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क़ैस इब्न अल-मुलाव्वह
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क़ैस इब्न अल-मुलाव्वह قيس بن الملوح Qays ibn Al-Mulawwah by Khalil Gibran.png खलील जिब्रान द्वारा क़ैस इब्न अल-मुलाव्वह का एक रेखाचित्र लगभग 645 ईसवी नज्द, अरबी प्रायद्वीप (उमय्यद खिलाफत) लगभग 688 ईसवी नज्द, अरबी प्रायद्वीप कवि शास्त्रीय अरबी अरब ग़ज़ल, उज़्री (ʿUdhri) प्रेम कविता मजनून लैला की कविताएँ (दीवान-ए-मजनून) उज़्री (ʿUdhri) काव्य परंपरा Q14354376
क़ैस इब्न अल-मुलाव्वह (अरबी: قيس بن الملوح; जन्म लगभग 645 ईसवी – निधन 688 ईसवी), जिन्हें इतिहास और साहित्य में उनके लोकप्रिय उपनाम मजनून लैला (مجنون ليلى, अर्थात "लैला का पागल") से जाना जाता है, उमय्यद खिलाफत के युग के एक प्रमुख शास्त्रीय अरबी कवि थे। वे बानू आमिर (Banu 'Amir) कबीले से संबंधित एक बद्दू (खानाबदोश) कवि थे। शास्त्रीय अरबी साहित्य और मध्य पूर्वी इतिहास में उन्हें उनकी चचेरी बहन लैला अल-आमिरिया (Layla al-Aamiriya) के साथ उनके अप्राप्य और दुखद प्रेम प्रसंग के लिए मुख्य रूप से पहचाना जाता है। उनकी यह कथा अरबी संस्कृति से निकलकर बाद में मध्य पूर्वी, तुर्की और दक्षिण एशियाई साहित्य की सर्वाधिक प्रसिद्ध कथाओं में से एक बन गई।https://www.cambridge.org/core/books/arabic-poetics/069E5876505AED64A8B3FD53A4A5EB4A Arabic Poetics: Aesthetic Experience in Classical Arabic Literature Harb Lara 2020 Cambridge University Press 978-1-108-49021-4 Cambridge Studies in Islamic Civilization Cambridge
प्रारंभिक जीवन और सामाजिक परिवेश
क़ैस इब्न अल-मुलाव्वह का जन्म सातवीं शताब्दी में अरबी प्रायद्वीप के नज्द क्षेत्र में हुआ था। ऐतिहासिक कथाओं और साहित्यिक स्रोतों के अनुसार, क़ैस और लैला एक ही कबीले के थे और बचपन के साथी थे। बेदुइन (बद्दू) परंपराओं के अनुसार, वे दोनों अपने कबीले के मवेशियों को एक साथ चराते हुए बड़े हुए थे। इसी दौरान क़ैस का लैला के प्रति आकर्षण बढ़ा। जैसे-जैसे वे बड़े हुए, क़ैस ने लैला की सुंदरता और अपने भावनात्मक जुड़ाव का वर्णन करते हुए कविताएँ लिखनी शुरू कर दीं, जो धीरे-धीरे उनके कबीले में प्रसिद्ध होने लगीं।https://arablit.org/2014/11/04/chronicles-of-majnun-layla-selected-poems/ ‘Chronicles of Majnun Layla & Selected Poems’: A Different Kind of Crazy 2014-11-04 ARABLIT & ARABLIT QUARTERLY en-US 2026-03-13
उस समय के तत्कालीन अरब समाज में, विवाह से पूर्व किसी महिला के लिए खुलेआम प्रेम कविताएँ लिखना या उसके नाम की सार्वजनिक घोषणा करना सामाजिक रूप से अत्यंत अनुचित माना जाता था। जब क़ैस ने लैला के पिता के समक्ष विवाह का औपचारिक प्रस्ताव रखा, तो उसे अस्वीकार कर दिया गया। लैला के परिवार का तर्क था कि क़ैस की कविताओं ने पहले ही समाज में विवाद उत्पन्न कर दिया है, और ऐसे व्यक्ति से विवाह करना परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा के विरुद्ध होगा। इसके परिणामस्वरूप, लैला का विवाह 'वर्द' (Ward) नामक एक अन्य संपन्न व्यक्ति से कर दिया गया।https://www.orient-institut.org/publications/bts-beiruter-texte-und-studien/details/love-madness-and-poetry-an-interpretation-of-the-ma-nun-legend.html Love, Madness, and Poetry: An Interpretation of the Maǧnūn Legend www.orient-institut.org en-US 2026-03-13
