411 REFERENCE · Wikipedia
गोपाल गोडसे
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
गोपाल गोडसे Gopal Godse.jpg 200px गोपाल विनायक गोडसे 12 जून 1919 ब्रिटिश राज 26 नवंबर 2005 (आयु 86) पुणे, महाराष्ट्र, भारत महात्मा गांधी की हत्या का सह-षड्यंत्रकारी सिंधु गोडसे नाथूराम गोडसे (भाई) गोपाळ गोडसे mr
गोपाल विनायक गोडसे (mr गोपाळ विनायक गोडसे; 12 जून 1919 – 26 नवंबर 2005नाथूराम के भाई गोपाल गोडसे की मृत्यु) हिन्दू महासभा का एक कार्यकर्ता तथा ये प्रमुख आरोपी नाथूराम गोडसे का छोटा भाई था। इसे गांधी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली थी।
न्यायालय में जब गान्धी-हत्या का अभियोग चला तो मदनलाल पाहवा ने उसमें स्वीकार किया कि जो भी लोग इस षड्यन्त्र में शामिल थे पूर्व योजनानुसार उसे केवल बम फोडकर सभा में गडबडी फैलाने का काम करना था, शेष कार्य अन्य लोगों के जिम्मे था। जब उसे छोटूराम ने जाने से रोका तो उसने जैसे भी उससे बन पाया अपना काम कर दिया। उस दिन की योजना भले ही असफल हो गयी हो परन्तु इस बात की जानकारी तो सरकार को हो ही गयी थी कि गान्धी की हत्या कभी भी कोई कर सकता है। आखिर २० जनवरी १९४८ की पाहवा द्वारा गान्धी की प्रार्थना-सभा में बम-विस्फोट के ठीक १० दिन बाद उसी प्रार्थना सभा में उसी समूह के एक सदस्य नथूराम गोडसे ने गान्धी के सीने में ३ गोलियाँ मारकर गान्धी जी की हत्या कर दी।
center|500px|thumb|ऊपर ( खड़े हैं ): शंकर किस्तैया, गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा, दिगंबर बाड़गे नीचे (बैठे हैं): नारायण आप्टे, विनायक दामोदर सावरकर, नाथूराम गोडसे, विष्णु करकरे।
जीवनी
यहाँ दिए गए पाठ का हिंदी अनुवाद है:
जीवनी
गांधी की हत्या पर 2021 में आई एक पुस्तक में बताया गया है कि गोपाल गोडसे उस समय एक परिवहन कंपनी में काम करते थे और उन्होंने इससे पहले अंग्रेज-इराकी युद्ध के दौरान ब्रितानी सेना में काम कर चुका था।Suresh A.E. Kotamraju P. The Murderer, The Monarch and The Fakir: A New Investigation of Mahatma Gandhi's Assassination HarperCollins India 2021 978-93-5489-061-1 https://books.google.com/books?id=F5U9EAAAQBAJ 4 December 2022 Prologue गांधी की हत्या का षडयन्त्र रचने के आरोप में जल्द ही गिरफ्तार किए गए लोगों में गोपाल गोडसे भी शामिल थे। गोडसे और उनके सह-साजिशकर्ताओं ने इससे दस दिन पहले भी गांधी की हत्या का प्रयास किया था, लेकिन वह प्रयास विफल रहा था, जिसके लिए साजिशकर्ता मदनलाल पाहवा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। गोपाल गोडसे को दोषी ठहराया गया और उन्होंने 16 साल जेल में बिताए। Jagdish Chandra Jain Gandhi, the Forgotten Mahatma https://books.google.com/books?id=NurqxSttqjoC&pg=PA76 1987 Mittal Publications 978-81-7099-037-6 76–77 जबकि नवंबर 1949 में, उनके भाई नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी दे दी गई।https://www.outlookindia.com/magazine/story/i-regret-i-wasnt-the-man-to-kill-gandhi/204997 Madanlal Pahwa outlook Outlook India 18 November 2019 https://web.archive.org/web/20200812014101/https://www.outlookindia.com/magazine/story/i-regret-i-wasnt-the-man-to-kill-gandhi/204997 12 अगस्त 2020 dead Godse was convicted, and served 16 years in prison.Nathuram Godse, the RSS, and the Murder of Gandhi – MANAS MANAS 30 January 1948 https://southasia.ucla.edu/history-politics/hindu-rashtra/nathuram-godse-rss-murder-gandhi/ 4 December 2022 In November 1949, His brother Nathuram and Narayan Apte were sentenced to death and hanged for their role in the assassination.
