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'''विद्युतचुम्बकीय प्रेरण''' (Electromagnetic induction)
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विद्युत्-चुम्बकीय प्रेरण वार्ता:विद्युत्-चुम्बकीय प्रेरण#प्रस्तावित विलय विद्युतचुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic induction) में विद्युत्-चुम्बकीय प्रेरण सितंबर 2026
विद्युतचुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic induction) वह भौतिक परिघटना है जिसमें किसी परिपथ से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर उस परिपथ में विद्युतवाहक बल (EMF) उत्पन्न होता है। यदि परिपथ बन्द हो, तो इस विद्युतवाहक बल के कारण उसमें विद्युत धारा प्रवाहित हो सकती है।https://openstax.org/books/physics/pages/20-3-electromagnetic-induction Electromagnetic Induction Physics OpenStax 2026-09-08
विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का उपयोग विद्युत जनित्र, ट्रांसफॉर्मर, प्रेरक तथा अनेक अन्य विद्युत उपकरणों में किया जाता है।https://openstax.org/books/college-physics/pages/23-introduction-to-electromagnetic-induction-ac-circuits-and-electrical-technologies Introduction to Electromagnetic Induction, AC Circuits and Electrical Technologies College Physics OpenStax 2026-09-08
इतिहास
माइकल फैराडे ने 1831 में विद्युतचुम्बकीय प्रेरण से संबंधित प्रयोग किए। उनके प्रयोगों में यह पाया गया कि चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन होने पर किसी पास के परिपथ में विद्युत प्रभाव उत्पन्न हो सकता है। इसी समय जोसेफ हेनरी ने भी स्वतंत्र रूप से इस घटना का प्रदर्शन किया था।https://www.rigb.org/about-us/our-history Our history Royal Institution 2026-09-08
फैराडे के प्रयोगों ने विद्युत और चुम्बकत्व के बीच संबंध को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में विद्युतचुम्बकीय प्रेरण विद्युतचुम्बकत्व के मूलभूत सिद्धान्तों में शामिल हो गया।
चुम्बकीय फ्लक्स
किसी सतह से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय क्षेत्र के माप से संबंधित राशि को चुम्बकीय फ्लक्स कहा जाता है। एक समान चुम्बकीय क्षेत्र के लिए इसका मान इस प्रकार लिखा जा सकता है:
जहाँ चुम्बकीय फ्लक्स, चुम्बकीय क्षेत्र, सतह का क्षेत्रफल तथा चुम्बकीय क्षेत्र और सतह के अभिलम्ब के बीच का कोण है।https://openstax.org/books/college-physics/pages/23-1-induced-emf-and-magnetic-flux Induced EMF and Magnetic Flux College Physics OpenStax 2026-09-08
चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, सतह के क्षेत्रफल या चुम्बकीय क्षेत्र के सापेक्ष सतह की दिशा में परिवर्तन के कारण हो सकता है।
फैराडे का प्रेरण नियम
फैराडे के प्रेरण नियम के अनुसार किसी परिपथ में उत्पन्न विद्युतवाहक बल चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है।https://openstax.org/books/college-physics/pages/23-2-faradays-law-of-induction-lenzs-law Faraday's Law of Induction: Lenz's Law College Physics OpenStax 2026-09-08
यदि किसी कुंडली में फेरे हों, तो:
जहाँ प्रेरित विद्युतवाहक बल, कुंडली में फेरों की संख्या तथा चुम्बकीय फ्लक्स है। ऋणात्मक चिह्न प्रेरित विद्युतवाहक बल की दिशा को दर्शाता है और इसे लेंज का नियम द्वारा समझाया जाता है।
लेंज का नियम
लेंज का नियम के अनुसार प्रेरित धारा की दिशा ऐसी होती है कि उसके द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय प्रभाव उस परिवर्तन का विरोध करता है जिसके कारण धारा उत्पन्न हुई है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कुंडली से होकर गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स बढ़ रहा है, तो कुंडली में प्रेरित धारा ऐसी दिशा में प्रवाहित होगी जिससे उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र फ्लक्स की इस वृद्धि का विरोध करे। इसी कारण फैराडे के नियम में ऋणात्मक चिह्न आता है।