अलगाव, निर्वासन और उज़्री काव्य परंपरा
लैला के विवाह की खबर का क़ैस के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने अपना सामान्य जीवन, कबीले के लोग और अपना घर छोड़ दिया और रेगिस्तान की ओर प्रस्थान किया। उनके इस विक्षिप्त व्यवहार, सामाजिक अलगाव और दिन-रात जंगलों में भटकने के कारण ही स्थानीय लोगों ने उन्हें मजनून (जिसका अरबी अर्थ 'पागल' या 'जिन्न द्वारा ग्रसित' होता है) कहना शुरू कर दिया।https://press.uchicago.edu/ucp/books/book/chicago/Z/bo3634564.html The Zephyrs of Najd: The Poetics of Nostalgia in The Classical Arabic Nasib Stetkevych Jaroslav University of Chicago Press Chicago, IL en
साहित्यिक आख्यानों के अनुसार, मजनून ने अपना शेष जीवन नज्द के बंजर रेगिस्तान में भटकते हुए व्यतीत किया। वे अक्सर रेत पर लकड़ी के टुकड़े से लैला के लिए कविताएँ लिखते थे। उनकी कविताओं में अलगाव की पीड़ा, अप्राप्य प्रेम का दुख और आसपास के प्राकृतिक परिवेश का विस्तृत वर्णन मिलता है। उनकी ये रचनाएँ अरबी साहित्य की 'उज़्री' (ʿUdhri) काव्य परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती हैं। उज़्री कविता की विशेषता यह है कि यह बिना किसी शारीरिक या सांसारिक संबंध के, एक अत्यंत पवित्र, वैराग्यपूर्ण और दुखद प्रेम पर केंद्रित होती है, जिसमें प्रेमी अक्सर अपने प्रेम की प्राप्ति न होने पर मृत्यु को प्राप्त होता है।Al-A’māl al-Shiʿriyyah [Poetic Works] 2 Beirut Al-Muʾassasa al-ʿArabiyya lil-Dirāsāt wa-l-Nashr 2000 181–254
साहित्यिक विरासत और सूफी प्रतीकवाद
क़ैस इब्न अल-मुलाव्वह की कहानी केवल एक क्षेत्रीय अरबी लोककथा तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय के साथ इसने एक दार्शनिक, आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक रूप ग्रहण कर लिया। इस्लामी रहस्यवाद (सूफीवाद) के उदय के साथ, मजनून का लैला के प्रति सांसारिक प्रेम, आत्मा की ईश्वर (परमात्मा) के प्रति असीम लालसा का एक रूपक (Allegory) बन गया। सूफी विचारकों ने मजनून के विक्षिप्तपन को सांसारिक मोहमाया से मुक्ति और ईश्वरीय प्रेम में पूर्ण समर्पण (फ़ना) के रूप में व्याख्यायित किया।Watson Alasdair From Qays to Majnun: the evolution of a legend fromʿUdhri roots to Sufi allegory University of Oxford 2 2026-03-13 https://www.slv.vic.gov.au/sites/default/files/La-Trobe-Journal-91-Alasdair-Watson.pdf
