411 REFERENCE · Wikipedia
लेंस
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
thumb|right| ताल का चित्र
right|frame| ताल का उपयोग प्रकाश को फ़ोकस करने के लिये किया जा सकता है
ताल (लेंस) एक प्रकाशीय युक्ति है जो प्रकाश के अपवर्तन के सिद्धान्त पर काम करता है। ताल गोलीय, बेलनाकार आदि जैसे नियमित, ज्यामिती रूप की दो सतहों से घिरा हुआ पारदर्शक माध्यम, जिससे अपवर्तन के पश्चात किसी वस्तु का वास्तविक अथवा काल्पनिक प्रतिबिंब बनता है, ताल कहलाता है। उत्तल (convex) ताल मसूर की आकृति का होता है।
ताल की सतह प्राय: गोलीय (spherical) होती है, परंतु आवश्यकतानुसार बेलनाकर, या अगोली ताल भी प्रयुक्त होते हैं। आँख के क्रिस्टलीय ताल ही एकमात्र प्राकृतिक ताल है। हज़ारों वर्ष पहले भी लोग ताल के विषय में जानते थे और माइसनर (Meissner) के अनुसार प्राचीन काल में भी चश्मे से लाभ उठाया जाता था। चश्में के अलावा प्रकाश विज्ञान में ताल का उपयोग दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी, प्रकाशस्तंभ, द्विनेत्री (बाइनॉक्यूलर) इत्यादि में होता है।
वर्गीकरण
thumb|500 px|अभिसारी ताल1 - उत्तलोत्तल या द्वि- उत्तल ताल 2 - समतलोत्तल ताल 3 - उत्तलावतल (अभिसारी मेनिस्कस)अपसारी ताल 4 - अवतलावतल या द्वि-अवतल ताल 5 - समतलावतल ताल 6 - अभिसारी मेनिस्कस
ताल को मुख्य रूप से दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:
उत्तल ताल (convex lens) https://web.archive.org/web/20230606172334/https://hubstd.in/uttal-lens-ki-puri-jankari/ 6 जून 2023 : उत्तल लेंस एक गोलाकर लेंस होता है जो कि बीच से मोटा तथा किनारों से पतला होता है। उत्तल लेंस अपने मे से गुज़रने वाले सम्पूर्ण प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित कर देता है
अवतल ताल (concave lens)
अनंत से आनेवाली समांतर किरण उत्तल लेंस में अपवर्तन के पश्चात बिंदु फ़ पर अभिसरित (converge) होकर वहाँ वास्तविक प्रतिबिंब बना रही है; जबकि अवतल ताल में अपवर्तन के पश्चात वे बिंदु "फ़" पर बने काल्पनिक प्रतिबिंब से अपसारित (diverge) होती प्रतीत होती हैं। अत: उत्तल ताल को 'अभिसारी ताल' और अवतल ताल को 'अपसारी ताल' भी कहते हैं। यहाँ यह जान लेना आवश्यक है कि उत्तल ताल अभिसारी ताल और अवतल ताल अपसारी ताल के रूप में तभी काम करता है, जब उसके चारों तरफ़ के माध्यम का अपवर्तनांक (refractive index) ताल के माध्यम के अपवर्तनांक से कम होता है। (काँच का अपवर्तनांक, म्यू (m) = 1.5, हवा का अपवर्तनांक, म्यू (m) = 1.00 होता है)। यदि चारों तरफ के माध्यम का अपवर्तनांक ताल के माध्यम के अपवर्तनांक से अधिक होगा, तो उत्तल ताल अपसारी और अवतल ताल अभिसारी हो जाएगा।
ताल के उपयोग
प्रकाशीय यंत्रों (कैमरा, दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी आदि) में
आँख के चश्मों में
प्रकाश को अभिकेंद्रित करने के लिए
ताल निर्माता का सूत्र (Lensmaker's equation)
किसी ताल की फ़ोकस दूरी निम्नलिखित सूत्र से निकाली जा सकती है। इस सूत्र को ताल-निर्माता का सूत्र कहते हैं।Greivenkamp, p.14; Hecht §6.1
