411 REFERENCE · Wikipedia
शैलपुत्री
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
Hindu Shailaputri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG शैलपुत्री- नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री शैलपुत्री हिन्दू देवी, शक्ति, पार्वती हिमालय की बेटी (यानी पार्वती) हिमालय, कैलाश ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
वंदे वाद्द्रिछतलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्
देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः त्रिशूल, कमल शिव वृषभ
शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूप में पहले स्वरूप में जानी जाती हैं।http://hindi.webdunia.com/religion/occasion/durga/0809/29/1080929066_1.htm संग्रहीत प्रति 18 मार्च 2009 https://web.archive.org/web/20090307155559/http://hindi.webdunia.com/religion/occasion/durga/0809/29/1080929066_1.htm 7 मार्च 2009 dead ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ाGupta G.J. Ved Aaur Purano Me Varnit Mahashaktiya Hindūlôjī Buksa २००९ http://books.google.co.in/books?id=6UwqAQAAMAAJ it २७ मार्च २०२० । नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है।
श्लोक
वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् |
वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||
Preeti jha नवरात्र में प्रथम दिन करें मां के शैलपुत्री रूप का पूजन Dainik Jagran २२ मार्च 2017 https://www.jagran.com/spiritual/puja-path-shailputri-mata-first-goddess-of-navratri-15721905.html हिन्दी भाषा २७ मार्च २०२० https://web.archive.org/web/20200326205155/https://www.jagran.com/spiritual/puja-path-shailputri-mata-first-goddess-of-navratri-15721905.html 26 मार्च 2020 live
शोभा
वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थींAgravāla A. Chattīsagaṛha ke vrata-tihāra aū kathā-kahinī Śatākshī Prakāśana 2003 http://books.google.co.in/books?id=gFxJAQAAIAAJ lv २७ मार्च २०२० , तब इनका नाम 'सती' था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था।
कथा
एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।
अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।'
शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी।
सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे।
परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है।
वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध होअपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।
सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे 'शैलपुत्री' नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था।
उपसंहार
'शैलपुत्री' देवी का विवाह भी शंकरजी से ही हुआ। पूर्वजन्म की भाँति इस जन्म में भी वे शिवजी की ही अर्द्धांगिनी बनीं। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा का महत्व और शक्तियाँ अनंत हैं।अमर उजालाजून 2020 InternetArchiveBot
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
2
श्री नवदुर्गाजून 2020 InternetArchiveBot
नवरात्रि पूजा विधि और नवदुर्गा कथा
नवभारत टाइम्स पर
स्पिरिचुअल इंडियाजून 2020 InternetArchiveBot
मां दुर्गा महिमा
दैट्स हिन्दीजून 2020 InternetArchiveBot
हरिभूमि में शैलपुत्री पूजन
सिफ़ी पर
गूगल सर्च पर
</div>
श्रेणी:हिन्दू देवियाँ
श्रेणी:दुर्गा
श्रेणी:नवरात्रि