इस ऐतिहासिक कथा को 12वीं शताब्दी में फारसी के महान कवि निज़ामी गंजवी ने अपने महाकाव्य 'लैला-मजनून' का मुख्य विषय बनाया। निज़ामी की रचना के बाद यह कहानी तुर्की, फारसी और दक्षिण एशियाई साहित्य में व्यापक रूप से लोकप्रिय हो गई। प्रारंभिक आधुनिक भारतीय उपमहाद्वीप में भी लैला और मजनून की कथा का व्यापक प्रभाव पड़ा, जहाँ इसे क्षेत्रीय भाषाओं में कई बार रूपांतरित किया गया और यह यहाँ के लोक साहित्य का अभिन्न अंग बन गई।Hasson Michal 31 August 2018 Crazy in Love: The Story of Laila and Majnun in Early Modern South Asia Harvard University, Graduate School of Arts & Sciences 32 2026-03-13 https://dash.harvard.edu/server/api/core/bitstreams/a9b27ae0-5d0a-422e-aafe-08b5100288c3/content 6 मार्च 2026 https://web.archive.org/web/20260306173334/https://dash.harvard.edu/server/api/core/bitstreams/a9b27ae0-5d0a-422e-aafe-08b5100288c3/content bot: unknown
आधुनिक संस्कृति और कला में प्रभाव
क़ैस की कविता और उनके जीवन की कथा का आधुनिक साहित्य, कला और सिनेमा पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। समकालीन लेखकों और कवियों ने उनकी शास्त्रीय कविताओं का नए दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया है। बहरीन के प्रसिद्ध कवि कसीम हद्दाद ने अपनी पुस्तक 'क्रॉनिकल्स ऑफ मजनून लैला एंड सिलेक्टेड पोयम्स' में उनकी कविताओं का आधुनिक और मनोवैज्ञानिक संदर्भ में विश्लेषण किया है।https://openlibrary.org/books/OL34028710M/Chronicles_of_Majnun_Layla_and_Selected_Poems Chronicles of Majnun Layla and Selected Poems Haddad Qasim Ghazoul Ferial Jabouri Verlenden John 2014 Syracuse University Press 978-0-8156-5288-5
विश्व स्तर पर इस कहानी का कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उदाहरण के लिए, 1981 में जापानी विद्वान एमिको ओकाडा द्वारा इसका जापानी भाषा में अनुवाद किया गया, जिसने पूर्वी एशिया में इस कथा को परिचित कराया।Laila and Majnun: An Arab Love Story ja Emiko Okada Heibonsha Toyo Bunko 1981 2026-03-13 https://www.heibonsha.co.jp/book/b164515.html https://web.archive.org/web/20250417035217/https://www.heibonsha.co.jp/book/b164515.html 2025-04-17 इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्वी सिनेमा और दृश्य-श्रव्य माध्यमों में भी इस कहानी को कई बार फिल्माया गया है। 1960 में 'कैस वा लैला' (Qaiss wa Laila) नामक एक लोकप्रिय अरबी फिल्म का निर्माण किया गया।Din Ahmed Dia El Qaiss wa Laila 1960-01-18 https://www.imdb.com/hi/title/tt0359531/?reasonForLanguagePrompt=browser_header_mismatch Magda, Shukri Sarhan, Mohamed Sobeih Aflam Magda 2026-03-13 2008 में 'मजनून लैला' (مجنون ليلى) नामक एक ऐतिहासिक टेलीविजन धारावाहिक प्रसारित किया गया, जिसने आधुनिक दर्शकों के समक्ष इस कवि की जीवनी को एक नए रूप में प्रस्तुत किया।طاقم العمل: مسلسل - مجنون ليلى - 2008 https://elcinema.com/work/1011442/cast 2026-03-13
इन्हें भी देखें
लैला अल-आमिरिया
सन्दर्भ
श्रेणी:अरब कवि
श्रेणी:उमय्यद खलीफ़ाओं के काल के लोग
श्रेणी:सातवीं शताब्दी के अरब लोग