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जैत्रसिंह चौहान
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जैत्रसिंह चौहान चौहान वंश के राजपूत राजा रणथम्भौर, राजस्थाव, भारत ई० १२०० के बाद ई० १३०० के पूर्व सम्राट महाराजा हम्मीरदेव चौहान
जैत्रसिंह चौहान (ई०१२४८-१२८२) राजस्थान के एक राजा थे।http://www.ugtabharat.com/%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%A5%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%BE/ संग्रहीत प्रति 5 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20140921001006/http://www.ugtabharat.com/%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%A5%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%BE/ 21 सितंबर 2014 dead उन्हे रणथम्भौर साम्राज्य का एक महान शासक माना जाता है। रणथम्भौर साम्राज्य में महाराजा जैत्रसिंह का १२४९ ईस्वी के लगभग राज्यारोहण हुआ था। इन्होंने रणथम्भौर साम्राज्य पर ३२ साल तक शासन किया और रणथम्भौर साम्राज्य का विस्तार किया। इनके पुत्र का नाम हम्मीरदेव चौहान था जिन्होंने अपने पिता जैत्रसिंह की याद में रणथंभोर दुर्ग में ३२ खंभो की छतरी का निर्माण करवाया था।
जीवन
जैत्रसिंह के जीवन की प्रमुख घटनाएँ
रणथम्भौर में महाराजा जैत्रसिंह चौहान व दिल्ली सल्तनत के बलबन में १२५७ के लगभग युद्ध हुआ जिसमें बलबन पराजय हुआ
१२५८ में बलबन व जैत्रसिंह चौहान में रणथम्भौर का द्वितीय युद्ध, बलबन की पुन: पराजय
सन् १२५८ से १२८२ तक जैत्रसिंह चौहान द्वारा रणथम्भौर साम्राज्य की सीमाओं का विस्तार कराया गया
ई०स० १२३७ मे रावत जैत्रसिंह द्वारा सुल्तान बलबन पर विजयhttp://mympsc.com/Article.aspx?ArticleID=368जुलाई 2020 InternetArchiveBot
जैत्रसिंह चौहान द्वारा अपने योग्य पुत्र हम्मीरदेव चौहान को १२८२ में रणथम्भौर साम्राज्य का राजा घोषित करना
महाराजा जैत्रसिंह चौहान की पत्नी का नाम हीरा देवी था, इन्हीं के गर्भ से महाराजा हम्मीरदेव चौहान का जन्म हुआ, जो भारत के इतिहास में 'हठी महाराजा' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
सन्दर्भ
श्रेणी:राजस्थान के लोग
श्रेणी:राजस्थान के राजा