जहाँ
ताल की फ़ोकस दूरी है।
ताल के पदार्थ की अपवर्तन गुणांक (refractive index) है।
प्रकाश के स्रोत के निकट वाले ताल के तल की वक्रता त्रिज्या (radius of curvature),
प्रकाश के स्रोत से दूर वाले ताल के तल की वक्रता त्रिज्या (radius of curvature),
ताल की मोटाई
पतले लेंसों के लिए समीकरण
यदि d का मान R1 और R2 की तुलना में छोटा हो तो इसे 'पतला ताल' कहेंगे। इसके लिये फ़ोकस दूरी का सूत्र इस प्रकार होगा (लगभग)
Hecht, § 5.2.3
यौगिक ताल (compound lens)
लेंसों में प्रकाशीय वर्ण-विपथन की समस्या पाई जाती है। बहुत-सी स्थितियों में दो पूरक वर्ण-विपथन वाले लेंसों के संयोग से इस समस्या को बहुत सीमा तक हटाया जा सकता है। यदि अलग-अलग आकार के एवं अलग-अलग पदार्थ के सरल लेंसों को एक के बाद एक क्रम में लगाया जाए, तो इसे यौगिक ताल कहते हैं।
सबसे सरल स्थिति वह है, जिसमें ताल एक दूसरे के सटकर रखे जाएँ। यदि f1 और f2 फ़ोकस दूरी वाले दो पतले ताल सटाकर रखे जाते हैं, तो उनकी सम्मिलित फ़ोकस दूरी f का मान निम्नलिखित सूत्र से निकाला जायेगा:
चूँकि 1/f को ताल की शक्ति कहा जाता है, इसलिए कहा जा सकता है कि युग्मित करने पर लेंसों की शक्तियाँ भी जुड़ जाती है।
किंतु यदि दो पतले ताल परस्पर d दूरी पर रखे जाए, तो संयुक्त ताल तंत्र की फ़ोकस दूरी इस सूत्र से निकलेगी:
ताल का निर्माण
प्रकाशीय अवयवों का निर्माण एवं परीक्षण
चश्मा
चश्में का ताल पतला होता है और इसे भी पहले बताई हुई रीति से ही बनाते हैं। परंतु इसकी सतह का उतना यथार्थ होना आवश्यक नहीं है, जितना उन लेंसों की सतह का, जो दूरदर्शी और फ़टॉग्रफ़ी में प्रयुक्त होते हैं। ताल के किनारों को पत्थर के पहिए पर घिसकर चश्में के फ़्रेम के आकार का बना लेते हैं।
निकट दृष्टि दोष (short sight or myopia) को दूर करने के लिए अवतल ताल और दूर दृष्टि दोष (long sight or hypermetropia) को दूर करने के लिए उत्तल ताल प्रयुक्त होता है। अबिंदुकता (astigmatizm) के दोष को दूर करने के लिए बेलनदार ताल प्रयुक्त होता है। यदि इस दोष के साथ साथ निकट दृष्टि, या दूर दृष्टि, का दोष भी हो, तो गोलीय बेलनाकार ताल (spherocylindrical lens) प्रयुक्त होता है। ऊर्ध्वाधर अक्ष (vertical axis) की दिशा में ऐसे लेंसों की शक्ति, क्षैतिज अक्ष (horizontal axis) की दिशा में ताल की शक्ति से, भिन्न होती है।
द्विफ़ोकसी ताल (Bifocal Lens)
जरादूर दृष्टि (presbyopia) के दोष को दूर करने के लिए द्विफ़ोकसी ताल काम में आता है, जिसमें अवतल तथा उत्तल एक ही ताल में दोनों तरह के ताल संयुक्त रहते हैं। ऊपर का भाग दूर की वस्तुओं तथा निचला भाग पास की वस्तुओं का देखने के लिए होता है। काँच को एक विशेष प्रकार की मशीन पर घिसकर द्विफ़ोकसी ताल तैयार करते हैं। आज कल, प्राय: दोनों तरह के लेंसों को एक भट्ठी में गर्म करके तथा जोड़कर बाइफ़ोकल ताल बनाया जाता है और इस तरह से बनाए गए ताल संलीन द्विफ़ोकसी ताल (fused bifocal lens) कहलाते हैं।
