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411 समाचार
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आर्थर शोपेनहावर

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march 2021Schopenhauer by Jules Lunteschütz.jpg आर्थर शोपनहावर Arthur Schopenhauer Signature.svg आर्थर शोपेनहावर आर्थर शोपनहावर (de Arthur Schopenhauer no, ˈaʁtuːɐ̯ ˈʃoːpn̩haʊɐ जर्मन उच्चारण De-Arthur Schopenhauer2.ogg; 22 फ़रवरी 1788 – 21 सितंबर 1860) एक जर्मन दार्शनिक थे। वह अपने 1818 के काम एक इच्छा और एक प्रतिनिधित्व के रूप में विश्व (1844 में विस्तारित) के लिए सबसे अच्छी तरह से जाने जाते हैं, जो अभूतपूर्व जगत को एक अंधे नूमेनल वसीयत के उत्पाद के रूप में दर्शाता है। इमानुएल काण्ट के पारलौकिक आदर्शवाद पर निर्माण करते हुए, शोपनहावर ने एक नास्तिक आध्यात्मिक और नैतिक प्रणाली विकसित की जिसने जर्मन आदर्शवाद के समकालीन विचारों को ख़ारिज कर दिया। वह भारतीय दर्शन के महत्वपूर्ण सिद्धान्तों को साझा करने और पुष्टि करने वाले पाश्चात्य दर्शन के पहले विचारकों में से थे, जैसे कि तपस्या, स्वयं को नकारना, और विश्वरूप में दिखने की धारणा। उनके काम को दार्शनिक निराशावाद की एक अनुकरणीय अभिव्यक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। शोपनहावर पर अन्य विचारकों का प्रभाव शोपनहावर का कहना था कि वे उपनिषदों, कांट एवं प्लेटो से प्रभावित थे। शोपनहावर के लेखों में भारतीय दर्शन का बारम्बार उल्लेख आता है। वे बुद्ध की शिक्षाओं को मानते थे और स्वयं को बौद्ध धर्मी कहते उनका यहाँ तक कहना था कि यदि ये शिक्षाएँ नहीं होतीं तो उनका दर्शन भी नहीं होता। उपनिषदों के बारे में उन्होने कहा - "मेरे जीवन में उपनिषदों से शान्ति मिली है; उनसे ही मुझे मृत्यु के समय भी शान्ति मिलेगी।" शोपनहावर का प्रभाव शोपनहावर का इच्छा का विश्लेषण एवं उनकी मानवी इच्छा एवं प्रेरणाओं पर विचार ने फ्रेडरिक नीत्शे, रिचर्ड वाग्नर, लुड्विग विटिंगस्टीन एवं सैमुएल फ्रायड आदि प्रसिद्ध दार्शनिकों को प्रभावित किया। उनके पश्चवर्ती विचारकों पर उनका गहरा प्रभाव पड़ा, यद्यपि यह प्रभाव दर्शन की अपेक्षा कला के क्षेत्र में ज्यादा है। भारतविद्या शोपनहावर ने उपनिषद का लातिन अनुवाद पढ़ा था जो फ़्रान्सीसी लेखक आंकेतिल द्यूपरों (fr Anquetil-Duperron) द्वारा दारा शिकोह के फ़ारसी में सिर्र-ए-अकबर (fa سرِ اکبر, महान् रहस्य) से अनूदित था। वह उपनिषदों के दर्शन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होने कहा कि उपनिषदों ने मानव का सर्वोच्च ज्ञान उत्पन्न किया है। It is the most satisfying and elevating reading (with the exception of the original text) which is possible in the world; it has been the solace of my life and will be the solace of my death. ओप्नेख़त् (de Oupnekhat, उपनिषद्) नामक पुस्तक सदैव उनकी मेज़ पर पड़ी रहती थी और सोने के पूर्व वे उसे अवश्य पढ़ते थे। संस्कृत साहित्य को वह अपनी शताब्दी का सर्वोत्कृष्ट उपहार कहते थे। उन्होने भविष्यवाणी की थी कि उपनिषदों का ज्ञान और दर्शन ही पश्चिम का धर्म बन जायेगा। पशु अधिकार अपने दर्शन के कारण शोपनहावर जानवरों के अधिकार के प्रति बहुत संवेदन्शील हो गये थे। शोपनहावर और बौद्ध धर्म १८३० एवं १८४० के दशकों में स्वयं शोपनहावर एवं अन्य यूरोपीय विचारक शोपनहावर के दर्शन एवं बौद्ध दर्शन (चार परम सत्य) में बहुत एकरूपता पाते थे। इन्हें भी देखें रोमां रोलां सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ Schopenhauers Philosophie der Kunstजून 2020 InternetArchiveBot Ross, Kelley L., 1998, "Arthur Schopenhauer (1788-1860)." Two short essays, on Schopenhauer's life and work, and on his dim view of academia. Freely accessible assorted essays by Arthur Schopenhauer from The University of Adelaide Schopenhauersource: Freely accessible reproductions of Schopenhauer's manuscripts लेख Abelson, Peter, 1993, "Schopenhauer and Buddhism," Philosophy East and West 43(2): 255-78. श्रेणी:दार्शनिक श्रेणी:भारतविद श्रेणी:जर्मन दार्शनिक