Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

प्राणायाम

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

right|thumb|300px|प्राणायाम करते हुए एक व्यक्ति right|thumb|300px|मोनियर-विलियमस ने प्राणायाम को कुम्भक के रूप में इस प्रकार परिभाषित किया है। इसमें क्षैतिज अक्ष पर समत है, और ऊर्ध्व अक्ष पर फेफड़ों में वायु की मात्रा प्राणायाम योग के आठ अंगों में से एक है। अष्टांग योग में आठ प्रक्रियाएँ होती हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, तथा समाधि । प्राणायाम = प्राण + आयाम । इसका शाब्दिक अर्थ है -  प्राण या श्वसन को लम्बा करना  या फिर  जीवनी शक्ति  को लम्बा करना । प्राणायाम का अर्थ कुछ हद तक श्वास को नियंत्रित करना हो सकता है, परन्तु स्वास को कम करना नहीं होता है। प्राण या श्वास का आयाम या विस्तार ही प्राणायाम कहलाता है। प्राणायाम प्राण-शक्ति का प्रवाह कर व्यक्ति को जीवन शक्ति प्रदान करता है। हठयोगप्रदीपिका में कहा गया है- चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत् योगी स्थाणुत्वमाप्नोति ततो वायुं निरोधयेत्॥२॥ (अर्थात प्राणों के चलायमान होने पर चित्त भी चलायमान हो जाता है और प्राणों के निश्चल होने पर मन भी स्वत: निश्चल हो जाता है और योगी स्थाणु हो जाता है। अतः योगी को श्वांसों का नियंत्रण करना चाहिये। यह भी कहा गया है- यावद्वायुः स्थितो देहे तावज्जीवनमुच्यते। मरणं तस्य निष्क्रान्तिः ततो वायुं निरोधयेत् ॥ ( जब तक शरीर में वायु है तब तक जीवन है। वायु का निष्क्रमण (निकलना) ही मरण है। अतः वायु का निरोध करना चाहिये।) परिचय प्राणायाम दो शब्दों के योग से बना है- (प्राण+आयाम) पहला शब्द "प्राण" है दूसरा "आयाम"। प्राण का अर्थ जो हमें शक्ति देता है या बल देता है। प्राणायाम के बारे में बहुत से ऋषियों ने अपने-अपने ढंग से कहा है लेकिन पतञ्जलि का प्राणायाम सूत्र महत्वपूर्ण माना जाता है जो इस प्रकार है- तस्मिन सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेदः प्राणायामः॥ इसका हिन्दी अनुवाद इस प्रकार होगा- श्वास प्रश्वास के गति को अलग करना प्राणायाम है। प्राणायाम के प्रकार - घेरन्ड संहिता के अनुसार - सहित: सूर्यभेदश्च उज्जायी शीतली तथा । भस्त्रिका भरमारी मूर्च्छा केवली चाष्टकुम्भका: ।। घेरन्ड संहिता के अनुसार प्राणायाम के आठ भेद बताए गए हैं - सहित, सूर्यभेदी, उज्जायी, शीतली, भस्त्रिका, भ्रामरी, मूर्च्छा और केवली । हठप्रदीपिका के अनुसार - सूर्यभेदनमुज़्जायी सीत्कारी शीतली तथा । भस्त्रिका भ्रामरी मूर्च्छा प्लाविनीत्यष्ट कुम्भक: ।। हठप्रदीपिका के अनुसार प्राणायाम के आठ भेद निम्न हैं - सूर्यभेदन, उज्जायी, सीत्कारी, शीतली, भस्त्रिका, भ्रामरी, मूर्च्छा और प्लाविनी ये आठ प्रकार के कुम्भक (प्राणायाम ) होते हैं । महत्व प्राणायाम का योग में बहुत महत्व है। आदि शंकराचार्य श्वेताश्वतर उपनिषद पर अपने भाष्य में कहते हैं, "प्राणायाम के द्वारा जिस मन का मैल धुल गया है वही मन ब्रह्म में स्थिर होता है। इसलिए शास्त्रों में प्राणायाम के विषय में उल्लेख है।"https://hindipath.com/swami-vivekananda-sadhana-ke-prathamik-sopan/ साधना के प्राथमिक सोपान विवेकानंद स्वामी https://web.archive.org/web/20190819095735/https://hindipath.com/swami-vivekananda-sadhana-ke-prathamik-sopan/ 19 अगस्त 2019 dead स्वामी विवेकानंद इस विषय में अपना मत व्यक्त करते हैं, "इस प्राणायाम में सिद्ध होने पर हमारे लिए मानो अनंत शक्ति का द्वार खुल जाता है। मान लो, किसी व्यक्ति की समझ में यह प्राण का विषय पूरी तरह आ गया और वह उस पर विजय प्राप्त करने में भी कृतकार्य हो गया , तो फिर संसार में ऐसी कौन-सी शक्ति है, जो उसके अधिकार में न आए? उसकी आज्ञा से चन्द्र-सूर्य अपनी जगह से हिलने लगते हैं, क्षुद्रतम परमाणु से वृहत्तम सूर्य तक सभी उसके वशीभूत हो जाते हैं, क्योंकि उसने प्राण को जीत लिया है। प्रकृति को वशीभूत करने की शक्ति प्राप्त करना ही प्राणायाम की साधना का लक्ष्य है।"https://hindipath.com/swami-vivekananda-rajayoga-pran-hindi/ राजयोग तृतीय अध्याय – प्राण विवेकानंद स्वामी https://web.archive.org/web/20191022104724/https://hindipath.com/swami-vivekananda-rajayoga-pran-hindi/ 22 अक्तूबर 2019 live इन्हें भी देखें हठयोग योगासन ध्यान सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ प्राणायाम प्राणायाम स्पेशल जानें प्राणायाम क्या है? (वेबदुनिया) प्राणायाम के लाभ प्राणायाम कैसे करें श्रेणी:योग