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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सुपरहेटरोडाइन संग्राही

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right|thumb|350px|सन १९७५ के आसपास प्रचलित ट्रांजिस्टर सुपरहेट्रोडाइन संग्राह प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान मेजर एडविन आर्मस्ट्रांग नामक वैज्ञानिक ने सरल संग्राही में अपेक्षित सुधार कर ऐसी संग्राही व्यवस्था को जन्म दिया जिसमें किसी भी आवृत्ति के संकेत को किसी समय सुगमता से ग्रहण किया जा सकता है। यह व्यवस्था वस्तुत: आधुनिक लोकप्रिय रेडियो संग्राही सेटों की जनक है। एंटेना से आनेवाले रेडियो आवृत्ति के संकेतों को सर्वप्रथम एक मिश्रण-पद (mixer stage) से होकर गुजारा जाता है, जहाँ उसी क्षण उपयुक्त आवृत्ति का एक अन्य रेडियो संकेत भी प्रविष्ट कराया जाता है। यह दूसरा संकेत एक अन्य स्थानीय कंपित्र (local oscillator) में उत्पन्न किया जाता है। मिश्रण पद में दोनों संकेतों के संयोजन से विस्पंद-सिद्धांत (beat theory) द्वारा एक निम्न आवृत्ति का संकेत उत्पन्न होता है, जो दोनों आवृत्तियों का अंतर होता है। मिश्रण-पद के आगे का संपूर्ण परिपथ इसी आवृत्ति के लिए समस्वरित होता है। यह आवृत्ति माध्य आवृत्ति (intermediate frequency, या i. f.) कहलाती है। इस क्षीण आवृत्ति को एक रेडियो-आवृत्ति प्रवर्धक (r. f. amplifier) द्वारा प्रदर्शित कर, तथा विमाडुलक (demodulator) द्वारा संशोधित कर, संसूचक वाल्व द्वारा श्रव्यावृत्ति में परिणत किया जाता है। आगे इस श्रव्य आवृत्ति का प्रवर्धित कर ध्वनि विस्तारक में प्रेषित कर दिया जाता है। thumb|center|500px|सुपरहेटेरोडाइन संग्राही का ब्लॉक आरेख center|thumb|500px|एन्टेना से प्राप्त संकेत (बाएँ), लोकल ऑसिलेटर का संकेत (नीचे) और दोनों के मिश्रण से प्राप्त संकेत (दाएँ) सुपरहेटरोडाइन संग्राही की विशेषताएँ सुपरहेटरोडाइन संग्राही निम्नलिखि विशेषताओं के कारण उपयोगी होता है : (१) इसमें रेडियो आवृत्ति प्रवर्धन अधिक उत्तम एवं विघ्नरहित उत्पन्न होता है (वह भी, विशेषकर निम्न आवृत्तियों के लिए)। (२) वांछित आवृत्ति का चयन कर सकने की क्षमता इसमें पर्याप्त होती है, क्योंकि समस्वरित परिपथ को उस आवृत्तिविशेष के लिए समस्वरित किया जा सकता है। (३) चूंकि अनेक सचर संधारित्रों (वैरिएबल कैपेसिटर्स) के बदले एक अस्थिर रेडियो आवृत्ति प्रवर्धक में कई प्रवर्धक पदों को सम्मिलित कर अभीष्ट उच्च आवर्धन प्राप्त किया जा सकता है, इसलिए ये संग्राही अपेक्षाकृत सस्ते भी होते हैं। साथ ही इनके भार में भी अनावश्यक वृद्धि नहीं होने पाती। इन्हें भी देखें रेडियो संग्राही दूरदर्शन बाहरी कड़ियाँ Radio electronic diagrams Radio electronic diagrams Who Invented the Superheterodyne? An article giving the history of the various inventors working on the superheterodyne method. An in-depth introduction to superheterodyne receivers Superheterodyne receivers from microwaves101.com श्रेणी:दूरसंचार श्रेणी:एलेक्ट्रॉनिक डिजाइन