संपर्क ताल (Contact Lens)
कुछ लोग, जैसे अभिनेता, सुंदरता की रक्षा के लिए चश्मा नहीं लगाना चाहते। उनकी आँख में एक पतला ताल लगा दिया जाता है, जो स्वच्छमण्डल पर ठीक बैठता है। ताल और आँख के बीच का स्थान एक उपयुक्त द्रव से भर दिया जाता है। स्वच्छमण्डल के शंक्वाकार हो जाने, या सिकुड़ जाने पर भी संपर्क ताल लगाया जाता है। संपर्क ताल लगाने के लिए बहुत ही सावधानी एवं धन की आवश्यकता होती है।
फ़्रेनेल ताल (Fresnel Lenses)
फ्रेसनेल ताल
प्रकाश स्तंभ (light houses) के ताल बहुत बड़े और मोटे होते हैं। इतना बड़ा और मोटा ताल पहले बताई गई रीति से बनाना संभव नहीं है। दूसरे, ताल बड़ा तथा मोटा होने के कारण इतना भारी हो जाता है कि इतना भारी ताल बनाना भी उचित नहीं है। सन 1820 में ऑगस्टिन फ़्रेनेल (Augustin Fresnel) ने प्रकाशस्तंभ में प्रयुक्त होनेवाले लेसों के बनाने की विधि बतलाई। उचित वक्रता करके काँच की छड़ों को अलग अलग घिसा और चमकाया जाता है। फिर उन्हें एक धातु के फ़्रेम में सिलसिलेवार जोड़कर प्रकाशस्तंभ का ताल बनाया जाता है।
कभी-कभी काँच को गलाकर तथा साँचे में ढालकर भी फ़्रेनेल ताल बनाए जाते हैं। ऐसे ताल पुंज प्रकाश (flood lights), रेल मार्ग (rail road), यातायात संकेत (traffic signal) इत्यादि में प्रयुक्त होते हैं। सन 1945 के बाद प्लास्टिक पदार्थों को गलाकर पतले फ़्रेनेल ताल भी बनाए गए, जो प्राय: अभिक्षेत्र (fieled) ताल के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
thumb|right|500px|पतले ताल से प्रतिबिम्ब निर्माण का सिम्युलेशन
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
दर्पण
प्रकाशीय यंत्र
प्रकाशीय अवयवों का निर्माण एवं परीक्षण (Fabrication and testing of optical components)
उत्तल लेंस (Convex Lens) | परिचय और विशेषताएं https://web.archive.org/web/20230606172334/https://hubstd.in/uttal-lens-ki-puri-jankari/ 6 जून 2023
बाहरी कड़ियाँ
Applied photographic optics Book
Book- The properties of optical glass
Handbook of Ceramics, Glasses, and Diamonds
Optical glass construction
साइमन शेफ़र, प्रफ़ेसर, इतिहास एवं फ़िलॉसफ़ी, केंब्रिज विश्वविद्यालय, जिम बेनिट, म्यूज़ीयम ऑव द हिस्ट्री ऑव साइन्स के निदेशक, ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय तथा एमिली विंटरबर्न, खगोलीय संग्राहलय की अध्यक्ष, नैशनल मैरीटाइम म्यूज़ीयम द्वारा History of Optics (audio mp3) (बीबीसी द्वारा रिकॉर्डिड)।
a chapter from an online textbook on refraction and lenses
Thin Spherical Lenses on Project PHYSNET.
Lens article at digitalartform.com
Article on Ancient Egyptian lenses
picture of the Ninive rock crystal lens
Do Sensors “Outresolve” Lenses?; on lens and sensor resolution interaction.
सिमुलेशन (Simulations)
Learning by Simulations - Concave and Convex Lenses
OpticalRayTracer - Open source lens simulator (downloadable java)
श्रेणी:भौतिकी
श्रेणी:प्रकाशीय यंत्र