्तार देने के लिए कई महत्त्वपूर्ण सैनिक अभियान किये और युद्ध लड़े। होयसल वंश के राजा कि विजय के बाद सिंघण ने उत्तर दिशा में विजय यात्रा के लिए प्रस्थान किया। गुजरात पर उसने कई बार आक्रमण किए और मालवा को अपने अधिकार में लाकर काशी और मथुरा तक विजय यात्रा की। इतना ही नहीं, उसने कलचुरी राज्य को परास्त कर अफ़ग़ान शासकों के साथ भी युद्ध किए, जो उस समय उत्तर भारत के बड़े भाग को अपने स्वामीत्व में ला चुके थे।
कोल्हापुर के शिलाहार, बनवासी के कदम्ब और पांड्य देश के राजाओं को भी सिंघण ने आक्रान्त किया और अपनी इन दिग्विजयों के उपलक्ष्य में कावेरी नदी के तट पर एक 'विजय स्तम्भ' की स्थापना की। इसमें सन्देह नहीं कि यादव राज सिंघण एक विशाल साम्राज्य का निर्माण करने में सफल हुआ था और न केवल सम्पूर्ण दक्षिणापथ अपितु कावेरी तक का दक्षिण भारत और विंध्याचल के उत्तर के भी कतिपय प्रदेश उसकी अधीनता में आ गए थे।
सन्दर्भ
श्रेणी:१३वीं शताब्दी के भारतीय शासक