गोपाल गोडसे को 1964 में रिहा किया गया था। उन्हें हत्या में अपनी भूमिका पर कोई पछतावा नहीं था। 2003 के एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि उन्हें इसका खेद नहीं है। जेल से छूटने के बाद गोपाल पुणे में रहे और हत्या पर लिखी अपनी पुस्तकों से मिलने वाली रॉयल्टी पर जीवन यापन किया। 1993 में, उन्होंने अपने भाई नाथूराम द्वारा लिखित पुस्तक "ह्वाई आई असैसिनेटेड महात्मा गांधी" (मैंने महात्मा गांधी की हत्या क्यों की?) जारी की। इसके कुछ समय बाद एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि नाथूराम, वे स्वयं और उनके दो अन्य भाई लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य रहे थे और उन्होंने कभी संगठन नहीं छोड़ा था। राजनीतिक समीक्षक ए. जी. नूरानी के अनुसार, 1997 में आरएसएस की पत्रिका ऑर्गनाइज़र द्वारा उनकी दो पुस्तकों (जिसमें एक हत्या के बारे में थी) का प्रचार किया गया था।Noorani A.G.A.M. The RSS and the BJP: A Division of Labour LeftWord Books Green School Series 2000 978-81-87496-13-7 https://books.google.com/books?id=6PnBFW7cdtsC&pg=PT43 11 December 2022 29, 43-47 A. G. Noorani
26 नवंबर 2005 को अपने घर पर ही उनकी मृत्यु हो गई। वे हत्या के षडयन्त्र करने वालों में अंतिम जीवित सदस्य थे।
गोपाल गोडसे का विवाह सिंधु गोडसे से हुआ था और उनकी दो बेटियाँ और एक बेटा है।
प्रदीप दलवी द्वारा लिखित और 1997 में पहली बार मंचित मी नथुराम गोडसे बोलतोय (मैं नाथूराम गोडसे बोल रहा हूँ) नामक मराठी नाटक गोपाल गोडसे की पुस्तक "मे इट प्लीज योर ऑनर" पर आधारित था। कारलाइन मैक्लेन के अनुसार, यह नाटक "गोडसे के बचाव पक्ष के तर्क" को अभिनीत करता है और इस प्रकार "गांधी की हत्या और गोडसे के मुकदमे को गोडसे के दृष्टिकोण से देखता है।"https://www.hindustantimes.com/India-news/Mumbai/Political-drama-surrounds-play-on-Nathuram-Godse/Article1-658335.aspx Political drama surrounds play on Nathuram Godse Kurian Susamma 2011-02-04 HT Media 9 April 2012 New Delhi dead https://web.archive.org/web/20130324235733/http://www.hindustantimes.com/India-news/Mumbai/Political-drama-surrounds-play-on-Nathuram-Godse/Article1-658335.aspx 24 March 2013Karline McLain India's Immortal Comic Books: Gods, Kings, and Other Heroes https://books.google.com/books?id=V4-Su0whKa0C&pg=PA192 10 April 2012 11 February 2009 Indiana University Press 978-0-253-22052-3 192
गांधी-वध क्यों
गोपाल गोडसे द्वारा लिखित “गांधी-वध क्यों?" (मैंने गाँधी को क्यों मारा?) एक ऐसी पुस्तक है जो महात्मा गाँधी की हत्या के ऐतिहासिक दिन तक पहुँचने वाली घटनाओं का वर्णन करती है, और नाथूराम गोडसे की फाँसी तक की कहानी बताती है। इस पुस्तक में उस समय का जनमत, राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और चर्चाएँ भी शामिल हैं, जो गाँधीजी की हत्या तथा नाथूराम गोडसे के न्यायालय में दिए गए आधिकारिक बयान के बाद उत्पन्न हुई थीं।
इन्हें भी देखें
गांधी हत्याकांड
बाहरी कड़ियाँ
Manohar Malgaonkar, The Men Who Killed Gandhi, Madras, Macmillan India (1978) ISBN 0-333-18228-6
पहले भी हुआ था बापू को मारने का प्रयास
गांधी-वध क्यों ? (गोपाल गोडसे)
सन्दर्भ
श्रेणी:महात्मा गांधी की हत्या