विद्युतचुम्बकीय प्रेरण की प्रक्रिया
किसी स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति मात्र से किसी स्थिर कुंडली में आवश्यक रूप से प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होती। प्रेरण के लिए कुंडली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होना आवश्यक है।
यदि किसी छड़ चुम्बक को तार की कुंडली के पास ले जाया जाए या उससे दूर ले जाया जाए, तो कुंडली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स बदलता है और उसमें विद्युतवाहक बल उत्पन्न हो सकता है। चुम्बक और कुंडली के बीच सापेक्ष गति को उलटने पर प्रेरित धारा की दिशा भी बदल सकती है।
इसी प्रकार कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाने पर भी उसके साथ संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स बदल सकता है और प्रेरित विद्युतवाहक बल उत्पन्न हो सकता है।
गतिज विद्युतवाहक बल
जब कोई चालक चुम्बकीय क्षेत्र में गति करता है और इस गति के कारण चालक से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसमें विद्युतवाहक बल उत्पन्न हो सकता है। इसे गतिज विद्युतवाहक बल कहा जाता है।https://openstax.org/books/college-physics/pages/23-3-motional-emf Motional EMF College Physics OpenStax 2026-09-08
विद्युत जनित्र में इस सिद्धान्त का उपयोग किया जाता है। यांत्रिक गति के कारण चुम्बकीय क्षेत्र और चालक के बीच सापेक्ष गति उत्पन्न होती है, जिससे विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।
पारस्परिक प्रेरण
जब एक परिपथ में विद्युत धारा में परिवर्तन के कारण पास स्थित दूसरे परिपथ में विद्युतवाहक बल उत्पन्न होता है, तो इस घटना को पारस्परिक प्रेरण कहा जाता है।
पारस्परिक प्रेरण का महत्वपूर्ण उपयोग ट्रांसफॉर्मर में होता है। ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक कुंडली की परिवर्ती धारा बदलता हुआ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, जिसके कारण द्वितीयक कुंडली में विद्युतवाहक बल प्रेरित होता है।
स्वप्रेरण
जब किसी कुंडली में प्रवाहित विद्युत धारा में परिवर्तन के कारण उसी कुंडली में विद्युतवाहक बल उत्पन्न होता है, तो इसे स्वप्रेरण कहा जाता है।
स्वप्रेरण के कारण उत्पन्न विद्युतवाहक बल धारा में होने वाले परिवर्तन का विरोध करता है। इस गुण का उपयोग प्रेरक सहित विभिन्न विद्युत परिपथों में किया जाता है।
अनुप्रयोग
विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के कुछ प्रमुख अनुप्रयोग हैं:
विद्युत जनित्र में यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलना।
ट्रांसफॉर्मर में विद्युत वोल्टता को बढ़ाना या घटाना।
प्रेरक जैसे विद्युत परिपथीय घटकों में चुम्बकीय क्षेत्र के माध्यम से ऊर्जा का संचय करना।
प्रेरण मोटर में विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का उपयोग।
विभिन्न प्रकार के विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में प्रेरित विद्युत संकेत उत्पन्न करना।
महत्व
विद्युतचुम्बकीय प्रेरण ने विद्युत ऊर्जा के उत्पादन और वितरण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विद्युत जनित्र चुम्बकीय क्षेत्र और यांत्रिक गति का उपयोग करके विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करते हैं, जबकि ट्रांसफॉर्मर विद्युत ऊर्जा प्रणालियों में वोल्टता के रूपांतरण के लिए विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का उपयोग करते हैं।
इन्हें भी देखें
माइकल फैराडे
फैराडे का विद्युतचुम्बकीय प्रेरण का नियम
लेंज का नियम
चुम्बकीय फ्लक्स
विद्युतवाहक बल
विद्युतचुम्बकत्व
ट्रांसफॉर्मर
विद्युत जनित्र
स्वप्रेरण
पारस्परिक प्रेरण
सन्दर्भ
श्रेणी:विद्युतचुम्बकत्व
श्रेणी:भौतिकी
श्रेणी:विद्युत
श्रेणी:विद्युतचुम्बकीय प्रेरण